मुख्य खबर एक नजर में: 15 से 18 नवंबर तक जोधपुर में पुरुष वर्ग के तीन राष्ट्रीय साइकिल पोलो कप एक साथ खेले जाएंगे। करीब 15 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है। इसके साथ ही 18 से 20 नवंबर तक पहली बार राष्ट्रीय साइकिल पोलो रेफरी प्रशिक्षण शिविर भी जोधपुर में होगा।
जोधपुर के खेल प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। करीब डेढ़ दशक के इंतजार के बाद सूर्यनगरी फिर से राष्ट्रीय साइकिल पोलो का केंद्र बनने जा रही है। राज मारवाड़ खेल महोत्सव और साइकिल पोलो फेडरेशन ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में 15 से 18 नवंबर तक पुरुष वर्ग के तीनों प्रमुख राष्ट्रीय साइकिल पोलो कप एक ही मैदान पर खेले जाएंगे — मुकाबले महाराजा गज सिंह स्पोर्ट्स फाउंडेशन पोलो मैदान में होंगे।
तीनों कपों के साथ-साथ जोधपुर में पहली बार राष्ट्रीय साइकिल पोलो रेफरी प्रशिक्षण शिविर का भी आयोजन किया जा रहा है। यानी नवंबर का महीना जोधपुर में साइकिल पोलो के नाम रहने वाला है — पहले चार दिन खिलाड़ियों के नाम, फिर तीन दिन उन लोगों के नाम जो भविष्य में मैदान के फैसलों की जिम्मेदारी संभालना चाहते हैं।
कौन-से तीन कप, कब और कहां
इस बार आयोजित होने वाले तीनों राष्ट्रीय कपों की पूरी जानकारी एक जगह समझ लीजिए:
| कप का नाम | वर्ग | तारीख | स्थान |
|---|---|---|---|
| महाराजा जोधपुर राष्ट्रीय कप | पुरुष (सीनियर) | 15–18 नवंबर 2026 | महाराजा गज सिंह स्पोर्ट्स फाउंडेशन पोलो मैदान, जोधपुर |
| युवराज जोधपुर जूनियर राष्ट्रीय साइकिल पोलो कप | जूनियर | 15–18 नवंबर 2026 | महाराजा गज सिंह स्पोर्ट्स फाउंडेशन पोलो मैदान, जोधपुर |
| जोधपुर राजभंवर सब-जूनियर राष्ट्रीय साइकिल पोलो कप | सब-जूनियर | 15–18 नवंबर 2026 | महाराजा गज सिंह स्पोर्ट्स फाउंडेशन पोलो मैदान, जोधपुर |
तीनों कपों का आयोजन एक ही अवधि और एक ही मैदान पर हो रहा है — यही इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत है। देशभर से टीमें तीनों वर्गों में हिस्सा लेंगी।
15 साल का इंतजार क्यों है खास
राज मारवाड़ खेल महोत्सव के सह-संस्थापक राजेंद्र कुमार गुर्जर के मुताबिक करीब 15 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद जोधपुर में पुरुष वर्ग के तीनों प्रमुख राष्ट्रीय साइकिल पोलो कप एक साथ आयोजित हो रहे हैं। आमतौर पर अलग-अलग कप अलग-अलग शहरों या अलग-अलग समय पर होते हैं, इसलिए यह एक ऐतिहासिक मौका है।
पिछले साल भी जोधपुर में राष्ट्रीय साइकिल पोलो फेडरेशन कप की पुरुष और महिला वर्ग की प्रतियोगिताएं हुई थीं, जिन्हें अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। आयोजकों के अनुसार इस बार तीन राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के एक साथ होने से शहर में साइकिल पोलो की गतिविधियां तेज होंगी और नए खिलाड़ी इस खेल की ओर आकर्षित होंगे। महोत्सव के उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने इसे शहर के लिए गर्व का विषय बताया है।
पहली बार रेफरी प्रशिक्षण शिविर — खेल के भविष्य के लिए बड़ा कदम
सिर्फ मुकाबले ही नहीं, इस बार जोधपुर में पहली बार राष्ट्रीय साइकिल पोलो रेफरी प्रशिक्षण शिविर भी लग रहा है। यह शिविर 18 से 20 नवंबर तक चलेगा। इसमें उन प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेफरी या अंपायर बनने के इच्छुक हैं।
शिविर का संचालन राष्ट्रीय तकनीकी समिति के अध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय साइकिल पोलो खिलाड़ी फ्लाइट लेफ्टिनेंट मदन लाल नायक की अध्यक्षता में होगा, और उनकी टीम का सहयोग रहेगा। प्रशिक्षण के बाद लिखित और शारीरिक परीक्षा के आधार पर चयन किया जाएगा। यानी यह सिर्फ एक जानकारी-सत्र नहीं, बल्कि रेफरी बनने की दिशा में एक विधिवत चयन प्रक्रिया है। साइकिल पोलो जैसे तेज खेल में प्रशिक्षित रेफरियों की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी, और यह शिविर उस खाई को भरने की ठोस पहल है।
साइकिल पोलो आखिर है क्या — जानिए इस अनोखे खेल को
साइकिल पोलो उन चुनिंदा खेलों में है जो देखने में जितना रोमांचक लगता है, खेलने में उससे कहीं ज्यादा मुश्किल है। घुड़सवारी वाले पारंपरिक पोलो की तरह ही इसमें गेंद को लंबी स्टिक से मारकर गोल करना होता है — फर्क बस इतना कि घोड़े की जगह साइकिल होती है।
खिलाड़ी का बायां हाथ साइकिल के ब्रेक पर रहता है और दाहिने हाथ में पोलो स्टिक होती है, इसलिए यह खेल सिर्फ सीधे हाथ के खिलाड़ी ही खेल सकते हैं। एक टीम में 8 सदस्य होते हैं — 4 मैदान पर खेलते हैं और 4 रिप्लेसमेंट के लिए तैयार रहते हैं। मुकाबला 4 चक्करों में होता है, हर चक्कर साढ़े सात मिनट का। खेल के लिए सामान्य साइकिल में खास बदलाव किए जाते हैं ताकि टक्कर का खतरा कम हो — चेन कवर और स्टैंड हटा दिए जाते हैं और व्हील कवर लगाए जाते हैं। यह खेल कभी राजा-रजवाड़ों के शौक से शुरू होकर आज आम आदमी का खेल बन चुका है। इसे 1908 के ओलिंपिक में प्रदर्शन मैच के तौर पर भी शामिल किया गया था, और आज 50 से ज्यादा देशों में साइकिल पोलो खेला जाता है।
जोधपुर और पोलो का पुराना रिश्ता
जोधपुर का पोलो से नाता नया नहीं है। महाराजा गज सिंह स्पोर्ट्स फाउंडेशन पोलो मैदान शहर के प्रमुख खेल मैदानों में गिना जाता है, और यहां पहले भी राष्ट्रीय स्तर की साइकिल पोलो प्रतियोगिताएं हो चुकी हैं। पिछले साल हुए फेडरेशन कप ने साबित किया था कि जोधपुर में इस खेल के दर्शक और माहौल दोनों मौजूद हैं। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि तीन राष्ट्रीय कपों का एक साथ आयोजन इस परंपरा को और आगे बढ़ाएगा।
खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए अहम जानकारी
- तारीखें: मुख्य मुकाबले 15 से 18 नवंबर, रेफरी शिविर 18 से 20 नवंबर।
- स्थान: महाराजा गज सिंह स्पोर्ट्स फाउंडेशन पोलो मैदान, जोधपुर।
- रेफरी बनने के इच्छुक: साइकिल पोलो फेडरेशन ऑफ इंडिया से संपर्क करें; चयन लिखित और शारीरिक परीक्षा के आधार पर होगा।
- दर्शक: तीनों वर्गों (सीनियर, जूनियर, सब-जूनियर) के फाइनल मुकाबले एक ही मैदान पर देखने का दुर्लभ मौका है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: जोधपुर में साइकिल पोलो के तीन राष्ट्रीय कप कब खेले जाएंगे?
जवाब: 15 से 18 नवंबर 2026 तक — महाराजा जोधपुर राष्ट्रीय कप, युवराज जोधपुर जूनियर राष्ट्रीय कप और जोधपुर राजभंवर सब-जूनियर राष्ट्रीय कप एक साथ आयोजित होंगे।
सवाल: रेफरी प्रशिक्षण शिविर में कौन शामिल हो सकता है?
जवाब: राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइकिल पोलो रेफरी बनने के इच्छुक व्यक्ति 18 से 20 नवंबर के शिविर में प्रशिक्षण ले सकते हैं। चयन लिखित और शारीरिक परीक्षा के बाद होगा।
सवाल: साइकिल पोलो का एक मुकाबला कितने समय का होता है?
जवाब: मुकाबला 4 चक्करों में खेला जाता है, हर चक्कर साढ़े सात मिनट का होता है। एक टीम में 8 सदस्य होते हैं, जिनमें से 4 मैदान पर खेलते हैं।
सवाल: इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत क्या है?
जवाब: करीब 15 साल बाद जोधपुर में पुरुष वर्ग के तीनों प्रमुख राष्ट्रीय साइकिल पोलो कप एक साथ हो रहे हैं, और पहली बार राष्ट्रीय रेफरी प्रशिक्षण शिविर भी यहीं आयोजित किया जा रहा है।