राजधानी जयपुर के सबसे व्यस्त चौराहों पर भीख मांगते नजर आने वाले चेहरों को अब जिला प्रशासन मुख्यधारा में लाने की तैयारी कर रहा है। जयपुर भिक्षावृत्ति अभियान की शुरुआत जिला कलक्टर संदेश नायक की पहल पर हुई है, जिसके तहत शहर के तीन प्रमुख चौराहों — रामबाग सर्किल, जेडीए चौराहा और ओटीएस चौराहे — पर 9 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक विशेष रेस्क्यू अभियान चलाया जाएगा। यह सिर्फ कार्रवाई का अभियान नहीं है; प्रशासन का दावा है कि पकड़े गए लोगों को पुनर्वास से जोड़ा जाएगा ताकि वे स्थायी रूप से भीख मांगने के चक्र से बाहर आ सकें।
दीपावली से ठीक पहले शुरू हो रहा यह अभियान इसलिए भी अहम है क्योंकि त्योहारी सीजन में जयपुर में पर्यटकों की भीड़ बढ़ती है।
तीन चौराहे, इक्कीस दिन, एक-एक दिन छोड़कर कार्रवाई
अभियान के पहले चरण में शहर के तीन सबसे संवेदनशील चौराहों को चुना गया है। रामबाग सर्किल और जेडीए चौराहा शहर के सबसे व्यस्त ट्रैफिक पॉइंट्स में गिने जाते हैं, जहां दिनभर हजारों वाहन गुजरते हैं। ओटीएस चौराहा भी रोजाना भारी भीड़ वाला इलाका है। इन्हीं जगहों पर भिक्षावृत्ति सबसे ज्यादा दिखाई देती है।
प्रशासन ने तीनों चौराहों के लिए अलग-अलग दिन तय किए हैं। रामबाग सर्किल और जेडीए चौराहे पर 9 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक निर्धारित तारीखों पर रेस्क्यू अभियान चलेगा, जबकि ओटीएस चौराहे पर 10 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक अभियान आयोजित किया जाएगा। एक दिन छोड़कर कार्रवाई करने का मकसद यह है कि टीमें हर चौराहे पर पूरी तैयारी के साथ पहुंचें और लगातार निगरानी भी बनी रहे।
कार्रवाई की तारीखों का पूरा शेड्यूल
| चौराहा | कार्रवाई की तारीखें |
|---|---|
| रामबाग सर्किल | 9, 11, 13, 15, 17, 19, 21, 23, 25, 27, 29 अक्टूबर |
| जेडीए चौराहा | 9, 11, 13, 15, 17, 19, 21, 23, 25, 27, 29 अक्टूबर |
| ओटीएस चौराहा | 10, 12, 14, 16, 18, 20, 22, 24, 26, 28, 30 अक्टूबर |
इस तरह कुल 21 दिनों तक, हर दूसरे दिन किसी न किसी चौराहे पर टीमें तैनात रहेंगी। अभियान की शुरुआत गुरुवार को हो गई है और इसका समापन 30 अक्टूबर को होगा।
जयपुर भिक्षावृत्ति अभियान में कौन-कौन शामिल है
इस बार अभियान को सिर्फ एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं रखा गया है। जिला कलक्टर की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय समिति की बैठक में पूरी रूपरेखा तय की गई, जिसमें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, पुलिस, यातायात विभाग और नगर निगम के अधिकारी मौजूद रहे।
मैदान में उतरने वाली टीमों में पुलिस और यातायात विभाग के जवान, जेडीए और नगर निगम के कर्मचारी शामिल होंगे। इसके अलावा भिक्षावृत्ति उन्मूलन के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों (NGO) का भी सहयोग लिया जाएगा। इन संगठनों के कार्यकर्ता भिक्षुकों से बातचीत, उनकी काउंसलिंग और पुनर्वास की प्रक्रिया में प्रशासन की मदद करेंगे।
यह बहु-विभागीय मॉडल इसलिए चुना गया है क्योंकि पहले भी कई बार सिर्फ छापामार कार्रवाई के बाद भिक्षुक कुछ दिनों में उन्हीं चौराहों पर लौट आते थे। इस बार प्रशासन का फोकस “पकड़ो और छोड़ दो” की जगह “रेस्क्यू और पुनर्वास” पर है।
सिर्फ कार्रवाई नहीं, पुनर्वास पर जोर
जयपुर भिक्षावृत्ति अभियान का सबसे अहम पहलू है इसका पुनर्वास वाला हिस्सा। यह पूरी पहल भिक्षावृत्ति पुनर्वास गृह योजना के तहत की जा रही है। रेस्क्यू किए गए लोगों को अस्थायी ठिकानों पर रखा जाएगा, जहां उनकी काउंसलिंग होगी।
प्रक्रिया कुछ इस तरह तय की गई है: पहले चौराहों से भिक्षुकों का रेस्क्यू किया जाएगा, फिर उनकी श्रेणी तय की जाएगी — कौन बच्चा है, कौन बुजुर्ग, कौन निशक्त और कौन काम करने योग्य युवा। इसके बाद काम करने योग्य लोगों को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने का प्रयास होगा, जबकि बच्चों, बुजुर्गों और निशक्तजनों को संबंधित कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
इससे पहले भी जयपुर में भिक्षुकों को मुख्यधारा से जोड़ने की पहल हो चुकी है, जिसमें रेस्क्यू किए गए लोगों को कौशल प्रशिक्षण दिलाया गया था और कुछ लोग रोजगार से भी जुड़े थे। नया अभियान उसी दिशा में एक बड़ा और व्यवस्थित कदम माना जा रहा है।
पर्यटन नगरी की छवि भी दांव पर
जयपुर हर साल लाखों देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है। प्रशासन का कहना है कि जयपुर देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है, और ऐसे में शहर को भिक्षावृत्ति से मुक्त करना जरूरी है।
दीपावली के आसपास शहर में पर्यटकों और खरीददारों की आवाजाही अपने चरम पर होती है। ऐसे समय में तीनों प्रमुख चौराहों को भिक्षावृत्ति से मुक्त रखने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही त्योहारी सीजन में चौराहों पर भीड़ बढ़ने से ट्रैफिक जाम और हादसों का खतरा भी रहता है, जिसे देखते हुए यातायात विभाग को भी अभियान में शामिल किया गया है।
आम नागरिकों के लिए इसका क्या मतलब है
अगर आप जयपुर में रहते हैं या यहां आते-जाते हैं, तो अगले तीन हफ्तों में इन तीनों चौराहों पर आपको प्रशासन की टीमें सक्रिय दिखेंगी। जरूरी काम पहले निपटा लें और इन तारीखों में इन चौराहों के आसपास अतिरिक्त प्रशासनिक गतिविधि की उम्मीद रखें। विशेषज्ञों का मानना है कि चौराहों पर भीख देने से भिक्षावृत्ति का चक्र बना रहता है; अगर मदद करनी है तो पंजीकृत संस्थाओं या सरकारी पुनर्वास योजनाओं के जरिए करें। अगर आपको किसी चौराहे पर बच्चों से भीख मंगवाते हुए कोई दिखे, तो इसकी सूचना पुलिस या चाइल्ड हेल्पलाइन को दें।
आगे क्या
जिला प्रशासन का कहना है कि अभियान के बाद भी निगरानी जारी रहेगी और पुनर्वास गृहों में रखे गए लोगों की प्रगति की समीक्षा होती रहेगी। 30 अक्टूबर को अभियान के समापन के बाद प्रशासन इसकी समीक्षा करेगा और जरूरत के हिसाब से इसे आगे बढ़ाने या दूसरे चौराहों तक विस्तार देने पर फैसला होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: जयपुर भिक्षावृत्ति अभियान कब से कब तक चलेगा?
उत्तर: 9 अक्टूबर 2026 से 30 अक्टूबर 2026 तक। रामबाग सर्किल और जेडीए चौराहे पर 9, 11, 13, 15, 17, 19, 21, 23, 25, 27, 29 अक्टूबर को; ओटीएस चौराहे पर 10, 12, 14, 16, 18, 20, 22, 24, 26, 28, 30 अक्टूबर को कार्रवाई होगी।
प्रश्न 2: अभियान में किन चौराहों को शामिल किया गया है?
उत्तर: रामबाग सर्किल, जेडीए चौराहा और ओटीएस चौराहा।
प्रश्न 3: रेस्क्यू किए गए भिक्षुकों का क्या होगा?
उत्तर: भिक्षावृत्ति पुनर्वास गृह योजना के तहत काउंसलिंग, श्रेणीकरण, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की व्यवस्था; बच्चों, बुजुर्गों और निशक्तजनों को कल्याण योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
प्रश्न 4: अभियान की अगुवाई कौन कर रहा है?
उत्तर: जिला कलक्टर संदेश नायक की पहल; पुलिस, यातायात विभाग, जेडीए, नगर निगम, सामाजिक न्याय विभाग और NGO शामिल।