Rajasthan Panchayat Chunav 2026: आज दोपहर 3 बजे से गांवों में लागू होगी आचार संहिता — 4 चरणों में होगा 1.69 लाख जनप्रतिनिधियों का चुनाव
राजस्थान के गांवों में आज से सियासी सरगर्मी एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। राज्य निर्वाचन आयोग आज शनिवार (3 अक्टूबर) दोपहर 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पंचायतीराज चुनावों का कार्यक्रम जारी करेगा। घोषणा के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी और अगले करीब दो महीने तक गांव-गांव की सारी प्रशासनिक गतिविधियों पर आयोग की पहरेदारी रहेगी।
इस चुनाव का सबसे बड़ा मतलब समझना आसान है: प्रदेशभर में करीब 1.69 लाख नए जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे। यानी आने वाले कुछ हफ्तों में गांवों में लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव दिखेगा — सरपंच, उपसरपंच, वार्ड पंच से लेकर जिला प्रमुख तक, सब कुछ तय होना है।
सबसे बड़ा अंक: 1.69 लाख जनप्रतिनिधियों का चुनाव
पंचायतीराज चुनाव का परिमाण अकेले आंकड़ों से समझा जा सकता है। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इस चुनाव में कुल 1.69 लाख से अधिक जनप्रतिनिधियों का निर्वाचन होगा।
| पद | संख्या |
|---|---|
| जिला परिषद सदस्य | 1,403 |
| पंचायत समिति सदस्य | 8,245 |
| जिला प्रमुख | 41 |
| पंचायत समितियों के प्रधान | 457 |
| ग्राम पंचायतें | 14,403 |
| वार्ड पंच (लगभग) | 1,30,584 |
सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव सीधे गांव की गलियों में होंगे, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद के सदस्यों के जरिए बाद में प्रधान और जिला प्रमुख चुने जाएंगे। चुनाव चार चरणों में कराए जाने की संभावना है, ताकि इतनी बड़ी मतदान प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से पूरा किया जा सके।
आचार संहिता लगते ही क्या-क्या थम जाएगा
आदर्श आचार संहिता का मतलब सिर्फ प्रचार-प्रसार के नियम नहीं हैं। घोषणा के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक फैसलों पर बड़ी रोक लग जाएगी:
- तबादलों पर पूर्ण रोक: सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक नहीं होंगे। यह रोक ग्रामीण क्षेत्रों के प्रशासनिक ढांचे पर सीधा असर डालेगी।
- नई योजनाओं की घोषणा पर पाबंदी: कोई नई योजना, राहत पैकेज या घोषणाएं नहीं हो सकेंगी।
- शिलान्यास और लोकार्पण बंद: निर्माण कार्यों का शिलान्यास या उद्घाटन नहीं होगा।
- सख्त दिशानिर्देश: राजनीतिक दलों और प्रशासन — दोनों को आयोग के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा।
चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक सरकार और प्रशासन को निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के अनुसार काम करना होगा। करीब दो महीने तक यह संहिता प्रभावी रहने की संभावना है।
वोट कैसे पड़ेगा: बैलेट, ईवीएम और चरणों का हिसाब
पंचायतीराज चुनाव की खासियत यह है कि अलग-अलग पदों के लिए मतदान की व्यवस्था अलग-अलग रखी गई है। सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएंगे, जबकि पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों के लिए ईवीएम से मतदान होगा।
समय-सारिणी की बात करें तो चुनाव प्रक्रिया को 9 नवंबर तक पूरा करने की तैयारी है। संभावना है कि आचार संहिता लागू होने के बाद जिला कलेक्टर 5 या 6 अक्टूबर को अधिसूचना जारी करेंगे, और इसके एक सप्ताह के भीतर नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है। पहले यह पूरी प्रक्रिया सितंबर में ही पूरी होनी थी, लेकिन देरी के कारण अब अधिसूचना और नामांकन के बीच का समय कम रखा जा सकता है।
हाईकोर्ट के निर्देशानुसार पूरी चुनाव प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी करनी है। यानी अगला डेढ़ महीना राजस्थान की ग्रामीण राजनीति के लिए सबसे सक्रिय दौर होगा।
महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण: पूरी तस्वीर
इस पंचायतीराज चुनाव का सबसे अहम चेहरा महिला सशक्तिकरण है। पंचायतीराज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू रहेगा।
- जिला प्रमुख: 41 में से 20 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। बीकानेर संभाग के सभी जिलों में जिला प्रमुख का पद महिला के लिए आरक्षित रहेगा।
- प्रधान: 457 पंचायत समितियों में से 221 प्रधान पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। जयपुर और जोधपुर में 11-11 पंचायत समितियों की प्रधान महिलाएं होंगी।
- सरपंच: 14,403 ग्राम पंचायतों में करीब 7,200 महिला सरपंच चुनी जाएंगी। सरपंच पदों में 3,058 एसटी, 2,493 एससी और 1,961 ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
- वार्ड पंच: करीब 1,30,584 वार्ड पंच पदों में से लगभग 65 हजार पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। वार्ड पंचों में 21,962 एससी, 19,117 एसटी और करीब 15 हजार पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर में सरपंच के सभी 1,253 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं। डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सलूंबर और प्रतापगढ़ में प्रधान पद भी एसटी वर्ग के लिए आरक्षित रहेंगे।
3 अक्टूबर से 15 नवंबर तक का सफर
चुनाव की पूरी यात्रा का मोटा खाका अब साफ होता जा रहा है:
- 3 अक्टूबर (आज): दोपहर 3 बजे आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस — चुनाव कार्यक्रम की घोषणा, आचार संहिता लागू।
- 5-6 अक्टूबर: जिला कलेक्टरों की ओर से चुनाव की अधिसूचना जारी होने की संभावना।
- नामांकन: अधिसूचना के एक सप्ताह के भीतर नामांकन प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
- 4 चरणों में मतदान: संभावित चार चरणों में मतदान और मतगणना।
- 9 नवंबर तक: चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी।
- 15 नवंबर: हाईकोर्ट के निर्देशानुसार पूरी प्रक्रिया अंतिम रूप से पूरी करनी होगी।
आयोग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। घोषणा के साथ ही गांवों में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो जाएंगी — नामांकन, प्रचार और मतदान की तस्वीर अब दिनों में साफ होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- आचार संहिता लागू होने का आम ग्रामीण पर क्या असर पड़ेगा?
आचार संहिता से गांव के रोजमर्रा के काम नहीं रुकेंगे, लेकिन नई योजनाओं की घोषणा, शिलान्यास और लोकार्पण पर रोक लग जाएगी। सरकारी कर्मचारियों के तबादले भी चुनाव तक स्थगित रहेंगे। - सरपंच का चुनाव कैसे होगा?
सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बैलेट पेपर से होंगे। इसके उलट, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों के लिए ईवीएम से मतदान कराया जाएगा। - नामांकन कब से शुरू होगा?
संभावना है कि 5 या 6 अक्टूबर को जिला कलेक्टर अधिसूचना जारी करेंगे और उसके एक सप्ताह के भीतर नामांकन प्रक्रिया शुरू हो सकती है। - क्या चुनाव में महिलाओं को आरक्षण मिलेगा?
हां, पंचायतीराज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इसके चलते बड़ी संख्या में महिलाएं पहली बार पंचायतीराज संस्थाओं में निर्वाचित होकर जिम्मेदारी संभालेंगी।
नोट: यह खबर राज्य निर्वाचन आयोग के आधिकारिक बयानों और प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित है। चुनाव की अंतिम तारीखों और नियमों के लिए आयोग की आधिकारिक अधिसूचना का अवलोकन अवश्य करें।