राजस्थान में पंचायत चुनावों की सरगर्मी के बीच बीकानेर जिले से एक ऐसी खबर आई है जो चुनावी शोर-शराबे से बिल्कुल अलग है। यहां पूगल पंचायत समिति की पार्वती तलाई ग्राम पंचायत में किसी को वोट डालने की जरूरत ही नहीं पड़ी — गांव की 36 कौमों ने आपसी सहमति से सरपंच से लेकर सभी सात वार्ड पंचों तक, पूरी पंचायत निर्विरोध चुन ली। बीकानेर निर्विरोध सरपंच के रूप में महेंद्र सिंह भाटी के नाम पर सबकी रजामंदी बनी, और इस तरह बिना किसी चुनावी टक्कर के गांव की सरकार का गठन हो गया।
यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब प्रदेश के 16 जिलों की 3,314 ग्राम पंचायतों में सरपंची की कुर्सी के लिए हजारों उम्मीदवार मैदान में हैं। ऐसे में एक गांव का बिना मतदान के, बिना मनमुटाव के, एक राय होकर अपने प्रतिनिधि चुन लेना अपने आप में बड़ी बात है।
बीकानेर निर्विरोध सरपंच: सहमति कैसे बनी
पार्वती तलाई में यह सहमति अचानक नहीं बनी। गांव के लोगों ने आपस में बैठकर चर्चा की और फिर सरपंच पद के लिए महेंद्र सिंह भाटी के नाम पर सबकी सहमति जताई। पूर्व जिला महामंत्री सवाई सिंह तंवर सहित गांव के प्रमुख लोगों ने भाटी के पक्ष में समर्थन दिया, जिसके बाद सरपंच पद पर किसी मुकाबले की नौबत ही नहीं आई।
खास बात यह है कि सिर्फ सरपंच ही नहीं, ग्राम पंचायत के सभी सात वार्डों के वार्ड पंच भी निर्विरोध चुने गए हैं। यानी पूरी पंचायत का गठन बिना चुनावी मुकाबले के हुआ। ग्रामीण इसे सामाजिक एकता, आपसी विश्वास और भाईचारे की मिसाल बता रहे हैं, और उनका मानना है कि आपसी सहमति से चुनी गई पंचायत विकास कार्यों को भी तेजी से आगे बढ़ा सकेगी।
अकेली मिसाल नहीं: सांपला और बाड़मेर में भी वही तस्वीर
पार्वती तलाई अकेला ऐसा गांव नहीं है। पंचायत चुनाव 2026 के पहले चरण में ही प्रदेश के कई गांवों से सर्वसम्मति की ऐसी ही कहानियां सामने आई हैं।
केकड़ी विधानसभा क्षेत्र की सरवाड़ पंचायत समिति की सांपला ग्राम पंचायत में भी ग्रामीणों ने बिना चुनाव के पूरी पंचायत का गठन कर लिया। यहां सरपंच पद पर अर्जुनसिंह राठौड़ सहित सभी 11 वार्डों के पंच निर्विरोध चुने गए। दिलचस्प बात यह है कि सरपंच पद के लिए 6 उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन ग्रामीणों ने सबको एक साथ बैठाकर प्रेम और सौहार्द से बात की। नतीजा यह हुआ कि 5 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन वापस ले लिए और अर्जुनसिंह राठौड़ अकेले मैदान में रह गए।
वार्ड पंचों के चुनाव में तो और भी अनोखा तरीका अपनाया गया। जिन वार्डों में एक से ज्यादा उम्मीदवार थे, वहां ग्रामीणों ने सभी दावेदारों को एक साथ बिठाया और गोली निकालकर फैसला किया — जिसकी गोली निकली, वही विजेता माना गया। बाकी उम्मीदवारों ने भी इस फैसले पर कोई एतराज नहीं जताया और अपने आवेदन वापस ले लिए। इसके बाद सरपंच और सभी पंचों ने जुलूस के साथ भगवान गोपाल महाराज के मंदिर में जाकर दर्शन किए।
उधर बाड़मेर जिले में तो निर्विरोध निर्वाचन का आंकड़ा और भी बड़ा है। जिले की 359 ग्राम पंचायतों में से 60 में सरपंच निर्विरोध चुने गए। शनिवार को हुए मतदान में जिले में 88.76 प्रतिशत वोटिंग हुई, जिसमें मांगता में सबसे ज्यादा 91.42 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले।
| गांव / जिला | निर्विरोध चुने गए पद | खास बात |
|---|---|---|
| पार्वती तलाई, बीकानेर | सरपंच + 7 वार्ड पंच | 36 कौमों की सर्वसम्मति |
| सांपला, केकड़ी (अजमेर) | सरपंच + 11 वार्ड पंच | गोली निकालकर चुने गए पंच |
| बाड़मेर जिला | 60 सरपंच | जिले में 88.76% मतदान |
पहले चरण का बड़ा चित्र: 85 लाख मतदाता, 3,314 पंचायतें
पंचायतीराज चुनाव 2026 के पहले चरण में शनिवार, 24 अक्टूबर को प्रदेश के 16 जिलों की 3,314 ग्राम पंचायतों में मतदान हुआ। इन जिलों में अजमेर, अलवर, बाड़मेर, भीलवाड़ा, बीकानेर, डूंगरपुर, जयपुर, झालावाड़, जोधपुर, कोटा, नागौर, पाली, फलोदी, राजसमंद, सिरोही और उदयपुर शामिल हैं।
इस चरण में सरपंच के 16,795 उम्मीदवार और वार्ड पंच के 28,682 पदों के लिए मुकाबला हुआ। करीब 85 लाख मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। मतदान बैलेट पेपर से कराया गया — हर मतदाता को दो मतपत्र मिले, एक सरपंच के लिए और एक वार्ड पंच के लिए। सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक वोट डाले गए, और मतदान खत्म होते ही मतगणना शुरू हो गई। नतीजे देर रात तक घोषित किए गए। रविवार को उप सरपंच का चुनाव होना है।
निर्विरोध निर्वाचन का मतलब क्या होता है
निर्विरोध निर्वाचन का मतलब यह नहीं है कि चुनाव प्रक्रिया हुई ही नहीं। प्रक्रिया पूरी होती है — नामांकन भरे जाते हैं, जांच होती है, और नाम वापसी का मौका मिलता है। अगर किसी पद के लिए नाम वापसी के बाद सिर्फ एक ही उम्मीदवार मैदान में रह जाए, तो उसे निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है। उस पद के लिए मतदान कराने की जरूरत नहीं पड़ती।
पार्वती तलाई और सांपला में यही हुआ। लोगों ने आपसी बातचीत से दावेदारों को मनाया, नाम वापस कराए और एक-एक नाम पर सहमति बनाई। औपचारिक घोषणा निर्वाचन विभाग की ओर से की जाती है। इस तरह के फैसलों के पीछे अक्सर एक सोच होती है — चुनावी रंजिश गांव में सालों तक बनी रहती है, जबकि सर्वसम्मति से चुना गया प्रतिनिधि सबका प्रतिनिधि होता है।
गांव को अब क्या उम्मीद है
पार्वती तलाई के लोगों को अब नई पंचायत से यही उम्मीद है कि वह आपसी सहयोग से गांव की मूलभूत सुविधाओं और विकास कार्यों को प्राथमिकता देगी। पूरे इलाके में इस पंचायत की चर्चा हो रही है। लोग इसे गौरवपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं। पार्वती तलाई ने यह संदेश दिया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ सर्वसम्मति और सामाजिक एकता की भी अहम भूमिका होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: बीकानेर की पार्वती तलाई ग्राम पंचायत में सरपंच कौन बने?
उत्तर: पार्वती तलाई में महेंद्र सिंह भाटी को निर्विरोध सरपंच चुना गया है। गांव की 36 कौमों ने सर्वसम्मति से उनके नाम का समर्थन किया।
प्रश्न: पार्वती तलाई में कितने वार्ड पंच निर्विरोध चुने गए?
उत्तर: सरपंच के साथ-साथ सभी सात वार्डों के वार्ड पंच भी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं, यानी पूरी पंचायत का गठन बिना मतदान के हुआ है।
प्रश्न: पंचायत चुनाव 2026 के पहले चरण में कितनी पंचायतों में मतदान हुआ?
उत्तर: पहले चरण में 16 जिलों की 3,314 ग्राम पंचायतों में मतदान हुआ। करीब 85 लाख मतदाताओं ने वोट डाले, और सरपंच पद के लिए 16,795 उम्मीदवार मैदान में थे।
प्रश्न: निर्विरोध निर्वाचन कैसे होता है?
उत्तर: नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद अगर किसी पद के लिए सिर्फ एक उम्मीदवार मैदान में रह जाए, तो उसे निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है और उस पद के लिए मतदान नहीं कराना पड़ता।
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