जयपुर। राजस्थान के लाखों किसानों के लिए खरीफ सीजन 2026 का आधिकारिक लेखा-जोखा सामने आ गया है, और यह मिला-जुला संदेश लेकर आया है। खरीफ फसल उत्पादन अनुमान 2026 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की प्रमुख फसल बाजरा के उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले करीब 4.34 लाख टन की गिरावट का अनुमान है, वहीं मूंगफली की पैदावार में लगभग 7 लाख टन की बढ़ोतरी की उम्मीद है। कम बारिश इस असंतुलन की सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है। यह अभी शुरुआती अनुमान है — मंडियों में फसलों की आवक जारी है, इसलिए अंतिम आंकड़े बाद में पुष्ट होंगे।
खरीफ फसल उत्पादन अनुमान 2026: चार प्रमुख फसलों के आंकड़े एक नजर में
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खरीफ 2026 में राजस्थान की चार प्रमुख फसलों की तस्वीर इस प्रकार है:
| फसल | बुवाई 2026 (लाख हेक्टेयर) | उत्पादन अनुमान 2026 (लाख टन) | पिछले साल उत्पादन (लाख टन) | अंतर |
|---|---|---|---|---|
| बाजरा | 39.58 | 49.39 | 53.73 | -4.34 लाख टन |
| ग्वार | 23.10 | 17.85 | 19.74 | -1.89 लाख टन |
| मूंग | 23.82 | 14.40 | 13.79 | +0.61 लाख टन |
| मूंगफली | 11.85 | 28.21 | 21.23 | +6.98 लाख टन |
खरीफ फसल उत्पादन अनुमान में बाजरे को सबसे बड़ा झटका: रकबा और उत्पादन दोनों घटे
बाजरा राजस्थान के किसानों की प्रमुख खाद्यान्न फसल है, लेकिन इस बार उसे सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है। पिछले साल करीब 43.52 लाख हेक्टेयर में बाजरे की बुवाई हुई थी, जबकि इस बार यह घटकर 39.58 लाख हेक्टेयर पर आ गई — यानी करीब 3.94 लाख हेक्टेयर रकबा कम। उत्पादन भी 53.73 लाख टन से घटकर 49.39 लाख टन रहने का अनुमान है।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, कम बारिश के दौर में किसानों ने कम पानी में पनपने वाली फसलों की ओर रुख किया और बाजरे के रकबे में कटौती की। यही वजह है कि बुवाई का क्षेत्रफल भी घटा और प्रति हेक्टेयर पैदावार पर भी दबाव पड़ा।
मूंगफली किसानों के लिए खुशखबरी: 7 लाख टन बढ़ा उत्पादन अनुमान
तिलहन फसलों में मूंगफली इस बार सबसे चमकदार प्रदर्शन करती दिख रही है। इस साल 11.85 लाख हेक्टेयर में मूंगफली की बुवाई हुई, जबकि पिछले साल यह 10.48 लाख हेक्टेयर थी। उत्पादन 21.23 लाख टन से बढ़कर 28.21 लाख टन होने का अनुमान है — करीब 6.98 लाख टन का इजाफा।
यह बढ़ोतरी इसलिए भी अहम है क्योंकि खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता सरकार की प्राथमिकता है। मूंगफली की अच्छी पैदावार का सीधा फायदा तेल मिलों और तिलहन किसानों दोनों को मिलेगा। मूंगफली किसानों से जुड़ी ताजा खबरों के लिए यहां खोजें।
ग्वार और मूंग की स्थिति: एक ओर दबाव, दूसरी ओर राहत
पश्चिमी राजस्थान — खासकर बाड़मेर, जोधपुर, जालौर और नागौर बेल्ट — में बड़े पैमाने पर बोए जाने वाले ग्वार पर कम बारिश का असर दिखा है। पिछले साल 29.82 लाख हेक्टेयर में ग्वार की बुवाई हुई थी, जो इस बार घटकर 23.10 लाख हेक्टेयर रह गई। उत्पादन 19.74 लाख टन से घटकर 17.85 लाख टन रहने का अनुमान है, यानी करीब 1.89 लाख टन की कमी।
इसके उलट, मूंग से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस बार 23.82 लाख हेक्टेयर में मूंग बोई गई (पिछले साल 23.63 लाख हेक्टेयर), और उत्पादन 13.79 लाख टन से बढ़कर 14.40 लाख टन होने का अनुमान है — करीब 61 हजार टन की मामूली लेकिन महत्वपूर्ण बढ़ोतरी। मूंग-मूंगफली की MSP खरीद से जुड़ी खबरें यहां देखें।
कम बारिश बनी मुख्य वजह, मंडियों में आवक से तय होगी अंतिम तस्वीर
सरकारी अनुमान के पीछे सबसे बड़ा कारण इस साल की कम बारिश है। मानसून की कमी से खरीफ फसलों की बुवाई और पैदावार दोनों प्रभावित हुईं। हालांकि, कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये शुरुआती आंकड़े हैं — राज्य की मंडियों में फसलों की आवक अभी जारी है, और अंतिम उत्पादन के आंकड़े आवक पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
किसानों के लिए अच्छी बात यह है कि बाजरे के मंडी भाव इस सीजन में मजबूत चल रहे हैं, जिससे उत्पादन में कमी का कुछ हद तक भरपाई भाव से हो सकती है।
खेती राजस्थान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ — 27% हिस्सेदारी
राजस्थान की अर्थव्यवस्था में खेती और इससे जुड़े क्षेत्रों की हिस्सेदारी करीब 27 फीसदी है। इसलिए खरीफ उत्पादन में उतार-चढ़ाव का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहता — यह ग्रामीण आय, मंडी कारोबार और उपभोक्ता बाजार तक पहुंचता है। सरकार इस हिस्सेदारी को बढ़ाने के लिए खेती से जुड़ी नई योजनाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है।
किसानों के लिए व्यावहारिक मतलब: अब क्या करें?
- मंडियों पर नजर रखें: उत्पादन अनुमान से कीमतों की दिशा का अंदाजा लगता है। बाजरा और ग्वार की कमी से भाव मजबूत रहने की संभावना है — जल्दबाजी में फसल न बेचें।
- MSP खरीद का फायदा उठाएं: मूंग और मूंगफली की सरकारी खरीद प्रक्रिया शुरू हो रही है। पंजीकरण और दस्तावेज पहले से तैयार रखें।
- रबी की योजना बनाएं: खरीफ की कटाई के साथ ही रबी बुवाई का समय नजदीक है। कम पानी वाली किस्मों और सरसों जैसी फसलों पर विचार करें।
- आंकड़ों की पुष्टि का इंतजार करें: यह शुरुआती अनुमान है। अंतिम आंकड़ों के बाद ही बड़े फैसले लें — जैसे स्टॉक रखने या बेचने का निर्णय।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: खरीफ फसल उत्पादन अनुमान 2026 के आंकड़े अंतिम हैं?
नहीं, ये शुरुआती सरकारी अनुमान हैं। मंडियों में फसल की आवक जारी है, इसलिए उत्पादन के अंतिम आंकड़े बाद में जारी होंगे।
प्रश्न 2: किस फसल का उत्पादन सबसे ज्यादा घटने का अनुमान है?
बाजरे का — पिछले साल के 53.73 लाख टन से घटकर 49.39 लाख टन रहने का अनुमान है, यानी करीब 4.34 लाख टन की कमी।
प्रश्न 3: किस फसल से किसानों को सबसे ज्यादा राहत की उम्मीद है?
मूंगफली से — उत्पादन 21.23 लाख टन से बढ़कर 28.21 लाख टन होने का अनुमान है, यानी करीब 6.98 लाख टन की बढ़ोतरी।
प्रश्न 4: उत्पादन घटने की मुख्य वजह क्या बताई गई है?
कम बारिश। मानसून की कमी से बुवाई का रकबा और प्रति हेक्टेयर पैदावार दोनों प्रभावित हुए।