जयसमंद झील से रबी फसल को सिर्फ 2 बार मिलेगा सिंचाई पानी: 10 नवंबर से नहरों में शुरू होगी सप्लाई

उदयपुर के जयसमंद झील क्षेत्र के किसानों के लिए रबी सीजन 2026-27 की सबसे बड़ी खबर आ गई है — और यह खबर थोड़ी चिंता वाली भी है। जयसमंद झील सिंचाई पानी इस बार सिर्फ दो बार मिलेगा। पूरी रबी फसल के लिए नहरों से पानी की सप्लाई केवल दो बार होगी, और इसकी शुरुआत 10 नवंबर से होने जा रही है। झील में कम जलस्तर के चलते प्रशासन को यह फैसला लेना पड़ा है। इसका सीधा मतलब यह है कि किसानों को अपनी बुवाई और सिंचाई की पूरी योजना अब इसी सीमित पानी के हिसाब से बनानी होगी।

दो बार पानी का मतलब किसानों के लिए क्या है

रबी सीजन में आमतौर पर किसान इस भरोसे पर बुवाई करते हैं कि फसल की जरूरत के हिसाब से नहरों से पानी मिलता रहेगा। लेकिन जब पानी सिर्फ दो बार मिलना तय हो, तो हर बारी की कीमत कई गुना बढ़ जाती है। पहली बारी बुवाई के बाद जमाव और शुरुआती बढ़वार के लिए अहम होती है, जबकि दूसरी बारी फसल की गंभीर अवस्था — जैसे गेहूं में कल्ले फूटने और दाना भरने के समय — में काम आती है।

यही वजह है कि इस फैसले को सिर्फ एक सरकारी घोषणा की तरह नहीं, बल्कि पूरी रबी योजना की बुनियाद की तरह देखना चाहिए। जो किसान पूरी तरह नहर के पानी पर निर्भर है, उसके लिए इन दो बारियों का सही इस्तेमाल ही फसल की कामयाबी तय करेगा।

गुरुवार की बैठक में क्या-क्या तय हुआ

सिंचाई व्यवस्था तय करने और किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए गुरुवार, 29 अक्टूबर को झील की पाल स्थित सिंचाई विभाग कार्यालय परिसर में बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता जिला कलेक्टर एवं जल वितरण समिति के अध्यक्ष मुहम्मद जुनेद पी.पी. ने की। बैठक में तय हुआ कि किसानों को इस सीजन में केवल दो बार सिंचाई का पानी मिलेगा, जिसकी आपूर्ति 10 नवंबर से शुरू होगी।

बैठक में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता निर्मल मेघवाल, सराड़ा के सहायक अभियंता भावेश पाटीदार, सलूंबर के सहायक अभियंता ईश्वर सुधार, कनिष्ठ अभियंता मनोहर लाल मीणा और कपिल मेहता मौजूद रहे। इसके अलावा कृषि एवं वन विभाग के अधिकारी, जल वितरण समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में किसान भी शामिल हुए।

किसानों की तीन बड़ी मांगें जो बैठक में उठीं

बैठक में किसानों ने सिर्फ पानी की तारीख ही नहीं पूछी, बल्कि अपनी तीन ठोस परेशानियां भी खुलकर रखीं। पहली मांग नहरों की सफाई को लेकर थी — नियमित सफाई नहीं होने से पानी खेतों के अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाता, जिससे आखिरी खेत का किसान हर बार नुकसान उठाता है। इसलिए किसानों ने मांग की कि पानी छोड़ने से पहले नहरों की सफाई कराई जाए और गेटों का उचित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।

दूसरी मांग बीज और खाद को लेकर थी — कृषि विभाग से समय पर बीज-खाद उपलब्ध कराने की मांग रखी गई, ताकि बुवाई पानी की सप्लाई से तालमेल में हो सके। तीसरी चिंता फसल सुरक्षा को लेकर थी — नीलगाय, पैंथर और जंगली सूअरों से फसलों को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई गई और प्रभावी उपाय करने की जरूरत बताई गई। जब पानी ही सीमित हो, तो जानवरों से फसल का नुकसान किसानों के लिए दोहरी मार बन जाता है।

जिला कलेक्टर ने किसानों की समस्याएं सुनकर संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए। अब नजर इस बात पर रहेगी कि नहर सफाई और गेट रखरखाव के निर्देश 10 नवंबर से पहले जमीन पर कितने उतरते हैं।

जयसमंद झील और रबी सीजन का संदर्भ

जयसमंद झील को राजस्थान की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील माना जाता है। उदयपुर जिले में स्थित यह झील ढेबर झील के नाम से भी जानी जाती है और सदियों से इस क्षेत्र की खेती और पेयजल का अहम स्रोत रही है। इसके कमांड क्षेत्र के किसान रबी सीजन में गेहूं, सरसों, चना और जौ जैसी फसलों की बुवाई करते हैं, जिनके लिए सर्दियों में समय पर सिंचाई सबसे बड़ा सहारा होती है।

किसानों के लिए काम की बातें: अब क्या करें

  • नहर की बारी पहले से पक्की करें: जल वितरण समिति या सिंचाई विभाग से पता करें कि आपके गांव की नहर में पानी किस दिन छोड़ा जाएगा। बारी के दिन खेत पर मौजूद रहें।
  • बुवाई 10 नवंबर से पहले निपटाएं: पहली सप्लाई से पहले बुवाई पूरी कर लें, ताकि पहली बारी का पानी सीधे काम आए।
  • खेत की तैयारी अभी से करें: मेड़बंदी दुरुस्त करें और नालियों की सफाई करें। सीमित पानी में एक-एक बूंद की कीमत है।
  • फसल सुरक्षा का इंतजाम करें: नीलगाय और जंगली सूअर से बचाव के लिए गांव स्तर पर सामूहिक उपाय करें, जरूरत पड़ने पर वन विभाग से संपर्क करें।
  • दूसरी बारी सोच-समझकर इस्तेमाल करें: दूसरी बारी को फसल की सबसे नाजुक अवस्था के लिए बचाकर रखें।

जयसमंद झील सिंचाई पानी फैसला: एक नजर में

बिंदु जानकारी
झील जयसमंद झील, उदयपुर
सीजन रबी फसल 2026-27
सिंचाई पानी की बारियां सिर्फ 2 बार
नहरों में सप्लाई शुरू 10 नवंबर से
पानी सीमित होने की वजह झील में कम जलस्तर
बैठक की तारीख गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
बैठक स्थल झील की पाल स्थित सिंचाई विभाग कार्यालय परिसर
अध्यक्षता जिला कलेक्टर एवं जल वितरण समिति अध्यक्ष मुहम्मद जुनेद पी.पी.
किसानों की प्रमुख मांगें नहर सफाई व गेट रखरखाव, समय पर बीज-खाद, फसल सुरक्षा
मौजूद अधिकारी निर्मल मेघवाल, भावेश पाटीदार, ईश्वर सुधार, मनोहर लाल मीणा, कपिल मेहता

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. जयसमंद झील से रबी 2026-27 में किसानों को कितनी बार सिंचाई पानी मिलेगा?

इस रबी सीजन में किसानों को जयसमंद झील से सिर्फ दो बार सिंचाई पानी मिलेगा। नहरों में जलापूर्ति 10 नवंबर से शुरू होगी।

2. सिर्फ दो बार पानी क्यों मिलेगा?

जयसमंद झील में कम जलस्तर के चलते प्रशासन ने पानी की सप्लाई दो बार तक सीमित की है, ताकि उपलब्ध पानी का सभी किसानों तक संतुलित वितरण हो सके।

3. बैठक में किसानों ने नहर सफाई की मांग क्यों उठाई?

किसानों का कहना है कि नहरों की नियमित सफाई नहीं होने से पानी खेतों के अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाता। इसलिए उन्होंने पानी छोड़ने से पहले नहर सफाई और गेट रखरखाव की मांग की है।

4. किसानों को अब सबसे पहले क्या करना चाहिए?

किसानों को 10 नवंबर से पहले बुवाई पूरी करनी चाहिए, अपनी नहर की बारी जल वितरण समिति या सिंचाई विभाग से पक्की करनी चाहिए और खेत की मेड़बंदी व नालियों की सफाई कर लेनी चाहिए।

इस फैसले से जुड़ी हर नई जानकारी — जैसे नहरवार बारी का कार्यक्रम या पानी की दूसरी बारी की तारीख — सामने आते ही हम आप तक पहुंचाएंगे। रबी फसल और उदयपुर से जुड़ी पुरानी खबरों के लिए साइट पर सर्च करें। मूल खबर का स्रोत: दैनिक जागरण, उदयपुर।

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