कोटा नगर निगम की तिजोरी इस वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में नगरीय विकास कर से करीब 10.50 करोड़ रुपये से भर गई है। 1 अप्रैल से 13 अक्टूबर तक की यह वसूली सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है — इसके पीछे 26,772 ऐसी संपत्तियों का पूरा जाल है जिन्हें एक निजी फर्म के सर्वे के बाद टैक्स के दायरे में लाया गया। कोटा नगरीय विकास कर की यह कहानी बताती है कि शहरों में टैक्स वसूली अब डेटा और सर्वे के दम पर हो रही है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आवासीय संपत्तियों से ही अकेले 2.14 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जमा हुई — और यह पैसा सिर्फ 1,271 घरों से आया है।
10.50 करोड़ का पूरा हिसाब: कहां से आया कितना पैसा
नगर निगम के राजस्व विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 1 अप्रैल 2026 से 13 अक्टूबर तक नगरीय विकास कर के रूप में कुल 10 करोड़ 50 लाख 50 हजार 994 रुपये जमा हुए हैं। श्रेणीवार ब्योरा इस प्रकार है:
| संपत्ति की श्रेणी | टैक्स जमा करने वाली इकाइयां | कुल वसूली (रुपये) |
| आवासीय संपत्तियां | 1,271 | 2,14,15,088 |
| व्यवसायिक इकाइयां | 936 | 2,73,09,702 |
| संस्थानिक इकाइयां | 342 | 1,94,02,903 |
| बड़े औद्योगिक संस्थान | 63 | 1,74,38,020 |
| मिश्रित उपयोग इकाइयां | 910 | 1,94,85,281 |
| कुल योग | 3,522 | 10,50,50,994 |
इन आंकड़ों की सबसे बड़ी दिलचस्प बात यह है कि टैक्स के दायरे में आने वाली 26,772 संपत्तियों में से अब तक सिर्फ 3,522 इकाइयों ने ही इस वित्त वर्ष का टैक्स चुकाया है।
नगरीय विकास कर आखिर होता क्या है? कौन-कौन देता है
बहुत से लोगों को हाउस टैक्स और नगरीय विकास कर में फर्क समझ नहीं आता, जबकि दोनों अलग-अलग चीजें हैं। नगरीय विकास कर शहर के बुनियादी ढांचे — सड़कें, नालियां, स्ट्रीट लाइटें, सफाई व्यवस्था — के विकास के लिए लगाया जाने वाला कर है। कोटा नगर निगम इसे वर्ष 2007 से वसूल कर रहा है।
इस कर के दायरे में आने की एक साफ सीमा तय है: 900 वर्ग फीट से अधिक क्षेत्रफल वाले व्यवसायिक भूखंड और संपत्तियां, तथा 2,700 वर्ग फीट से अधिक के आवासीय भूखंड और भवन। यानी छोटा घर या छोटी दुकान रखने वालों पर कोटा नगरीय विकास कर लागू नहीं होता। पहले यह वसूली राजस्व विभाग के जरिए होती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से निगम ने यह काम एक निजी फर्म को सौंप दिया है — और सर्वे के नतीजे बता रहे हैं कि यह फैसला वसूली के लिहाज से फायदेमंद साबित हो रहा है।
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निजी फर्म का सर्वे: 1.92 लाख संपत्तियों की छानबीन
कोटा नगरीय विकास कर की वसूली में इस बार का सबसे बड़ा हथियार बना है निजी फर्म का घर-घर सर्वे। फर्म ने शहर में कुल 1 लाख 92 हजार 848 संपत्तियों का सर्वे किया, जिनमें से 26,772 संपत्तियां टैक्स के दायरे में पाई गईं।
सिर्फ आवासीय संपत्तियों की बात करें तो 1 लाख 70 हजार 442 घरों का सर्वे हुआ और इनमें से 7,040 घर टैक्स के दायरे में आए। इन 7,040 घरों में से चालू वित्त वर्ष में अब तक 1,271 ने अपना टैक्स जमा कर दिया है। शेष करीब 5,769 आवासीय संपत्ति मालिकों के लिए अब निगम के नोटिस का इंतजार करना ही बुद्धिमानी नहीं होगी।
कोटा नगरीय विकास कर: समय पर भरने पर 5 से 10 फीसदी तक की छूट
नगर निगम कोटा के उपायुक्त राजस्व धीरज कुमार सोनी के मुताबिक समय पर टैक्स चुकाने वालों को निगम छूट भी दे रहा है। वित्त वर्ष के शुरुआती तीन महीनों — अप्रैल से जून — में चालू वर्ष का टैक्स जमा करवाने पर 10 फीसदी की छूट मिली, जबकि दूसरी तिमाही जुलाई से सितंबर तक टैक्स जमा करने वालों को 5 फीसदी की छूट दी गई।
इस छूट का फायदा उठाकर ही अधिकतर करदाताओं ने अपना टैक्स जमा कराया है। लेकिन एक अहम बात नोट कर लें: अक्टूबर से यह छूट का लाभ बंद हो चुका है। यानी अब जो भी टैक्स जमा करेगा, उसे पूरी राशि देनी होगी — कोई छूट नहीं मिलेगी।
बकायादारों पर सख्ती: कोटा नगरीय विकास कर न भरने पर सीजिंग तक
जो संपत्ति मालिक बार-बार नोटिस मिलने के बावजूद नगरीय विकास कर जमा नहीं कर रहे हैं, उनके लिए अब राह आसान नहीं रहने वाली। उपायुक्त राजस्व धीरज कुमार सोनी ने साफ कहा है कि ऐसे बकायादारों के खिलाफ राजस्थान नगर पालिका अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
कार्रवाई के चरण कुछ इस तरह होंगे: पहले संपत्ति की सीजिंग, फिर बैंक खातों को अटैच करना, और जरूरत पड़ी तो विधिक कुर्की तक की नौबत आ सकती है। निगम का संदेश साफ है — छूट की अवधि में कोटा नगरीय विकास कर न भरने वालों को अब कानून का सामना करना होगा। नगर निगमों की ऐसी सख्ती का एक ताजा उदाहरण जयपुर में भी देखने को मिला, जहां अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में सामान जब्त किया गया था।
टैक्स जमा करने से पहले ये बातें जरूर ध्यान रखें
अगर आपकी संपत्ति भी नगरीय विकास कर के दायरे में आती है, तो इन बातों का ध्यान रखें:
1. अपना आकलन पत्र साथ रखें: निगम कार्यालय में आपकी संपत्ति का जो टैक्स आकलन बना है, उसकी कॉपी या प्रॉपर्टी आईडी साथ ले जाएं। इससे बकाया राशि का मिलान आसान होगा।
2. संपत्ति का सही वर्गीकरण जांचें: आपकी संपत्ति आवासीय, व्यवसायिक, औद्योगिक या मिश्रित — किस श्रेणी में दर्ज है, यह जरूर सत्यापित करें। गलत वर्गीकरण पर टैक्स की दर भी गलत लग सकती है।
3. बकाया अवधि का पूरा ब्योरा लें: सिर्फ कुल रकम न पूछें — मूल बकाया, पेनल्टी और ब्याज अलग-अलग लिखवाकर लें ताकि कोई गलती हो तो उसी समय सुधर जाए।
4. भुगतान की रसीद संभालकर रखें: टैक्स जमा करने के बाद रसीद और नो-ड्यूज की लिखित पुष्टि जरूर लें। भविष्य में किसी विवाद में यही आपके काम आएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: कोटा में नगरीय विकास कर किन संपत्तियों पर लगता है?
900 वर्ग फीट से अधिक के व्यवसायिक भूखंड और संपत्तियों तथा 2,700 वर्ग फीट से अधिक के आवासीय भूखंड और भवनों पर यह कर लागू होता है। इससे छोटी संपत्तियां इसके दायरे से बाहर हैं।
प्रश्न 2: इस वित्त वर्ष में कोटा नगर निगम ने कितना नगरीय विकास कर वसूला है?
1 अप्रैल 2026 से 13 अक्टूबर तक कुल 10 करोड़ 50 लाख 50 हजार 994 रुपये की वसूली हुई है। इसमें आवासीय संपत्तियों से 2.14 करोड़ रुपये से अधिक की रकम शामिल है।
प्रश्न 3: समय पर टैक्स भरने पर क्या छूट मिलती है?
अप्रैल से जून तक टैक्स जमा करने पर 10 फीसदी और जुलाई से सितंबर तक 5 फीसदी की छूट मिलती है। अक्टूबर से यह छूट बंद हो जाती है।
प्रश्न 4: टैक्स न भरने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
बार-बार नोटिस के बावजूद टैक्स न जमा करने पर राजस्थान नगर पालिका अधिनियम के तहत संपत्ति की सीजिंग, बैंक खाता अटैच करने और विधिक कुर्की जैसी कार्रवाई की जा सकती है।