बुधवार की रात राजस्थान की सियासत में बड़ा घटनाक्रम हुआ। रात करीब साढ़े नौ बजे से पहले ही सोशल मीडिया पर खबर फैलने लगी — भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ की नाराजगी की अंदरूनी बात पार्टी दफ्तर की चारदीवारी से बाहर आ गई है। खबर मिलते ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बिना तयशुदा सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरा इंतजार किए सीधे प्रदेश भाजपा मुख्यालय रवाना हो गए, जहां देर रात तक बंद कमरे में वरिष्ठ नेताओं का मंथन चला। राजेंद्र राठौड़ नाराजगी का ये घटनाक्रम पंचायत चुनाव के तीसरे चरण के टिकटों पर चल रही रायशुमारी से जुड़ा है।
राजेंद्र राठौड़ नाराजगी की रात — 9:30 बजे के बाद क्या हुआ
सूत्रों के अनुसार, बुधवार रात करीब साढ़े नौ बजे से पहले भाजपा मुख्यालय के भीतर चल रही टिकट रायशुमारी की अंदरूनी चर्चाएं सोशल मीडिया पर फ्लैश होने लगीं। राठौड़ की नाराजगी की बात जैसे ही सार्वजनिक हुई, सत्ता और संगठन के शीर्ष स्तर पर हलचल मच गई और डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू हो गई।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बिना औपचारिक तैयारी के सीधे भाजपा मुख्यालय पहुंचे, ताकि नाराज खेमे से संवाद कर मामले को तूल पकड़ने से रोका जा सके। देर रात तक वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच बंद कमरे में मंथन चलता रहा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव के बीच वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी का खुलकर सामने आना पार्टी अनुशासन के लिए असहज स्थिति है। संगठन के रणनीतिकार अब ये भी पता लगाने में जुटे हैं कि बंद कमरे की ये संवेदनशील सूचना लीक होकर सोशल मीडिया तक कैसे पहुंची।
बेटे का टिकट “होल्ड” — बैठक में असली विवाद
पूरे घटनाक्रम की जड़ बुधवार को भाजपा मुख्यालय में हुई वो बैठक है, जिसमें तीसरे चरण के टिकटों पर रायशुमारी चल रही थी। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ चूरू जिला परिषद के लिए बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ और बहू के टिकट की मांग कर रहे थे। संगठन ने प्रस्ताव रखा कि बहू का टिकट तय कर दिया जाए, लेकिन बेटे का टिकट फिलहाल “होल्ड” पर रखा जाए — इसी बात पर राठौड़ भड़क गए और बैठक छोड़कर जाने लगे।
बैठक में मौजूद मुख्यमंत्री ने स्थिति संभाली और राठौड़ से कहा कि वे वरिष्ठ नेता हैं और उनकी राय को महत्व दिया जाएगा। संगठन की राय थी कि शेखावाटी अंचल भाजपा के लिए आसान नहीं है और एक ही परिवार को टिकट देने से इलाके में नाराजगी हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, राठौड़ ने यहां तक कह दिया कि संगठन अपनी मर्जी से चुनाव लड़ा ले और जितवा ले।
“आरसीए में भी होल्ड किया था” — पुरानी टीस
बैठक में राठौड़ ने कहा कि बेटे का नाम राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) में भी होल्ड पर रख लिया गया था — आखिर कब तक होल्ड पर रखा जाएगा? उन्होंने ये भी कहा कि कई जगह एक ही परिवार को तीन-तीन टिकट दिए गए हैं, तो संगठन को उन्हीं से क्या समस्या है।
गौरतलब है कि पराक्रम सिंह राठौड़ ने सितंबर में RCA के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन किया था, लेकिन बाद में नाम वापस ले लिया था। राठौड़ खेमे की नजर में ये दोनों घटनाएं एक पैटर्न की तरह दिख रही हैं, जबकि संगठन इन्हें अलग-अलग फैसलों के तौर पर देखता है।
प्रोटोकॉल टूटने का मतलब — रूट-लाइनिंग से पहले रवाना काफिला
उस रात मुख्यमंत्री के मूवमेंट के दौरान सामान्य प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो सका। आमतौर पर मुख्यमंत्री के दौरे से पहले रूट पर भारी पुलिस जाब्ता और ट्रैफिक डायवर्जन की पुख्ता व्यवस्था होती है, लेकिन उस रात पूरा बंदोबस्त तैनात होने से पहले ही काफिला रवाना हो गया।
मुख्यमंत्री की सुरक्षा “जेड प्लस” श्रेणी की होती है, इसलिए प्रोटोकॉल में इस तरह की छूट अपने आप में बड़ी बात है — इससे अंदाजा लगता है कि नेतृत्व इस मामले को कितनी गंभीरता से ले रहा था।
बुधवार से गुरुवार: पूरी टाइमलाइन
| समय | घटनाक्रम |
|---|---|
| बुधवार दोपहर | भाजपा मुख्यालय में तीसरे चरण के टिकटों पर रायशुमारी बैठक |
| बुधवार दोपहर | पराक्रम का टिकट “होल्ड” रखने पर राठौड़ भड़के, बैठक छोड़ने लगे |
| बुधवार दोपहर | CM भजनलाल शर्मा ने बीच-बचाव कर राठौड़ को मनाया |
| बुधवार रात ~9:30 से पहले | नाराजगी की खबर सोशल मीडिया पर लीक, तेजी से वायरल |
| बुधवार रात | CM बिना पूरी रूट-लाइनिंग के सीधे भाजपा मुख्यालय पहुंचे |
| बुधवार देर रात | मुख्यालय में बंद कमरे में वरिष्ठ नेताओं का मंथन |
| गुरुवार सुबह | खबर मीडिया में प्रमुखता से, कोई आधिकारिक बयान नहीं |
राजेंद्र राठौड़ नाराजगी का सियासी मतलब
पंचायत चुनाव के बीच पार्टी के इतने वरिष्ठ नेता का खुलकर नाराज होना संगठन के लिए असहज है। राठौड़ विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं और शेखावाटी में उनकी पकड़ मानी जाती है। भाजपा ने 3 अक्टूबर को सात संभागों में जो चुनाव संचालन समितियां बनाई थीं, उनमें राठौड़ को उदयपुर संभाग की जिम्मेदारी मिली है।
वहीं संगठन का तर्क भी अपनी जगह है — एक ही परिवार को कई टिकट देने से स्थानीय स्तर पर असंतोष की आशंका रहती है। मुख्यमंत्री ने खुद मोर्चा संभाला है, जो इस विवाद को लंबा न खिंचने देने का संकेत है।
आगे क्या होगा
चूरू में पंचायत चुनाव का मतदान नवंबर में होना है, इसलिए टिकटों पर अंतिम फैसला जल्द आना तय है। अब तक भाजपा या राठौड़ की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
पंचायत चुनाव की प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार चल रही है — पहले चरण का मतदान 22 अक्टूबर को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो चुका है, और टिकटों पर मंथन के बाद अगले चरणों की तस्वीर साफ होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: राजेंद्र राठौड़ नाराजगी की वजह क्या है? उत्तर: तीसरे चरण के टिकटों की रायशुमारी में बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ का टिकट “होल्ड” पर रखे जाने से वे नाराज हैं। वे चूरू जिला परिषद के लिए बेटे और बहू, दोनों के टिकट की मांग कर रहे थे।
प्रश्न 2: RCA प्रकरण क्या था? उत्तर: पराक्रम सिंह राठौड़ ने सितंबर 2026 में राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन किया था, लेकिन बाद में नाम वापस ले लिया था।
प्रश्न 3: मुख्यमंत्री आधी रात को भाजपा दफ्तर क्यों गए? उत्तर: नाराजगी की खबर लीक होते ही डैमेज कंट्रोल के लिए CM भजनलाल शर्मा बिना पूरी सुरक्षा तैयारी के सीधे भाजपा मुख्यालय पहुंचे, जहां देर रात तक मंथन चला।
प्रश्न 4: क्या कोई आधिकारिक बयान आया है? उत्तर: नहीं। अब तक भाजपा संगठन या राजेंद्र राठौड़ की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
निष्कर्ष
राजेंद्र राठौड़ नाराजगी का ये घटनाक्रम बताता है कि पंचायत चुनाव में टिकट बंटवारा संगठन के भीतर संतुलन की परीक्षा है। मुख्यमंत्री का आधी रात को खुद मुख्यालय पहुंचना संकेत है कि नेतृत्व किसी असंतोष को चुनावी मौसम में बढ़ने नहीं देना चाहता। अब नजर इस बात पर है कि टिकट सूची में पराक्रम सिंह राठौड़ का नाम आता है या “होल्ड” बना रहता है।