आरजीएचएस दवाई संकट: देवली में दवाएं नहीं, सीएम से गुहार

हर महीने वेतन या पेंशन से अंशदान कटता है, लेकिन जरूरत के वक्त दवा नहीं मिलती — मेडिकल स्टोर से जवाब मिलता है, “आरजीएचएस में ये दवा उपलब्ध नहीं है।” टोंक जिले के देवली में यही आरजीएचएस दवाई संकट आज सबसे बड़ी चर्चा है। दर्जनों बुजुर्ग पेंशनर और गंभीर मरीज रोजाना संबद्ध मेडिकल स्टोरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, और कई लोगों को मजबूरी में अपनी जेब से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।

हालात इतने बिगड़ गए कि देवली नगर पालिका के पूर्व पार्षद लोकेश लक्षकार ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ज्ञापन की प्रतिलिपि चिकित्सा मंत्री और टोंक के जिला कलेक्टर को भी भेजी गई है। यह मामला अब सिर्फ स्थानीय शिकायत नहीं रहा — राज्य की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य योजना के जमीनी क्रियान्वयन पर सीधा सवाल बन गया है।

देवली में आरजीएचएस दवाई संकट: क्या है पूरा मामला

दैनिक ब्यूरो नेटवर्क की 19 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व पार्षद लोकेश लक्षकार ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में बताया है कि राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) के तहत देवली के संबद्ध मेडिकल स्टोरों पर लाभार्थियों को निर्धारित दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। लाभार्थियों को स्टोरों पर अनावश्यक रूप से परेशान किए जाने की शिकायत भी सामने आई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि आवश्यक दवाइयां न मिलने से बुजुर्ग पेंशनर्स और गंभीर मरीजों को बार-बार मेडिकल स्टोरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। एक तरफ सरकार हर महीने उनके वेतन या पेंशन से योजना का अंशदान काटती है, दूसरी तरफ जरूरत के समय दवा ही नहीं मिलती — यही इस पूरे संकट का सबसे दर्दनाक पहलू है।

लोकेश लक्षकार ने संबद्ध स्टोरों की नियमित जांच, दवाओं की निरंतर उपलब्धता, स्टॉक होने के बावजूद इनकार करने वालों पर कार्रवाई, और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए प्रभावी हेल्पलाइन की मांग की है।

आरजीएचएस क्या है — दवा की सुविधा कैसे मिलनी चाहिए

राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) राज्य के कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिवारों के लिए चलाई जा रही एक लाभकारी स्वास्थ्य योजना है। योजना के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार इसके लाभार्थियों में मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक, अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी, राज्य सरकार के सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारी, स्वायत्तशासी निकायों के कर्मचारी और पेंशनर शामिल हैं।

यह योजना सीजीएचएस पैकेज दरों पर आधारित कैशलेस चिकित्सा सुविधा देती है। ओपीडी दवाएं संबद्ध फार्मेसी स्टोरों से मिलनी होती हैं — पोर्टल पर जिलेवार संबद्ध स्टोरों और निलंबित स्टोरों की सूची भी है। क्रियान्वयन राजस्थान राज्य स्वास्थ्य आश्वासन एजेंसी (आरएसएचएए) करती है।

सैद्धांतिक रूप से व्यवस्था साफ है: डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के साथ लाभार्थी किसी भी संबद्ध स्टोर से दवा ले, और उसे जेब से एक रुपया न देना पड़े। लेकिन देवली की घटना दिखाती है कि कागज पर बनी व्यवस्था जमीन पर टूट रही है — और यही आरजीएचएस दवाई संकट की जड़ है।

आरजीएचएस दवाई संकट के पीछे क्या कारण हैं

देवली का आरजीएचएस दवाई संकट कोई अपवाद नहीं लगता। पिछले दो वर्षों में मीडिया रिपोर्टों में बार-बार यह आरोप सामने आया है कि वेतन से नियमित कटौती तो होती है, लेकिन निर्धारित दवाएं फार्मेसी स्टोरों पर “उपलब्ध नहीं” बता दी जाती हैं। कुछ रिपोर्टों में स्टोर संचालकों ने सरकार से बकाया भुगतान न मिलने को बड़ा कारण बताया है। यानी लाभार्थी दोहरी मार झेलता है — नियमित अंशदान की कटौती भी, और जेब से दवा का खर्च भी।

इसी महीने की शुरुआत में खबर आई थी कि भुगतान बकाए के कारण कुछ निजी अस्पतालों ने आरजीएचएस के कैशलेस इलाज पर रोक लगा दी थी। दिसंबर में ब्रांडेड उपकरणों की अतिरिक्त वसूली के आरोप भी लगे थे। यानी योजना का दायरा बड़ा है, पर जमीनी क्रियान्वयन में खामियां लगातार सामने आ रही हैं।

आरजीएचएस दवाई संकट से कैसे निपटें — लाभार्थियों के लिए उपाय

देवली जैसे आरजीएचएस दवाई संकट में चुपचाप जेब से खर्च करना समाधान नहीं है। योजना के आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत निवारण की व्यवस्था मौजूद है:

  1. संबद्ध स्टोरों की सूची जांचें: rghs.rajasthan.gov.in पर अपने जिले के संबद्ध मेडिकल स्टोरों की सूची देखें — हो सकता है क्षेत्र में कोई और स्टोर हो जहां दवा उपलब्ध हो।
  2. लिखित शिकायत दें: मौखिक शिकायत पर कार्रवाई कम होती है। आरजीएचएस दवाई संकट की शिकायत जिला नोडल अधिकारी को लिखित में दें और पावती जरूर लें।
  3. हेल्पलाइन 181 पर कॉल करें: आरजीएचएस की आधिकारिक हेल्पलाइन 181 है। पोर्टल पर सेवारत कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए अलग-अलग हेल्पडेस्क ईमेल भी दिए गए हैं।
  4. इनकार लिखित में मांगें: स्टोर संचालक स्टॉक होने के बावजूद दवा न दे, तो कारण लिखित में मांगें — यह शिकायत में मजबूत साक्ष्य बनेगा।
  5. सामूहिक ज्ञापन भेजें: देवली की तरह जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग को सामूहिक ज्ञापन भेजा जा सकता है।

नियमों के अनुसार संबद्ध स्टोरों को निर्धारित दवाएं उपलब्ध करानी ही होती हैं — यही मांग देवली के ज्ञापन में भी उठाई गई है।

एक नजर में जरूरी तथ्य

विवरण जानकारी
योजना राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (RGHS)
क्रियान्वयन राजस्थान राज्य स्वास्थ्य आश्वासन एजेंसी (RSHAA)
लाभार्थी कर्मचारी, पेंशनर व उनके आश्रित, विधायक, AIS अधिकारी
दवा सुविधा संबद्ध फार्मेसी/कॉन्फेड स्टोर से कैशलेस ओपीडी दवाएं
दरें CGHS पैकेज दरों पर आधारित
हेल्पलाइन 181
आधिकारिक पोर्टल rghs.rajasthan.gov.in

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: आरजीएचएस में दवा लेने की प्रक्रिया क्या है?

उत्तर: डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के साथ अपने जिले के किसी भी संबद्ध मेडिकल स्टोर से दवा लें। दवा कैशलेस मिलती है — आपको अलग से भुगतान नहीं करना होता। आरजीएचएस दवाई संकट से बचने का पहला उपाय हमेशा संबद्ध स्टोर से ही दवा लेना है।

प्रश्न 2: स्टोर दवा देने से मना करे तो शिकायत कहां करें?

उत्तर: हेल्पलाइन 181 पर संपर्क करें — आरजीएचएस दवाई संकट जैसी शिकायतों के लिए यह पहला आधिकारिक रास्ता है। आरजीएचएस पोर्टल पर शिकायत निवारण व्यवस्था है, और जिला नोडल अधिकारी को लिखित शिकायत दी जा सकती है।

प्रश्न 3: आरजीएचएस के लाभार्थी कौन हैं?

उत्तर: आधिकारिक पोर्टल के अनुसार मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक, अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी, राज्य सरकार के सेवारत व सेवानिवृत्त कर्मचारी, उनके आश्रित परिवारजन और स्वायत्तशासी निकायों के कर्मचारी-पेंशनर इसके लाभार्थी हैं।

प्रश्न 4: देवली में सरकार से क्या मांग की गई है?

उत्तर: पूर्व पार्षद लोकेश लक्षकार ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि संबद्ध स्टोरों की नियमित जांच हो, दवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित हो, स्टॉक होने के बावजूद दवा न देने वालों पर कार्रवाई हो, और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए प्रभावी हेल्पलाइन व जवाबदेही तय की जाए।

देवली का मामला दिखाता है कि स्वास्थ्य योजनाओं की सफलता घोषणाओं से नहीं, जमीनी क्रियान्वयन से तय होती है। जब तक हर संबद्ध स्टोर पर दवा नहीं मिलेगी, आरजीएचएस दवाई संकट जैसे मामले सामने आते रहेंगे। जुड़े रहें।

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