दिल्ली में राजस्थान की अक्षय ऊर्जा की बड़ी पेशकश: CM भजनलाल ने 50 से ज्यादा निवेशकों के सामने रखा 125 GW का रोडमैप

2030 तक 125 गीगावाट, आज 51 हजार मेगावाट से ज्यादा स्थापित क्षमता, और एक ही कमरे में 50 से ज्यादा बड़े निवेशक — राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा निवेश की कहानी अब सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि दिल्ली में हुई एक ठोस बैठक की भी है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ राउंड टेबल बैठक में राजस्थान के अक्षय ऊर्जा अवसर सामने रखे। यह बैठक इसलिए अहम है क्योंकि राजस्थान पहले से ही अक्षय ऊर्जा उत्पादन और सौर क्षमता में देश में पहले स्थान पर है — अब सरकार इस बढ़त को निवेश में बदलना चाहती है।

दिल्ली में क्या हुआ: एक ही मेज पर 50 से ज्यादा निवेशक

सम्मेलन का उद्घाटन सोमवार, 2 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत मंडपम में किया। इसी अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी की उपस्थिति में 50 से अधिक प्रमुख निवेशकों के साथ राउंड टेबल बैठक की। बैठक में ब्रुकफील्ड, रिन्यू, आदित्य बिड़ला रिन्यूएबल्स, जिंदल समूह और अवाडा सहित कई बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने राजस्थान में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं को रेखांकित किया और निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। बाद में उन्होंने राजस्थान की स्टॉल्स का उद्घाटन-अवलोकन भी किया; ऊर्जा राज्यमंत्री हीरालाल नागर और मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास भी मौजूद रहे।

राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा निवेश का गणित: आंकड़ों में समझें

राजस्थान का दावा आंकड़ों पर टिका है। मुख्यमंत्री ने बैठक में जो आंकड़े रखे, वे प्रदेश की मौजूदा स्थिति को साफ दिखाते हैं:

बिंदु आंकड़ा
कुल स्थापित क्षमता 51,000 मेगावाट से अधिक
सौर क्षमता 45,000 मेगावाट से अधिक
2030 लक्ष्य लगभग 125 गीगावाट
बैठक में निवेशक 50 से अधिक कंपनियों के प्रतिनिधि
भागीदार देश 130 से अधिक
प्रदर्शक 400 से अधिक
क्षमता दिखाने वाले राज्य/UT 13
अवधि 2 से 5 नवंबर 2026

इन आंकड़ों का मतलब यह है कि राजस्थान की स्थापित क्षमता का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से आता है, और 2030 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए सौर के साथ-साथ पवन ऊर्जा, हाइब्रिड परियोजनाओं और ऊर्जा भंडारण पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में बड़े सौर पार्कों, रूफटॉप सोलर, पवन ऊर्जा, बायोमास और भंडारण परियोजनाओं का विस्तार हो रहा है। भड़ला सिरेमिक सोलर प्रोजेक्ट में दिन की धूप सहेजकर रात में बिजली बनाने का पायलट और जयपुर डिस्कॉम के 96,500 घरों की 150 यूनिट मुफ्त सोलर रूफटॉप योजना इसी विस्तार की मिसाल हैं।

निवेशकों को क्या भरोसा दिया गया: नीतियां, जमीन और भंडारण

निवेशक को धूप-जमीन के साथ नीति की स्पष्टता का भरोसा भी चाहिए — इसलिए राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा निवेश की चर्चा में नीतियों पर इतना जोर है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति लागू की है। मेगा परियोजनाओं के लिए भूमि हेतु ‘राइट टू यूज’ नीति भी जारी की गई है। इसके साथ ही राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना 2024 के तहत निवेशकों को विभिन्न प्रोत्साहन और सुविधाएं दी जा रही हैं।

दूसरा अहम बिंदु भंडारण है: सूरज ढलते ही सौर उत्पादन रुक जाता है, जबकि मांग शाम को सबसे ज्यादा होती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अतिरिक्त सौर उत्पादन के उपयोग और पीक डिमांड के दौरान ग्रिड प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं की कार्ययोजना तैयार की गई है। यानी सरकार सिर्फ बिजली बनाने पर नहीं, बल्कि उसे संभालकर सही समय पर इस्तेमाल करने की व्यवस्था पर भी काम कर रही है।

देश का बड़ा संदर्भ: 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म लक्ष्य पांच साल पहले

प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन में कहा कि भारत में 50 प्रतिशत से अधिक विद्युत क्षमता अब गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों पर आधारित हो चुकी है। यह उपलब्धि पेरिस समझौते के तहत वर्ष 2030 के लिए तय लक्ष्य से पांच वर्ष पहले, वर्ष 2025 में ही हासिल कर ली गई है।

सम्मेलन की थीम ‘निवेश करें, नवाचार करें, प्रेरित करें’ है। यह आयोजन 2 से 5 नवंबर तक चल रहा है, जिसमें 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और 40 से अधिक मंत्री शामिल हो रहे हैं। एक्सपो में 400 से अधिक प्रदर्शक सौर-पवन ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण की तकनीक दिखा रहे हैं। इसी के साथ अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की नौवीं सभा और हरित हाइड्रोजन पर चौथा सम्मेलन भी हो रहा है। राजस्थान सहित 13 राज्य/केंद्र-शासित प्रदेश अपनी क्षमता दिखा रहे हैं। सम्मेलन का आधिकारिक विवरण प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट पर देखा जा सकता है।

युवाओं और आम लोगों के लिए राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा निवेश का क्या मतलब है

बड़ी निवेश बैठकों की खबरें अक्सर दूर की लगती हैं, लेकिन इनका असर जमीन पर भी पड़ता है। जब सौर पार्क, पवन परियोजनाएं, हाइब्रिड प्लांट और भंडारण इकाइयां लगती हैं, तो विनिर्माण, स्थापना, रखरखाव और तकनीकी सेवाओं से जुड़े काम भी बढ़ते हैं। जयपुर में माइक्रोटेक का 400 करोड़ रुपये का सोलर प्लांट इसी कड़ी का उदाहरण है।

आम उपभोक्ता के लिए भी इसके मायने हैं: रूफटॉप सोलर से बिजली बिल कम हो सकता है और भंडारण बढ़ने से पीक आवर्स में ग्रिड स्थिर रहेगा। हालांकि किसी एक बैठक से तुरंत बिजली सस्ती नहीं होती — निवेश का असर परियोजनाएं जमीन पर उतरने के बाद ही दिखता है।

आगे क्या देखना है

सम्मेलन 5 नवंबर तक चलेगा; निवेशकों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा निवेश की असली परीक्षा यह होगी कि राउंड टेबल की चर्चा कितनी परियोजनाओं में बदलती है और जमीन के ‘राइट टू यूज’ व RIPS 2024 के प्रोत्साहनों का लाभ निवेशक किस तरह उठाते हैं। 125 गीगावाट का लक्ष्य बड़ा है, लेकिन 51 हजार मेगावाट की मौजूदा क्षमता राजस्थान को इस दौड़ में मजबूत शुरुआत देती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राजस्थान में अभी कितनी अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित है?

राज्य सरकार के अनुसार 51 हजार मेगावाट से अधिक अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित है, जिसमें सौर ऊर्जा 45 हजार मेगावाट से अधिक है।

2030 तक राजस्थान का अक्षय ऊर्जा लक्ष्य क्या है?

लक्ष्य वर्ष 2030 तक लगभग 125 गीगावाट क्षमता विकसित करना है, जिसमें सौर, पवन, हाइब्रिड और ऊर्जा भंडारण पर ध्यान दिया जा रहा है।

दिल्ली की बैठक में कौन-कौन सी कंपनियां शामिल हुईं?

ब्रुकफील्ड, रिन्यू, आदित्य बिड़ला रिन्यूएबल्स, जिंदल समूह और अवाडा सहित 50 से अधिक निवेशकों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी की उपस्थिति में हुई।

निवेशकों को राजस्थान में क्या सुविधाएं दी जा रही हैं?

राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा निवेश के लिए एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति लागू है, मेगा परियोजनाओं हेतु ‘राइट टू यूज’ नीति जारी है, और RIPS 2024 के तहत विभिन्न प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

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