रामदेवरा के जवान मोतीसिंह तंवर की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत: 10 दिन की छुट्टी पर घर लौट रहे थे, तिरंगे में लिपटा लौटा पार्थिव शरीर

जैसलमेर के रामदेवरा में आज शोक की लहर है। 24 राजस्थान राइफल बटालियन में तैनात 34 वर्षीय जवान मोतीसिंह तंवर की सड़क हादसे में मौत हो गई। दस दिन की छुट्टी लेकर वे अपने पैतृक गांव रामदेवरा लौट रहे थे, लेकिन घर से महज 40 किलोमीटर पहले फलोदी के पास कलरा गांव में उनकी बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई। जोधपुर के अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। शुक्रवार शाम को तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर जब रामदेवरा पहुंचा, तो पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी।

14 साल की सेवा के बाद 4 साल में होने वाले थे रिटायर

मोतीसिंह तंवर ने भारतीय सेना में करीब 14 साल तक सेवा दी थी। वे महज चार साल बाद सेना से सेवानिवृत्त होने वाले थे। घर-परिवार से दूर सीमा पर तैनात रहने के बाद रिटायरमेंट के करीब पहुंचकर उन्होंने अपने गांव में शांत जीवन की योजना बनाई होगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पंजाब के पठानकोट में अपनी ड्यूटी पूरी कर वे 30 सितंबर को दस दिन की छुट्टी मंजूर करवाकर घर के लिए रवाना हुए थे। यह छुट्टी उनके लिए परिवार से मिलने का सुनहरा मौका थी, पर रास्ते में हुए हादसे ने सब कुछ छीन लिया।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़: पत्नी और 5 बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। मोतीसिंह के परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटे, तीन बेटियां और बुजुर्ग माता-पिता हैं। उनके पिता सूबेदार खेमसिंह भी सेना से सेवानिवृत्त हैं। पिता ने अपने युवा बेटे को खो दिया, पत्नी का सुहाग उजड़ गया और पांच बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। जिस घर में छुट्टी की खुशियां मनाने की तैयारियां हो रही होंगी, वहां अब मातम छाया हुआ है।

छुट्टी की खुशी कैसे मातम में बदली: कलरा गांव के पास हुआ भीषण हादसा

सफर के दौरान जब मोतीसिंह फलोदी पहुंचे, तो वहां उनकी मुलाकात अपने मामा के बेटे जसवंत सिंह से हो गई। इसके बाद उन्होंने आगे का सफर बस से करने के बजाय भाई जसवंत सिंह के साथ बाइक पर तय करने का फैसला किया। दोनों भाई बाइक से रामदेवरा की ओर निकल पड़े। रामदेवरा पहुंचने से करीब 40 किलोमीटर पहले कलरा गांव के पास उनकी बाइक अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसा इतना भीषण था कि बाइक सवार दोनों भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को फलोदी के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद मोतीसिंह की गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें जोधपुर के लिए रेफर कर दिया। जोधपुर के अस्पताल में इलाज के दौरान गुरुवार रात को जवान मोतीसिंह तंवर ने अंतिम सांस ली।

सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई: हवा में गोलियां दागकर दी सलामी

जवान के निधन की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने तुरंत घटना की जानकारी मोतीसिंह की बटालियन के वरिष्ठ अधिकारियों को दी। शुक्रवार को जब तिरंगे में लिपटा जवान का पार्थिव शरीर रामदेवरा पहुंचा, तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। शाम के समय गांव में एक विशाल शव यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सेना के अधिकारी महेंद्र सिंह सहित यूनिट के जवानों ने हवा में गोलियां दागकर और गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी और रामदेवरा प्रशासक समंदर सिंह भी अंतिम संस्कार में मौजूद रहे और उन्होंने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी।

घटना का पूरा क्रम: एक नजर में

Dateघटना
30 सितंबर 2026मोतीसिंह ने पठानकोट से 10 दिन की छुट्टी लेकर रामदेवरा के लिए प्रस्थान किया
30 सितंबर 2026फलोदी में मामा के बेटे जसवंत सिंह से मुलाकात, बाइक से आगे का सफर तय
30 सितंबर 2026कलरा गांव के पास बाइक दुर्घटनाग्रस्त, दोनों भाई गंभीर घायल
30 सितंबर 2026फलोदी के सरकारी अस्पताल में प्राथमिक उपचार, फिर जोधपुर रेफर
1 अक्टूबर 2026 (गुरुवार रात)जोधपुर के अस्पताल में इलाज के दौरान मोतीसिंह का निधन
2 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार शाम)रामदेवरा में गार्ड ऑफ ऑनर और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

हाईवे पर दोपहिया सफर: इन सावधानियों को नजरअंदाज न करें

यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि लंबी दूरी का दोपहिया सफर कितना जोखिम भरा हो सकता है। अगर आप भी हाईवे पर बाइक से सफर करते हैं, तो कुछ बातों का खास ध्यान रखें। सबसे पहले अच्छी गुणवत्ता का हेलमेट पहनना बिल्कुल न भूलें — हेलमेट सिर की गंभीर चोटों से बचाव की पहली ढाल है। दूसरा, लंबी दूरी तय करते समय बीच-बीच में रुककर आराम करें, क्योंकि थकान और नींद हादसों का बड़ा कारण बनती है। तीसरा, ओवरटेकिंग के दौरान जल्दबाजी न करें और हमेशा इंडिकेटर का इस्तेमाल करें। चौथा, रात के समय या कम रोशनी में सफर से बचें, और अगर जरूरी हो तो रिफ्लेक्टिव जैकेट जरूर पहनें। पांचवां, बाइक की नियमित सर्विसिंग करवाएं — टायर, ब्रेक और लाइट की जांच सफर से पहले जरूर कर लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मोतीसिंह तंवर कौन थे? — मोतीसिंह तंवर जैसलमेर जिले के रामदेवरा के निवासी थे और 24 राजस्थान राइफल बटालियन में तैनात थे। उन्होंने भारतीय सेना में करीब 14 साल तक सेवा दी थी और वे 34 वर्ष के थे।

हादसा कहां और कैसे हुआ? — हादसा फलोदी के पास कलरा गांव में हुआ, जो रामदेवरा से करीब 40 किलोमीटर पहले पड़ता है। मोतीसिंह अपने भाई जसवंत सिंह के साथ बाइक पर सफर कर रहे थे, तभी बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

मोतीसिंह का निधन कब हुआ? — गंभीर हालत में उन्हें जोधपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान गुरुवार रात (1 अक्टूबर 2026) को उनका निधन हो गया।

अंतिम संस्कार में कौन-कौन शामिल हुआ? — शुक्रवार शाम को रामदेवरा में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ। सेना के अधिकारी महेंद्र सिंह और यूनिट के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया, जबकि पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी और रामदेवरा प्रशासक समंदर सिंह भी मौजूद रहे।

उनके परिवार में कौन-कौन है? — उनके परिवार में पत्नी, दो बेटे, तीन बेटियां और बुजुर्ग माता-पिता हैं। उनके पिता सूबेदार खेमसिंह सेना से सेवानिवृत्त हैं।

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