जयपुर डिजिटल हेल्थ समिट: AI-टेलीमेडिसिन से गांव तक पहुंचेगा विशेषज्ञ इलाज, 300 से ज्यादा डॉक्टरों ने साझा किया रोडमैप

जयपुर डिजिटल हेल्थ समिट में इस बार सबसे ज्यादा चर्चा किसी मशीन या ऐप की नहीं, बल्कि एक आम मरीज की हुई। वह मरीज जो विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलने के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर करता है, एक दिन की मजदूरी गंवाता है और फिर भी कई बार लंबी लाइन में नंबर नहीं पाता। जयपुर में आयोजित ग्लोबल एआई एंड डिजिटल हेल्थ समिट 2026 का मूल संदेश यही था कि तकनीक को यह दूरी खत्म करनी है। MGUMST जयपुर में टेलीमेडिसिन सोसाइटी ऑफ इंडिया की 22वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ यह तीन दिवसीय सम्मेलन हो रहा है, जिसमें देशभर से 300 से अधिक चिकित्सक और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

जयपुर डिजिटल हेल्थ समिट में मरीज को क्या मिलेगा

टेलीमेडिसिन का मतलब सिर्फ वीडियो कॉल नहीं है। इसका असली फायदा तब है जब गांव के स्वास्थ्य केंद्र पर बैठा मरीज भी शहर के विशेषज्ञ की राय पा सके। इसी सोच से आभा आईडी और ई-संजीवनी का जिक्र हुआ, जिनसे घर बैठे या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से डॉक्टर से परामर्श लिया जा सकता है।

टेलीमेडिसिन सोसाइटी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनील श्रॉफ ने कहा कि डिजिटल माध्यम से इलाज की लागत और मरीज के आने-जाने का समय दोनों बचते हैं। दूरदराज के इलाकों में, जहां विशेषज्ञ आसानी से नहीं मिलते, वहां टेलीमेडिसिन ही सबसे व्यावहारिक रास्ता है। राजस्थान के लिए यह खास तौर पर अहम है, जहां जिला मुख्यालय तक पहुंचना ही कई परिवारों के लिए एक दिन का काम है।

डॉक्टर की जगह नहीं लेगी तकनीक, यही रही समिट की चेतावनी

समिट का दूसरा संदेश सावधानी का था। विशिष्ट अतिथि डॉ. अचल गुलाटी ने कहा कि नई तकनीक तभी काम की है जब वह चिकित्सकीय विशेषज्ञता के साथ जिम्मेदारी से जुड़े। एआई रिपोर्ट पढ़ने या रिकॉर्ड संभालने में मदद कर सकता है, लेकिन अंतिम फैसला डॉक्टर का ही होगा और रोगी की मानवीय संवेदना हमेशा इलाज के केंद्र में रहनी चाहिए।

नेशनल हेल्थ मिशन की एडिशनल मेडिकल डायरेक्टर डी.टी. शुभमंगला ने कहा कि तकनीक तभी सफल होगी जब वह सरकारी स्वास्थ्य ढांचे के अंदर मजबूती से जुड़े, अलग-थलग ऐप बनकर नहीं रहे। मरीज का स्वास्थ्य डेटा संवेदनशील है, इसलिए उसे कौन देख सकता है, इस पर भी साफ नियम जरूरी हैं।

जयपुर डिजिटल हेल्थ समिट: MGUMST में तीन दिन क्या हो रहा है

तीन दिवसीय सम्मेलन का आयोजन टेलीमेडिसिन सोसाइटी ऑफ इंडिया के राजस्थान स्टेट चैप्टर द्वारा MGUMST के सहयोग से किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र आर.एल. स्वर्णकार ऑडिटोरियम में खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने किया। उन्होंने कहा कि एआई और डिजिटल तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बना रही हैं और आगे इनका उपयोग और व्यापक होगा।

सम्मेलन का नेतृत्व आयोजन अध्यक्ष डॉ. धनंजय के. मंगल और आयोजन सचिव डॉ. अभिषेक जादौन कर रहे हैं। उद्घाटन में टेलीमेडिसिन सोसाइटी ऑफ इंडिया की वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन हुआ और महात्मा गांधी अस्पताल की टेलीमेडिसिन सेवाओं की जानकारी भी दी गई।

जयपुर डिजिटल हेल्थ समिट: मुख्य तथ्य विवरण
आयोजन टेलीमेडिसिन सोसाइटी ऑफ इंडिया की 22वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस एवं ग्लोबल एआई एंड डिजिटल हेल्थ समिट 2026
स्थान MGUMST, जयपुर (आर.एल. स्वर्णकार ऑडिटोरियम)
अवधि तीन दिवसीय सम्मेलन
प्रतिभागी देशभर से 300 से अधिक चिकित्सक, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, एआई विशेषज्ञ, शोधकर्ता और शिक्षाविद
मुख्य अतिथि कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़
प्रमुख विषय टेलीमेडिसिन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आभा आईडी, ई-संजीवनी, डेटा सिस्टम और सार्वजनिक स्वास्थ्य

राजस्थान के गांवों के लिए जयपुर डिजिटल हेल्थ समिट क्यों अहम है

राजस्थान में स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चुनौती दूरी और विशेषज्ञों की कमी है। सामान्य बीमारी के लिए भी मरीज को जिला अस्पताल जाना पड़ता है, क्योंकि प्राथमिक केंद्र पर विशेषज्ञ नहीं होता। अगर गांव के स्वास्थ्य केंद्र से ही विशेषज्ञ की राय मिल जाए तो मरीज का समय, किराया और मजदूरी तीनों बचते हैं और गंभीर मरीज को समय पर बड़े अस्पताल रेफर किया जा सकता है।

डेटा भी इसमें अहम है। जब मरीज का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहता है तो हर बार पूरी कहानी दोहरानी नहीं पड़ती और गलत दवा या दोहरी जांच का खतरा घटता है। प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी पुरानी खबरों में जिला अस्पतालों में स्टाफ की कमी बार-बार सामने आई है, इसलिए टेलीमेडिसिन जादू की छड़ी नहीं, बल्कि मौजूदा ढांचे की पहुंच बढ़ाने का व्यावहारिक साधन है। इसके लिए गांव के केंद्रों पर इंटरनेट, प्रशिक्षित कार्यकर्ता और विशेषज्ञों का नियमित समय तीनों चाहिए।

मरीज घर बैठे ऑनलाइन परामर्श कैसे ले सकता है

जयपुर डिजिटल हेल्थ समिट में चर्चा हुई ई-संजीवनी भारत सरकार की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा है, जिसके दो रूप हैं। पहला, ई-संजीवनी ओपीडी, जिसमें मरीज खुद घर से वीडियो परामर्श ले सकता है। दूसरा, स्वास्थ्य केंद्रों के जरिये डॉक्टर-से-डॉक्टर परामर्श, जिसमें गांव के केंद्र का कार्यकर्ता मरीज को बड़े अस्पताल के विशेषज्ञ से जोड़ता है। पंजीकरण के बाद वीडियो कॉल पर परामर्श होता है और डिजिटल पर्चा मिलता है। आधिकारिक पोर्टल ई-संजीवनी पर जाकर इस सेवा का उपयोग किया जा सकता है।

सावधानी भी जरूरी है। ऑनलाइन परामर्श सामान्य बीमारियों और फॉलो-अप के लिए उपयोगी है, लेकिन सांस की तकलीफ, सीने में दर्द या गंभीर चोट जैसी आपात स्थिति में सीधे नजदीकी अस्पताल जाएं। सरकारी सेवा के नाम पर भुगतान मांगने वाले किसी भी अनजान लिंक पर भरोसा न करें, हमेशा आधिकारिक पोर्टल का ही उपयोग करें।

आगे क्या देखना होगा

जयपुर डिजिटल हेल्थ समिट के बाद असली परीक्षा जमीन पर होगी। क्या गांवों के स्वास्थ्य केंद्रों पर टेलीमेडिसिन नियमित मिलेगी, क्या विशेषज्ञों का समय तय होगा और क्या मरीजों को इसकी जानकारी मिलेगी, यही तय करेगा कि यह सम्मेलन भाषणों तक सीमित रहा या मरीज तक पहुंचा। इसमें उत्साह भी है और चेतावनी भी: तकनीक गांव तक विशेषज्ञ इलाज पहुंचा सकती है, लेकिन उसे डॉक्टर और मरीज के भरोसे की जगह नहीं लेनी चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जयपुर डिजिटल हेल्थ समिट 2026 कहां हो रहा है?
यह सम्मेलन जयपुर स्थित MGUMST में हो रहा है, जिसका आयोजन टेलीमेडिसिन सोसाइटी ऑफ इंडिया के राजस्थान स्टेट चैप्टर द्वारा MGUMST के सहयोग से किया जा रहा है।

समिट में कितने लोग भाग ले रहे हैं?
तीन दिवसीय सम्मेलन में देशभर से 300 से अधिक चिकित्सक, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और एआई विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

टेलीमेडिसिन से आम मरीज को क्या फायदा होगा?
टेलीमेडिसिन से मरीज का समय और खर्च बचता है और दूरदराज के इलाकों में भी विशेषज्ञ की राय मिल सकती है।

क्या एआई डॉक्टर की जगह ले लेगा?
नहीं। समिट में साफ कहा गया कि एआई डॉक्टर की मदद कर सकता है, लेकिन अंतिम फैसला डॉक्टर का ही होगा।

स्रोत: सच कहूँ न्यूज़ और संचार जगत में 31 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित सम्मेलन की रिपोर्ट।

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