जयपुर के घाटगेट इलाके में एक ऐसा विद्यालय है, जिसने सौ साल तक सिर्फ पढ़ाई नहीं करवाई, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी बेटियों को अपने पैरों पर खड़ा होने का आत्मविश्वास दिया। सेंट एंजेला सोफिया सीनियर सेकेंडरी स्कूल के 100 वर्ष पूरे होने पर शनिवार को सोफिया स्कूल शताब्दी समारोह के तहत तीन दिवसीय ‘स्वर्णिम शताब्दी महोत्सव’ का आगाज हुआ, जिसमें पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी मुख्य अतिथि रहे।
सोफिया स्कूल शताब्दी समारोह सिर्फ एक स्कूल का जन्मदिन नहीं है। यह इस बात का जश्न है कि जब लड़कियों की पढ़ाई को लेकर समाज में तरह-तरह की बंदिशें थीं, तब भी एक संस्थान ने बालिका शिक्षा को अपनी पहचान बनाया और उसे सौ साल तक निभाया।
1926 से 2026: एक सदी की यात्रा
विद्यालय की 100 वर्ष की गौरवशाली यात्रा 1926 से 2026 तक फैली हुई है। शताब्दी महोत्सव के उद्घाटन के दिन विद्यालय की 100 वर्ष की प्रगति रिपोर्ट और उपलब्धियां भी प्रस्तुत की गईं। छात्राओं ने बैंड और स्वागत संगीत से अतिथियों का अभिनंदन किया।
इस यात्रा की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि संस्थान पूरी तरह लड़कियों की शिक्षा के लिए समर्पित रहा। फॉर्मर सुपीरियर जनरल सिस्टर सविना ने समारोह में कहा कि यहां से छात्राओं को आत्मविश्वास और शक्ति मिली है।
‘मां से बड़ी कोई शक्ति नहीं’: गुलाब कोठारी का संदेश
समारोह के मुख्य अतिथि गुलाब कोठारी ने अपने संबोधन में स्त्री की शक्ति को सबसे ऊपर रखा। उन्होंने कहा कि इस धरती पर मां से बड़ी कोई शक्ति नहीं है। नारी बच्चों को जन्म देने और उनका पालन-पोषण करने के साथ पुरुष और परिवार का भी निर्माण करती है।
कोठारी ने कहा कि 100 वर्ष से यह संस्थान उस शक्ति की पूजा और प्रतिष्ठा करता आ रहा है। उनके शब्दों में, सोफिया केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक परंपरा और संकल्प है।
वह विरोधाभास, जिसे समारोह ने आईना दिखाया
अपने भाषण में गुलाब कोठारी ने समाज के एक गहरे विरोधाभास की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में एक समय कन्याओं को केवल लड़की होने के कारण गर्भ में ही मार दिया जाता था, वहीं नवरात्र में उन्हीं कन्याओं की पूजा भी की जाती है।
इसी विरोधाभास के बीच सोफिया ने 100 वर्ष पहले बालिका शिक्षा के माध्यम से नारी शक्ति को प्रतिष्ठित करने का काम शुरू किया।
शिक्षा में सरस्वती प्रधान होनी चाहिए
कोठारी के भाषण का सबसे चर्चित हिस्सा शिक्षा की दिशा को लेकर था। उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा में लड़कियों को सशक्तीकरण की बात तो सिखाई जा रही है, लेकिन शिक्षा में सरस्वती प्रधान होनी चाहिए, जबकि व्यवस्था लक्ष्मी के पीछे दौड़ना सिखा रही है।
उनका कहना था कि शिक्षा में शब्द और ध्वनि के साथ सृष्टि के तत्वों को भी शामिल करना होगा। यानी पढ़ाई सिर्फ किताबी ज्ञान और कमाई का जरिया न बने, बल्कि वह बच्चे के भीतर संवेदना और विवेक भी पैदा करे।
बेटों को भी वही संस्कार: समान संस्कार की जरूरत
समारोह में कोठारी ने एक और सीधी बात कही, जो हर अभिभावक तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लड़के और लड़कियों को समान संस्कार देने की जरूरत है। अभिभावक जिस तरह बेटियों को संस्कार देते हैं, उसी तरह बेटों को भी स्त्री सम्मान, दया, करुणा और संवेदना सिखाएं।
यह संदेश इसलिए खास है क्योंकि बेटियों की सुरक्षा और सम्मान की बात अक्सर सिर्फ बेटियों तक सीमित कर दी जाती है। कोठारी ने साफ किया कि बदलाव की शुरुआत बेटों की परवरिश से भी होनी चाहिए।
100 दीप, बड़ा गुब्बारा और छात्राओं की प्रस्तुतियां
शताब्दी महोत्सव की शुरुआत भी उतनी ही प्रतीकात्मक रही। प्रधानाचार्या रेवरेंड डॉ. सिस्टर सिंथिया, सिस्टर्स और अभिभावकों ने 100 दीप प्रज्वलित कर समारोह की शुरुआत की। हर दीप इस संस्थान के एक वर्ष की रोशनी का प्रतीक था।
इसके बाद विद्यालय के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आकाश में बड़ा गुब्बारा भी उड़ाया गया। समारोह में छात्राओं ने नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों के जरिए विद्यालय के इतिहास, राजस्थान की संस्कृति और महिला सशक्तीकरण की झलक दिखाई। राजस्थानी गीतों पर नन्ही छात्राओं की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। बच्चों की ओर से तैयार उपहार अतिथियों को भेंट किए गए।
कौन-कौन पहुंचा समारोह में
तीन दिवसीय महोत्सव के आगाज पर कई जाने-माने अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम में विधायक रफीक खान के साथ आईएएस नवीन जैन, ब्रिगेडियर महेंद्र सिंह मेहला, राइट रेवरेंड ओसवर्ड लुईस, राइट रेवरेंड इग्नेशियस मैनेजस, रेवरेंड सिस्टर सविना सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।
उप-प्रधानाचार्या रेवरेंड सिस्टर रेचल ने आभार व्यक्त किया।
सोफिया शताब्दी समारोह: मुख्य तथ्य एक नजर में
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| विद्यालय | सेंट एंजेला सोफिया सीनियर सेकेंडरी स्कूल, घाटगेट, जयपुर |
| अवसर | विद्यालय के 100 वर्ष पूरे (1926-2026) |
| महोत्सव | तीन दिवसीय ‘स्वर्णिम शताब्दी महोत्सव’, शनिवार को आगाज |
| मुख्य अतिथि | पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी |
| शुरुआत | 100 दीप प्रज्वलित कर, आकाश में बड़ा गुब्बारा उड़ाया गया |
| प्रस्तुतियां | छात्राओं के नृत्य-नाट्य, राजस्थानी गीत, बैंड और स्वागत संगीत |
| प्रधानाचार्या | रेवरेंड डॉ. सिस्टर सिंथिया |
| संदेश | मां से बड़ी कोई शक्ति नहीं, शिक्षा में सरस्वती प्रधान हो |
जयपुर की बेटियों के लिए इस शताब्दी का मतलब
सोफिया स्कूल शताब्दी समारोह का असली संदेश आंकड़ों में नहीं, बल्कि सोच में है। एक सौ साल तक किसी संस्थान का सिर्फ लड़कियों की पढ़ाई के लिए समर्पित रहना अपने आप में एक बड़ी बात है। आज जब राजस्थान में बालिका रोजगार अवसर और हुनर की पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है, तब सोफिया की परंपरा यह बताती है कि हुनर से पहले आत्मविश्वास चाहिए। जयपुर में नारी शक्ति सम्मेलन जैसे आयोजनों में भी यही बात दोहराई जाती है कि महिलाओं को मौके मिलने चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सोफिया स्कूल शताब्दी समारोह कहां आयोजित हुआ?
यह समारोह जयपुर के घाटगेट स्थित सेंट एंजेला सोफिया सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित हुआ।
शताब्दी महोत्सव कितने दिन का है?
यह तीन दिवसीय ‘स्वर्णिम शताब्दी महोत्सव’ है, जिसका आगाज शनिवार को हुआ।
समारोह के मुख्य अतिथि कौन थे?
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी इस समारोह के मुख्य अतिथि थे।
गुलाब कोठारी ने शिक्षा को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि मां से बड़ी कोई शक्ति नहीं है, शिक्षा में सरस्वती प्रधान होनी चाहिए, और बेटों-बेटियों को समान संस्कार दिए जाने चाहिए।
सोफिया स्कूल कितने साल पुराना है?
विद्यालय की यात्रा 1926 से 2026 तक, यानी पूरे 100 वर्ष की है।
निष्कर्ष
जयपुर के सोफिया स्कूल का शताब्दी समारोह एक सरल लेकिन गहरी बात सिखाता है: बेटियों की पढ़ाई पर किया गया निवेश कभी बेकार नहीं जाता। सौ साल पहले शुरू हुई एक परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है, क्योंकि उसने सिर्फ किताबें नहीं पढ़ाईं, बल्कि आत्मविश्वास, सम्मान और संस्कार दिए।