चित्तौड़गढ़-जयपुर में अवैध पटाखा फैक्ट्री का भंडाफोड़: 15 क्विंटल बारूद, 9 गिरफ्तार

दीवाली से ठीक पहले राजस्थान पुलिस ने दो शहरों में ऐसी कार्रवाई की है, जिसने एक बड़े हादसे को पहले ही टाल दिया। सबसे बड़ा खुलासा चित्तौड़गढ़ अवैध पटाखा फैक्ट्री का हुआ — जहां खेत के बीच बने एक मकान में करीब 15 क्विंटल बारूद और तैयार पटाखों का जखीरा छिपाकर रखा गया था। वहीं राजधानी जयपुर में भी पुलिस ने अवैध पटाखा फैक्ट्री और उससे जुड़े तीन गोदामों को सीज कर 1432 किलो तैयार पटाखे जब्त किए हैं। दोनों जगहों की कार्रवाई को मिलाकर देखें, तो त्योहारी सीजन में बाजार तक पहुंचने से पहले ही टनों विस्फोटक सामग्री रोक ली गई।

यह सिर्फ एक खबर नहीं है — यह हर उस घर के लिए चेतावनी है जो दीवाली पर पटाखे खरीदता है। बिना लाइसेंस बना एक भी पटाखा कब बड़ा धमाका कर जाए, कोई नहीं जानता। आइए जानते हैं दोनों कार्रवाइयों का पूरा ब्योरा, पुलिस ने कैसे भंडाफोड़ किया और कानून इस अपराध पर क्या सजा तय करता है।

चित्तौड़गढ़ अवैध पटाखा फैक्ट्री: खेत के बीच बने मकान में चल रहा था धंधा

जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह के मुताबिक, जिला विशेष दल (डीएसटी) के प्रभारी एएसआई सूरज कुमार को 16 अक्टूबर को मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी कि डूंगला थाना क्षेत्र में कसारना गांव से गुर्जनियां जाने वाले रास्ते पर एक खेत में बने मकान में बिना लाइसेंस विस्फोटक सामग्री रखी गई है और वहीं पटाखे भी बनाए जा रहे हैं। पुष्टि के बाद डीएसटी और डूंगला थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने दबिश दी।

तलाशी में तैयार सुतली बम के 3 कट्टे, तैयार नलियों वाले बारूदी पटाखों के 9 कट्टे, बारूद से भरे 14 कट्टे और 2 कार्टन, सुतली के 11 कट्टे, खाली पटाखा नलियों के 25 कट्टे और कच्चे माल के 15 कट्टे मिले। जांच में साफ हुआ कि आरोपियों के पास पटाखा निर्माण या विस्फोटक भंडारण का कोई वैध लाइसेंस नहीं था। पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया, 2 नाबालिगों को निरुद्ध किया और कथित मास्टरमाइंड को नामजद किया है।

पुलिस अब यह पता लगा रही है कि बारूद कहां से लाया गया, तैयार माल किन बाजारों में सप्लाई होना था और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।

जयपुर के जयसिंहपुरा खोर में ‘मैजिक फायर वर्क्स’ के 3 गोदाम सीज

उधर राजधानी जयपुर में भी पुलिस ने शनिवार दोपहर बड़ी कार्रवाई की। डीसीपी (नॉर्थ) करण शर्मा के अनुसार, सेंट्रल स्पेशल टीम (CST) को सूचना मिली थी कि जयसिंहपुरा खोर इलाके में ‘मैजिक फायर वर्क्स’ नाम की कंपनी अवैध रूप से विस्फोटक सामग्री का निर्माण और भंडारण कर रही है।

पुख्ता सूचना पर सीएसटी और स्थानीय पुलिस ने कंपनी के तीन गोदामों पर छापा मारकर उन्हें सीज कर दिया। इनसे विभिन्न ब्रांडों के 1432 किलोग्राम तैयार अवैध पटाखे जब्त हुए। साथ ही अवैध पटाखा फैक्ट्री को भी सीज किया गया, जहां से 190 किलोग्राम कच्चा माल और उपकरण कब्जे में लिए गए।

फैक्ट्री संचालक जहीर अहमद के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज है। संचालक फरार बताया जा रहा है और उसकी तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। पुलिस का कहना है कि त्योहारी सीजन में इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक पकड़े जाने से एक बड़ा हादसा टल गया है।

दोनों कार्रवाइयों की जब्ती — एक नजर में

चित्तौड़गढ़ अवैध पटाखा फैक्ट्री और जयपुर की कार्रवाई में जब्त सामग्री का हिसाब इस प्रकार है:

विवरण चित्तौड़गढ़ (डूंगला) जयपुर (जयसिंहपुरा खोर)
कुल विस्फोटक सामग्री लगभग 15 क्विंटल बारूद 1432 किलो तैयार पटाखे + 190 किलो कच्चा माल
गिरफ्तारी/कार्रवाई 9 गिरफ्तार, 2 नाबालिग निरुद्ध, मास्टरमाइंड नामजद 3 गोदाम सीज, फैक्ट्री सीज, संचालक के खिलाफ केस, फरार
सूचना का स्रोत डीएसटी प्रभारी को मुखबिर से सूचना (16 अक्टूबर) सीएसटी को सूचना
कार्रवाई करने वाली टीम डीएसटी + डूंगला थाना पुलिस सीएसटी + स्थानीय पुलिस
जगह खेत में बना मकान, कसारना-गुर्जनियां रोड ‘मैजिक फायर वर्क्स’ के गोदाम

बिना लाइसेंस का बारूद कितना बड़ा खतरा?

सवाल यह है कि खेत में छिपाकर रखे गए 15 क्विंटल बारूद से कितना बड़ा खतरा था? इतनी मात्रा का विस्फोटक एक साथ फट जाए तो कई सौ मीटर के दायरे में तबाही मचा सकता है। बारूद, गंधक और अन्य रसायन अत्यंत संवेदनशील होते हैं — हल्की चिंगारी या ज्यादा तापमान भी विस्फोट को ट्रिगर कर सकता है। हाल ही में उदयपुर-चित्तौड़गढ़ हाईवे पर बारूद से भरे कंटेनर में लगी भीषण आग ने दिखाया था कि विस्फोटक से जुड़ी छोटी सी चूक भी कितनी जानलेवा हो सकती है।

जयपुर में भी पुलिस लगातार सक्रिय है — हाल ही में ऑपरेशन म्यूल हंटर में 21 साइबर ठगों की गिरफ्तारी के बाद यह कार्रवाई पुलिस की सख्ती का एक और उदाहरण है।

विस्फोटक अधिनियम में क्या है सजा का प्रावधान?

भारत में विस्फोटक सामग्री के निर्माण, भंडारण और बिक्री को विस्फोटक अधिनियम, 1884 और विस्फोटक नियम, 2008 के तहत सख्ती से नियंत्रित किया जाता है। पटाखों के निर्माण के लिए पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से लाइसेंस लेना अनिवार्य है। बिना लाइसेंस विस्फोटक रखने या बनाने पर तीन साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। लाइसेंस की प्रक्रिया और नियमों की विस्तृत जानकारी पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

प्रशासन की नजर बिना अनुमति के चलने वाले हर कारोबार पर है — हाल ही में जयपुर में बिना लाइसेंस चल रही अवैध अल्कलाइन वाटर फैक्ट्री को भी सीज किया गया था। त्योहारी सीजन में लोग केवल अधिकृत और लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही पटाखे खरीदें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: चित्तौड़गढ़ में अवैध पटाखा फैक्ट्री कहां चल रही थी?
उत्तर: डूंगला थाना क्षेत्र में कसारना गांव से गुर्जनियां जाने वाले रास्ते पर एक खेत में बने मकान में बिना लाइसेंस पटाखे बनाए जा रहे थे। पुलिस ने वहां से 15 क्विंटल बारूद समेत भारी मात्रा में सामग्री जब्त की है।

प्रश्न: जयपुर में कितनी विस्फोटक सामग्री जब्त हुई?
उत्तर: जयसिंहपुरा खोर में ‘मैजिक फायर वर्क्स’ के 3 गोदामों से 1432 किलो तैयार पटाखे और 190 किलो कच्चा माल जब्त कर गोदामों को सीज किया गया है।

प्रश्न: इस मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए?
उत्तर: चित्तौड़गढ़ में 9 आरोपी गिरफ्तार और 2 नाबालिग निरुद्ध किए गए हैं, जबकि मास्टरमाइंड को नामजद किया गया है। जयपुर में फैक्ट्री संचालक जहीर अहमद के खिलाफ मामला दर्ज है और वह फरार है।

प्रश्न: अवैध पटाखा फैक्ट्री की सूचना कहां दें?
उत्तर: अपने क्षेत्र के थाने, पुलिस कंट्रोल रूम या 100/112 नंबर पर सूचना दें। विस्फोटक सामग्री को खुद छूने या हटाने की कोशिश न करें — यह जानलेवा हो सकता है।

दीवाली खुशियों का त्योहार है, धमाकों का नहीं। चित्तौड़गढ़ अवैध पटाखा फैक्ट्री जैसे मामलों पर पुलिस की कार्रवाई ने एक संभावित त्रासदी को रोका है, लेकिन असली सुरक्षा तब होगी जब हर खरीदार जिम्मेदारी से काम लेगा — केवल लाइसेंसधारी दुकान से पटाखे खरीदें, बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें।

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