राजस्थान हाईकोर्ट कचरा नियम 2026: न्यायिक परिसरों में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पूरी रोक, कचरा अब 4 श्रेणियों में बंटेगा

अदालत परिसरों में अब सफाई को लेकर सख्त व्यवस्था लागू होने जा रही है। प्रदेश की सबसे बड़ी अदालत — राजस्थान हाईकोर्ट — ने अपने अधीन सभी न्यायिक भवनों और न्यायिक अधिकारियों के आवासीय परिसरों के लिए राजस्थान हाईकोर्ट कचरा नियम 2026 के तहत कचरा प्रबंधन के नए नियम जारी कर दिए हैं। एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया भी साथ में जारी हुई है, जिसमें कचरे के अलगाव से लेकर निगरानी तक हर बिंदु तय किया गया है।

इसका सबसे सीधा असर यह है कि राज्य के किसी भी अदालती परिसर में अब सिंगल-यूज प्लास्टिक और डिस्पोजेबल प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यह व्यवस्था ‘राजस्थान हाईकोर्ट सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026’ को जमीन पर उतारने और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।

राजस्थान हाईकोर्ट कचरा नियम 2026 का सबसे बड़ा फैसला: प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध

नए नियमों की सबसे सख्त धारा प्लास्टिक को लेकर है। राजस्थान हाईकोर्ट कचरा नियम 2026 के तहत प्रदेश के सभी न्यायालय परिसरों में सिंगल-यूज प्लास्टिक के प्रयोग पर पूरी रोक लगा दी गई है। डिस्पोजेबल प्लास्टिक उत्पाद भी अब कोर्ट परिसरों में इस्तेमाल नहीं हो सकेंगे।

इसका असर रोजाना हजारों लोगों पर पड़ेगा। जिला न्यायालयों, अधीनस्थ अदालतों और हाईकोर्ट की जोधपुर-जयपुर दोनों पीठों में रोज वकील, वादकारी, कर्मचारी और आगंतुक आते हैं। कैंटीनों में प्लास्टिक के कप सबसे आम दृश्य थे — अब इनकी जगह कांच, स्टील या बायोडिग्रेडेबल विकल्प लेंगे। गौरतलब है कि इससे पहले नाहरगढ़ जैविक उद्यान में भी प्लास्टिक बोतल पर जुर्माने की व्यवस्था लागू हो चुकी है — यानी प्रदेश में प्लास्टिक के खिलाफ मोर्चा चौड़ा हो रहा है।

कचरा अब 4 श्रेणियों में बंटेगा, हर श्रेणी के लिए अलग रंग के डिब्बे

नई SOP में कचरे का वैज्ञानिक वर्गीकरण भी तय है। न्यायिक परिसरों और अधिकारियों की आवासीय कॉलोनियों में कचरा चार श्रेणियों में बांटा जाएगा — गीला, सूखा, सेनेटरी और विशेष कचरा। हर श्रेणी के लिए रंग-आधारित कूड़ेदान लगाए जाएंगे, ताकि स्रोत पर ही पृथक्करण हो सके।

कचरे की श्रेणी इसमें क्या आएगा
गीला कचरा रसोई का बचा खाना, फलों-सब्जियों के छिलके
सूखा कचरा कागज, गत्ता, प्लास्टिक की बोतलें, डिब्बे
सेनेटरी कचरा डायपर, सैनिटरी नैपकिन, चिकित्सा अपशिष्ट
विशेष कचरा ई-वेस्ट, बैटरियां, खतरनाक रसायन

कचरे को जलाने या खुले में फेंकने पर सख्त रोक रहेगी। उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों पर प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा — यानी जवाबदेही सिर्फ कागज पर नहीं, अमल में भी तय है।

राजस्थान हाईकोर्ट कचरा नियम 2026 में हर 3 महीने समीक्षा की व्यवस्था

नियम बनाने से ज्यादा मुश्किल उन्हें लागू करवाना होता है — हाईकोर्ट ने इसका भी इंतजाम किया है। नई व्यवस्था के अनुपालन के लिए निगरानी समितियां बनाई गई हैं, जो हर तीन महीने में ठोस कचरा प्रबंधन कार्यों की विस्तृत समीक्षा करेंगी। नियुक्त नोडल अधिकारी भी हर तिमाही अपनी प्रगति रिपोर्ट सौंपेंगे।

इस त्रैमासिक समीक्षा से कचरा प्रबंधन किसी एक बार के अभियान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा बनेगा। रिपोर्टों से पता चलता रहेगा कि कहां नियमों का पालन हो रहा है और कहां ढिलाई है।

पृष्ठभूमि: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और प्रदेश की पुरानी कोशिशें

यह व्यवस्था अचानक नहीं आई। इसके पीछे उच्चतम न्यायालय के वे निर्देश हैं, जिनमें सार्वजनिक संस्थानों में पर्यावरण-अनुकूल प्रथाएं अपनाने पर जोर दिया गया है। राजस्थान हाईकोर्ट कचरा नियम 2026 इन्हीं निर्देशों को राज्य के न्यायिक तंत्र में उतारने का माध्यम है।

राजस्थान में प्लास्टिक पर रोक की यह पहली कोशिश भी नहीं है। राज्य सरकार ने 2010 में प्लास्टिक के कैरी बैग पर प्रतिबंध लगाया था, हालांकि जमीनी असर सीमित रहा। 2019 में हाईकोर्ट की फुल कोर्ट ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर अपने परिसरों में सिंगल-यूज प्लास्टिक और थर्माकोल पर प्रतिबंध का प्रस्ताव पारित किया था। अब 2026 के नए नियम एक और बड़ा कदम हैं — इस बार सिर्फ प्रतिबंध नहीं, कचरे के पूरे प्रबंधन की व्यवस्था तय हुई है।

कागज बचाने पर जोर: ई-फाइलिंग और डिजिटलीकरण को बढ़ावा

राजस्थान हाईकोर्ट कचरा नियम 2026 का एक और अहम पहलू कागजों की खपत घटाना है। SOP में ई-फाइलिंग और डिजिटलीकरण तेज करने पर जोर है। अदालतों में रोजाना हजारों पन्नों के दस्तावेज दाखिल होते हैं — वकालतनामे, शपथपत्र, साक्ष्य, फैसले — जिनमें से बड़ी मात्रा अंततः कचरे में बदल जाती है। ई-फाइलिंग से कागज बचेगा और फाइलों का रखरखाव आसान होगा।

इसके साथ ही राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी अधिकारियों-कर्मचारियों को इन नियमों का विशेष प्रशिक्षण देगी — ताकि नियम कागजों से निकलकर परिसरों में दिखें।

आम लोगों और वकीलों पर क्या असर पड़ेगा?

अगर आप वकील हैं, वादकारी हैं या किसी काम से कोर्ट परिसर जाते हैं, तो राजस्थान हाईकोर्ट कचरा नियम 2026 का सीधा असर आप पर भी पड़ेगा:

  • प्लास्टिक की बोतल या थैली लेकर न जाएं — सिंगल-यूज प्लास्टिक पर रोक है, स्टील या कांच की बोतल साथ रखें।
  • कचरा सही डिब्बे में डालें — चार श्रेणियों के रंग-कोडेड डिब्बे लगेंगे; कचरा मिलाकर न फेंकें।
  • कैंटीन में बदलाव — चाय-कॉफी अब प्लास्टिक कप की बजाय कांच या कुल्हड़ में मिलेगी।
  • ई-फाइलिंग अपनाएं — वकीलों के लिए ऑनलाइन फाइलिंग आसान होगी, कागजी झंझट घटेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: राजस्थान हाईकोर्ट कचरा नियम 2026 कहां-कहां लागू होंगे?

उत्तर: प्रदेश के सभी न्यायिक परिसरों — हाईकोर्ट की जोधपुर और जयपुर पीठों, सभी जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों — तथा न्यायिक अधिकारियों की आवासीय कॉलोनियों में।

प्रश्न 2: क्या कोर्ट परिसर में प्लास्टिक की पानी की बोतल ले जाना भी मना है?

उत्तर: सिंगल-यूज और डिस्पोजेबल प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध है। एक बार इस्तेमाल वाली बोतलों से बचें; स्टील की बोतल साथ रखना बेहतर रहेगा।

प्रश्न 3: नियमों का पालन न करने पर क्या होगा?

उत्तर: खुले में कचरा फेंकने या जलाने पर रोक है और उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों पर प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा। निगरानी समितियां हर तीन महीने में समीक्षा करेंगी।

प्रश्न 4: ई-फाइलिंग से वकीलों को क्या फायदा होगा?

उत्तर: कागज की खपत घटेगी, फाइलें खोने का जोखिम कम होगा और मुकदमों की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

कुल मिलाकर, यह कदम दिखाता है कि स्वच्छता की जिम्मेदारी सिर्फ नगर निगमों की नहीं — न्यायपालिका अपने घर से शुरुआत कर रही है। हाल ही में जयपुर स्वच्छता उत्सव और जोधपुर महापौर सफाई अभियान भी इसी दिशा में हुए हैं। अगर राजस्थान हाईकोर्ट कचरा नियम 2026 सही से लागू हुए, तो प्रदेश के सैकड़ों न्यायिक परिसर स्वच्छता के मॉडल बन सकते हैं।

अधिक जानकारी के लिए राजस्थान हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट hcraj.nic.in देख सकते हैं।

Leave a Comment