जयपुर में ऑफिस की तलाश कर रही कंपनियों के लिए विकल्प अब पहले से ज्यादा हैं — वजह है जयपुर कमर्शियल रियल एस्टेट में आया ताजा उछाल। JLL की 22 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक जयपुर देश के प्रमुख टियर-2 कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट्स में से एक बनकर उभरा है, जहां ऑफिस, रिटेल और वेयरहाउसिंग तीनों सेक्टर एक साथ विस्तार कर रहे हैं।
रिपोर्ट का सबसे बड़ा संकेत: 2028 तक जयपुर में कुल 6.62 मिलियन स्क्वायर फीट नई कमर्शियल जगह जुड़ जाएगी — 3.32 मिलियन ऑफिस, 0.90 मिलियन मॉल और 2.4 मिलियन वेयरहाउसिंग।
जयपुर कमर्शियल रियल एस्टेट के मुख्य आंकड़े
ऑफिस सेक्टर इस वृद्धि की अगुवाई कर रहा है। शहर में अभी 9.70 मिलियन स्क्वायर फीट ग्रेड-A ऑफिस स्टॉक तैयार और चालू है, और 2028 तक इसमें 3.32 मिलियन स्क्वायर फीट की और आपूर्ति जुड़ने का अनुमान है। यानी आज के मुकाबले करीब एक-तिहाई नई ऑफिस जगह बनने की राह पर है।
फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस भी तेजी से बढ़ रहा है — करीब 11,000 फ्लेक्स सीटें मौजूद हैं और आने वाली तिमाहियों में 3,150 सीटें और जुड़ने की उम्मीद है।
JLL के सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष अग्रवाल के मुताबिक टेक कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों की मांग साफ दिख रही है — जयपुर में मेट्रो शहरों जैसा इन्फ्रास्ट्रक्चर है, लेकिन लागत कहीं बेहतर है और उत्तर भारत का बढ़ता टैलेंट पूल भी यहीं है।
ऑफिस बाजार: किराया कितना, खाली जगह कितनी
जयपुर में ग्रेड-A ऑफिस का मासिक किराया 45 से 95 रुपये प्रति स्क्वायर फीट के बीच चल रहा है। वैकेंसी रेट करीब 24 फीसदी है — यानी हर चार में से लगभग एक ऑफिस जगह फिलहाल खाली है। टियर-2 मार्केट्स में यह दर आपूर्ति के विस्तार को दिखाती है और किराये पर दबाव रखने का भी एक कारण है।
मांग मुख्यतः IT/ITES, BFSI, कंसल्टिंग और लॉजिस्टिक्स से आ रही है। इन सेक्टर्स की मौजूदगी ही तय करती है कि जयपुर का ऑफिस बाजार किसी एक इंडस्ट्री पर निर्भर नहीं है। दिल्ली-NCR से निकटता यहां का सबसे बड़ा तुरुप का पत्ता है — जो कंपनियां बड़े मेट्रो शहरों का किराया नहीं दे पातीं, वे जयपुर में लगभग वही गुणवत्ता का इन्फ्रास्ट्रक्चर कम लागत में पा सकती हैं।
शहर के तीन बिजनेस जिले: कहां कौन बसा है
JLL ने जयपुर के कमर्शियल रियल एस्टेट को तीन मुख्य बिजनेस जिलों में बांटा है।
सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट (CBD): MI रोड और सी-स्कीम इस जिले की धुरी हैं। यहां वित्तीय संस्थान, कॉरपोरेट हेडक्वार्टर और प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी संपत्तियां केंद्रित हैं।
सेकेंडरी बिजनेस डिस्ट्रिक्ट: सिविल लाइंस, अजमेर रोड, विद्याधर नगर, मालवीय नगर, टोंक रोड और JLN मार्ग। यहां स्टैंडअलोन कमर्शियल कॉम्प्लेक्स हैं जिनमें ऑफिस और रिटेल दोनों घटक मौजूद हैं।
पेरिफेरल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट: महिंद्रा सिटी, जगतपुरा और सीतापुरा। यह टेक्नोलॉजी और IT-इनेबल्ड सेवाओं का गढ़ है — महिंद्रा SEZ में विप्रो और इंफोसिस जैसे एंकर टेनेंट पहले से मौजूद हैं।
इन तीनों जिलों में जयपुर कमर्शियल रियल एस्टेट की पूरी कहानी समाई है — वित्तीय संस्थान CBD में, रिटेल-ऑफिस मिक्स सेकेंडरी जिले में, और टेक कंपनियां पेरिफेरल इलाकों में।
जयपुर मेट्रो लाइन 2 के भूमिगत हिस्से पर काम आगे बढ़ रहा है, जो आने वाले सालों में इन कमर्शियल इलाकों तक पहुंच को और बेहतर बनाएगा।
रिटेल और वेयरहाउसिंग: मॉल से गोदाम तक
जयपुर में ऑर्गनाइज्ड रिटेल के पास करीब 12 चालू प्रोजेक्ट्स में कुल 4.9 मिलियन स्क्वायर फीट मॉल स्टॉक है, वैकेंसी करीब 16 फीसदी। प्रीमियम रिटेल स्पेस का मासिक किराया 100 से 280 रुपये प्रति स्क्वायर फीट के बीच है, और 2028 तक 0.9 मिलियन स्क्वायर फीट मॉल जगह और जुड़ने की उम्मीद है।
वेयरहाउसिंग सेक्टर में 3.5 मिलियन स्क्वायर फीट ग्रेड-A स्टॉक है — मासिक किराया 18 से 24 रुपये प्रति स्क्वायर फीट, वैकेंसी करीब 22 फीसदी। 2028 तक इसमें 2.4 मिलियन स्क्वायर फीट की अतिरिक्त आपूर्ति की उम्मीद है। वेयरहाउसिंग तीन जोनों में बंटा है — सीकर रोड–NH 11 और VKI क्षेत्र (19–24 रुपये), अजमेर रोड–NH-48 (20–25 रुपये), और मालवीय नगर/सीतापुरा इंडस्ट्रियल एरिया (22–25 रुपये)।
| सेक्टर | चालू स्टॉक | वैकेंसी दर | मासिक किराया (₹/स्क्वायर फीट) | 2028 तक नई आपूर्ति |
|---|---|---|---|---|
| ऑफिस (ग्रेड-A) | 9.70 मिलियन स्क्वायर फीट | ~24% | 45–95 | 3.32 मिलियन स्क्वायर फीट |
| रिटेल (मॉल) | 4.90 मिलियन स्क्वायर फीट | ~16% | 100–280 | 0.90 मिलियन स्क्वायर फीट |
| वेयरहाउसिंग | 3.50 मिलियन स्क्वायर फीट | ~22% | 18–24 | 2.40 मिलियन स्क्वायर फीट |
| फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस | ~11,000 सीटें | — | — | +3,150 सीटें |
जयपुर को क्यों चुना जा रहा है — और आपके लिए इसका मतलब
रिपोर्ट में तीन कारण बार-बार सामने आते हैं: दिल्ली-NCR से निकटता, बनता हुआ इन्फ्रास्ट्रक्चर, और प्रतिस्पर्धी परिचालन लागत। हाल के महीनों में कई बड़ी लीज डील्स जयपुर में हुई हैं — वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों ने लाखों स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस और प्रमुख उपकरण कंपनियों ने वेयरहाउसिंग स्पेस पट्टे पर लिया है। यानी रिपोर्ट के आंकड़े जमीन पर भी दिख रहे हैं।
निवेशकों के लिए संदेश साफ है: डेवलपर्स का भरोसा बढ़ रहा है, लेकिन वैकेंसी दरें (ऑफिस 24%, वेयरहाउसिंग 22%) भी देखिए — किराया-वृद्धि धीमी रह सकती है। स्टार्टअप के लिए फ्लेक्स वर्कस्पेस का विस्तार अच्छी खबर है, और नौकरी चाहने वालों के लिए IT/ITES, BFSI और लॉजिस्टिक्स में अवसर बढ़ रहे हैं। RAJ-RERA के नियमन के बीच यह आर्थिक विस्तार प्रदेश के लिए सकारात्मक संकेत है।
ध्यान रहे, यह JLL की अपनी मार्केट रिसर्च है और आंकड़े उसी के अनुमान हैं — फिर भी, आपूर्ति की योजना का पैमाना जयपुर के कमर्शियल भविष्य के बारे में आशावादी संकेत देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: JLL रिपोर्ट के मुताबिक जयपुर में कितना ऑफिस स्टॉक तैयार है?
उत्तर: 9.70 मिलियन स्क्वायर फीट ग्रेड-A ऑफिस स्टॉक चालू है; 2028 तक 3.32 मिलियन स्क्वायर फीट की और आपूर्ति जुड़ने का अनुमान है।
प्रश्न: जयपुर में ऑफिस का किराया और वैकेंसी दर कितनी है?
उत्तर: मासिक किराया 45 से 95 रुपये प्रति स्क्वायर फीट; वैकेंसी दर करीब 24 फीसदी।
प्रश्न: 2028 तक कितनी नई कमर्शियल जगह जुड़ेगी?
उत्तर: कुल 6.62 मिलियन स्क्वायर फीट — 3.32 मिलियन ऑफिस, 0.90 मिलियन मॉल, 2.40 मिलियन वेयरहाउसिंग।
प्रश्न: किन सेक्टरों की कंपनियां सबसे ज्यादा जगह ले रही हैं?
उत्तर: IT/ITES, BFSI, कंसल्टिंग और लॉजिस्टिक्स। महिंद्रा सिटी और सीतापुरा में विप्रो-इंफोसिस जैसे बड़े नाम पहले से मौजूद हैं।
स्रोत: JLL रिपोर्ट (22 अक्टूबर 2026); Fortune India, BusinessFortnight।