जयपुर सहित राजस्थान के आठ शहरों में जल्द ही सड़कों पर नीले-हरे रंग की ई-बसें दौड़ती नजर आएंगी। राजस्थान ई-बस योजना (पीएम ई-बस सेवा योजना) के तहत प्रदेश के आठ शहरों के लिए कुल 675 इलेक्ट्रिक बसें स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से अब तक 250 बसों की डिलीवरी भी हो चुकी है। गुरुवार (22 अक्टूबर 2026) को शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों को लंबित काम प्राथमिकता से पूरा करने और बस डिपो व चार्जिंग सुविधाएं समय पर विकसित करने के सख्त निर्देश दिए गए।
बैठक का सबसे बड़ा निष्कर्ष यही रहा कि अब राजस्थान ई-बस योजना की रफ्तार तेज होगी। मुख्य सचिव ने साफ कहा — बसें डिलीवर हो रही हैं, लेकिन उनके चलने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा कई जगह अधूरा है। जयपुर के टोडी डिपो में बिजली कनेक्शन का काम लंबित है और कई शहरों में डिपो के लिए जमीन नहीं मिली है। इन्हीं रुकावटों को दूर करने के लिए कार्ययोजना पर चर्चा हुई।
बैठक में मुख्य सचिव ने क्या निर्देश दिए
मुख्य सचिव ने अधिकारियों से दो सीधे सवाल पूछे — अब तक ई-बसों में कितने यात्रियों ने सफर किया है और यात्री किराए से सरकार को कितनी आय मिली है। उन्होंने कहा कि योजना की प्रभावशीलता का आकलन इन्हीं आंकड़ों से होगा, इसलिए कुल यात्री संख्या, प्रतिदिन औसतन सफर करने वाले यात्रियों और किराए से हुई आय की जानकारी जुटाई जाए।
बैठक में प्रमुख शासन सचिव (स्वायत्त शासन विभाग) रवि जैन ने बताया कि राजस्थान ई-बस योजना के तहत आठों शहरों के लिए बसें स्वीकृत हो चुकी हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि संचालन की प्रभावशीलता को परखने के लिए प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (केपीआई) तय किए जाएं और एक स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जाए। जयपुर में चल रही सरकारी और निजी बसों की संख्या, उनकी कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा की गई और विभिन्न बस सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय बनाने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान ई-बस योजना के तहत बसें चलने वाले स्थानों पर ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड (टीसीबी) को क्रियाशील किया जाए, ताकि यात्रियों को रूट और समय की सही जानकारी मिले। साथ ही निजी बस संचालकों को भी ई-बसों की ओर प्रोत्साहित करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए गए — यानी आने वाले दिनों में निजी क्षेत्र की डीजल बसों की जगह ई-बसें भी नजर आ सकती हैं।
राजस्थान ई-बस योजना: किन आठ शहरों को कितनी बसें
पहले चरण में स्वीकृत 675 बसों में 565 नौ-मीटर लंबाई वाली बसें और 110 बारह-मीटर लंबाई वाली स्टैंडर्ड बसें शामिल हैं। शहरवार आवंटन इस प्रकार है:
| शहर | स्वीकृत ई-बसें |
|---|---|
| जयपुर | 150 |
| जोधपुर | 100 |
| कोटा | 100 |
| अजमेर | 100 |
| बीकानेर | 75 |
| उदयपुर | 50 |
| भीलवाड़ा | 50 |
| अलवर | 50 |
| कुल | 675 |
जयपुर को सबसे ज्यादा 150 बसें मिली हैं। राजधानी में ये बसें दो डिपो — बाग्राना और टोडी — से संचालित होंगी, दोनों डिपो में 75-75 बसें रखी जाएंगी। बाग्राना डिपो में 15 चार्जर पहले से लगाए जा चुके हैं और यहां 45 ई-बसें अभी संचालित भी हो रही हैं। टोडी डिपो में 15 चार्जर लगाने का काम फिलहाल चल रहा है।
राजस्थान में सार्वजनिक परिवहन की रफ्तार बढ़ाने के लिए सरकार ने हाल ही में 35 ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक और रोडवेज की नई बसों की परियोजना को भी रफ्तार दी है।
दूसरे चरण में 475 और बसें — कुल संख्या 1,150
यह योजना यहीं नहीं रुक रही। दूसरे चरण में राजस्थान को 475 और ई-बसें स्वीकृत की गई हैं, जिनसे जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, अलवर और सीकर शहरों को लाभ मिलेगा। दोनों चरणों को मिलाकर प्रदेश में कुल 1,150 इलेक्ट्रिक बसों का आवंटन हो चुका है।
अब तक पहले चरण की 139 बसें आठों शहरों में संचालित हो रही हैं — जयपुर में 45, भीलवाड़ा में 28, उदयपुर में 25 और कोटा में 21, जबकि जोधपुर, बीकानेर, अलवर और अजमेर में पांच-पांच। अतिरिक्त 60 बसें मिलने के साथ कुल उपलब्धता 199 की है और पूरे बेड़े के लिए 65 चार्जर लगाए जा चुके हैं।
12 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में 16 ई-बसों को हरी झंडी दिखाकर इस योजना की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा था कि ये बसें बिना धुएं और बिना शोर के चलेंगी और इसके लिए बस स्टैंड व चार्जिंग पॉइंट का ढांचा विकसित किया जा रहा है।
राजस्थान ई-बस योजना से यात्रियों को क्या मिलेगा
ई-बसें डीजल बसों की तरह प्रदूषण नहीं फैलातीं और इनमें शोर भी बेहद कम होता है। इसका सीधा फायदा शहरों की हवा को मिलेगा, खासकर जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे घनी आबादी वाले शहरों में। सरकार का लक्ष्य किफायती और सस्ती यात्रा सुविधा देना है, ताकि आम आदमी की जेब पर बोझ न बढ़े।
जयपुर मेट्रो लाइन 2 की परियोजना के साथ-साथ ई-बस नेटवर्क राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बदलने की तैयारी में है। बस और मेट्रो का समन्वय यात्रियों को आखिरी छोर तक पहुंचने की सुविधा देगा, जिस पर मुख्य सचिव की बैठक में भी खास जोर दिया गया। जब सभी 675 बसें सड़कों पर उतर आएंगी तो रोजाना लाखों यात्री इनका लाभ उठा सकेंगे।
राह में क्या रुकावटें हैं
बैठक में यह बात खुलकर सामने आई कि राजस्थान ई-बस योजना की गति बुनियादी ढांचे की कमी से धीमी हो रही है। जयपुर के टोडी डिपो में बिजली कनेक्शन का काम लंबित होने से वहां 75 बसों का संचालन पूरी क्षमता से शुरू नहीं हो पा रहा है और कई शहरों में बस डिपो के लिए जमीन की उपलब्धता भी सुनिश्चित नहीं हुई है। मुख्य सचिव ने लंबित कार्य प्राथमिकता से पूरे करने के निर्देश दिए, ताकि डिलीवर हो रही बसें खड़ी न रहें और जल्द से जल्द यात्रियों की सेवा में लग सकें।
इलेक्ट्रिक इंजनों की ओर बढ़ती भारतीय रेल की तरह ही राजस्थान का शहरी परिवहन भी बिजली की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत राजस्थान को कितनी बसें मिली हैं? पहले चरण में राजस्थान के आठ शहरों के लिए 675 ई-बसें स्वीकृत हैं। दूसरे चरण में 475 और बसें स्वीकृत हैं, यानी कुल आवंटन 1,150 बसों का है।
अब तक कितनी बसों की डिलीवरी हो चुकी है? अब तक 250 बसों की डिलीवरी हो चुकी है, जिनमें से 139 बसें आठों शहरों में फिलहाल संचालित भी हो रही हैं। अतिरिक्त 60 बसें मिलने के साथ कुल उपलब्धता 199 की है।
किन शहरों में ई-बसें चलेंगी? जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, भीलवाड़ा और अलवर में पहले चरण की बसें चलेंगी। दूसरे चरण में जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, अलवर और सीकर को अतिरिक्त बसें मिलेंगी।
मुख्य सचिव की बैठक में क्या तय हुआ? मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने डिपो और चार्जिंग सुविधाएं समय पर विकसित करने, यात्री संख्या व किराए से आय की समीक्षा, KPI तय करने और निजी बस संचालकों को ई-बसों के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।
यह खबर 22 अक्टूबर 2026 को हुई मुख्य सचिव स्तर की समीक्षा बैठक पर आधारित है। (स्रोत: ET Government)