माउंट आबू की हरी घास पर आखिरी सीटी बजने तक किसी को नहीं पता था कि ट्रॉफी किस जिले के हाथ में जाएगी। कोटा जयपुर फुटबॉल फाइनल में कोटा ने जयपुर को पेनल्टी शूटआउट में 5-4 से हराकर राजस्थान सीनियर फुटबॉल चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया। निर्धारित समय में दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर थीं, इसलिए विजेता का फैसला पेनल्टी के उस दबाव भरे दौर से हुआ, जिसमें एक चूक ही हार-जीत तय कर देती है।
इस फाइनल में पलड़ा बार-बार बदला। जयपुर ने पहले बढ़त बनाई, कोटा ने आखिरी मिनटों में बराबरी की, और फिर पेनल्टी में धैर्य की परीक्षा पास की। राजस्थान फुटबॉल संघ के तत्वावधान में आयोजित इस चैंपियनशिप में प्रदेश के 33 जिलों की टीमें उतरी थीं, इसलिए फाइनल तक पहुंचना ही दोनों टीमों के लिए बड़ी उपलब्धि थी।
फाइनल का रोमांच: जयपुर की बढ़त और कोटा की वापसी
फाइनल की शुरुआत से ही दोनों टीमें आक्रामक दिखीं। जयपुर के कप्तान अनुज ने 27वें मिनट में शानदार गोल करके अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद कोटा बराबरी के गोल की तलाश में लगातार दबाव बनाता रहा।
कोटा ने हार नहीं मानी। मैच के आखिरी क्षणों में पूनिया ने 89वें मिनट में बेहतरीन गोल करके स्कोर 1-1 कर दिया। यह गोल सिर्फ बराबरी का नहीं था, बल्कि पूरे फाइनल का रुख पलटने वाला था। जयपुर, जो जीत के बेहद करीब पहुंच चुका था, अचानक फिर से बराबरी पर आ गया। निर्धारित समय खत्म होने तक कोई टीम दूसरा गोल नहीं कर सकी, इसलिए खिताब का फैसला पेनल्टी शूटआउट पर टल गया।
पेनल्टी शूटआउट: जहां धैर्य ही सबसे बड़ा हथियार था
पेनल्टी शूटआउट में तकनीक से ज्यादा मनोबल की परीक्षा होती है, क्योंकि शूट लेने वाले खिलाड़ी को दबाव में भी शांत रहना होता है। इस फाइनल में कोटा के खिलाड़ियों ने यही धैर्य दिखाया और शूटआउट 5-4 से अपने नाम कर लिया।
कोटा के लिए यह जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि उसने जयपुर की बढ़त का जवाब आखिरी मिनट में दिया और फिर शूटआउट के दबाव में भी संयम नहीं खोया। ऐसे मैच युवा खिलाड़ियों को सिखाते हैं कि आखिरी सीटी तक उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।
सेमीफाइनल का सफर: जयपुर और कोटा ऐसे पहुंचे फाइनल तक
फाइनल से पहले दोनों सेमीफाइनल भी उतने ही रोमांचक रहे थे। पहले सेमीफाइनल में जयपुर का सामना श्रीगंगानगर से हुआ। निर्धारित समय में मुकाबला 1-1 की बराबरी पर रहा, जिसके बाद पेनल्टी शूटआउट में जयपुर ने 7-6 से जीत दर्ज की।
दूसरे सेमीफाइनल में कोटा ने जोधपुर को 3-2 से हराया। यह मुकाबला भी गोलों के लिहाज से खुला रहा, जिसमें दोनों टीमों ने आक्रामक खेल दिखाया। तीसरे स्थान के मुकाबले में श्रीगंगानगर ने जोधपुर को 1-0 से हराकर तीसरा स्थान हासिल किया। इस तरह अंतिम तालिका में कोटा पहले, जयपुर दूसरे और श्रीगंगानगर तीसरे स्थान पर रहे।
क्वार्टर फाइनल और शुरुआती दौर: 33 जिलों की टक्कर
टूर्नामेंट के तीसरे दिन माउंट आबू में खेले गए क्वार्टर फाइनल मुकाबलों ने ही बता दिया था कि खिताब की दौड़ कितनी कड़ी है। जयपुर ने उदयपुर को 5-1 से हराया, कोटा ने अजमेर को 4-0 से मात दी, जोधपुर ने भीलवाड़ा को 6-0 से हराया और श्रीगंगानगर ने बीकानेर को 4-0 से हराया।
चैंपियनशिप की शुरुआत में ही करीब 600 खिलाड़ी 33 जिलों से माउंट आबू पहुंचे थे। पहले दिन दो मैदानों पर कुल 12 मुकाबले खेले गए। जयपुर ने भरतपुर को 4-0 से हराया, कोटा ने अलवर को 1-0 से हराया, सवाई माधोपुर ने बांसवाड़ा को 4-1 से हराया, बीकानेर ने टोंक को 3-0 से हराया, अजमेर ने सीकर को पेनल्टी में 5-4 से हराया और सिरोही ने करौली को 4-0 से हराया।
राजस्थान फुटबॉल संघ के सचिव दिलीप सिंह शेखावत ने टूर्नामेंट के दौरान कहा था कि इस चैंपियनशिप का मकसद प्रदेश में फुटबॉल को बढ़ावा देना और खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बेहतर मंच देना है। फाइनल का रोमांच इस मकसद को सही साबित करता है, क्योंकि पूरे टूर्नामेंट में जिला स्तर के खिलाड़ियों को बड़े मंच पर खेलने का मौका मिला।
माउंट आबू में फुटबॉल का उत्सव
माउंट आबू में इस चैंपियनशिप का आयोजन अपने आप में खास रहा, क्योंकि बड़े टूर्नामेंट आमतौर पर बड़े शहरों में होते हैं, लेकिन इस बार सिरोही जिले के पर्वतीय क्षेत्र ने राज्य भर के खिलाड़ियों की मेजबानी की। इससे स्थानीय खेल प्रेमियों को उच्च स्तर का फुटबॉल देखने का मौका मिला और 33 जिलों की टीमें एक ही जगह अलग-अलग खेल शैलियों से रूबरू हुईं।
कोटा की जीत का मतलब क्या है
कोटा की यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी तक सीमित नहीं है। किसी भी जिले की टीम के लिए राज्य चैंपियन बनना वहां के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का काम करता है, क्योंकि जब अपने ही जिले की टीम बड़े मंच पर जीतती है, तो मैदानों में खेलने वाले बच्चों को लगता है कि वे भी इस मुकाम तक पहुंच सकते हैं। जयपुर के लिए भी यह टूर्नामेंट निराशा का कारण नहीं है, क्योंकि फाइनल तक पहुंचना और सेमीफाइनल में पेनल्टी जीतना उसकी ताकत दिखाता है।
| चरण | मुकाबला | नतीजा |
|---|---|---|
| फाइनल | कोटा बनाम जयपुर | 1-1 के बाद पेनल्टी में कोटा 5-4 से विजेता |
| सेमीफाइनल | जयपुर बनाम श्रीगंगानगर | 1-1 के बाद पेनल्टी में जयपुर 7-6 से विजेता |
| सेमीफाइनल | कोटा बनाम जोधपुर | कोटा 3-2 से विजेता |
| तीसरा स्थान | श्रीगंगानगर बनाम जोधपुर | श्रीगंगानगर 1-0 से विजेता |
| क्वार्टर फाइनल | जयपुर बनाम उदयपुर | जयपुर 5-1 से विजेता |
| क्वार्टर फाइनल | कोटा बनाम अजमेर | कोटा 4-0 से विजेता |
| क्वार्टर फाइनल | जोधपुर बनाम भीलवाड़ा | जोधपुर 6-0 से विजेता |
| क्वार्टर फाइनल | श्रीगंगानगर बनाम बीकानेर | श्रीगंगानगर 4-0 से विजेता |
राजस्थान के खेल प्रेमियों के लिए यह टूर्नामेंट एक यादगार अध्याय बन गया है। राजस्थान पुलिस के तीरंदाजों की रांची में स्वर्णिम सफलता और बारां की सीनियर फुटबॉल टीम की खबरों के साथ यह फाइनल बताता है कि प्रदेश के खिलाड़ी अलग-अलग खेलों में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। चैंपियनशिप की शुरुआत की रिपोर्ट में पहले दिन के मुकाबलों का ब्योरा भी दर्ज है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राजस्थान सीनियर फुटबॉल चैंपियनशिप का फाइनल किसने जीता?
कोटा ने फाइनल में जयपुर को पेनल्टी शूटआउट में 5-4 से हराकर खिताब जीता। निर्धारित समय में मुकाबला 1-1 की बराबरी पर था।
फाइनल में गोल किसने किए?
जयपुर के कप्तान अनुज ने 27वें मिनट में गोल करके जयपुर को बढ़त दिलाई, जबकि कोटा के पूनिया ने 89वें मिनट में गोल करके स्कोर 1-1 कर दिया।
चैंपियनशिप कहां और किसके तत्वावधान में हुई?
यह चैंपियनशिप सिरोही जिले के माउंट आबू में राजस्थान फुटबॉल संघ के तत्वावधान में आयोजित हुई, जिसमें 33 जिलों की टीमें उतरी थीं।
अंतिम तालिका में कौन-कौन सी टीमें रहीं?
कोटा पहले स्थान पर रहा, जयपुर दूसरे स्थान पर रहा और श्रीगंगानगर ने तीसरा स्थान हासिल किया।