राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सहायक प्रोफेसर भर्ती के 847 पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ

राजस्थान के हजारों डॉक्टर-शिक्षकों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत की खबर आई है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने चिकित्सा शिक्षा विभाग में सहायक प्रोफेसर भर्ती 847 पद पर लगी कानूनी अड़चन दूर कर दी है। अदालत ने राज्य सरकार और आरपीएससी की अपील स्वीकार करते हुए एकलपीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें 2021 की भर्ती का परिणाम निरस्त करके संशोधित नियमों के तहत दोबारा जारी करने को कहा गया था। अब दोनों भर्तियों की अटकी नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

सीधे शब्दों में कहें तो आयोग के सामने वह कानूनी दीवार अब नहीं रही, जिसकी वजह से करीब 847 पदों पर नियुक्तियां लटकी थीं। हालांकि अंतिम नियुक्ति पत्र विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मिलेगा, इसलिए रफ्तार आरपीएससी और विभाग की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

सहायक प्रोफेसर भर्ती: 847 पदों का पूरा गणित

दो अलग-अलग भर्तियां एक-दूसरे से जुड़ी थीं, इसलिए एक का अटकना दूसरे को भी रोक रहा था। खंडपीठ के फैसले से दोनों का रास्ता एक साथ खुला है।

भर्ती पदों की संख्या स्थिति
सहायक प्रोफेसर भर्ती, वर्ष 2021 397 पद (43 विषय) परिणाम विवादित; एकलपीठ ने निरस्त किया था
सहायक प्रोफेसर भर्ती, वर्ष 2025 करीब 450 पद 2021 के विवाद से नियुक्तियां रुकी थीं
कुल करीब 847 पद नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह ने पक्ष रखा; खंडपीठ में जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा शामिल थे।

अभ्यर्थियों के लिए इस फैसले का सीधा मतलब

सबसे बड़ा फायदा उन अभ्यर्थियों को होगा, जो दोनों भर्तियों में शामिल थे। अगर किसी अभ्यर्थी को पहले 2025 की भर्ती में नियुक्ति मिल जाती और बाद में उसका चयन 2021 की भर्ती में भी हो जाता, तो वरिष्ठता को लेकर कानूनी विवाद खड़े हो सकते थे। इसीलिए आयोग 2025 की भर्ती पर नियुक्तियां जारी करने से हिचक रहा था। अब यह पेंच सुलझ गया है।

दूसरा फायदा यह है कि 2021 की भर्ती का पुराना परिणाम अब संशोधित नियमों के तहत दोबारा बनाने की बाध्यता खत्म हो गई है। चयन प्रक्रिया उसी ढांचे में आगे बढ़ेगी, जिसमें वह शुरू हुई थी, और नियम बदलने से मेरिट स्थिति पलटने का डर खत्म हो गया है।

विवाद की जड़: 2021 के विज्ञापन से शुरू हुई कहानी

पूरा मामला 27 नवंबर 2021 के भर्ती विज्ञापन से जुड़ा है, जिसके जरिए 43 विषयों के 397 पदों पर सहायक प्रोफेसर की भर्ती होनी थी। इसी प्रक्रिया में डॉ. रचिता माथुर ने स्किन एंड वीडी विषय में आवेदन किया था, जिसमें केवल तीन पद थे। आवेदनों की संख्या अधिक होने से आरपीएससी ने 6 मई 2022 को स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित की।

10 मई 2022 को आयोग की बैठक में अंतिम चयन के लिए अंकों का भार तय हुआ: स्क्रीनिंग टेस्ट 40 प्रतिशत, शैक्षणिक अंक 20 प्रतिशत और साक्षात्कार 40 प्रतिशत। इसी बीच राज्य सरकार ने 23 मई 2022 को भर्ती नियमों में संशोधन कर दिया, जिसके तहत साक्षात्कार के अंक कुल पूर्णांक के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकते थे। याचिकाकर्ता का तर्क था कि भर्ती प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई थी, इसलिए नए नियम लागू होने चाहिए। उन्होंने 40 प्रतिशत साक्षात्कार वेटेज को चुनौती दी, और एकलपीठ ने 2021 की भर्ती का परिणाम निरस्त करके संशोधित नियमों के अनुसार दोबारा परिणाम जारी करने का निर्देश दे दिया। राज्य सरकार और आरपीएससी ने इस आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी थी।

सहायक प्रोफेसर भर्ती पर खंडपीठ ने आदेश क्यों पलटा

खंडपीठ का सिद्धांत है कि भर्ती प्रक्रिया विज्ञापन के साथ ही शुरू हो जाती है और पद भरने तक जारी रहती है। सामान्य नियम के अनुसार, भर्ती शुरू होने के समय लागू नियम ही पूरी प्रक्रिया पर प्रभावी रहते हैं। संशोधन को पुरानी भर्ती पर तभी लागू किया जा सकता है, जब उसमें स्पष्ट रूप से पूर्वव्यापी प्रभाव का प्रावधान हो। यहां 23 मई 2022 के संशोधित नियम उसी तारीख से लागू हुए थे और उनमें पूर्वव्यापी प्रभाव का उल्लेख नहीं था, इसलिए नवंबर 2021 की भर्ती पर साक्षात्कार की 10 प्रतिशत सीमा लागू नहीं हो सकती।

सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए खंडपीठ ने यह भी माना कि साक्षात्कार के अंक विशेषज्ञ समिति और सेवा की जरूरतों पर निर्भर करते हैं, इसलिए 40 प्रतिशत वेटेज मनमाना नहीं है।

आगे क्या होगा: अभ्यर्थी किन बातों पर नजर रखें

फैसले के बाद अगला कदम आरपीएससी और चिकित्सा शिक्षा विभाग का है। आयोग को अब 2021 की रुकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा और 2025 की भर्ती में नियुक्तियों की राह भी साफ करनी होगी। अभ्यर्थी केवल आयोग की आधिकारिक वेबसाइट rpsc.rajasthan.gov.in पर जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें, और दस्तावेज पहले से तैयार रखें, क्योंकि आगे दस्तावेज सत्यापन की बारी आ सकती है। हाल ही में आरपीएससी की सेकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती के गणित विषय का परिणाम भी जारी हुआ है, जिसमें पात्रता जांच के लिए विस्तृत आवेदन चल रहे हैं।

एक सावधानी यह भी है कि अदालत का फैसला नियुक्ति की गारंटी नहीं, बल्कि कानूनी अड़चन हटने की सूचना है। अंतिम नियुक्ति मेरिट, पदों की उपलब्धता और विभागीय औपचारिकताओं पर निर्भर करेगी, इसलिए किसी बिचौलिए के झांसे में न आएं। राजस्थान में फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए शिक्षक भर्ती में चयन का मामला पहले ही सामने आ चुका है — हर सूचना को आधिकारिक स्रोत से ही सत्यापित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सहायक प्रोफेसर भर्ती के 847 पद किन भर्तियों के हैं?
करीब 847 पदों में 2021 के विज्ञापन के 397 पद और 2025 के विज्ञापन के करीब 450 पद शामिल हैं, सभी चिकित्सा शिक्षा विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद हैं।

हाईकोर्ट ने किस आदेश को रद्द किया है?
खंडपीठ ने एकलपीठ का वह आदेश रद्द किया है, जिसमें 2021 की भर्ती का परिणाम निरस्त करके संशोधित नियमों के तहत दोबारा जारी करने को कहा गया था।

40 प्रतिशत साक्षात्कार वेटेज क्यों बरकरार रहा?
खंडपीठ ने माना कि भर्ती शुरू होने के समय लागू नियम ही पूरी प्रक्रिया पर लागू रहते हैं, और 23 मई 2022 के संशोधन में पूर्वव्यापी प्रभाव का उल्लेख नहीं था। इंटरव्यू वेटेज विशेषज्ञ समिति की जरूरतों पर निर्भर करता है, इसलिए 40 प्रतिशत वेटेज मनमाना नहीं है।

नियुक्तियां कब तक होंगी?
कोई निश्चित तारीख अदालत ने तय नहीं की है। नियुक्तियां आरपीएससी और चिकित्सा शिक्षा विभाग की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेंगी। अभ्यर्थी आयोग की वेबसाइट पर नजर रखें।

कुल मिलाकर, यह फैसला सहायक प्रोफेसर बनने का सपना देख रहे हजारों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत है। पांच साल से लटकी भर्ती का कानूनी पेंच सुलझ गया है, और गेंद अब आयोग व विभाग के पाले में है।

स्रोत: अमर उजाला, 29 अक्टूबर 2026; राजस्थान हाईकोर्ट खंडपीठ का फैसला। नियुक्ति संबंधी अंतिम जानकारी के लिए rpsc.rajasthan.gov.in देखें।

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