‘सदी के महानायक’ केसी मालू को भावांजलि: 200 पन्नों के स्मृति विशेषांक का जयपुर में लोकार्पण, 6 हजार संदेशों से चुने गए संस्मरण

जयपुर। राजस्थान की मिट्टी की आवाज को कैसेट के दौर से डिजिटल जमाने तक देश-दुनिया के घर-घर पहुंचाने वाले राजस्थान रत्न केसी मालू अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके सुर गुरुवार को जयपुर में फिर जीवंत हो उठे। उनकी स्मृति को समर्पित करीब 200 पृष्ठों के ‘स्वर सरिता भावांजलि विशेषांक’ का लोकार्पण राजधानी में गरिमामय समारोह में हुआ, जहां विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने उन्हें राजस्थानी कला-संस्कृति का ‘सदी का महानायक’ बताते हुए भावुक श्रद्धांजलि दी। यह विशेषांक सिर्फ एक किताब नहीं है — यह उस शख्सियत का दस्तावेज है, जिसने बिना किसी सरकारी सहायता के पांच हजार से ज्यादा लोकगीतों को सहेजकर राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को अमर कर दिया।

लोकार्पण समारोह में कौन-कौन रहा मौजूद?

समारोह में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के साथ राजस्थान धरोहर प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत, सिविल लाइन्स विधायक गोपाल शर्मा, संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष रमेश बोराणा और वरिष्ठ कला-संस्कृति व्यक्तित्व अशोक पंड्या समेत कई गणमान्य अतिथियों ने विशेषांक का विधिवत लोकार्पण किया। इस मौके पर केसी मालू की धर्मपत्नी फूल देवी मालू और परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे। राजनीति, प्रशासन, कला, संस्कृति, संगीत, साहित्य और उद्योग जगत से जुड़ी अनेक प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी ने बता दिया कि मालू का परिवार सिर्फ उनका अपना परिवार नहीं था — पूरा सांस्कृतिक राजस्थान उनका परिवार था।

देवनानी ने अपने संबोधन में कहा कि केसी मालू ने अपना पूरा जीवन कला, संस्कृति और लोकसंगीत को समर्पित कर दिया। उन्होंने अनेक कलाकारों को मंच, अवसर और पहचान दिलाई। देवनानी के शब्द थे कि मालू भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जिन कलाकारों को उन्होंने तैयार किया और राजस्थानी कला-संस्कृति के लिए जो कार्य किया, उसके माध्यम से उनका व्यक्तित्व और योगदान सदैव जीवित रहेगा।

6 हजार संदेश, 200 पन्ने और दो महीने की मेहनत

इस विशेषांक की सबसे खास बात इसकी तैयारी की कहानी है। करीब 200 पृष्ठों के इस भावांजलि विशेषांक में देश-विदेश से ई-मेल और डाक के माध्यम से प्राप्त 6 हजार से अधिक स्मृति संदेशों में से चयनित करीब 400 से 500 श्रद्धांजलि एवं संस्मरण संदेशों को शामिल किया गया है। विशेषांक को तैयार करने में लगभग दो माह का समय लगा। इसमें केसी मालू के व्यक्तित्व, उनके कृतित्व, उनकी संगीत-साधना और राजस्थान की कला, संस्कृति तथा लोकसंगीत के लिए उनके योगदान को संस्मरणों और श्रद्धांजलि संदेशों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यानी यह अंक पढ़ने वालों को मालू सिर्फ एक नाम के रूप में नहीं, सैकड़ों लोगों की यादों में बसे एक जीवंत व्यक्तित्व के रूप में मिलेंगे।

विशेषांक की खास बातें विवरण
विशेषांक का नाम स्वर सरिता भावांजलि विशेषांक
कुल पृष्ठ करीब 200
प्राप्त स्मृति संदेश 6,000 से अधिक (ई-मेल व डाक से)
शामिल चयनित संदेश करीब 400–500
तैयारी में लगा समय लगभग 2 माह
लोकार्पण स्थल जयपुर
लोकार्पणकर्ता विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी व अतिथिगण

सम्मान अपने लिए नहीं, कलाकारों के लिए चाहते थे मालू

विधायक गोपाल शर्मा ने मालू से जुड़े अपने संस्मरण साझा करते हुए एक ऐसी बात बताई, जो उनके व्यक्तित्व को सबसे अच्छी तरह समझाती है। शर्मा ने कहा कि पद्मश्री दिए जाने की चर्चा के दौरान भी केसी मालू का विचार था कि सम्मान उन्हें नहीं, बल्कि उन कलाकारों को मिलना चाहिए, जिन्हें उन्होंने तैयार किया है। उन्होंने बताया कि मालू द्वारा तैयार किए गए कई कलाकारों को बाद में पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। शर्मा के अनुसार मालू ने राजस्थान के पारंपरिक लोकगीतों को सहेजने, संग्रहित करने और उन्हें संगीत के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया और उनकी संगीत साधना ने राजस्थान की लोक परंपराओं तथा सांस्कृतिक मूल्यों को व्यापक पहचान दिलाई।

चूरू के सुजानगढ़ से शुरू हुआ सफर, 5 हजार गीतों का खजाना

केशरी चंद मालू का जन्म वर्ष 1946 में चूरू जिले के सुजानगढ़ में हुआ था। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में एमए किया, साथ ही साहित्य रत्न और जैन सिद्धांत रत्न का अध्ययन भी किया। साहित्य की यह पृष्ठभूमि ही शायद वह नींव थी, जिस पर उन्होंने लोकगीतों को सिर्फ मनोरंजन नहीं, साहित्य और धरोहर मानकर सहेजने का अभियान खड़ा किया। उन्होंने बिना किसी सरकारी सहायता के पांच हजार से अधिक लोकगीतों की पांडुलिपि और ध्वनिलिपि तैयार कर उनकी ऑडियो रिकॉर्डिंग करवाई — लोकगीतों के संरक्षण के क्षेत्र में यह योगदान ऐतिहासिक माना जाता है।

वीणा म्यूजिक समूह और स्वदेशी संगीत को समर्पित संस्था सुर-संगम की स्थापना का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। ‘घूमर’, ‘चीरमी’ और ‘कांगसियो’ जैसे लोकप्रिय राजस्थानी गीतों के एलबम उन्होंने प्रोड्यूस किए, जो आज भी हर राजस्थानी घर और हर त्योहार की पहचान हैं। वर्ष 1987 में अकाल पीड़ितों की सहायता के लिए उन्होंने जयपुर में लता मंगेशकर नाइट का आयोजन करवाया था, जिसके माध्यम से करीब एक करोड़ रुपये की राशि एकत्र की गई थी — यह दिखाता है कि उनके लिए संगीत सिर्फ कला नहीं, समाज सेवा का माध्यम भी था। उनके इन्हीं योगदानों के लिए उन्हें प्रदेश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘राजस्थान रत्न’ से सम्मानित किया गया, साथ ही राजस्थान संगीत नाटक अकादमी का ‘समग्र कला साधना अवॉर्ड’ और महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन का ‘डागर घराना अवॉर्ड’ भी उन्हें मिला।

परिवार का संकल्प: अधूरे सपनों को पूरा करना ही लक्ष्य

लोकार्पण के मौके पर वीणा ग्रुप के प्रबंध निदेशक और केसी मालू के पुत्र हेमजीत मालू भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि पिता के अधूरे सपनों को पूरा करना ही उनका लक्ष्य है। हेमजीत के अनुसार केसी मालू दूरदृष्टि रखने वाले व्यक्तित्व थे और हमेशा ‘काम की साधना’ पर जोर देते थे। परिवार उनके विचारों और कार्यशैली के अनुरूप विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। मालू के छोटे भाई वरिष्ठ अधिवक्ता निर्मल कुमार मालू और पुत्र प्रसेनजित मालू ने भी कहा कि परिवार उनके मूल्यों और विरासत को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा। ऐसे समय में जब क्षेत्रीय भाषाओं का संगीत बड़े प्लेटफॉर्म की चकाचौंध में पीछे छूटने का खतरा झेल रहा है, यह विशेषांक नई पीढ़ी को याद दिलाता है कि धरोहरें अपने आप नहीं बचतीं — उन्हें सहेजने वाले चाहिए होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल: ‘स्वर सरिता भावांजलि विशेषांक’ क्या है? जवाब: यह राजस्थान रत्न स्वर्गीय केसी मालू की स्मृति को समर्पित करीब 200 पृष्ठों का विशेषांक है, जिसका लोकार्पण 1 अक्टूबर 2026 को जयपुर में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और अन्य गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी में हुआ। इसमें उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और संगीत-साधना पर आधारित संस्मरण व श्रद्धांजलि संदेश शामिल हैं।

सवाल: विशेषांक में कितने संदेश शामिल किए गए हैं? जवाब: विशेषांक के लिए देश-विदेश से ई-मेल और डाक के जरिए 6 हजार से अधिक स्मृति संदेश प्राप्त हुए थे, जिनमें से चयनित करीब 400 से 500 संदेशों को इसमें शामिल किया गया है। इसे तैयार करने में लगभग दो माह का समय लगा।

सवाल: केसी मालू कौन थे और उनका सबसे बड़ा योगदान क्या माना जाता है? जवाब: केशरी चंद मालू (जन्म 1946, सुजानगढ़, चूरू) वीणा म्यूजिक समूह के संस्थापक और राजस्थान रत्न से सम्मानित लोकसंगीत साधक थे। उनका सबसे बड़ा योगदान बिना सरकारी सहायता के पांच हजार से अधिक राजस्थानी लोकगीतों की रिकॉर्डिंग कर उन्हें सहेजना और लोक कलाकारों को मंच व पहचान दिलाना माना जाता है।

सवाल: केसी मालू को कौन-कौन से बड़े सम्मान मिले थे? जवाब: उन्हें ‘राजस्थान रत्न’ के अलावा राजस्थान संगीत नाटक अकादमी का ‘समग्र कला साधना अवॉर्ड’ और महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन का ‘डागर घराना अवॉर्ड’ प्राप्त हुआ था। ‘घूमर’, ‘चीरमी’ और ‘कांगसियो’ जैसे प्रसिद्ध गीतों के एलबम भी उन्हीं के द्वारा प्रोड्यूस किए गए थे।

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