कोटा ACB ट्रैप: ‘पैसे दो वरना केस में फंसा दूंगा’ — रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया कांस्टेबल अभय सिंह

कोटा ACB ट्रैप कांस्टेबल की खबर ने रविवार को पूरे शहर में चर्चा छेड़ दी है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कोटा इकाई ने नांता थाने की बड़गांव चौकी पर तैनात कांस्टेबल अभय सिंह को 2,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि कांस्टेबल एक कार चालक को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर उससे पैसे वसूल रहा था।

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें एक ऐसे कानून का नाम लेकर डराया गया, जो समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए बना है। एट्रोसिटी एक्ट जैसे सख्त प्रावधान का डर दिखाकर पैसे मांगना कानून की साख पर भी सवाल खड़े करता है।

कोटा ACB ट्रैप: बड़गांव चौकी पर कैसे बिछा जाल

ACB के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय स्वर्णकार ने बताया कि यह कार्रवाई मुख्यालय के निर्देश पर कोटा इकाई ने की। परिवादी कार चालक ने शिकायत दी थी कि बड़गांव चौकी पर तैनात कांस्टेबल अभय सिंह उससे रिश्वत मांग रहा है और न देने पर गंभीर मुकदमे में फंसाने की धमकी दे रहा है।

शिकायत के बाद ACB ने सबसे पहले रिश्वत मांगने के दावे की जांच की। सत्यापन में सामने आया कि कांस्टेबल परिवादी से पहले ही 700 रुपये ले चुका था और बाकी 2,000 रुपये बाद में लेने की बात कर रहा था। इसी पुष्टि के आधार पर ट्रैप की योजना बनी। रविवार को जब कांस्टेबल ने बड़गांव चौकी पर परिवादी से 2,000 रुपये लिए, तभी ACB की टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया।

21 अक्टूबर की टक्कर से शुरू हुआ पूरा विवाद

इस पूरे प्रकरण की जड़ चार दिन पहले हुई एक सड़क दुर्घटना में है। 21 अक्टूबर को बड़गांव चौकी के समीप एक डंपर ने मोटरसाइकिल सवार को टक्कर मार दी, जिसके बाद वह मोटरसाइकिल आगे चल रही एक कार से जा टकराई। हादसे के बाद कार चालक और डंपर चालक के बीच तीखी कहासुनी हो गई।

इसी विवाद के बाद डंपर चालक ने कार चालक के खिलाफ नांता थाने में शिकायत पत्र दे दिया, जिसमें एट्रोसिटी एक्ट की धारा 3 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। मामले की जांच का जिम्मा बड़गांव चौकी पर तैनात कांस्टेबल अभय सिंह को सौंपा गया। परिवादी का आरोप है कि जांच के नाम पर कांस्टेबल ने मामले को रफा-दफा करने के एवज में रिश्वत की मांग शुरू कर दी।

परिवादी के अनुसार, कांस्टेबल ने साफ धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए तो वह कार चालक के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट का गंभीर मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भिजवा देगा। लेकिन परिवादी ने पैसे देकर मामला दबाने के बजाय ACB से शिकायत करने का रास्ता चुना, और यही फैसला इस कार्रवाई की वजह बना।

सत्यापन से गिरफ्तारी तक: ACB ट्रैप की प्रक्रिया कैसे काम करती है

ACB की ट्रैप कार्रवाई एक तय प्रक्रिया से गुजरती है। पहले शिकायत दर्ज की जाती है, फिर टीम गुप्त तरीके से सत्यापित करती है कि आरोपी वाकई रिश्वत मांग रहा है या नहीं। इस मामले में भी सत्यापन के दौरान पहले लिए गए 700 रुपये और आगे मांगे जा रहे 2,000 रुपये की पुष्टि हुई।

सत्यापन के बाद ट्रैप टीम बनाई जाती है, जिसमें स्वतंत्र गवाह शामिल किए जाते हैं और रिश्वत के नोटों पर पहचान के लिए निशान लगाए जाते हैं। इसके बाद शिकायतकर्ता को तय जगह पर भेजा जाता है और जैसे ही आरोपी पैसे लेता है, टीम उसे मौके पर पकड़ लेती है। फिर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज होता है। यह प्रक्रिया इसलिए अहम है क्योंकि इससे कोई निर्दोष फंसता नहीं है और दोषी के खिलाफ पुख्ता सबूत अदालत तक पहुंचते हैं।

कोटा ACB ट्रैप कांस्टेबल पर अब क्या कार्रवाई होगी

गिरफ्तारी के बाद कांस्टेबल अभय सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। आगे की जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या उसने पहले भी किसी अन्य मामले में इसी तरह पैसे लिए थे। साथ ही, जिस दुर्घटना और शिकायत की जांच उसके पास थी, उसे किसी अन्य अधिकारी को सौंपा जाना जरूरी हो जाता है, ताकि जांच प्रभावित न हो।

विभागीय स्तर पर भी कांस्टेबल के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है — आमतौर पर ऐसे मामलों में आरोपी को निलंबित किया जाता है और विभागीय जांच शुरू होती है। अगर आरोप साबित होते हैं तो बर्खास्तगी तक की सजा संभव है, लेकिन अभी मामला जांच के चरण में है।

राजस्थान में ACB की हालिया कार्रवाई और आम आदमी के लिए सबक

कोटा का यह मामला अकेला नहीं है। पिछले कुछ दिनों में ही खैरथल में DST के दो कांस्टेबलों को 2 लाख रुपये की घूस लेते हुए पकड़ा गया था, और बांसवाड़ा में एक कॉलेज के रिश्वतकांड में निदेशक समेत तीन लोगों को ट्रैप किया गया था। इन मामलों से साफ है कि छोटी रकम से लेकर लाखों तक — रिश्वत के हर स्तर पर ACB की नजर है।

अगर कोई सरकारी कर्मचारी आपसे किसी काम के बदले रिश्वत मांगे, तो घबराकर पैसे न दें — पैसे देने से मांग बढ़ने का रास्ता खुलता है। इसके बजाय ACB से शिकायत करें और रिश्वत मांगने का समय, जगह और रकम नोट करके रखें। शिकायत के बाद ACB खुद सत्यापन करती है और आपकी पहचान गोपनीय रखी जाती है। रिश्वत देना भी कानूनन अपराध है, लेकिन शिकायत करके ट्रैप में सहयोग करना कानून की मदद माना जाता है।

घटनाक्रम विवरण
21 अक्टूबर 2026 बड़गांव चौकी के पास टक्कर, दोनों चालकों में विवाद
इसके बाद डंपर चालक की एट्रोसिटी एक्ट शिकायत, जांच कांस्टेबल अभय सिंह को मिली
सत्यापन के दौरान पहले 700 रुपये लेना सामने आया, शेष 2,000 रुपये की मांग की पुष्टि हुई
25 अक्टूबर 2026 ACB कोटा इकाई ने बड़गांव चौकी पर 2,000 रुपये लेते कांस्टेबल को पकड़ा
आगे की प्रक्रिया भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज, विभागीय जांच शुरू

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कोटा ACB ट्रैप में किसे गिरफ्तार किया गया है?

नांता थाने की बड़गांव चौकी के कांस्टेबल अभय सिंह को ACB ने 2,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

कांस्टेबल ने रिश्वत किस बात के लिए मांगी थी?

आरोप है कि वह एक सड़क दुर्घटना से जुड़ी एट्रोसिटी एक्ट की शिकायत को रफा-दफा करने के एवज में पैसे मांग रहा था और न देने पर झूठा मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की धमकी दे रहा था।

ACB ट्रैप की कार्रवाई कैसे होती है?

पहले शिकायत का सत्यापन होता है, फिर स्वतंत्र गवाहों के साथ ट्रैप टीम बनाई जाती है और रिश्वत के नोटों पर निशान लगाकर आरोपी को पैसे लेते हुए पकड़ा जाता है।

रिश्वत मांगे जाने पर आम आदमी कहां शिकायत करे?

अपने जिले की ACB इकाई में शिकायत की जा सकती है। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है और सत्यापन के बाद ही कार्रवाई होती है।

स्रोत: ETV Bharat

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