खिमसर करंट हादसा: किसान दंपति की मौत, 14 मवेशी भी मरे — बिजली विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल

बिजली का टूटा तार एक दिन पहले ही जमीन पर गिर चुका था। ग्रामीणों ने फोन करके बिजली विभाग को इसकी खबर भी कर दी थी। लेकिन न लाइन की सप्लाई काटी गई, न खराब तार की मरम्मत हुई। और अगले दिन उसी टूटे तार ने नागौर के खिमसर इलाके की जंडू की ढाणी में दो इंसानी जानें ले लीं — किसान रावताराम कड़वासरा और उनकी पत्नी वीरो देवी की — साथ ही 13 से 14 भेड़-बकरियों की भी मौत हो गई। यही है खिमसर करंट हादसा, जिसने एक बार फिर बिजली व्यवस्था की लापरवाही को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

खिमसर करंट हादसा: एक दिन पहले ही दी गई थी टूटे तार की सूचना

इस घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू ये है कि ये हादसा शायद रोका जा सकता था। ग्रामीणों का आरोप है कि हाई-वोल्टेज बिजली लाइन घटना से एक दिन पहले ही टूट चुकी थी, और खतरे की जानकारी बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को फोन पर दे दी गई थी। लेकिन समय रहते न तो सप्लाई काटी गई, न ही खराब लाइन की मरम्मत की गई।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि खतरे की पूर्व सूचना मिलने के बावजूद विभाग ने कार्रवाई क्यों नहीं की — और इस लापरवाही की जवाबदेही आखिर किसकी होगी।

गुरुवार को जंडू की ढाणी में क्या हुआ

नागौर जिले के गिडा क्षेत्र के खिमसर इलाके में जंडू की ढाणी स्थित है। गुरुवार को ऊपर से गुजर रही थ्री-फेज बिजली लाइन का एक तार टूटकर खेत की लोहे की जालीदार बाड़ पर जा गिरा। बाड़ के पास ही पशुबाड़ा था, जिसमें करंट फैल गया।

बाड़े के अंदर मौजूद भेड़-बकरियों को जब झटके लगने लगे, तो हिम्मताराम के बेटे रावताराम कड़वासरा उन्हें बचाने के लिए अंदर दौड़ पड़े। अंदर जाते ही उन्हें जोरदार झटका लगा। पति को मुसीबत में देखकर पत्नी वीरो देवी आगे आईं — लेकिन जैसे ही उन्होंने बाड़े के लोहे के गेट को छुआ, उन्हें भी जानलेवा झटका लगा। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में 13 से 14 भेड़-बकरियों की भी जान चली गई; रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ एक बकरी बच पाई।

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही प्रतापगढ़ में भी ऐसा ही एक करंट हादसा हुआ था, जहां टेंट के हाईटेंशन लाइन से टकराने पर दो लोगों की मौत हो गई थी।

मवेशियों को बचाने की जिद ने ले ली दो जानें

रावताराम और वीरो देवी किसान परिवार से थे — उनके लिए पशु रोजी-रोटी का सहारा थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जब बाड़े में करंट फैला तो रावताराम बिना एक पल गंवाए अंदर कूद गए। उन्हें अंदाजा नहीं था कि लोहे की बाड़ और गेट पूरी तरह करंट से भरे हैं। पत्नी वीरो देवी ने पति को तड़पता देखा तो खुद को रोक नहीं पाईं, और गेट छूते ही वो भी चपेट में आ गईं।

खिमसर करंट हादसा के बाद गांव का आक्रोश, गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज करने की मांग

घटना के बाद जंडू की ढाणी और आसपास के गांवों में भारी आक्रोश है। पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनकी मांग है कि जांच के आधार पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाए, और ये जवाबदेही तय हो कि खतरे की सूचना मिलने के बावजूद लाइन क्यों नहीं सुधारी गई।

ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजे की प्रक्रिया भी तेज और पारदर्शी होनी चाहिए, क्योंकि परिवार ने न सिर्फ अपने दो सदस्य खोए हैं, बल्कि पशुधन के रूप में आजीविका का बड़ा हिस्सा भी गंवा दिया है। करौली में भी टूटी बिजली लाइन से ऐसी ही मौतें हो चुकी हैं, जहां ग्रामीणों ने बिजली निगम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था।

पुलिस और पशु चिकित्सा विभाग की कार्रवाई अब तक

घटना के बाद नागाणा पुलिस थाने की एक टीम और बटाडू पुलिस चौकी के प्रभारी मौके पर पहुंचे और बिजली की सप्लाई कटवाई। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बटाडू मोर्चरी भेज दिया।

पशु चिकित्सा विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची, जिसने मृत मवेशियों की जांच की और जरूरत के अनुसार पोस्टमार्टम किया।

टूटी बिजली लाइन दिखे तो कहां शिकायत करें

खिमसर करंट हादसा जैसी घटनाओं से बचने का सबसे असरदार तरीका है — खतरे की सूचना समय पर और सही जगह देना। अगर आपके इलाके में बिजली का तार टूटा हो या खंभा झुका हो, तो तुरंत ये कदम अपनाएं:

  • 1912 पर कॉल करें: बिजली शिकायतों का राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर।
  • स्थानीय बिजली निगम कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराएं और पावती जरूर लें।
  • राजस्थान ऊर्जा विभाग की वेबसाइट पर भी ऑनलाइन शिकायत का विकल्प उपलब्ध है।
  • टूटे तार से 8 से 10 मीटर की दूरी बनाए रखें और बच्चों व पशुओं को पास न जाने दें।

फोन पर दी गई सूचना का रिकॉर्ड जरूर रखें — शिकायत नंबर, तारीख और अधिकारी का नाम नोट कर लें, ताकि लापरवाही होने पर जवाबदेही तय की जा सके।

घटना के तथ्य — एक नजर में

बिंदु विवरण
हादसे की तारीख 22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार)
स्थान जंडू की ढाणी, खिमसर इलाका, गिडा क्षेत्र, जिला नागौर
मृतक रावताराम कड़वासरा और पत्नी वीरो देवी
पशु हानि 13-14 भेड़-बकरियां; सिर्फ एक बकरी बची
हादसे का कारण टूटी थ्री-फेज लाइन का तार लोहे की जालीदार बाड़ पर गिरा
ग्रामीणों का आरोप एक दिन पहले सूचना देने के बावजूद बिजली विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की
पुलिस कार्रवाई नागाणा थाना और बटाडू चौकी की टीम मौके पर; सप्लाई कटवाई; शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे
परिजनों की मांग गैर-इरादतन हत्या का केस, जिम्मेदारों पर कार्रवाई, उचित मुआवजा

खिमसर करंट हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि समय पर कार्रवाई न होने की कीमत का उदाहरण है। जब तक टूटी लाइनों की सूचना पर तुरंत एक्शन नहीं होगा, ऐसे हादसे दोहराते रहेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: खिमसर करंट हादसा कब और कहां हुआ?

उत्तर: 22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को नागौर के गिडा क्षेत्र के खिमसर इलाके की जंडू की ढाणी में।

प्रश्न 2: हादसे में कितने लोगों और पशुओं की मौत हुई?

उत्तर: किसान रावताराम कड़वासरा और उनकी पत्नी वीरो देवी की मौके पर ही मौत हो गई। साथ ही 13 से 14 भेड़-बकरियों की भी जान चली गई।

प्रश्न 3: बिजली विभाग पर क्या आरोप हैं?

उत्तर: ग्रामीणों का आरोप है कि टूटे तार की सूचना एक दिन पहले ही फोन पर दे दी गई थी, लेकिन न सप्लाई काटी गई, न मरम्मत हुई। इसी लापरवाही को हादसे की वजह बताया जा रहा है।

प्रश्न 4: टूटी बिजली लाइन की शिकायत कहां करें?

उत्तर: 1912 टोल-फ्री हेल्पलाइन पर, स्थानीय बिजली निगम कार्यालय में लिखित शिकायत देकर, या राजस्थान ऊर्जा विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन।

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