नाहरगढ़ में प्लास्टिक की बोतल दिखी तो ₹1000 का जुर्माना! कांच की बोतल में पानी और ₹40 वापस की नई व्यवस्था शुरू
जयपुर के नाहरगढ़ जैविक उद्यान घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो अपनी प्लास्टिक की पानी की बोतल घर पर ही छोड़ जाइए। अब यहां प्लास्टिक की बोतल के साथ पकड़े गए तो सीधे ₹1000 का जुर्माना लगेगा। वन विभाग ने नाहरगढ़ में ग्रीन टूरिज्म की नई पहल शुरू की है, जिसके तहत टिकट विंडो के पास ही पर्यटकों को कांच की बोतल में शुद्ध पानी दिया जाएगा — और बोतल वापस लौटाने पर पैसे भी वापस मिलेंगे।
जेब पर पड़ेगा सीधा असर: जुर्माना भी, रिफंड भी
इस नई व्यवस्था की सबसे खास बात इसका सीधा-सादा गणित है। टिकट विंडो के पास बने काउंटर पर पर्यटक को 500 मिलीलीटर पानी कांच की बोतल में ₹50 में मिलेगा। पानी पीने के बाद जब आप खाली बोतल काउंटर पर वापस जमा कराएंगे, तो ₹40 तुरंत वापस मिल जाएंगे। यानी असल में एक बोतल पानी की कीमत पड़ेगी सिर्फ ₹10। बोतल काउंटर पर वापस आती है, धोकर फिर से इस्तेमाल होती है और कचरे का ढेर नहीं बनता।
वन विभाग का तर्क साफ है — जब तक पर्यटक के पास प्लास्टिक की बोतल होगी, वो कहीं न कहीं फेंकी ही जाएगी। लेकिन जब बोतल की कीमत ₹40 हो और वो कांच की हो, तो कोई उसे जंगल में फेंककर जाएगा नहीं। वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा वही फेंकी हुई प्लास्टिक बोतलें थीं, जो नाहरगढ़ परिसर में हर दिन सैकड़ों की संख्या में जमा हो रही थीं।
कौन लेकर आया ये पहल और कैसे शुरू हुई
इस व्यवस्था की शुरुआत वन विभाग, जयपुर और नीर अमृत फाउंडेशन के सहयोग से हुई है। 72वें वन्यजीव सप्ताह 2026 के तहत इसका औपचारिक शुभारंभ किया गया। मौके पर मुख्य वन संरक्षक रामकरण खेरवा, मुख्य वन संरक्षक डॉ. आशीष व्यास, उप वन संरक्षक मनफूल विश्नोई, वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक अरविंद माथुर समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने पौधारोपण भी किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
यह व्यवस्था फिलहाल प्रायोगिक तौर पर शुरू की गई है। नीर अमृत फाउंडेशन इसमें नो-प्रॉफिट, नो-लॉस आधार पर तकनीकी और परिचालन सहयोग दे रहा है। यानी फिलहाल ये एक पायलट प्रोजेक्ट है — सफल रहा तो इसे स्थायी व्यवस्था में बदल दिया जाएगा।
प्लास्टिक मुक्त परिसर का बड़ा लक्ष्य
मुख्य वन संरक्षक रामकरण खेरवा के मुताबिक नाहरगढ़ जैविक उद्यान में हर दिन बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। सैकड़ों पर्यटक अपने साथ प्लास्टिक की पानी की बोतलें लाते हैं और इस्तेमाल के बाद उन्हें परिसर में ही फेंक देते हैं। ये बोतलें वन्यजीवों के लिए सीधा खतरा बन जाती हैं — जानवर इन्हें चबा लेते हैं या इनमें फंस जाते हैं, और पर्यावरण पर इनका असर तो सभी जानते हैं।
इसी समस्या को देखते हुए जैविक उद्यान को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त रखने की दिशा में यह फैसला लिया गया। नई व्यवस्था का संदेश भी बिल्कुल स्पष्ट रखा गया है — “एक बोतल का बार-बार उपयोग, प्लास्टिक कचरे में कमी की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम।” वन विभाग का कहना है कि ग्रीन टूरिज्म का मतलब सिर्फ जंगल घुमाना नहीं, बल्कि जंगल को वैसा ही छोड़कर आना है जैसा हमें मिला था।
72वां वन्यजीव सप्ताह और नाहरगढ़ का खास रिश्ता
गौर करने वाली बात है कि यह पहल 72वें वन्यजीव सप्ताह 2026 के मौके पर शुरू हुई है। अक्टूबर के पहले हफ्ते में मनाया जाने वाला वन्यजीव सप्ताह हर साल वन्यजीव संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने का मौका देता है। नाहरगढ़ जैविक उद्यान जयपुर का सबसे लोकप्रिय वन्यजीव पर्यटन स्थल है, जहां टाइगर और लायन सफारी के लिए पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है।
जंगल सफारी का नया सीजन भी अभी-अभी 1 अक्टूबर से शुरू हुआ है, ऐसे में अक्टूबर-नवंबर में यहां पर्यटकों की संख्या सबसे ज्यादा रहती है। ठीक इसी भीड़ भरे सीजन की शुरुआत में प्लास्टिक पर सख्ती का फैसला लिया गया है, ताकि सबसे ज्यादा कचरा पैदा होने वाले महीनों में ही परिसर साफ-सुथरा बना रहे।
सिर्फ नाहरगढ़ तक सीमित नहीं रहेगा
वन विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि यह पहल सिर्फ नाहरगढ़ तक सीमित नहीं रहेगी। अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो इसे जयपुर के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों तक भी बढ़ाया जा सकता है। आमेर, नाहरगढ़ किला, जलमहल जैसे स्थानों पर हर दिन हजारों पर्यटक आते हैं और वहां भी प्लास्टिक कचरे की समस्या उतनी ही गंभीर है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की “डिपॉजिट-रिफंड” व्यवस्था दुनिया के कई देशों के पर्यटन स्थलों पर पहले से सफल है। भारत में भी कुछ राष्ट्रीय उद्यानों और पहाड़ी पर्यटन स्थलों पर प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रयोग हुए हैं, लेकिन कांच की बोतल पर आधारित रिफिल व्यवस्था का यह प्रयोग राजस्थान में अपनी तरह का पहला माना जा रहा है।
पर्यटकों के लिए जरूरी जानकारी एक नजर में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | नाहरगढ़ जैविक उद्यान, जयपुर (टिकट विंडो के पास काउंटर) |
| पानी की कीमत | 500 मिलीलीटर कांच की बोतल — ₹50 |
| बोतल वापसी पर रिफंड | ₹40 तुरंत वापस |
| असल लागत (बोतल लौटाने पर) | सिर्फ ₹10 |
| प्लास्टिक बोतल पर जुर्माना | ₹1000 |
| व्यवस्था का स्वरूप | फिलहाल प्रायोगिक (पायलट), नीर अमृत फाउंडेशन के सहयोग से |
| शुभारंभ | 72वां वन्यजीव सप्ताह 2026, 3 अक्टूबर 2026 |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: क्या मैं अपनी प्लास्टिक की बोतल लेकर नाहरगढ़ जा सकता हूं?
जवाब: नहीं। परिसर में प्लास्टिक की पानी की बोतल के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है और पकड़े जाने पर ₹1000 का जुर्माना लगेगा। बेहतर है कि बोतल घर पर ही छोड़ जाएं।
सवाल: कांच की बोतल का पानी कितने का पड़ेगा?
जवाब: काउंटर पर 500 मिलीलीटर पानी कांच की बोतल में ₹50 में मिलेगा। खाली बोतल वापस करने पर ₹40 मिल जाएंगे, यानी आपकी जेब से सिर्फ ₹10 खर्च होंगे।
सवाल: क्या ये व्यवस्था स्थायी है?
जवाब: फिलहाल यह प्रायोगिक तौर पर शुरू की गई है। नीर अमृत फाउंडेशन नो-प्रॉफिट, नो-लॉस आधार पर सहयोग दे रहा है। सफलता के आधार पर इसे स्थायी और अन्य पर्यटन स्थलों तक बढ़ाया जा सकता है।
सवाल: बच्चों और बुजुर्गों के लिए कोई अलग व्यवस्था है?
जवाब: व्यवस्था सभी पर्यटकों के लिए एक समान है। टिकट विंडो के पास ही काउंटर होने से पानी लेना आसान रहेगा और बोतल वापसी की प्रक्रिया भी वहीं पूरी हो जाएगी।