गंभीर बीमारी से जूझ रहे किसी मरीज के लिए अस्पताल के चक्कर सबसे बड़ी मुसीबत होते हैं — खासकर तब, जब मरीज बुजुर्ग हो या बिस्तर पर हो। राजस्थान सरकार का दावा है कि इस मुसीबत का हल अब मरीजों के घर तक पहुंच रहा है। राज्य में होम बेस्ड पेलिएटिव केयर व्यवस्था के जरिए सवा साल के भीतर तीन लाख से ज्यादा मरीजों को घर पर ही इलाज और देखभाल मिली है। सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, ये सेवा कैंसर, स्ट्रोक और पार्किंसन जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए सबसे ज्यादा मददगार साबित हो रही है।
सवा साल में 3 लाख से ज्यादा मरीज — आंकड़े खुद बोल रहे हैं
राज्य सरकार ने जो आंकड़े जारी किए हैं, वे इस योजना के दायरे को साफ दिखाते हैं। अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 के बीच पेलिएटिव केयर सेवाओं के तहत करीब 2.51 लाख मरीजों को ओपीडी में परामर्श और उपचार दिया गया। इसी अवधि में 41 हजार से ज्यादा मरीजों को आईपीडी में भर्ती करके इलाज और देखभाल दी गई।
घर पर दी जाने वाली सेवा की शुरुआत जुलाई 2025 में हुई थी। इसके तहत स्वास्थ्यकर्मी मरीजों के घर जाकर उनकी जरूरत के हिसाब से देखभाल करते हैं। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अगस्त तक करीब 43 हजार मरीजों को घर पर यह सुविधा मिल चुकी है, जिनमें लगभग 20 हजार बुजुर्ग शामिल हैं।
| सेवा का प्रकार | लाभार्थी मरीज (लगभग) |
|---|---|
| ओपीडी परामर्श (अप्रैल 2025 – अगस्त 2026) | 2.51 लाख |
| आईपीडी में भर्ती देखभाल | 41 हजार से ज्यादा |
| घर पर देखभाल (वित्त वर्ष 2026-27, अगस्त तक) | 43 हजार |
| घर पर सेवा पाने वाले बुजुर्ग | 20 हजार |
| प्रशिक्षित केयर गिवर्स | 57 हजार |
राज्य में 98 जिला अस्पतालों, उप जिला अस्पतालों और सेटेलाइट अस्पतालों में पेलिएटिव केयर क्लिनिक स्थापित किए गए हैं। इन क्लिनिकों से जुड़ी टीम ही घर-घर जाकर मरीजों की देखभाल करती है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के लिए टेली-कंसल्टेशन की सुविधा भी जोड़ी गई है, ताकि मरीजों को बार-बार दूर के अस्पतालों तक न जाना पड़े।
‘राहत की किरण’: होम बेस्ड पेलिएटिव केयर की घर-घर टीम
इस पूरी व्यवस्था की रीढ़ है ‘राहत की किरण’ नाम का वाहन। इस वाहन के जरिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी जरूरी दवाइयों के साथ सीधे मरीजों के घर पहुंचते हैं। टीम में नर्सिंग ऑफिसर, फिजियोथेरेपिस्ट और संबंधित इलाके की एएनएम या आशा कार्यकर्ता शामिल रहती हैं।
घर पहुंचने पर टीम मरीज की हालत के मुताबिक नर्सिंग केयर देती है, फिजियोथेरेपी कराती है और जरूरी दवाइयां उपलब्ध कराती है। इसके साथ ही मरीज और उनके परिजनों को मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक परामर्श भी दिया जाता है, ताकि लंबे इलाज के दौरान परिवार टूटे नहीं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल का मकसद सिर्फ बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि दर्द से राहत और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना भी है। खासकर उन परिवारों के लिए यह बड़ी राहत है, जिन्हें गंभीर रूप से बीमार परिजन को बार-बार अस्पताल ले जाने में दिक्कत होती थी।
होम बेस्ड पेलिएटिव केयर: किन बीमारियों में मिल रही है सुविधा
होम बेस्ड पेलिएटिव केयर खासतौर पर उन बीमारियों के लिए डिजाइन की गई है, जिनमें मरीज को लंबे समय तक देखभाल की जरूरत होती है और बार-बार अस्पताल जाना मुश्किल होता है:
- कैंसर — दर्द प्रबंधन और नियमित देखभाल
- पार्किंसन — चलने-फिरने में मदद और फिजियोथेरेपी
- स्ट्रोक (लकवा) — पुनर्वास और नर्सिंग केयर
- रीढ़ की चोट — लंबे समय तक बिस्तर पर रहने वाले मरीजों की देखभाल
- अल्जाइमर — बुजुर्ग मरीजों की मानसिक और शारीरिक देखभाल
इनके अलावा, बिस्तर पर रहने को मजबूर किसी भी गंभीर मरीज को इस सेवा का लाभ मिल सकता है — जोर इस बात पर है कि अस्पताल पहुंचने में असमर्थ मरीजों के घर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं।
हाल में जयपुर में स्क्रब टाइफस के कहर के बीच अस्पतालों पर दबाव बढ़ा है — ऐसे में घर पर इलाज की यह व्यवस्था अस्पतालों पर बोझ कम करने में भी मददगार साबित हो सकती है।
57 हजार केयर गिवर्स को प्रशिक्षण — गांव-ढाणी तक पहुंच की तैयारी
सेवा का दायरा बढ़ाने के साथ सरकार प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी काम कर रही है। जारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक करीब 57 हजार केयर गिवर्स को होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
इनमें 10 हजार एएनएम, 21 हजार से ज्यादा आशा कार्यकर्ता और करीब 10 हजार कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) शामिल हैं, ताकि ग्रामीण इलाकों में भी जरूरतमंद मरीजों को समय पर सुविधा मिल सके। आशा और एएनएम कार्यकर्ता पहले से ही गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहली कड़ी हैं, और अब वे पेलिएटिव केयर की प्रशिक्षित टीम का हिस्सा भी बन रही हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में मानव संसाधन की तैयारी लगातार चल रही है — हाल ही में आरयूएचएस फार्मेसी के तीसरे राउंड का सीट अलॉटमेंट भी जारी हुआ था, जिससे फार्मेसी क्षेत्र में नए पेशेवर जुड़ेंगे।
अगला लक्ष्य: PHC और CHC तक पेलिएटिव केयर
राज्य सरकार अब इस सेवा को बड़े अस्पतालों से आगे बढ़ाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। इससे गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को उनके घर के नजदीक ही स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
योजना के मुताबिक, हर जिले में पेलिएटिव केयर का नेटवर्क इतना मजबूत किया जाएगा कि गांव-ढाणी के किसी भी गंभीर मरीज को इलाज के लिए शहरों की ओर न भागना पड़े। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस विस्तार की तैयारियां चल रही हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
पेलिएटिव केयर क्या होती है?
पेलिएटिव केयर गंभीर और असाध्य बीमारियों के मरीजों को दी जाने वाली विशेष देखभाल है — इसमें दर्द से राहत, नर्सिंग केयर, फिजियोथेरेपी, जरूरी दवाइयां और मानसिक-सामाजिक सहयोग शामिल होता है।
क्या घर पर मिलने वाली यह सेवा मुफ्त है?
हां, राज्य सरकार की इस व्यवस्था के तहत घर पर दी जाने वाली नर्सिंग सेवा, फिजियोथेरेपी, जरूरी दवाइयां और परामर्श मरीजों को सरकारी व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराए जाते हैं।
घर पर यह सेवा कैसे मिलेगी?
इसके लिए नजदीकी सरकारी अस्पताल में स्थापित पेलिएटिव केयर क्लिनिक से संपर्क करना होगा। ‘राहत की किरण’ वाहन के जरिए प्रशिक्षित टीम — नर्सिंग ऑफिसर, फिजियोथेरेपिस्ट, एएनएम या आशा कार्यकर्ता — मरीज के घर पहुंचकर देखभाल करती है।
किन बीमारियों के मरीज इसका लाभ ले सकते हैं?
कैंसर, पार्किंसन, स्ट्रोक, रीढ़ की चोट और अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियों के मरीज, साथ ही बिस्तर पर रहने को मजबूर बुजुर्ग इसका लाभ ले सकते हैं।