दुग्ध संघ चुनाव नियम: वोट का नया गणित — 180 दिन और 1800 लीटर
राजस्थान के लाखों दुग्ध उत्पादकों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है। नए दुग्ध संघ चुनाव नियम के तहत अब जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों के चुनाव में वोट देना या चुनाव लड़ना सिर्फ सदस्यता से नहीं होगा। वोट के अधिकार को सदस्य की असल सक्रियता से जोड़ दिया गया है — जिस सदस्य समिति ने पिछले वित्तीय वर्ष में जिला दुग्ध संघ को कम से कम 180 दिन दूध दिया हो और उसकी सालाना आपूर्ति 1800 लीटर तक पहुंची हो, वही चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेगी।
अब तक सामान्य सदस्य को एक वोट का अधिकार मिलता था — सदस्यता ही एकमात्र शर्त थी। लेकिन नए दुग्ध संघ चुनाव नियम में “सक्रिय सदस्यता” और दूध की वास्तविक आपूर्ति को अहमियत दी गई है। मतलब साफ है — कागज पर सदस्य बने रहना अब वोट की गारंटी नहीं देगा। दूध देना होगा, नियमित देना होगा, और तय मात्रा में देना होगा।
दुग्ध संघ चुनाव नियम: वोट का नया गणित — 180 दिन और 1800 लीटर
दुग्ध संघ चुनाव नियम की सबसे अहम शर्त दोहरी है। पहला, सदस्य समिति ने चुनाव से पहले वाले वित्तीय वर्ष में जिला दुग्ध संघ को कम से कम 180 दिन दूध दिया हो। दूसरा, उस वर्ष में कुल आपूर्ति न्यूनतम 1800 लीटर भी रही हो। दोनों शर्तें एक साथ पूरी करनी होंगी।
अगर कोई सदस्य निर्धारित सीमा के भीतर चुनाव से पहले वाले वित्तीय वर्ष में दूध नहीं देता है, तो उसे संचालक मंडल के चुनाव की आमसभा में मतदान का अधिकार नहीं मिलेगा। यही कसौटी चुनाव लड़ने पर भी लागू होगी। विभाग का तर्क है कि जो समितियां वाकई दूध दे रही हैं, उन्हीं के हाथ में संघ का नेतृत्व होना चाहिए।
दुग्ध संघ चुनाव नियम: छोटे पशुपालकों पर असर और आपदा में छूट
नए दुग्ध संघ चुनाव नियम का सबसे संवेदनशील पहलू छोटे पशुपालकों से जुड़ा है। एक-दो पशु रखने वाले किसानों के लिए 1800 लीटर की सीमा — रोजाना औसतन करीब 5 लीटर दूध, लगातार 180 दिन तक — चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
हालांकि आदेश में राहत का प्रावधान भी है। प्राकृतिक आपदा या ऐसे दूसरे कारणों से दूध की आपूर्ति बाधित होने पर — जिनमें समिति की कोई गलती नहीं है — रजिस्ट्रार छूट दे सकेगा।
गौरतलब है कि सहकारी डेयरी व्यवस्था में सक्रियता पर जोर पहले से बढ़ रहा है। गांव की डेयरी समितियों की नई आदर्श उपविधियों पर हमारी खबर डेयरी समिति उपविधियां 2026 में विस्तार से पढ़ें।
दुग्ध संघ चुनाव नियम में ऑडिट की कड़ी शर्त
अब जिन प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों का पिछले वित्तीय वर्ष का ऑडिट पूरा हो चुका है, वे ही जिला संघ के चुनाव में भाग ले सकेंगी। ऑडिट अधूरी रहने पर समिति चुनावी प्रक्रिया से बाहर रहेगी।
यह प्रावधान सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है। ऑडिट को चुनावी पात्रता से जोड़कर विभाग ने समितियों पर वित्तीय अनुशासन का दबाव बनाया है। किसी समिति का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति की पात्रता भी दूध की आपूर्ति से जोड़ी गई है।
दुग्ध संघ चुनाव नियम: संचालक मंडल में नया उपाध्यक्ष पद
मतदाता सूची के साथ संचालक मंडल के ढांचे में भी संशोधन हुआ है — अब अध्यक्ष के साथ उपाध्यक्ष का चुनाव भी होगा। पहले यह पद निर्धारित नहीं था।
नए प्रावधान के अनुसार अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेगा। अगर दोनों मौजूद न हों, तो उपस्थित संचालक अपने में से किसी एक को अध्यक्षता के लिए चुन सकेंगे। इससे बैठकों में निरंतरता बनी रहेगी।
रजिस्ट्रार का आदेश और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
यह बदलाव रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां) डॉ. समित शर्मा के आदेश से हो रहा है। आदेश में जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों के उपनियमों में संशोधन के निर्देश हैं। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि समाज, उसके सदस्यों और लोकहित में सात उपनियमों में बदलाव आवश्यक है।
राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001 की धारा 11 के तहत संबंधित संघों को अपने उपनियम संशोधित करके इसकी जानकारी रजिस्ट्रार को देनी होगी। सहकारिता विभाग की आधिकारिक जानकारी राजसहकार पोर्टल पर देखी जा सकती है।
पुराना नियम बनाम नया नियम: एक नजर में
| बिंदु | पहले का नियम | नया नियम |
|---|---|---|
| वोट का अधिकार | सामान्य सदस्यता पर एक वोट | 180 दिन दूध + 1800 लीटर पर ही वोट |
| चुनाव लड़ने की पात्रता | सदस्यता पर्याप्त थी | सक्रियता की शर्त + ऑडिट अनिवार्य |
| ऑडिट | चुनाव से सीधे नहीं जुड़ा था | पिछले वर्ष का ऑडिट पूरा होना जरूरी |
| उपाध्यक्ष का पद | निर्धारित नहीं था | अध्यक्ष के साथ उपाध्यक्ष का चुनाव |
| आपदा में छूट | स्पष्ट प्रावधान नहीं | वाजिब कारण पर रजिस्ट्रार छूट दे सकेगा |
दूध उत्पादकों के लिए आगे की राह
अगर आप समिति के सदस्य हैं, तो सबसे पहले पिछले वित्तीय वर्ष के आंकड़े लें — कितने दिन दूध दिया, कुल आपूर्ति कितनी रही। दूसरा, समिति का ऑडिट पूरा हुआ है या नहीं, यह सुनिश्चित करें। तीसरा, आमसभा और चुनाव की तारीखों पर नजर रखें, क्योंकि मतदाता सूची नए दुग्ध संघ चुनाव नियम के तहत ही बनेगी।
उपभोक्ताओं के लिए भी यह खबर अहम है — डेयरी व्यवस्था में अनुशासन से दूध की गुणवत्ता और आपूर्ति शृंखला पर सकारात्मक असर की उम्मीद है। दूध के दाम से जुड़ी खबर सीकर में दूध की थैली पर ₹1 ज्यादा वसूलने पर ₹5000 का जुर्माना और सहकारी डेयरी की भूमिका पर सरस मिठाई दीपावली 2026 भी पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: दुग्ध संघ चुनाव में वोट के लिए अब क्या शर्त है?
उत्तर: सदस्य समिति ने पिछले वित्तीय वर्ष में जिला दुग्ध संघ को कम से कम 180 दिन दूध दिया हो और कुल आपूर्ति 1800 लीटर या अधिक रही हो — तभी वोट का अधिकार मिलेगा।
प्रश्न 2: क्या चुनाव लड़ने पर भी यही नियम लागू होगा?
उत्तर: हां। मतदान और उम्मीदवारी, दोनों के लिए सक्रिय सदस्यता की यही शर्त है। साथ ही समिति का पिछले वित्तीय वर्ष का ऑडिट पूरा होना भी जरूरी है।
प्रश्न 3: छोटे पशुपालक 1800 लीटर नहीं दे पाते तो क्या होगा?
उत्तर: उनके लिए चुनौती जरूर बढ़ी है। लेकिन प्राकृतिक आपदा या समिति की गलती न होने वाले कारणों से आपूर्ति बाधित होने पर रजिस्ट्रार छूट दे सकेगा।
प्रश्न 4: यह बदलाव किसके आदेश से हो रहा है?
उत्तर: रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, राजस्थान डॉ. समित शर्मा के आदेश से। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए सात उपनियमों में संशोधन के निर्देश दिए गए हैं, जो राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001 की धारा 11 के तहत लागू होंगे।