दिवाली की खरीदारी इस बार सिर्फ सामान खरीदने तक सीमित नहीं है — राजीविका दिवाली मेला जयपुर में आपकी हर खरीद सीधे किसी ग्रामीण महिला उद्यमी की आमदनी से जुड़ रही है। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) की ओर से आयोजित इस आठ दिवसीय मेले में 100 से अधिक स्टॉलों पर महिला स्वयं सहायता समूहों के हाथों बने उत्पाद बिक रहे हैं। मेला 28 अक्टूबर से शुरू हुआ है और 4 नवंबर 2026 तक चलेगा। प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क है और समय सुबह 10 बजे से रात 9 बजे तक है।
इस मेले का मकसद साफ है — ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए सीधा बाजार देना। आमतौर पर गांवों में बनी चीजें शहर तक पहुंचते-पहुंचते कई हाथों से गुजरती हैं, जिससे असली बनाने वाले को कम दाम मिलता है। यहां महिला उद्यमी खुद अपने स्टॉल पर खड़ी हैं और अपनी मेहनत की सही कीमत पा रही हैं।
राजीविका दिवाली मेला जयपुर: कहां, कब और कैसे पहुंचें
मेला जयपुर स्थित इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान (आईजीपीआरएस) परिसर में लग रहा है। तारीखें याद रखना आसान है — 28 अक्टूबर से 4 नवंबर 2026 तक, हर दिन सुबह 10 बजे से रात 9 बजे तक। प्रवेश पर कोई शुल्क नहीं है, इसलिए परिवार के साथ बिना झिझक घूमने जा सकते हैं। दिवाली के दिनों में जयपुर के बाजारों में भीड़ रहती है, ऐसे में एक ही जगह पर इतने सारे हस्तशिल्प उत्पाद देखना समय भी बचाता है और चुनाव की आजादी भी देता है। दिन के उजाले में उत्पादों को ध्यान से देखने पर रंग और बुनाई की बारीकी ठीक से परखी जा सकती है।
100 से अधिक स्टॉलों पर क्या-क्या मिल रहा है
मेले में 100 से अधिक स्टॉल हैं, और हर स्टॉल पर राजस्थान की किसी न किसी पारंपरिक कला की झलक है। कोटा डोरिया की साड़ियां यहां की खास पहचान हैं — हल्की, हवादार और अपनी बुनाई के लिए मशहूर। जयपुर की प्रसिद्ध ब्लू पॉटरी भी खरीदारों को खूब आकर्षित कर रही है, जिसके नीले डिजाइन घर की सजावट में अलग ही जान डाल देते हैं। इसके अलावा पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, डोरमैट और कारपेट भी उपलब्ध हैं।
दिवाली पर सजावट का सामान सबसे ज्यादा मांग में है। रंग-बिरंगे दीये, मोमबत्तियां, रंगोली और घर की सजावट से जुड़ी हस्तनिर्मित सामग्री स्टॉलों पर सजी है। मशीन से बने सामान की तुलना में हाथ से बने दीयों में एक अलगपन होता है — हर पीस थोड़ा अलग, थोड़ा अपना। स्थानीय कारीगरों और महिला स्वयं सहायता समूहों से सीधे खरीदने का मतलब यह भी है कि आपकी रकम बिचौलियों के बजाय बनाने वाले तक पहुंच रही है।
खाने-पीने के स्टॉल और मनोरंजन भी हैं आकर्षण
राजीविका दिवाली मेला केवल खरीदारी का केंद्र नहीं है। मेले में प्राकृतिक खाद्य उत्पादों और पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों की स्टॉलें भी हैं, जहां खरीदार राजस्थान के स्वाद का आनंद ले सकते हैं। परिवार के साथ आए लोगों के लिए तीरंदाजी जैसी मनोरंजक गतिविधियां भी ध्यान खींच रही हैं, जिससे बच्चे और बड़े दोनों मेले में लंबा समय बिता रहे हैं। त्योहार के मौसम में जब पूरा परिवार बाहर निकलता है, तो खरीदारी के साथ घूमने-फिरने और खाने का मजा मिलना मेले को और खास बना देता है।
कई महिला उद्यमी पहली बार अपने उत्पादों को इतने बड़े शहरी बाजार में पेश कर रही हैं। ग्राहकों से सीधी बातचीत से उन्हें यह समझने में मदद मिलती है कि शहर के खरीदार क्या पसंद करते हैं और कीमत किस स्तर पर रखनी चाहिए — यही बाजार की समझ किसी भी छोटे उद्यम की असली पूंजी होती है।
स्वयं सहायता समूहों के लिए सीधा बाजार क्यों मायने रखता है
महिला स्वयं सहायता समूहों का ढांचा इसी भरोसे पर टिका है कि महिलाएं मिलकर बचत करें, हुनर सीखें और फिर अपने उत्पाद बेचकर आत्मनिर्भर बनें। लेकिन हुनर सीखना आधी कहानी है — असली चुनौती बिक्री की होती है। राजीविका दिवाली मेला जैसी पहल इसी चुनौती का जवाब है। जब महिलाएं अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाती हैं, तो उन्हें नए खरीदारों से जुड़ने, अपने उत्पादों की पहचान बनाने और बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने का अवसर मिलता है।
इससे दो फायदे एक साथ होते हैं: महिलाओं की आजीविका को बढ़ावा मिलता है, और स्थानीय कारीगरी व स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन मिलता है। कोटा डोरिया की बुनाई हो या ब्लू पॉटरी की कला — ये सिर्फ उत्पाद नहीं, राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत के हिस्से हैं। जयपुर में इस तरह के महिला हस्तशिल्प आयोजनों की परंपरा नई नहीं है: हाल ही में जयपुर में अमृता हाट 2026 में भी महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद प्रदर्शित हुए थे, और विकसित भारत ग्रामीण मिशन में राजस्थान में महिलाओं की भागीदारी 72.69 प्रतिशत तक पहुंचना इसी बदलाव की एक झलक है।
खरीदारी के टिप्स और मेले के अहम आंकड़े
मेले से खरीदारी करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना फायदेमंद रहेगा। हाथ से बने उत्पादों में हल्का फर्क स्वाभाविक होता है — वही फर्क उसकी असलियत की पहचान है। उपहार के लिए खरीदारी कर रहे हैं तो प्राप्तकर्ता की पसंद ध्यान में रखें; ब्लू पॉटरी और हथकरघा उत्पाद लंबे समय तक इस्तेमाल में रहते हैं। दिवाली पर स्कूलों की छुट्टियों की योजना भी साथ में देख लें — राजस्थान में स्कूलों की दीपावली छुट्टी 4 से 15 नवंबर तक रहेगी, इसलिए परिवार के साथ मेले का दिन उसी हिसाब से चुनें।
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| मेले का नाम | राजीविका दिवाली मेला-2026 |
| आयोजक | राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) |
| स्थान | आईजीपीआरएस परिसर, जयपुर |
| तारीखें | 28 अक्टूबर से 4 नवंबर 2026 तक (आठ दिन) |
| समय | सुबह 10 बजे से रात 9 बजे तक |
| प्रवेश शुल्क | निःशुल्क |
| स्टॉल | 100 से अधिक |
| मुख्य उत्पाद | कोटा डोरिया साड़ियां, ब्लू पॉटरी, हस्तशिल्प, हथकरघा, डोरमैट, कारपेट, दीये, मोमबत्तियां, रंगोली, घर की सजावट का सामान |
स्रोत: कृषक जगत, 31 अक्टूबर 2026। तारीख, समय और प्रवेश संबंधी जानकारी आयोजक की घोषणा के अनुसार है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राजीविका दिवाली मेला जयपुर में कब तक चलेगा?
यह मेला 28 अक्टूबर से शुरू होकर 4 नवंबर 2026 तक चलेगा। हर दिन सुबह 10 बजे से रात 9 बजे तक स्टॉल खुले रहेंगे।
राजीविका दिवाली मेला कहां लग रहा है?
जयपुर स्थित इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान (आईजीपीआरएस) परिसर में यह मेला आयोजित हो रहा है।
क्या मेले में प्रवेश के लिए कोई शुल्क है?
नहीं, मेले में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क है।
मेले में किस तरह के उत्पाद मिल रहे हैं?
कोटा डोरिया की साड़ियां, जयपुर की ब्लू पॉटरी, पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, डोरमैट, कारपेट, दीये, मोमबत्तियां, रंगोली और घर की सजावट का सामान — सभी ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए हैं।