बांसवाड़ा से भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आया है, जहां आम आदमी की फाइल सरकारी दफ्तर में तभी आगे बढ़ती है जब जेब ढीली की जाए। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बृहस्पतिवार को कार्रवाई करते हुए वन विभाग के एक वनरक्षक को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी वन पट्टा की पत्रावली आगे बढ़ाने और फाइल उपलब्ध कराने के बदले परिवादी से रिश्वत मांग रहा था। शिकायत के सत्यापन के बाद ACB ने जाल बिछाया और आरोपी को रिश्वत की रकम लेते हुए दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी गई है और उसके आवास की तलाशी भी जारी है।
क्या है पूरा मामला — खेत की फाइल पर अटकी थी रिश्वत की मांग
ACB अधिकारियों के मुताबिक आरोपी की पहचान वन रेंज गढ़ी के वनरक्षक भूपेश पाटीदार के रूप में हुई है। मामले की शुरुआत एक ऐसे परिवादी से हुई, जो वन विभाग के क्षेत्र के बाहरी हिस्से में स्थित वन भूमि पर काफी समय से कब्जा कर कृषि कार्य कर रहा था। इस भूमि के संबंध में वन विभाग की ओर से पट्टा जारी करने के लिए सत्यापन कर पत्रावली आगे भेजी जा रही थी। यानी परिवादी की फाइल विभागीय प्रक्रिया से गुजर रही थी और उसे अपने पट्टे की उम्मीद थी।
आरोप है कि इसी प्रक्रिया का फायदा उठाकर वनरक्षक भूपेश पाटीदार ने परिवादी से रिश्वत मांगनी शुरू कर दी। वन पट्टा पत्रावली को आगे बढ़ाने और फाइल उपलब्ध कराने के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही थी। सरकारी काम के लिए सरकारी कर्मचारी का पैसा मांगना परिवादी को नागवार गुजरा और उसने हिम्मत जुटाकर ACB की बांसवाड़ा इकाई में शिकायत दर्ज करा दी। यही शिकायत इस पूरे ट्रैप की नींव बनी।
छह हजार की मांग, पांच हजार पर तय हुआ ‘सौदा’
शिकायत मिलते ही ACB ने अपने तौर पर मामले की जांच शुरू की। ACB ने शिकायत का सत्यापन कराया, जिसमें सामने आया कि आरोपी वनरक्षक परिवादी से छह हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था। परिवादी के आग्रह पर आरोपी पांच हजार रुपये लेने पर सहमत हो गया। सत्यापन में रिश्वत की मांग की पुष्टि हो जाने के बाद ACB के लिए आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया और ट्रैप की तैयारी शुरू हुई।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| आरोपी | भूपेश पाटीदार, वनरक्षक |
| तैनाती | वन रेंज गढ़ी, वन विभाग, बांसवाड़ा |
| रिश्वत की मांग | 6,000 रुपये |
| ट्रैप में पकड़ी गई रकम | 5,000 रुपये |
| काम जिसके लिए रिश्वत मांगी गई | वन पट्टा पत्रावली आगे बढ़ाना और फाइल उपलब्ध कराना |
| कार्रवाई करने वाली इकाई | ACB बांसवाड़ा इकाई |
| निगरानी | रामेश्वर सिंह, उप महानिरीक्षक (DIG), ACB |
| ट्रैप टीम का नेतृत्व | रतन सिंह राजपुरोहित, पुलिस उपाधीक्षक (DSP), ACB बांसवाड़ा |
यह पहला मौका नहीं है जब प्रदेश में छोटी रकम की रिश्वत में सरकारी कर्मचारी रंगे हाथ पकड़े गए हों। पांच-छह हजार रुपये देखने में छोटे लग सकते हैं, लेकिन जिस ग्रामीण के लिए पट्टे की फाइल ही उसकी रोजी-रोटी से जुड़ी हो, उसके लिए यह रकम और यह दबाव दोनों बड़े होते हैं।
DIG की निगरानी में बिछा जाल, ऐसे धरा गया वनरक्षक
सत्यापन के बाद ACB ने पूरी योजना के साथ ट्रैप की कार्रवाई की। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के उप महानिरीक्षक रामेश्वर सिंह की निगरानी में बांसवाड़ा इकाई के पुलिस उपाधीक्षक रतन सिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में टीम गठित की गई। बृहस्पतिवार को टीम ने जाल बिछाया और जैसे ही आरोपी वनरक्षक ने परिवादी से पांच हजार रुपये की रिश्वत की रकम ली, टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद ACB की कार्रवाई अभी जारी है। अधिकारियों के अनुसार आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उसके आवास की तलाशी भी ली जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि कहीं इस तरह की वसूली का कोई और सिलसिला तो नहीं चल रहा था। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच की जाएगी। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
वन पट्टा क्यों है ग्रामीणों के लिए इतना अहम?
आदिवासी बहुल बांसवाड़ा जैसे जिलों में कई परिवार पीढ़ियों से वन क्षेत्र से सटी भूमि पर कृषि कार्य करते आ रहे हैं। ऐसी भूमि पर पट्टा मिलना इन परिवारों के लिए सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं होता — पट्टा होने से जमीन पर उनका अधिकार सुरक्षित होता है, वे सरकारी योजनाओं का लाभ ले पाते हैं और बेदखली का डर खत्म होता है।
यही वजह है कि पट्टे की फाइल जहां अटकती है, वहां मनमानी शुरू हो जाती है। सत्यापन रिपोर्ट, पत्रावली आगे भेजना और फाइल उपलब्ध कराना — ये छोटे-छोटे कदम ही आवेदक के लिए सबसे बड़े पड़ाव बन जाते हैं। इस मामले में भी आरोप यही है कि इन्हीं कदमों को पैसों से जोड़ दिया गया था। ACB की इस कार्रवाई से संदेश साफ है कि छोटी रकम की रिश्वत भी अब बचने का रास्ता नहीं है।
कोई रिश्वत मांगे तो चुप न रहें — ऐसे करें ACB में शिकायत
यह मामला हर उस व्यक्ति के लिए सबक है, जिससे सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगी जाती है। ACB की कार्रवाई का आधार हमेशा पीड़ित की शिकायत होती है — जैसे इस मामले में परिवादी ने शिकायत की, उसका सत्यापन हुआ और फिर ट्रैप सफल हुआ।
- ACB की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1064 पर कॉल करें: राज्य के किसी भी हिस्से से 1064 या WhatsApp हेल्पलाइन 94135-02834 पर 24×7 शिकायत की जा सकती है।
- शिकायत के बाद ACB पहले गोपनीय तरीके से सत्यापन करती है — रिश्वत की मांग सही पाई जाने पर ही ट्रैप की योजना बनती है।
- शिकायकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है और ट्रैप के दौरान दी जाने वाली रकम भी प्रक्रिया के तहत सबूत के रूप में सुरक्षित रखी जाती है।
- रिश्वत देना भी अपराध है, इसलिए मांग होने पर रकम देने के बजाय तुरंत ACB से संपर्क करना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: बांसवाड़ा ACB ट्रैप में कौन गिरफ्तार हुआ है?
उत्तर: वन रेंज गढ़ी में तैनात वनरक्षक भूपेश पाटीदार को ACB ने पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
प्रश्न 2: वनरक्षक किस काम के लिए रिश्वत मांग रहा था?
उत्तर: आरोप है कि वह वन पट्टा की पत्रावली आगे बढ़ाने और फाइल उपलब्ध कराने के एवज में रिश्वत मांग रहा था। पहले छह हजार रुपये मांगे गए थे, बाद में पांच हजार पर सहमति बनी।
प्रश्न 3: ACB ने ट्रैप की कार्रवाई कैसे की?
उत्तर: परिवादी की शिकायत का सत्यापन कराने पर रिश्वत की मांग की पुष्टि हुई। इसके बाद DIG रामेश्वर सिंह की निगरानी में DSP रतन सिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में टीम ने जाल बिछाकर आरोपी को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।
प्रश्न 4: अब आगे क्या कार्रवाई होगी?
उत्तर: आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उसके आवास की तलाशी जारी है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच की जाएगी।