जयपुर। अगर आप त्योहारी खरीदारी के इस सीजन में घर के लिए कुछ खास, हाथ से बना और भरोसेमंद सामान खरीदना चाहते हैं, तो जवाहर कला केन्द्र का रुख कर लीजिए। राजस्थान सरकार का महिला अधिकारिता एवं बाल विकास विभाग 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक जयपुर के शिल्पग्राम परिसर में राज्य स्तरीय अमृता हाट 2026 लगा रहा है। इस दस दिवसीय मेले में प्रदेश के सभी जिलों के करीब 170 महिला स्वयं सहायता समूह अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री करेंगे — यानी सीधे कारीगर से खरीदारी, बीच में कोई बिचौलिया नहीं।
दस दिन, एक ही जगह, पूरे प्रदेश का हस्तशिल्प
अमृता हाट 2026 की सबसे बड़ी खासियत इसका पैमाना है। अलग-अलग जिलों में होने वाले मेलों में आम तौर पर एक इलाके के ही समूह पहुंचते हैं, लेकिन राज्य स्तरीय अमृता हाट में राजस्थान के लगभग हर जिले की महिला समूह भाग ले रही हैं। खरीदार को एक ही छत के नीचे बाड़मेर की कशीदाकारी भी मिलेगी, जयपुर की लाख की चूड़ियाँ भी और टेराकोटा शिल्प भी।
मेले का शुभारंभ रविवार 11 अक्टूबर को शाम 6 बजे महिला एवं बाल विकास विभाग की शासन सचिव श्रीमती पूनम ने फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन के बाद उन्होंने स्टॉलों का अवलोकन किया और महिला कारीगरों से बातचीत करके उनका हौसला बढ़ाया। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, हर साल जिलों में अमृता हाट लगती है और उसी कड़ी में जयपुर में राज्य स्तरीय आयोजन किया जाता है।
क्या-क्या मिलेगा: उत्पादों की पूरी झलक
मेले में उपलब्ध उत्पादों की सूची काफी लंबी है। घर सजाने के शौकीनों के लिए हैंडीक्राफ्ट, पेपरमेशी के सामान, टेराकोटा और आर्टिफिशियल ज्वैलरी मिलेगी। कपड़ों में सलवार सूट, कशीदाकारी वाले परिधान, चिकन और जरी वर्क के विकल्प होंगे। महिलाओं के लिए लाख की चूड़ियाँ और कांच-पेंच वर्क के परिधान भी लगाए गए हैं।
खाने-पीने के स्टॉलों पर घर जैसा स्वाद मिलेगा — अचार, मुरब्बा, मसाले और अन्य हस्तनिर्मित खाद्य उत्पाद। त्योहारों के सीजन में गिफ्टिंग के लिए हाथ से बने सामान की मांग बढ़ जाती है, और यह मेला सही समय पर लगा है।
| श्रेणी | क्या मिलेगा |
|---|---|
| हैंडीक्राफ्ट | टेराकोटा, पेपरमेशी आइटम, घर सज्जा सामान |
| परिधान | सलवार सूट, कशीदाकारी, चिकन-जरी वर्क, कांच-पेंच वर्क |
| ज्वैलरी | लाख की चूड़ियाँ, आर्टिफिशियल ज्वैलरी |
| खाद्य उत्पाद | अचार, मुरब्बा, मसाले, हस्तनिर्मित व्यंजन |
सिर्फ मेला नहीं, महिलाओं की आर्थिक आजादी का मंच
अमृता हाट का मकसद केवल सामान बेचना नहीं है — यह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की बड़ी योजना का हिस्सा है। महिला अधिकारिता विभाग का कहना है कि हस्तशिल्प से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उनका समग्र सशक्तिकरण करना विभाग का मुख्य लक्ष्य है। ऐसे आयोजनों से महिला स्वयं सहायता समूहों को सीधा बाजार मिलता है, जिससे उनकी आय बढ़ती है।
खास बात यह है कि इसका असर सिर्फ महिला कारीगरों तक सीमित नहीं रहता। विभाग के मुताबिक, इन मेलों से आत्मनिर्भर बन रही महिलाओं के परिवारजन भी उनके काम से जुड़ने लगते हैं, जिससे पूरी पारिवारिक इकाई का आर्थिक सशक्तिकरण होता है। यानी एक स्टॉल से एक परिवार की आजीविका जुड़ी होती है — 170 स्टॉलों का मतलब सैकड़ों परिवारों की कमाई का मौका।
कब जाएं, कहां जाएं: मेले की पूरी जानकारी
- तारीखें: 11 से 20 अक्टूबर 2026 (दस दिन)
- स्थान: शिल्पग्राम परिसर, जवाहर कला केन्द्र, जयपुर
- आयोजक: महिला अधिकारिता, महिला एवं बाल विकास विभाग, राजस्थान सरकार
- उद्घाटन: 11 अक्टूबर को शाम 6 बजे, शासन सचिव श्रीमती पूनम द्वारा
- स्टॉल: लगभग 170 महिला स्वयं सहायता समूह, सभी जिलों से
जवाहर कला केन्द्र शहर के बीचोंबीच स्थित है और आसानी से पहुंचा जा सकता है। त्योहारी भीड़ को देखते हुए सुबह या दोपहर के समय जाना बेहतर रहेगा, क्योंकि शाम को स्टॉलों पर ज्यादा भीड़ रह सकती है। साथ ही, हाथ से बने उत्पाद सीमित मात्रा में बनते हैं — लोकप्रिय डिजाइन जल्दी बिक जाते हैं, इसलिए पहले दिनों में जाना फायदेमंद रहेगा।
कारीगर और खरीदार, दोनों को फायदा
अमृता हाट की अर्थव्यवस्था दोतरफा फायदेमंद है। कारीगरों को सबसे बड़ा फायदा यह मिलता है कि वे अपना उत्पाद सीधे अंतिम ग्राहक को बेचते हैं — दुकानदार, थोक व्यापारी या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का कमीशन बीच से हट जाता है। हाथ से बने सामान में मेहनत और समय ज्यादा लगता है, और सीधी बिक्री से कारीगर को उसकी मेहनत का पूरा दाम मिलता है। यही वजह है कि ऐसे मेलों में भाग लेने वाली महिलाओं की आमदनी मेले के दिनों में कई गुना बढ़ जाती है।
खरीदारों के लिए फायदा यह है कि उन्हें प्रामाणिक और हाथ से बना सामान वाजिब दाम पर मिलता है। मॉल या शोरूम में बिकने वाले तथाकथित ‘हैंडमेड’ सामान के मुकाबले यहां हर उत्पाद की कहानी उसके बनाने वाले से सीधे जुड़ी होती है। साथ ही, खरीदारी का पैसा सीधे कारीगर के हाथ में जाता है — त्योहारों के सीजन में इससे बेहतर खर्च का विकल्प क्या होगा?
खरीदारों के लिए कुछ काम के सुझाव
पहला सुझाव: सीधे कारीगर से बात करें। स्वयं सहायता समूह के स्टॉलों पर अक्सर वही महिलाएं होती हैं जिन्होंने सामान बनाया है — वे उत्पाद की गुणवत्ता, रखरखाव और इस्तेमाल के बारे में सबसे सही जानकारी दे सकती हैं। दूसरा: त्योहारी गिफ्टिंग के लिए यहां से खरीदारी मॉल से कहीं सस्ती और अनूठी पड़ती है, साथ ही यह किसी परिवार की आजीविका में सीधा योगदान भी है। तीसरा: खाद्य उत्पाद (अचार, मुरब्बा, मसाले) खरीदते समय एक्सपायरी और पैकेजिंग की जानकारी जरूर लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: अमृता हाट 2026 कब और कहां लग रहा है?
उत्तर: 11 से 20 अक्टूबर 2026 तक, जयपुर के जवाहर कला केन्द्र के शिल्पग्राम परिसर में। यह दस दिवसीय राज्य स्तरीय मेला है।
प्रश्न: मेले में कौन भाग ले रहा है?
उत्तर: राजस्थान के सभी जिलों के लगभग 170 महिला स्वयं सहायता समूह और महिला कारीगर अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री कर रहे हैं।
प्रश्न: यहां क्या-क्या खरीद सकते हैं?
उत्तर: हैंडीक्राफ्ट, टेराकोटा, कशीदाकारी वाले परिधान, लाख की चूड़ियाँ, आर्टिफिशियल ज्वैलरी, अचार, मुरब्बा, मसाले और अन्य हस्तनिर्मित उत्पाद।
प्रश्न: अमृता हाट का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: महिला स्वयं सहायता समूहों को सीधा बाजार दिलाकर उनकी आय बढ़ाना और हस्तशिल्प से जुड़ी महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण करना। यह आयोजन महिला अधिकारिता विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा किया जाता है।
प्रश्न: क्या मेले में प्रवेश के लिए टिकट लगेगा?
उत्तर: सूत्रों के मुताबिक अमृता हाट आम जन के लिए खुला रहता है और स्टॉलों पर सीधी खरीदारी की जा सकती है। प्रवेश से जुड़ी किसी विशेष जानकारी के लिए मेला स्थल पर ही पता करना बेहतर रहेगा।