विकसित भारत ग्रामीण मिशन में राजस्थान नंबर-1: महिलाओं की भागीदारी 72.69%, 18.86 लाख परिवारों को रोजगार

गांवों में काम की गारंटी देने वाले देश के सबसे बड़े ग्रामीण रोजगार मिशन में राजस्थान ने सबको पीछे छोड़ दिया है। विकसित भारत – रोजगार और आजीविका गारंटी (ग्रामीण) मिशन के तहत इस वित्तीय वर्ष में प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी 72.69 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो राष्ट्रीय औसत 62.25 प्रतिशत से 10 प्रतिशत से भी ज्यादा ऊपर है। यानी मिशन के तहत सृजित हर 10 दिन के रोजगार में से 7 दिन से ज्यादा का काम महिलाओं के हाथ में गया है।

यह आंकड़ा सिर्फ एक रैंकिंग नहीं है। ग्रामीण राजस्थान में इसका सीधा मतलब है कि लाखों महिलाएं अब अपने गांव में ही कमाई कर रही हैं, उन्हें काम के लिए शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ रहा, और परिवार की आमदनी में उनकी हिस्सेदारी साफ तौर पर बढ़ी है। मिशन के तहत अब तक प्रदेश के 18.86 लाख परिवारों और 21.66 लाख व्यक्तियों को रोजगार मिल चुका है।

महिलाओं की भागीदारी में 10 प्रतिशत की बढ़त का क्या मतलब है

राष्ट्रीय औसत 62.25 प्रतिशत के मुकाबले राजस्थान का 72.69 प्रतिशत का आंकड़ा इसलिए खास है क्योंकि यह अंतर महज दशमलव का खेल नहीं है। देश के बाकी राज्यों की तुलना में राजस्थान में मिशन के काम में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 10.44 प्रतिशत बिंदु ज्यादा है। जब महिला के हाथ में नियमित मजदूरी आती है तो उसका असर बच्चों की पढ़ाई, परिवार के पोषण और घर के फैसलों में सीधे दिखता है।

प्रति परिवार औसत रोजगार के मामले में भी राजस्थान राष्ट्रीय औसत से आगे है। प्रदेश में प्रति परिवार औसतन 24.29 दिन का रोजगार सृजित हुआ है, जबकि राष्ट्रीय औसत 20.02 दिन है। यानी राजस्थान का ग्रामीण परिवार इस मिशन से राष्ट्रीय औसत से करीब 4 दिन ज्यादा काम पा रहा है।

आंकड़ों में राजस्थान का प्रदर्शन

पैमाना राजस्थान राष्ट्रीय औसत
महिलाओं की भागीदारी 72.69% 62.25%
प्रति परिवार औसत रोजगार 24.29 दिन 20.02 दिन
15 दिन में भुगतान 97.04% 82.46%
ईएफएमएस से व्यय 100% —
लाभान्वित परिवार 18.86 लाख —
लाभान्वित व्यक्ति 21.66 लाख —
निर्मित संपत्तियां 42,557 —

खास बात यह है कि मिशन के तहत अब तक 42,557 संपत्तियां भी बनाई गई हैं। इनमें ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़े काम शामिल हैं, जिनका फायदा गांवों को लंबे समय तक मिलेगा। कुल व्यय का 35.88 प्रतिशत कृषि और संबद्ध गतिविधियों पर खर्च हुआ है, जबकि जल संरक्षण के लिए नामित ब्लॉकों में 73.17 प्रतिशत धन जल-संबंधित विकास कार्यों में लगाया गया है। यानी रोजगार के साथ-साथ गांवों की पानी और खेती से जुड़ी जरूरतों पर भी पैसा लग रहा है।

भुगतान में पारदर्शिता: 97 प्रतिशत भुगतान 15 दिन के भीतर

ग्रामीण रोजगार योजनाओं की सबसे बड़ी शिकायत हमेशा भुगतान में देरी की रही है। इस मोर्चे पर भी राजस्थान का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। प्रदेश में 97.04 प्रतिशत लाभार्थियों का भुगतान 15 दिनों के भीतर कर दिया गया, जबकि राष्ट्रीय औसत 82.46 प्रतिशत है। इसके अलावा योजना के तहत राज्य का शत-प्रतिशत व्यय इलेक्ट्रॉनिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम (ईएफएमएस) के जरिए प्रबंधित किया गया है, जिससे हर रुपये का हिसाब डिजिटल रूप से दर्ज रहता है और बिचौलियों की गुंजाइश कम होती है।

125 दिन की गारंटी से मजबूत हुई आजीविका सुरक्षा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन समृद्ध गांवों के जरिए विकसित भारत हासिल करना है। उन्होंने बताया कि यह मिशन सिर्फ रोजगार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका ध्यान जल संरक्षण, बुनियादी ढांचे और टिकाऊ ग्रामीण प्रगति पर है। मिशन के तहत बढ़ी हुई 125 दिनों की वार्षिक रोजगार गारंटी ने ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा को और मजबूत किया है।

गौरतलब है कि विकसित भारत – रोजगार और आजीविका गारंटी (ग्रामीण) मिशन ग्रामीण रोजगार की नई व्यवस्था है, जिसमें परिवारों को साल में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है। पहले की व्यवस्था में यह सीमा 100 दिन थी। बढ़ी हुई गारंटी का सीधा फायदा उन परिवारों को मिलता है जिनकी आजीविका खेती और मजदूरी पर निर्भर है, खासकर सूखे या कम बारिश वाले वर्षों में। राजस्थान के 14 जिलों की 80 तहसीलें इस साल सूखाग्रस्त घोषित हो चुकी हैं, ऐसे में गांव में ही गारंटीशुदा काम का महत्व और बढ़ जाता है।

गांवों को क्या-क्या फायदा मिल रहा है

मिशन के काम सिर्फ मजदूरी तक सीमित नहीं हैं। जल संरक्षण ब्लॉकों में तालाबों, चेक डैम और जल संचयन संरचनाओं पर जोर दिया जा रहा है, ताकि आने वाले वर्षों में सिंचाई और पेयजल की स्थिति सुधरे। कृषि से जुड़े कार्यों में खेतों की मेड़बंदी, वृक्षारोपण और भूमि सुधार जैसे काम शामिल हैं। ग्रामीण बुनियादी ढांचे के तहत सड़क, नाली और सामुदायिक भवनों जैसे कामों से गांवों की तस्वीर बदल रही है।

ग्रामीण श्रमिकों के लिए जरूरी जानकारी

अगर आप गांव में रहते हैं और इस मिशन के तहत काम चाहते हैं, तो अपने ग्राम पंचायत में जॉब कार्ड के लिए आवेदन किया जा सकता है। जॉब कार्ड मिलने के बाद काम की मांग पंचायत में दर्ज करानी होती है, और तय समय में काम उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। मजदूरी का भुगतान सीधे बैंक खाते में होता है, इसलिए बैंक खाता और आधार का सही होना जरूरी है। भुगतान में देरी हो तो पंचायत और ब्लॉक स्तर पर शिकायत दर्ज की जा सकती है।

राजस्थान के किसान परिवारों के लिए हाल ही में एक और राहत की खबर आई थी, जब फसल बीमा के 345 करोड़ रुपये के लंबित दावों का भुगतान कराया गया था। इसी तरह ग्रामीण इलाकों में काम की गारंटी से जुड़ी व्यवस्थाओं के बारे में जानने के लिए ग्रामीण रोजगार से जुड़ी खबरें भी पढ़ी जा सकती हैं।

आगे की राह

राजस्थान का यह प्रदर्शन इसलिए भी अहम है क्योंकि वित्तीय वर्ष अभी आधा भी नहीं बीता है। आने वाले महीनों में रबी सीजन और सूखा प्रभावित इलाकों में काम की मांग और बढ़ सकती है। अगर भुगतान की गति और महिलाओं की भागीदारी इसी स्तर पर बनी रही, तो प्रदेश का यह अग्रणी स्थान साल के अंत तक और मजबूत हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

विकसित भारत ग्रामीण मिशन में राजस्थान की महिलाओं की भागीदारी कितनी है?

वित्तीय वर्ष 2026-27 में राजस्थान में महिलाओं की भागीदारी 72.69 प्रतिशत रही है, जो राष्ट्रीय औसत 62.25 प्रतिशत से 10 प्रतिशत से अधिक है।

इस मिशन के तहत राजस्थान में कितने परिवारों को रोजगार मिला है?

अब तक 18.86 लाख परिवारों और 21.66 लाख व्यक्तियों को रोजगार प्रदान किया गया है।

मिशन के तहत साल में कितने दिन के रोजगार की गारंटी है?

बढ़ी हुई व्यवस्था के तहत साल में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है।

राजस्थान में मजदूरी का भुगतान कितने दिन में हो रहा है?

97.04 प्रतिशत लाभार्थियों का भुगतान 15 दिनों के भीतर किया गया है, जबकि राष्ट्रीय औसत 82.46 प्रतिशत है।

Leave a Comment