देशभर से 6,175 कलाकृतियां आईं। उनमें से सिर्फ 270 को प्रदर्शनी में जगह मिली। और राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुने गए महज 20 कलाकार। इन्हीं चुनिंदा 20 नामों में एक नाम राजस्थान का भी है — टेराकोटा एवं दृश्य कला के कलाकार चंद्रशेखर सैन का। उनकी टेराकोटा कलाकृति ‘My Entire World – I’ को 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है, और यह सम्मान उन्हें खुद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में प्रदान किया। मिट्टी जैसे पारंपरिक माध्यम से समकालीन कला की दुनिया में यह उपलब्धि राजस्थान के लिए गर्व का बड़ा मौका है।
6175 दावेदार, सिर्फ 20 विजेता: आंकड़ों में समझिए कितनी बड़ी है यह जीत
राष्ट्रीय कला पुरस्कार की प्रतिस्पर्धा कितनी कठिन होती है, इसका अंदाजा इन आंकड़ों से लगाइए। 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के लिए देशभर से कुल 6,175 प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं। आयोजकों के मुताबिक, इनमें से 270 कलाकृतियों का चयन प्रदर्शनी के लिए किया गया — यानी करीब 96 प्रतिशत प्रविष्टियां पहले ही दौर में बाहर हो गईं। और फिर इन 270 में से सिर्फ 20 कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया।
| विवरण | आंकड़ा |
|---|---|
| कुल प्रविष्टियां | 6,175 |
| प्रदर्शनी के लिए चयनित कलाकृतियां | 270 |
| राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता | 20 |
| पुरस्कृत कलाकृति | ‘My Entire World – I’ (टेराकोटा) |
| सम्मानकर्ता | राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू |
| समारोह स्थल | डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली |
इन आंकड़ों से साफ है कि यह पुरस्कार सिर्फ एक प्रशस्ति पत्र नहीं, बल्कि देश के सबसे कठिन कला-मूल्यांकन में शीर्ष स्थान पाने जैसा है। चंद्रशेखर सैन का इस सूची में होना उनकी कलात्मक प्रतिभा, मौलिक सोच और टेराकोटा कला के क्षेत्र में लंबे योगदान को रेखांकित करता है।
‘My Entire World – I’: मिट्टी में ढली प्रकृति, जीवन और स्मृतियां
जिस कलाकृति ने यह राष्ट्रीय सम्मान दिलाया, उसका नाम है ‘My Entire World – I’। यह टेराकोटा माध्यम में तैयार एक विशिष्ट रचना है। कलाकार ने इसमें प्रकृति, जीवन, स्मृतियों और मानवीय भावनाओं को समकालीन कला-दृष्टि के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। पारंपरिक कला-माध्यम और आधुनिक विचारों का प्रभावशाली समन्वय ही इस रचना की सबसे बड़ी खासियत बताई जा रही है। जूरी ने इसी रचनात्मकता और मौलिक अभिव्यक्ति को पुरस्कार के योग्य पाया।
दिल्ली में सम्मान समारोह: राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार, ये दिग्गज रहे मौजूद
पुरस्कार समारोह नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित हुआ, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चंद्रशेखर सैन को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया। समारोह में कला और संस्कृति जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। इनमें केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल भी शामिल थे।
इस प्रदर्शनी और पुरस्कारों का आयोजन ललित कला अकादमी, नई दिल्ली की ओर से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में किया जाता है। राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का उद्देश्य देश के उत्कृष्ट कलाकारों की रचनात्मक उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करना और भारतीय कला की विविधता को मंच प्रदान करना है। 65वें संस्करण तक पहुंची यह प्रदर्शनी देश की सबसे प्रतिष्ठित कला-प्रतियोगिताओं में गिनी जाती है।
कौन हैं चंद्रशेखर सैन: मिट्टी के माध्यम से राष्ट्रीय पहचान
चंद्रशेखर सैन राजस्थान के प्रख्यात टेराकोटा एवं दृश्य कला कलाकार हैं। वे लंबे समय से टेराकोटा और दृश्य कला के क्षेत्र में सक्रिय हैं और उन्होंने मिट्टी जैसे पारंपरिक माध्यम को समकालीन अभिव्यक्ति से जोड़कर अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी कलाकृतियों में राजस्थान की पारंपरिक मिट्टी-कला और आधुनिक कलात्मक चिंतन का मेल साफ दिखाई देता है।
राष्ट्रीय पुरस्कार से पहले भी सैन की रचनाएं कला-जगत में चर्चा का विषय रही हैं, लेकिन राष्ट्रपति के हाथों मिला यह सम्मान उनके करियर का अब तक का सबसे बड़ा मुकाम माना जा रहा है। राजस्थान के कला-समुदाय में इस खबर को लेकर खुशी का माहौल है, क्योंकि राष्ट्रीय मंच पर प्रदेश की मिट्टी-कला को इस स्तर की पहचान कम ही मिलती है।
राजस्थान की टेराकोटा परंपरा: प्राचीन कला का समकालीन चेहरा
राजस्थान की मिट्टी-कला की परंपरा सदियों पुरानी है — गांवों में बनने वाले मिट्टी के बर्तन, पशु-पक्षियों की आकृतियां और धार्मिक मूर्तियां इसका जीवंत प्रमाण हैं। लेकिन चंद्रशेखर सैन जैसे कलाकारों ने इस लोक-शिल्प को गैलरी और राष्ट्रीय प्रदर्शनियों तक पहुंचाया है। टेराकोटा शिल्प आज भी प्रदेश के हस्तशिल्प मेलों और हाट-बाजारों में खरीदारों की पहली पसंद बना हुआ है, और अब राष्ट्रीय पुरस्कार ने इसे एक नई प्रतिष्ठा दी है।
कला-विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई पारंपरिक माध्यम राष्ट्रीय पुरस्कार जीतता है, तो उसका असर सिर्फ एक कलाकार तक सीमित नहीं रहता। इससे उस विधा से जुड़े हजारों कारीगरों और शिल्पकारों का मनोबल बढ़ता है, और युवा पीढ़ी भी पारंपरिक कलाओं को करियर के रूप में देखने लगती है। राजस्थान में कला-संस्कृति के आयोजनों की लगातार बढ़ती श्रृंखला के बीच यह उपलब्धि प्रदेश की सांस्कृतिक छवि को और मजबूत करती है।
ललित कला अकादमी और 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी
ललित कला अकादमी भारत की राष्ट्रीय ललित कला अकादमी है, जो देश में दृश्य कलाओं के प्रोत्साहन और संरक्षण का शीर्ष संस्थान है। इसकी राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी हर साल आयोजित होती है और इसमें चित्रकला, मूर्तिकला, ग्राफिक्स, फोटोग्राफी सहित दृश्य कला की तमाम विधाओं की श्रेष्ठ रचनाएं शामिल होती हैं। 65वां संस्करण इस परंपरा की निरंतरता और विस्तार दोनों का प्रतीक है — 6,175 प्रविष्टियों का आंकड़ा बताता है कि देशभर के कलाकार इस मंच को कितना महत्व देते हैं।
चंद्रशेखर सैन की जीत इस मायने में भी खास है कि टेराकोटा जैसे माध्यम को अक्सर ‘शिल्प’ की श्रेणी में रखकर ललित कला से अलग देखा जाता रहा है। राष्ट्रीय पुरस्कार ने इस धारणा को तोड़ा है और साबित किया है कि माध्यम कोई भी हो — मौलिक अभिव्यक्ति ही असली कला है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: चंद्रशेखर सैन को कौन सा पुरस्कार मिला है?
उत्तर: उन्हें 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। यह सम्मान उनकी टेराकोटा कलाकृति ‘My Entire World – I’ के लिए दिया गया।
प्रश्न: पुरस्कार किसने प्रदान किया और समारोह कहां हुआ?
उत्तर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किया।
प्रश्न: इस पुरस्कार के लिए कितनी प्रविष्टियां आई थीं?
उत्तर: देशभर से 6,175 प्रविष्टियां मिली थीं, जिनमें से 270 कलाकृतियां प्रदर्शनी के लिए चुनी गईं और सिर्फ 20 कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
प्रश्न: चंद्रशेखर सैन किस कला-विधा से जुड़े हैं?
उत्तर: वे राजस्थान के टेराकोटा एवं दृश्य कला कलाकार हैं। उनकी रचनाओं में पारंपरिक मिट्टी-कला और समकालीन कलात्मक चिंतन का मेल दिखाई देता है।
स्रोत: अमर उजाला