राजधानी जयपुर में रविवार दोपहर मौसम ने अचानक करवट बदल ली और शहर के कई हिस्सों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। जयपुर में ओलावृष्टि के चलते दोपहर में बाजार और सड़कों पर मौजूद लोगों को चौंकना पड़ा — धूप खिली दोपहर में अचानक काले बादल घिर आए और देखते ही देखते बारिश की बूंदों के साथ ओले गिरने लगे। मौसम विभाग के मुताबिक 18 अक्टूबर 2026 को प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ का असर बना हुआ था, जिसकी वजह से जयपुर के अलावा अजमेर, टोंक और बारां जिलों में भी बरसात दर्ज की गई।
अब सबसे राहत वाली खबर यह है कि सोमवार, 19 अक्टूबर से मौसम साफ रहने का पूर्वानुमान है और प्रदेश के किसी भी जिले के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।
सबसे पहले जानिए: जयपुर में ओलावृष्टि कहां-कहां हुई
जयपुर शहर में रविवार दोपहर बारिश और ओलावृष्टि का असर सबसे ज्यादा सी-स्कीम, जवाहर नगर और राजापार्क इलाकों में दिखा। इन पॉश और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में दोपहर के समय अचानक बादल छाए और बारिश शुरू हो गई, जिसके साथ ओले भी गिरे। सड़कों पर चल रहे लोगों को छतों और शेड्स की शरण लेनी पड़ी, वहीं कई जगह गाड़ियों की रफ्तार भी धीमी हो गई।
अजमेर के गगवाना गांव में शाम करीब 5:30 बजे भी बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई, हालांकि अजमेर शहर में दिनभर धूप खिली रही। टोंक और बारां जिलों में भी रविवार को बरसात की खबर मिली।
ओलावृष्टि क्यों हुई? पश्चिमी विक्षोभ की भूमिका
ओलावृष्टि कोई साधारण बारिश नहीं होती — इसके पीछे एक खास मौसमी तंत्र काम करता है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 18 अक्टूबर को राजस्थान पर पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव बना हुआ था। यह विक्षोभ भूमध्य सागर की तरफ से आने वाली हवाओं का एक तंत्र होता है, जो सर्दियों के मौसम में उत्तर भारत में बारिश और ओलावृष्टि की मुख्य वजह बनता है।
जब गर्म और ठंडी हवाएं टकराती हैं, तो वायुमंडल में ऊंचाई तक मजबूत संवहनीय धाराएं बनती हैं। इन्हीं धाराओं में पानी की बूंदें बर्फ की परतों में जमती जाती हैं और भारी होकर ओलों के रूप में नीचे गिरती हैं। यही वजह है कि ओलावृष्टि आमतौर पर गरज-चमक वाली तेज बारिश के साथ होती है।
मौसम विभाग ने रविवार के लिए करौली, सवाई माधोपुर, टोंक, बूंदी, कोटा और बारां — इन छह जिलों में बादल छाने के साथ कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया था। विभाग ने यह भी साफ किया था कि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का असर सीमित रहेगा।
तापमान का हाल: जयपुर में नरमी, बाड़मेर अब भी तप रहा
ओलावृष्टि और बारिश का सबसे साफ असर तापमान पर दिखा है। पूर्वी राजस्थान में बादलों और बरसात की वजह से पारा नीचे आया, जबकि पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी जिलों में गर्मी का असर बरकरार है। ताजा आंकड़ों पर एक नजर:
| शहर/जिला | अधिकतम तापमान | न्यूनतम तापमान | खास बात |
|---|---|---|---|
| जयपुर | 31.9°C | 22.3°C | दोपहर में बारिश के साथ ओले |
| बाड़मेर | 37.8°C | — | प्रदेश में सबसे ज्यादा गर्म |
| अजमेर (गगवाना) | — | — | शाम 5:30 बजे ओलावृष्टि |
| टोंक, बारां | — | — | हल्की बरसात दर्ज |
जयपुर में शनिवार को दिनभर मौसम साफ रहने के बाद देर शाम कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई थी। वहीं 17 अक्टूबर को बाड़मेर में 37.8 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश का सर्वाधिक अधिकतम तापमान दर्ज हुआ था।
सोमवार से आसमान साफ: मौसम विभाग का नया पूर्वानुमान
रविवार की ओलावृष्टि के बाद मौसम विभाग ने 18 अक्टूबर को जारी अपने ताजा बुलेटिन में सोमवार के लिए राहत भरी खबर दी है। पूर्वानुमान के मुताबिक 19 अक्टूबर को जयपुर में आसमान मुख्यतः साफ रहेगा और किसी भी तरह की चेतावनी जारी नहीं की गई है। यानी दीपावली की तैयारियों में जुटे शहरवासियों के लिए सोमवार का दिन अनुकूल रहेगा — 19 अक्टूबर के मौसम की विस्तृत जानकारी यहां पढ़ें।
पूर्वी राजस्थान में रविवार को गरज-चमक और तेज हवा जैसी मौसमी गतिविधियों की चेतावनी थी, लेकिन सोमवार से विभाग ने कोई चेतावनी जारी नहीं की है।
लेकिन एक और अहम जानकारी पर नजर रखनी होगी: मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में 23 और 24 अक्टूबर को एक नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है। अगर यह विक्षोभ मजबूत हुआ तो श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और चूरू जैसे जिलों में बादल और हल्की बारिश हो सकती है। इसके असर को लेकर आने वाले दिनों में नया पूर्वानुमान जारी होगा।
किसानों और आम लोगों के लिए खास सलाह
जयपुर में ओलावृष्टि जैसी घटना किसानों के लिए एक चेतावनी है — खरीफ की फसलें पककर तैयार खड़ी हैं और ओलों की मार फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। मौसम विभाग ने किसानों से कहा है कि पककर तैयार फसलों और खुले आसमान के नीचे रखे अनाज को बारिश से बचाने के उचित इंतजाम करें।
रबी सीजन की बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों के लिए 19 से 22 अक्टूबर का समय अनुकूल रहेगा — मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। लेकिन 23 अक्टूबर से पहले तैयार फसल को सुरक्षित जगह पहुंचा देना समझदारी होगी।
आम लोगों के लिए भी बुनियादी सावधानियां जरूरी हैं: मेघगर्जन के दौरान खुले मैदान, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें; यात्रा से पहले मौसम विभाग का ताजा अपडेट जरूर देखें — विस्तृत जिला-वार पूर्वानुमान IMD की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: जयपुर में ओलावृष्टि कब और कहां हुई?
जवाब: 18 अक्टूबर 2026 (रविवार) की दोपहर जयपुर के सी-स्कीम, जवाहर नगर और राजापार्क में बारिश के साथ ओले गिरे। शाम करीब 5:30 बजे अजमेर के गगवाना गांव में भी ओलावृष्टि हुई।
सवाल: ओलावृष्टि की वजह क्या थी?
जवाब: पश्चिमी विक्षोभ की वजह से गरज-चमक वाली बारिश हुई और वायुमंडल में मजबूत संवहनीय धाराओं के चलते ओले गिरे।
सवाल: सोमवार 19 अक्टूबर को राजस्थान का मौसम कैसा रहेगा?
जवाब: मौसम विभाग के मुताबिक 19 अक्टूबर को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आसमान साफ रहेगा और किसी जिले में कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।
सवाल: अगला पश्चिमी विक्षोभ कब आएगा?
जवाब: 23 और 24 अक्टूबर को उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में एक नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है। इससे श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और चूरू में हल्की बारिश हो सकती है — ताजा पूर्वानुमान पर नजर रखें।
कुल मिलाकर रविवार की जयपुर में ओलावृष्टि इस बात का संकेत है कि मौसम का मिजाज अक्टूबर में तेजी से बदल रहा है। सोमवार से भले ही आसमान साफ रहेगा, लेकिन 23-24 अक्टूबर के नए पश्चिमी विक्षोभ पर नजर बनाए रखनी चाहिए।