राजसमंद। रात के सन्नाटे में जब पूरा गांव सो रहा होता है, तभी दर्जनों जंगली सूअरों के झुंड खेतों में घुसकर महीनों की मेहनत मिट्टी में मिला देते हैं। राजसमंद जिले के भीम उपखंड के कानावास गांव में किसान दिन में फसल की देखभाल करते हैं और रात को बेबस रहते हैं — खड़ी फसल सुबह तक रौंदी हुई मिलती है। गांव के किसानों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से खेतों का सर्वे, गिरदावरी और मुआवजा मांगा है — और चेतावनी दी है कि जल्द कार्रवाई न हुई तो बड़ा कदम उठाएंगे।
सबसे बड़ा नुकसान: खड़ी फसलें तबाह, लागत और कर्ज का बोझ
यह सिर्फ फसल का नुकसान नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आजीविका पर प्रहार है। क्षेत्र के अधिकांश परिवार पूरी तरह खेती पर निर्भर हैं। फसल लगाने में महंगे बीज, कीटनाशक, खाद और बोरिंग के पानी पर भारी खर्च हुआ था। अब जंगली सूअर फसल को रौंदकर यह सारी लागत मिट्टी में मिला रहे हैं।
कई किसान कर्ज लेकर खेती करते हैं — एक तरफ फसल की बर्बादी, दूसरी तरफ कर्ज चुकाने की चिंता। यही वजह है कि किसान इसे सिर्फ खेत की समस्या नहीं, बल्कि परिवार के पालन-पोषण का सवाल बता रहे हैं।
कैसे हो रहा हमला: शाम ढलते ही घुसते हैं झुंड
किसानों के मुताबिक शाम ढलते ही या रात में ये दर्जनों की संख्या में झुंड बनाकर खेतों में घुस आते हैं। बाड़ और सुरक्षा प्रबंधों को भी पार कर जाते हैं — मजबूत बाड़ तक इनके आगे टिक नहीं पाती।
निशाना मक्का, बाजरा और मौसमी फसलें हैं। सूअर फसल को सिर्फ खाते नहीं, पैरों तले रौंदकर पूरा खेत तहस-नहस कर देते हैं — एक रात के हमले में पूरे खेत की फसल बर्बाद हो जाती है। पिछले कुछ समय से ये जानवर रिहायशी बस्तियों के नजदीक वाले खेतों को ही अपना ठिकाना बना चुके हैं, इसलिए हमले रोज़ की बात बन गए हैं।
किसानों की 4 मुख्य मांगें
किसानों की मांगें साफ हैं:
- मौके पर संयुक्त सर्वे — राजस्व विभाग और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें गांव आकर खेतों में हुए नुकसान का मौके पर सर्वे करें।
- गिरदावरी और आंकलन — प्रभावित खेतों की गिरदावरी करवाकर नुकसान का सही आंकलन हो, ताकि मुआवजे की राशि तय हो सके।
- वाजिब मुआवजा — जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, उन्हें सरकार की ओर से उचित मुआवजा राशि दी जाए।
- वन विभाग की कार्रवाई — वन विभाग क्षेत्र में गश्त बढ़ाए और जंगली सूअरों को आबादी व कृषि क्षेत्रों से दूर रखने के लिए ठोस, वैज्ञानिक कदम उठाए।
किसानों का कहना है कि समय रहते रोक नहीं लगी तो वे भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे।
यह कोई नई समस्या नहीं: राजस्थान में पुराना संकट
राजसमंद की यह घटना अकेली नहीं है। भीलवाड़ा जिले की हुरदा तहसील की सोडार पंचायत के गांवों में भी जंगली सूअरों ने सैकड़ों बीघा मक्की की फसल तहस-नहस कर दी थी। वहां के किसानों ने भी मुआवजे की मांग उठाई थी, लेकिन बताया गया कि जंगली सूअरों से फसल खराब होने पर मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है। यही विसंगति किसानों को सबसे ज्यादा परेशान करती है — नुकसान साफ दिखता है, लेकिन मुआवजे का रास्ता साफ नहीं है।
बिहार में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले नीलगाय और जंगली सूअरों को पकड़ने का अधिकार पंचायत के मुखिया को दिया गया, ताकि वन विभाग कार्रवाई कर सके। इससे संकेत मिलता है कि फसल सुरक्षा अब पंचायत स्तर की व्यवस्था का हिस्सा बनती जा रही है।
कानूनी स्थिति: वन विभाग क्या कर सकता है?
जंगली सूअर वन्य प्राणी हैं और उनके नियंत्रण की मुख्य जिम्मेदारी वन विभाग की होती है। इन जानवरों को मारने या पकड़ने के लिए वन विभाग की अनुमति की जरूरत होती है — किसान अपनी मर्जी से कदम नहीं उठा सकते, वरना कानूनी परेशानी हो सकती है। इसी वजह से किसान वन विभाग से गश्त बढ़ाने और वैज्ञानिक तरीके से सूअरों को खेतों से दूर रखने की मांग कर रहे हैं।
मुआवजा कैसे मिलता है: प्रक्रिया समझिए
मुआवजे की प्रक्रिया आमतौर पर इन चरणों से गुजरती है: किसान नुकसान की सूचना पटवारी या कृषि अधिकारी को देते हैं, फिर गिरदावरी और मौके पर सर्वे होता है, जिसके आधार पर नुकसान का आंकलन किया जाता है। रिपोर्ट तहसीलदार और जिला प्रशासन के माध्यम से आगे बढ़ती है। लेकिन जंगली जानवरों से हुए नुकसान पर प्रावधान हर जगह एक जैसे नहीं हैं। इसलिए कानावास के किसानों की सर्वे और गिरदावरी की मांग पहला जरूरी कदम है।
किसान खुद क्या कर सकते हैं: बचाव के उपाय
बचाव के लिए किसान ये उपाय भी अपना सकते हैं:
- रात में खेत की निगरानी के लिए बारी-बारी पहरा व्यवस्था करें।
- खेत के चारों ओर मजबूत, ऊंची बाड़ लगाएं; जमीन के नीचे भी जाली दबाएं।
- सूअरों को भगाने के लिए तेज आवाज, रोशनी या तेज गंध वाले उपाय अपनाएं।
- खेत के आसपास खाने-पीने का कचरा न फेंकें, जो जानवरों को आकर्षित करता है।
- नुकसान की हर घटना की तस्वीरें और तारीख का रिकॉर्ड रखें।
घटना एक नजर में
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| जिला | राजसमंद |
| गांव | कानावास (छापली ग्राम पंचायत, भीम उपखंड) |
| समस्या | जंगली सूअरों के झुंड से फसलें तबाह |
| प्रभावित फसलें | मक्का, बाजरा, मौसमी फसलें |
| हमले का समय | शाम और रात के समय |
| किसानों की मांगें | संयुक्त सर्वे, गिरदावरी, मुआवजा, वन विभाग की गश्त |
| खबर की तारीख | 3 अक्टूबर 2026 |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
राजसमंद के कानावास में क्या हो रहा है?
जवाब: भीम उपखंड के कानावास गांव में जंगली सूअरों के झुंड रात में खेतों में घुसकर मक्का, बाजरा और अन्य फसलें तबाह कर रहे हैं।
किसान क्या मांग कर रहे हैं?
जवाब: मांग है — राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम से सर्वे, खेतों की गिरदावरी, वाजिब मुआवजा और वन विभाग की बढ़ी गश्त।
क्या जंगली सूअर से फसल नुकसान पर मुआवजा मिलता है?
जवाब: हर जगह प्रावधान एक जैसे नहीं हैं — कुछ मामलों में सहायता मिलती है, कई में नहीं। इसलिए सर्वे और गिरदावरी पहला जरूरी कदम है।
किसान जंगली सूअरों से अपनी फसल कैसे बचाएं?
जवाब: मजबूत गहरी बाड़, रात में पहरा, तेज रोशनी और आवाज के उपाय अपनाएं और नुकसान का फोटो-रिकॉर्ड रखें।
खेती की लागत हर साल बढ़ रही है, लेकिन नुकसान की भरपाई का रास्ता आसान नहीं हो रहा। कानावास के किसानों की निगाहें अब प्रशासन के फैसले पर टिकी हैं।