राजस्थान के किसानों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। राज्य की बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋणदात्री समितियों (एम-पैक्स) को अब उर्वरक और बीज के व्यापार के लिए बैंक से साख सीमा मिलेगी, जिसके लिए एम-पैक्स साख सीमा को लेकर सहकारिता विभाग ने नए और कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद गांव की सहकारी समितियां खुद खाद, बीज और कीटनाशक का कारोबार कर सकेंगी और किसानों को समय पर कृषि आदान मिलेंगे। माना जा रहा है कि रबी सीजन 2026-27 की बुवाई के दौर में यह कदम किसानों के लिए बड़ा सहारा बनेगा।
रजिस्ट्रार सहकारी समितियां डॉ. समित शर्मा द्वारा जारी इन निर्देशों का मकसद साफ है — सहकारी समितियों के वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करना और ग्रामीण स्तर पर कृषि आदानों की आपूर्ति को गति देना। नए नियमों में साख सीमा के प्रतिशत, पात्रता की शर्तें, गोदामों के मानक और वित्तीय अनुशासन के कड़े प्रावधान तय किए गए हैं।
किसानों को सबसे बड़ा फायदा: समय पर खाद-बीज, दलाली पर रोक
नए नियमों का सबसे सीधा और बड़ा असर किसानों पर पड़ेगा। अब तक गांव स्तर पर कई सहकारी समितियों के पास अपना पर्याप्त फंड नहीं होता था, इसलिए वे खाद-बीज का व्यापार बड़े पैमाने पर नहीं कर पाती थीं। किसानों को या तो दूर के शहर जाना पड़ता था या निजी दुकानदारों से महंगे दामों पर आदान खरीदने पड़ते थे। एम-पैक्स साख सीमा मिलने के बाद समितियां केंद्रीय सहकारी बैंकों से कर्ज लेकर पहले से स्टॉक तैयार कर सकेंगी — बुवाई के समय गांव में ही समय पर खाद-बीज की उपलब्धता होगी।
यह समय भी अहम है। राजस्थान में इन दिनों रबी सीजन की तैयारियां जोरों पर हैं। राज्य सरकार के मुताबिक प्रदेश में इस समय 7.83 लाख टन खाद का स्टॉक उपलब्ध है, जिसमें 3.72 लाख टन यूरिया शामिल है। हाल के हफ्तों में डीएपी खाद संकट को लेकर भी प्रदेश में चर्चा रही है। ऐसे में समितियों को व्यापार के लिए साख सीमा मिलना किसानों की खरीद प्रक्रिया को और आसान बनाएगा।
साख सीमा के नियम: दृष्टिबंधक पर 60%, ताला कुंजी पर 75% तक कर्ज
दिशा-निर्देशों में दो तरह की साख सीमा की व्यवस्था की गई है। पहली है दृष्टिबंधक (Hypothecation) साख सीमा — इसमें समिति के गोदाम में रखे स्टॉक के कुल मूल्य का 60 प्रतिशत तक राशि बैंक स्वीकृत करेगा। शेष 40 प्रतिशत राशि समिति को अपने स्वयं के कोषों से वहन करनी होगी।
दूसरी व्यवस्था है ताला कुंजी (Pledge) साख सीमा, जिसमें स्टॉक मूल्य का 75 प्रतिशत तक राशि मिलेगी और समिति को 25 प्रतिशत राशि अपने फंड से लगानी होगी। यानी जितनी बेहतर वित्तीय स्थिति और जितना पारदर्शी प्रबंधन, उतनी ज्यादा कर्ज सीमा।
| साख सीमा का प्रकार | स्टॉक मूल्य पर बैंक की हिस्सेदारी | समिति का अपना योगदान |
|---|---|---|
| दृष्टिबंधक (Hypothecation) | 60 प्रतिशत तक | 40 प्रतिशत |
| ताला कुंजी (Pledge) | 75 प्रतिशत तक | 25 प्रतिशत |
साख सीमा की राशि तय करने का आधार शुद्ध प्रयोज्य वित्तीय साधन यानी एनडीआर (NDR) रखा गया है। समितियों के आंतरिक संसाधनों और प्रतिबद्धताओं के अंतर से तय होने वाली इस एनडीआर राशि के आधार पर दृष्टिबंधक सीमा डेढ़ गुना और ताला कुंजी सीमा ढाई गुना तक मिल सकेगी। जिन समितियों का एनडीआर शून्य या उससे कम होगा, उन्हें सामान्य रूप से नकद साख सीमा की अनुमति नहीं होगी — यह केवल विशेष मामलों में उप या सहायक रजिस्ट्रार की संस्तुति के बाद ही दी जा सकेगी।
कौन सी समितियां होंगी पात्र: ये शर्तें पूरी करनी होंगी
एम-पैक्स साख सीमा का लाभ हर समिति को अपने आप नहीं मिलेगा — कुछ अनिवार्य पात्रता मापदंड पूरे करने होंगे:
- समिति के पास पूर्णकालिक प्रशिक्षित व्यवस्थापक (मैनेजर) होना चाहिए।
- समिति के पास स्वयं का अथवा किराए का कार्यालय और गोदाम होना चाहिए।
- समिति को प्रधानमंत्री कृषक समृद्धि केंद्र के रूप में कार्य करना चाहिए।
इन शर्तों का उद्देश्य यही है कि केवल उन्हीं समितियों को कर्ज मिले जो पेशेवर तरीके से चल रही हैं और जिनके पास खाद-बीज के सुरक्षित भंडारण की बुनियादी व्यवस्था मौजूद है। विभाग का मानना है कि इससे सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी।
गोदामों और वित्तीय अनुशासन के कड़े मानक
नए नियम सिर्फ कर्ज देने तक सीमित नहीं हैं — पैसे के इस्तेमाल पर भी कड़ी निगरानी रखी गई है। गोदाम पूरी तरह पक्के, सीमेंटीकृत और नमी तथा चोरी से सुरक्षित होने चाहिए। समितियों को हर माह अपने प्राप्ति-भुगतान, संपत्ति-दायित्व और स्टॉक के पाक्षिक विवरण पत्र अनिवार्य रूप से बैंक को भेजने होंगे।
सबसे अहम प्रावधान यह है कि बिक्री से प्राप्त एक लाख रुपये तक की राशि तुरंत बैंक में जमा करवानी होगी, जिससे वित्तीय लेन-देन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकेगी।
गांव की समितियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति
सहकारिता विभाग का दावा है कि इन दिशा-निर्देशों से ग्रामीण स्तर पर कृषि आदानों की आपूर्ति को बल मिलेगा और किसानों को समय पर संसाधन प्राप्त हो सकेंगे। प्रधानमंत्री कृषक समृद्धि केंद्र के रूप में कार्य करने वाली समितियों को यह सुविधा मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में खाद-बीज की दुकानों का जाल भी मजबूत होगा।
यह कदम उस बड़े अभियान का हिस्सा माना जा रहा है जिसके तहत राज्य सरकार सहकारिता को जमीनी स्तर तक सशक्त कर रही है। हाल के महीनों में किसानों के लिए कई योजनाएं आगे बढ़ाई गई हैं — जैसे झालावाड़ में किसानों को सोलर ड्रायर पर अनुदान। एम-पैक्स साख सीमा का यह कदम उसी दिशा में एक और मजबूत कड़ी है, क्योंकि यह सीधे उस व्यवस्था को मजबूत करता है जिससे किसान हर सीजन में खाद-बीज खरीदते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: एम-पैक्स क्या है?
उत्तर: एम-पैक्स यानी बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋणदात्री समिति — गांव स्तर की सहकारी संस्था जो किसानों को ऋण के साथ-साथ अब खाद, बीज और कीटनाशक के व्यापार से भी जोड़ने की तैयारी में है।
प्रश्न: समितियों को कितनी साख सीमा मिलेगी?
उत्तर: दृष्टिबंधक सीमा में स्टॉक मूल्य का 60 प्रतिशत और ताला कुंजी सीमा में 75 प्रतिशत तक राशि केंद्रीय सहकारी बैंकों से स्वीकृत की जा सकेगी। बाकी राशि समिति को अपने फंड से लगानी होगी।
प्रश्न: साख सीमा के लिए कौन सी समितियां पात्र होंगी?
उत्तर: जिन समितियों के पास पूर्णकालिक प्रशिक्षित मैनेजर, कार्यालय और गोदाम हो, और जो प्रधानमंत्री कृषक समृद्धि केंद्र के रूप में कार्य करती हों।
प्रश्न: किसानों को इससे क्या फायदा होगा?
उत्तर: गांव स्तर पर ही समय पर खाद-बीज की उपलब्धता, बुवाई के सीजन में आदानों की कमी से राहत और सहकारी समितियों के माध्यम से पारदर्शी व भरोसेमंद खरीद व्यवस्था।