जयपुर में अल्का लांबा का बड़ा आरोप: अमित शाह 1 नवंबर की रैली को फेल करना चाहते हैं

दिल्ली में 1 नवंबर को होने वाली INDIA गठबंधन की रैली से ठीक पहले जयपुर से एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। अल्का लांबा जयपुर में महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाया कि रैली को कामयाब नहीं होने दिया जा रहा है। उनके मुताबिक, भीड़ का आंकड़ा घटाने के लिए तैयारियों को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है।

सबसे बड़ा दांव उन्होंने 30 अक्टूबर की तारीख पर लगाया है। लांबा ने कहा कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार 30 अक्टूबर तक इस्तीफा दे देते हैं, तो 1 नवंबर की रैली तुरंत वापस ले ली जाएगी। अगर इस्तीफा नहीं आता है, तो कांग्रेस का दावा है कि रामलीला मैदान में दस लाख लोग जुटेंगे। यह बयान 28 अक्टूबर को जयपुर में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में दिया गया।

30 अक्टूबर की डेडलाइन: इस्तीफा हुआ तो रैली वापस

लांबा के अनुसार, राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को यह संदेश दिया है कि अगर ज्ञानेश कुमार 30 अक्टूबर तक अपने पद से इस्तीफा दे देते हैं, तो 1 नवंबर की रैली तुरंत रद्द कर दी जाएगी। इसका मतलब यह निकाला जा रहा है कि कांग्रेस के लिए रैली मकसद नहीं, बल्कि दबाव का साधन है — और असली निशाना चुनाव आयोग के मुखिया का पद है। 30 अक्टूबर को कांग्रेस CEC के खिलाफ ‘जन महाभियोग’ का कार्यक्रम भी करेगी। अगर इस्तीफा नहीं आता है, तो लांबा का दावा है कि आंदोलन और तेज होगा और विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक कुमार पद से नहीं हटते।

अल्का लांबा जयपुर में: शाह पर लगे आरोपों की कहानी

जयपुर में पत्रकारों से बात करते हुए लांबा ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में दिल्ली पुलिस मुख्यालय जाकर पुलिस आयुक्त और दूसरे बड़े अधिकारियों से मुलाकात की थी। उनका आरोप है कि शाह ने आयुक्त को अपने दफ्तर बुलाने के बजाय खुद जाकर मुलाकात की, और इस मुलाकात के पीछे मकसद रैली में आने वाली भीड़ को रोकने के निर्देश देना हो सकता है।

शाह की मुलाकात का बताया गया मकसद लांबा का आरोप और आशंका है, साबित तथ्य नहीं। दिल्ली पुलिस या गृह मंत्रालय की ओर से इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया इस खबर में दर्ज नहीं है। फिर भी, यह आरोप इसलिए बड़ा है, क्योंकि यह सीधे गृह मंत्री पर और रैली से ठीक चार दिन पहले लगाया गया है।

12 अक्टूबर का हवाला: 56 मेट्रो स्टेशन बंद होने का दावा

अपने आरोप को मजबूत करने के लिए लांबा ने 12 अक्टूबर की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस दिन जब युवा संगठनों ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की थी, तो दिल्ली में 56 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए, सैकड़ों ट्रेनें रद्द हुईं और बाजार बंद कराए गए। उनके मुताबिक, यह सब विरोध को दबाने की रणनीति का हिस्सा था, और अब 1 नवंबर की रैली के साथ भी वही दोहराया जा सकता है।

कांग्रेस की तीन मांगें: CEC, बैलेट पेपर और SIR

रैली की मांगों को लांबा ने तीन हिस्सों में बांटकर समझाया। पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है — और सिर्फ इस्तीफा ही नहीं, बल्कि उन्हें जेल भेजने की मांग भी की गई है। दूसरी मांग 2029 के लोकसभा चुनाव बैलेट पेपर से कराने की है। तीसरी मांग देशभर में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को वापस लेने की है।

मांग कांग्रेस का तर्क क्या चाहती है पार्टी
मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा चुनाव आयोग के फैसले एकतरफा हो रहे हैं ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और उन पर कार्रवाई हो
बैलेट पेपर से चुनाव ईवीएम पर जनता का भरोसा घट रहा है 2029 का लोकसभा चुनाव बैलेट पेपर से हो
SIR प्रक्रिया की वापसी सूची से नाम काटना वोट चोरी का जरिया है देशभर में SIR प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए

बैलेट पेपर की मांग के पीछे लांबा ने मध्य प्रदेश और हरियाणा के मतदाताओं के दावे का हवाला दिया। उनके अनुसार, वहां कई मतदाताओं ने कहा था कि उन्होंने कांग्रेस को वोट दिया था, लेकिन वोट भाजपा के खाते में दर्ज हुआ। SIR को लेकर उनका दावा है कि ‘घुसपैठिया’ बताकर 33 करोड़ तक नाम सूची से काटे गए हैं — इसकी स्वतंत्र पुष्टि इस लेख में नहीं की गई है।

राजस्थान से भागीदारी: महिलाएं आगे, सबसे बड़ा जत्था

जयपुर में दिए गए बयान में राजस्थान का जिक्र खास तौर पर हुआ। लांबा ने भरोसा जताया कि दिल्ली की रैली में राजस्थान से सबसे बड़ा जत्था जाएगा। उन्होंने महिलाओं से इस लड़ाई में आगे आने की अपील की। महिला कांग्रेस ने रैली के लिए अपना अलग लक्ष्य भी रखा है — देशभर से 50,000 महिला कार्यकर्ताओं के दिल्ली पहुंचने का दावा किया गया है।

जयपुर में INDIA गठबंधन की बैठक में 1 नवंबर की रैली की तैयारी पर पहले भी चर्चा हो चुकी है।

आगे क्या: 30 अक्टूबर और 1 नवंबर की दो तारीखें

अगले तीन दिन इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे। 30 अक्टूबर को कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ‘जन महाभियोग’ का कार्यक्रम करेगी, उसी दिन इस्तीफे पर भी स्थिति साफ होगी। अगर इस्तीफा नहीं आता है, तो 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में दस लाख लोगों की भीड़ जुटाने का दावा किया जा रहा है।

राजस्थान के लिहाज से भी ये तारीखें अहम हैं, क्योंकि राज्य से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के दिल्ली जाने की तैयारी है। कांग्रेस का कहना है कि रैली शांतिपूर्ण होगी। इससे पहले भी कांग्रेस वोटर सूची के मुद्दे पर सड़क पर उतर चुकी है — सचिन पायलट ने चुनाव आयोग पर ‘वोटबंदी’ का आरोप लगाया था। अब अल्का लांबा का बयान उसी अभियान को आगे बढ़ाता है। इस खबर के तथ्य ETV Bharat की 28 अक्टूबर की रिपोर्ट पर आधारित हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1 नवंबर की रैली कहां और क्यों हो रही है?
INDIA गठबंधन की रैली 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होगी। यह रैली ‘वोट चोरी’ और चुनाव आयोग के खिलाफ है; दस लाख लोगों का लक्ष्य है।

अल्का लांबा ने अमित शाह पर क्या आरोप लगाया है?
लांबा का आरोप है कि अमित शाह दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से मिलकर रैली को फेल करने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्र की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

30 अक्टूबर की डेडलाइन का क्या मतलब है?
अगर ज्ञानेश कुमार 30 अक्टूबर तक इस्तीफा दे देते हैं, तो रैली तुरंत वापस ले ली जाएगी। नहीं तो रैली तय कार्यक्रम के अनुसार होगी।

कांग्रेस की तीन मांगें क्या हैं?
पहली, मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा और उन पर कार्रवाई। दूसरी, 2029 का लोकसभा चुनाव बैलेट पेपर से कराना। तीसरी, देशभर में SIR प्रक्रिया को वापस लेना।

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