राजस्थान में टोल सड़कों पर GST का नया नियम: 1 नवंबर से रखरखाव खर्च पर एस्क्रो से होगा टैक्स भुगतान

टोल सड़क जीएसटी नियम में 1 नवंबर 2026 से एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राजस्थान सरकार के वित्त विभाग ने 30 अक्टूबर 2026 को अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर यानी TOT मॉडल के तहत सड़क या हाईवे का संचालन और रखरखाव करने वाली कंपनियों को रखरखाव सेवाओं पर राज्य जीएसटी उस राशि के आधार पर चुकाना होगा, जो रखरखाव खर्च के रूप में एस्क्रो खाते से डेबिट की गई हो। टैक्स उसी टैक्स अवधि में देय होगा, जिसमें वह खर्च किया गया हो।

यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि अब तक रखरखाव से जुड़ी जीएसटी देनदारी के समय को लेकर भ्रम बना हुआ था। नई व्यवस्था इस सवाल का सीधा जवाब देती है: टैक्स तब बनेगा, जब खर्च एस्क्रो खाते से डेबिट होगा।

टोल सड़क जीएसटी नियम: 1 नवंबर से क्या बदलेगा

नई व्यवस्था 1 नवंबर 2026 से प्रभावी होगी। कंसेशन एग्रीमेंट के तहत सड़क या हाईवे का संचालन और रखरखाव करने वाली कंपनी को संबंधित प्राधिकरण को दी जाने वाली सेवाओं पर जीएसटी चुकाना होगा, और इसका आधार एस्क्रो खाते से डेबिट हुई रखरखाव राशि होगी।

यह नियम टोल वसूली के अधिकार पर लगने वाले टैक्स से अलग है। जीएसटी परिषद ने अक्टूबर 2026 में ही स्पष्ट कर दिया था कि वाहन चालकों द्वारा दिया जाने वाला टोल कर से मुक्त है। इसलिए यह खबर टोल की दरों के बारे में नहीं है, और अधिसूचना में आम लोगों के टोल शुल्क में बदलाव का कोई उल्लेख नहीं है।

TOT मॉडल और एस्क्रो खाता आसान भाषा में

TOT यानी टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर एक ऐसा मॉडल है, जिसमें कोई निजी कंपनी पहले से बनी हुई सड़क या हाईवे को एक तय अवधि के लिए संचालित करने का अधिकार लेती है। इसके बदले में वह कंपनी प्राधिकरण को पहले से तय कंसेशन फीस अग्रिम रूप में चुकाती है, और उस अवधि में सड़क से टोल वसूलने का विशेष अधिकार उसे मिलता है। साथ ही, उसी अवधि में सड़क का संचालन और रखरखाव भी उसी कंपनी की जिम्मेदारी होती है।

एस्क्रो खाता इस व्यवस्था का अहम हिस्सा है। इसमें टोल से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा रखरखाव के लिए अलग रखा जाता है। नई व्यवस्था के तहत टैक्स की घड़ी तब चलेगी, जब पैसा एस्क्रो खाते से रखरखाव खर्च के रूप में डेबिट होगा।

टोल सड़क जीएसटी नियम किन कंपनियों पर लागू होगा

यह नियम हर टोल कंपनी पर एक जैसा लागू नहीं होगा। यह सिर्फ उन कंसेशनायर पर लागू होगा, जो कुछ खास शर्तें पूरी करते हैं:

शर्त क्या जरूरी है
मॉडल टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (TOT) मॉडल के तहत कंसेशन एग्रीमेंट हो
टोल का अधिकार कंपनी को सड़क या हाईवे पर टोल मांगने, वसूलने और उसके उपयोग का विशेष अधिकार मिला हो
कंसेशन फीस कंपनी ने कंसेशन फीस अग्रिम रूप में जमा कराई हो
जिम्मेदारी कंपनी पर कंसेशन अवधि में सड़क का संचालन और रखरखाव करने की जिम्मेदारी हो
टैक्स का आधार एस्क्रो खाते से रखरखाव खर्च के रूप में निकाली या डेबिट की गई राशि
लागू होने की तारीख 1 नवंबर 2026 से

जो कंपनियां इन शर्तों में नहीं आतीं, उन पर यह खास व्यवस्था लागू नहीं होगी। इसी तरह, जो खर्च एस्क्रो खाते से डेबिट ही नहीं हुआ, उस पर इस नियम के तहत टैक्स नहीं बनेगा।

समयरेखा: परिषद की स्पष्टता से अधिसूचना तक

इस नियम की कहानी एक दिन में नहीं बनी है। जीएसटी परिषद ने अक्टूबर 2026 में स्पष्ट किया कि टोल पर कोई टैक्स नहीं लगेगा और सड़क रखरखाव पर टैक्स की देनदारी तब बनेगी, जब कंसेशनायर वास्तव में रखरखाव खर्च के एवज में पैसा निकाले। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से अक्टूबर 2026 में अधिसूचना संख्या 10/2026 जारी हुई, जिसमें TOT मॉडल के हाईवे कंसेशनायर के लिए विशेष जीएसटी प्रावधान तय किए गए। केंद्रीय कर से जुड़ी अधिसूचना 27 अक्टूबर 2026 की है, और उसमें भी यही सिद्धांत रखा गया है।

इसके बाद राजस्थान सरकार के वित्त विभाग ने 30 अक्टूबर 2026 को राज्य जीएसटी से जुड़ी अधिसूचना जारी की, जिसमें राज्य के दायरे में आने वाले TOT कंसेशनायर के लिए यही व्यवस्था लागू की गई है। यानी केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर एक ही सिद्धांत अपनाया गया है। राजस्थान हाईकोर्ट का मई 2026 का बॉट मॉडल से जुड़ा फैसला इससे अलग मामला था, इसलिए दोनों को एक नहीं समझना चाहिए।

रखरखाव, आम चालक और ऑपरेटरों पर असर

रखरखाव पर टैक्स के समय को लेकर स्पष्टता का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कंपनियां रखरखाव पर खर्च करने से पहले टैक्स के डर से हिचकिचाएंगी नहीं। अब देनदारी खर्च के साथ जुड़ गई है। आम वाहन चालकों के लिए यह समझना जरूरी है कि यह अधिसूचना टोल की दरें तय नहीं करती, और टोल के रूप में दिया जाने वाला भुगतान पहले से ही कर से मुक्त है।

TOT कंपनियों को नवंबर 2026 से अपने एस्क्रो खाते के हर डेबिट का महीनावार हिसाब रखना होगा, और उसे अपने जीएसटी रिटर्न के हिसाब से मिलाना होगा। कंपनियों को यह भी जांचना होगा कि उनका कंसेशन एग्रीमेंट नई अधिसूचना की शर्तों में आता है या नहीं। राजस्थान में जीएसटी जांच और कार्रवाई से जुड़ी हालिया खबरों से भी यह सबक मिलता है कि कर विभाग नियमों के पालन को गंभीरता से ले रहा है। मूल अधिसूचना की खबर दैनिक नवज्योति पर और TOT मॉडल के कर प्रावधानों का विश्लेषण टैक्सगुरु पर पढ़ा जा सकता है। राजस्थान की अन्य जीएसटी खबरों और सड़क से जुड़ी खबरों के लिए संबंधित पेज भी देखे जा सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

टोल सड़क जीएसटी नियम कब से लागू होगा?
यह व्यवस्था 1 नवंबर 2026 से लागू होगी। राजस्थान सरकार के वित्त विभाग की अधिसूचना 30 अक्टूबर 2026 को जारी हुई है।

टैक्स किस राशि पर लगेगा?
टैक्स उस राशि पर लगेगा, जो रखरखाव खर्च के रूप में एस्क्रो खाते से डेबिट की गई हो। सिर्फ एस्क्रो खाते में पैसा रख देने से टैक्स नहीं बनेगा।

क्या इससे आम वाहन चालकों का टोल बढ़ जाएगा?
नहीं, इस अधिसूचना में टोल की दरों में बदलाव का कोई उल्लेख नहीं है। वाहन चालकों का टोल पहले से ही कर से मुक्त है।

यह नियम किन कंपनियों पर लागू होगा?
सिर्फ TOT मॉडल के उन कंसेशनायर पर, जिन्हें टोल वसूलने का विशेष अधिकार मिला हो, जिन्होंने कंसेशन फीस अग्रिम चुकाई हो, और जिन पर कंसेशन अवधि में सड़क का संचालन और रखरखाव करने की जिम्मेदारी हो।

कुल मिलाकर, टोल सड़क जीएसटी नियम का नया अध्याय 1 नवंबर 2026 से शुरू होगा, और इसकी सबसे बड़ी खासियत यही है कि टैक्स अब खर्च के साथ चलेगा।

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