घड़साना किसान आंदोलन: 39वां दिन, बिरधवाल हेड पर कब्जे की चेतावनी

श्रीगंगानगर जिले के घड़साना में घड़साना किसान आंदोलन आज, 18 अक्टूबर को अपने 39वें दिन में प्रवेश कर चुका है — और इस बार आंदोलन की धार पहले से कहीं तेज दिख रही है। रविवार सुबह किसानों ने संघर्ष तेज करने का ऐलान करते हुए बिरधवाल हेड पर कब्जा करने और अनूपगढ़ शाखा में पानी छुड़वाने की चेतावनी दे दी है। डब्बर मोड़ पर जाम लगा दिया गया है, पुलिस मौके पर पहुंच गई है और स्थानीय प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखे हुए है।

नाजुक बात यह है कि शनिवार को सिंचाई मंत्री सुरेश रावत के साथ हुई वार्ता बेनतीजा रही। किसान अब रविवार को एक बार फिर बातचीत की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन उनकी चेतावनी साफ है — मांगों पर सहमति नहीं बनी तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

मंत्री से वार्ता बेनतीजा, जयपुर में रातभर चला धरना

किसानों का 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जयपुर में इंदिरा गांधी नहर परियोजना भवन पर धरना दे रहा है। यह प्रतिनिधिमंडल शनिवार रात से ही वहां मौजूद है और रविवार को भी धरना जारी रखा।

शनिवार को सिंचाई मंत्री सुरेश रावत के साथ किसान नेताओं की वार्ता हुई, लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। प्रतिनिधिमंडल सिंचाई पानी के रेगुलेशन की मांग पर पूरी तरह अड़ा हुआ है — किसान चाहते हैं कि नहरों में पानी के वितरण और रेगुलेशन से जुड़ी उनकी समस्याओं का स्थाई समाधान निकाला जाए।

घड़साना किसान आंदोलन: डब्बर मोड़ पर जाम, बिरधवाल हेड की ओर बढ़ते किसान

रविवार सुबह घड़साना में आंदोलन कर रहे किसानों ने अपने अगले कदम का खुलासा कर दिया। किसानों ने बिरधवाल हेड पर कब्जा करने और अनूपगढ़ शाखा में पानी छुड़वाने की घोषणा की है। इसी क्रम में किसान धरनास्थल से बिरधवाल हेड की तरफ आगे बढ़ने लगे।

रास्ते में डब्बर मोड़ पर किसानों ने जाम लगा दिया, जिससे इलाके में हलचल बढ़ गई। घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। स्थानीय पुलिस और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

किसानों का आरोप है कि लंबे समय से सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन नहर की टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा — यही नाराजगी आंदोलन को उग्र बना रही है।

किसानों की मांगें क्या हैं? तालिका में समझें

किसानों और नहर विभाग के रुख में अहम अंतर यह है:

मुद्दा किसानों की मांग विभाग का रुख
रबी सीजन के लिए पानी की बारी रबी की बुआई और पकाव के लिए 6 बारी पानी 5 बारी पानी का रेगुलेशन देने को तैयार
जनवरी में समीक्षा समीक्षा के बाद 2 अतिरिक्त बारी पानी का निर्णय केवल 1 अतिरिक्त बारी का आश्वासन
रेगुलेशन की अवधि स्थाई रेगुलेशन लागू हो रबी 2026-27 के लिए 5 बारियों का रेगुलेशन जारी
फसल खराबा विशेष गिरदावरी और मुआवजा विचाराधीन

किसान रबी फसल की बुआई और पकाव के लिए छह बारी पानी की मांग कर रहे हैं, जबकि सिंचाई विभाग केवल पांच बारी पानी का रेगुलेशन देने की बात कह रहा है। किसानों का आरोप है कि नहर की टेल तक पानी ही नहीं पहुंच रहा — उनकी फसलें सूखने के कगार पर हैं।

घड़साना किसान आंदोलन 39वें दिन तक कैसे पहुंचा?

घड़साना किसान आंदोलन एक दिन में नहीं भड़का। अनूपगढ़ शाखा क्षेत्र में किसान 10 सितंबर से आंदोलन कर रहे हैं, जबकि 18 सितंबर से घड़साना उपखंड कार्यालय के बाहर महापड़ाव डालकर किसान धरने पर बैठे हैं। एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद मांगों पर सहमति नहीं बनने से किसानों में नाराजगी लगातार बढ़ती गई।

इस आंदोलन में कई नाटकीय मोड़ आए। 11 अक्टूबर को आंदोलन के 32वें दिन NH-911 पर रातभर चक्का जाम रहा था, जिसमें हनुमान बेनीवाल ने खुद अगुवाई की थी। 14 अक्टूबर को भी अनूपगढ़ शाखा क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक स्थानों पर चक्काजाम हुआ था।

सिर्फ घड़साना ही नहीं, खाजूवाला से जैसलमेर तक सिंचाई पानी को लेकर किसान सड़कों पर हैं — यह आंदोलन अब पूरे इंदिरा गांधी नहर के प्रथम चरण क्षेत्र में फैल चुका है।

रबी बुआई की नाजुक घड़ी: क्यों इतना गहरा है किसानों का गुस्सा

पश्चिमी राजस्थान में खेती का बड़ा हिस्सा नहर के पानी पर निर्भर है। यहां बारिश कम होती है और भूजल भी सीमित है, इसलिए इंदिरा गांधी नहर ही किसानों की जीवनरेखा है — पानी में जरा सी कमी सीधे फसल और आय पर चोट करती है।

इस समय रबी की बुवाई का दौर चल रहा है। सरसों और गेहूं की बुवाई हजारों हेक्टेयर में हो चुकी है, और बुवाई के बाद फसल को समय पर पानी मिलना सबसे जरूरी होता है — यही वह नाजुक समय है जब पानी की कमी पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है। बीज, खाद और जुताई में लगा पैसा डूबने का डर किसानों को सड़कों पर ला रहा है। किसानों के अनुसार, 20 बीघा बुवाई पर सिर्फ 10 बीघा का पानी मिल रहा है — यानी जरूरत के मुकाबले आधा पानी।

आगे क्या? सबकी निगाहें आज की वार्ता पर

घड़साना में 39 दिनों से जारी आंदोलन और रविवार को डब्बर मोड़ पर लगाए गए जाम के बीच अब सरकार पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। किसान बिरधवाल हेड पर कब्जे और अनूपगढ़ शाखा में पानी छुड़वाने का ऐलान कर चुके हैं, और जयपुर में किसान प्रतिनिधिमंडल वार्ता की उम्मीद लगाए बैठा है। किसानों ने स्पष्ट किया है कि बातचीत से समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा — अब सबकी निगाहें आज की संभावित वार्ता और आंदोलन की अगली रणनीति पर टिकी हैं। इस घटनाक्रम पर ताजा अपडेट यहां पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

घड़साना किसान आंदोलन क्यों चल रहा है?

घड़साना और अनूपगढ़ शाखा क्षेत्र के किसान सिंचाई पानी के रेगुलेशन की मांग को लेकर 10 सितंबर से आंदोलन कर रहे हैं। 18 सितंबर से घड़साना उपखंड कार्यालय के बाहर महापड़ाव चल रहा है। रबी बुआई के समय पानी न मिलने से किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

18 अक्टूबर को क्या नया हुआ?

घड़साना किसान आंदोलन के 39वें दिन किसानों ने डब्बर मोड़ पर जाम लगाया और बिरधवाल हेड पर कब्जा करने व अनूपगढ़ शाखा में पानी छुड़वाने का ऐलान किया। साथ ही शनिवार को सिंचाई मंत्री सुरेश रावत से वार्ता बेनतीजा रही।

किसानों की मुख्य मांग क्या है?

किसान रबी सीजन के लिए 6 बारी सिंचाई पानी और स्थाई रेगुलेशन मांग रहे हैं, जबकि विभाग 5 बारी पानी का रेगुलेशन देने की बात कह रहा है। नहर की टेल तक पानी पहुंचाने और फसल खराबे के मुआवजे की भी मांग है।

जयपुर में क्या हो रहा है?

किसानों का 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जयपुर में इंदिरा गांधी नहर परियोजना भवन पर शनिवार रात से धरने पर है। रविवार को फिर बातचीत होने की उम्मीद है।

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