पाली शहर के उन मोहल्लों के लिए बड़ी राहत की खबर है, जहां पानी की किल्लत रोजमर्रा की परेशानी है। करीब 17 साल बाद हेमावास बांध का पानी एक बार फिर शहर के भीतरी इलाकों तक पहुंचेगा। जलदाय विभाग ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। पाली हेमावास बांध पानी की यह व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन इससे करीब 20 से 25 दिन की राहत मिलने की उम्मीद है।
पाली लंबे समय से जवाई पर निर्भर रहा है, जहां पानी की कमी की खबरें पहले भी आती रही हैं। पंप-पाइपलाइन व्यवस्था पूरी होते ही भैरूघाट सिटी हेडवर्क्स के क्षेत्रों में आपूर्ति शुरू हो जाएगी।
पाली हेमावास बांध पानी — किसे मिलेगी राहत, और कितने दिन चलेगी
इस आपूर्ति का सीधा फायदा पाली शहर के भीतरी इलाकों को मिलेगा, यानी सिटी हेडवर्क्स से जुड़े क्षेत्रों को। पानी भैरूघाट स्थित सिटी हेडवर्क्स तक पहुंचेगा और वहां से भीतरी मोहल्लों में बांटा जाएगा।
हेमावास बांध में इस समय 101 एमसीएफटी से अधिक पानी मौजूद है। इसी स्टॉक से शहरवासियों को करीब 20 से 25 दिन तक राहत मिलने का अनुमान है — यह अवधि रोजाना उठाए जाने वाले पानी और वितरण की गति पर निर्भर करेगी।
यह राहत अस्थायी है — पूरे साल की समस्या का स्थायी हल नहीं। स्थायी समाधान के लिए जवाई को भरने की बड़ी योजना पर काम चल रहा है।
पानी शहर तक कैसे पहुंचेगा — पंप, दीवार और पाइपलाइन का पूरा रास्ता
हेमावास का पानी नहर के रास्ते शहर तक नहीं लाया जाएगा। बांध के पास ही पंप लगाकर पानी को सीधे जवाई पाइपलाइन में डाला जाएगा, और वहां से वह भैरूघाट स्थित सिटी हेडवर्क्स तक पहुंचेगा।
इसके लिए सांचौर से मंगवाया गया 80 हॉर्स पावर का पंप लगाया जा रहा है, जिसकी क्षमता एक घंटे में 10 लाख लीटर पानी उठाने की है। विभाग का कहना है कि पंप को पूरी क्षमता पर चलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी — पानी नियंत्रित गति से उठाया जाएगा, ताकि स्टॉक 20 से 25 दिन तक चल सके।
पानी को सही रास्ते पर भेजने के लिए बांध के आगे नहर में एक दीवार भी बनवाई जा रही है, ताकि चामुंडा माता मंदिर क्षेत्र में स्थित बांध की मोरी से छोड़ा गया पानी आगे नहर में बहकर बेकार न चला जाए। दीवार के पास लगे पंप से ही पानी सीधे जवाई पाइपलाइन में डाला जाएगा।
पाली के अधिशाषी अभियंता कान सिंह राणावत के मुताबिक, सिटी हेडवर्क्स के क्षेत्रों में आपूर्ति जल्द शुरू होगी।
17 साल का इंतजार क्यों — पहले कहां जाता था हेमावास का पानी
अगर हेमावास में पानी था, तो शहर के भीतरी इलाकों को वह 17 साल तक क्यों नहीं मिला? जवाब वितरण की पुरानी व्यवस्था में है। हेमावास के पानी का पहले भी उपयोग होता रहा है, लेकिन वह मुख्य रूप से मंडली हेडवर्क्स से जुड़े क्षेत्रों — टैगोर नगर, गांधीनगर और सोजत आदि — की आपूर्ति के लिए होता था। यानी पानी का रुख पहले मंडली की तरफ था, शहर के भीतरी हिस्सों की तरफ नहीं।
इस बार व्यवस्था बदली है — पानी को सिटी हेडवर्क्स की तरफ मोड़ा जा रहा है। पानी नया नहीं है, लेकिन शहर के भीतरी हिस्सों तक पहुंचने का रास्ता नया है।
सिर्फ हेमावास नहीं — जवाई के लिए 1200 करोड़ की बड़ी योजना भी तैयार
हेमावास की व्यवस्था अस्थायी है, तो लंबे समय के लिए पाली और आसपास की प्यास कैसे बुझेगी? जवाब जवाई बांध को भरने की करीब 1200 करोड़ रुपए की प्रस्तावित योजना में है। इसके तहत दो जलाशय बनेंगे — सेई नदी पर सेई जलाशय और साबरमती नदी क्षेत्र में प्रस्तावित जलाशय (बुझा व चकसांडमारिया क्षेत्र)। दोनों से पानी टनल, पाइपलाइन और पंपिंग के जरिए जवाई बांध तक पहुंचाया जाएगा।
इस योजना से पाली और सिरोही जिलों, शिवगंज तथा ब्यावर जिले के जैतारण क्षेत्र सहित करीब 900 गांवों की पेयजल समस्या के समाधान की उम्मीद है। तकनीकी तौर पर यह बड़ा नेटवर्क होगा — तीन टनल प्रस्तावित हैं (टनल-ए 5.82 किलोमीटर, टनल-बी 7.4 किलोमीटर, टनल-सी 7.8 किलोमीटर), साथ ही करीब 15.12 किलोमीटर प्रेशराइज्ड पाइपलाइन और 5.67 व 28.6 किलोमीटर की ग्रेविटी पाइपलाइनें। जहां ढलान से पानी नहीं पहुंचेगा, वहां पंपिंग की व्यवस्था होगी।
अधिशाषी अभियंता धर्मेश सिंघवी के मुताबिक, जवाई तक पानी लाने के प्रयास तेज हैं। लेकिन यह योजना अभी प्रस्तावित चरण में है — इन जलाशयों का पानी कल से ही जवाई में नहीं आने लगेगा। निर्माण में समय लगेगा, और तब तक हेमावास जैसी अस्थायी व्यवस्थाएं ही शहर को राहत देंगी।
पाली हेमावास बांध पानी — एक नजर में सारे अहम आंकड़े
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| बांध | हेमावास बांध, पाली |
| मौजूदा स्टॉक | 101 एमसीएफटी से अधिक |
| राहत की अवधि | करीब 20 से 25 दिन |
| पंप की क्षमता | 80 हॉर्स पावर, एक घंटे में 10 लाख लीटर तक |
| पानी का रास्ता | हेमावास बांध — जवाई पाइपलाइन — भैरूघाट सिटी हेडवर्क्स |
| फायदा किसे | पाली शहर के भीतरी इलाके (सिटी हेडवर्क्स से जुड़े क्षेत्र) |
| लंबे समय की योजना | करीब 1200 करोड़ रुपए, दो जलाशय, करीब 900 गांवों को लाभ |
पाली के लोगों के लिए इसका मतलब यह है कि आने वाले दिनों में भीतरी इलाकों में आपूर्ति कुछ बेहतर हो सकती है, लेकिन राहत सीमित दिनों की है, इसलिए पानी का किफायती उपयोग अब भी जरूरी रहेगा। आपूर्ति की सटीक तारीख अभी घोषित नहीं हुई है — विभाग ने सिर्फ इतना कहा है कि तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
पाली की पेयजल समस्या नई नहीं है। इससे पहले भी जवाई बांध में पानी की कमी और पाली के जल संकट की खबरें आती रही हैं, और पुनर्भरण योजना को लेकर किसान मुख्यमंत्री से भी मिल चुके हैं। हेमावास की यह व्यवस्था उसी लंबी कहानी की नई कड़ी है — एक अस्थायी राहत, जिसके पीछे स्थायी समाधान की बड़ी योजना खड़ी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पाली में हेमावास बांध से पानी की आपूर्ति कब शुरू होगी?
तैयारियां अंतिम चरण में हैं और आपूर्ति जल्द शुरू की जाएगी। सटीक तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।
इस पानी से कितने दिन की राहत मिलेगी?
करीब 20 से 25 दिन तक। यह अवधि रोजाना उठाए जाने वाले पानी और वितरण की गति पर निर्भर करेगी।
किन इलाकों को इसका फायदा मिलेगा?
मुख्य रूप से पाली शहर के भीतरी इलाकों को, जो भैरूघाट स्थित सिटी हेडवर्क्स से जुड़े हैं। पहले यह पानी मंडली हेडवर्क्स के क्षेत्रों को जाता था।
क्या यह पाली की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान है?
नहीं, यह अस्थायी राहत है। स्थायी समाधान के लिए सेई और साबरमती जलाशयों से जवाई तक पानी लाने की करीब 1200 करोड़ रुपए की योजना प्रस्तावित है।