राजस्थान में हिरासत में मौतें एक साल में दोगुनी, NHRC आंकड़ों में देश में दूसरा नंबर — अशोक गहलोत का सरकार पर सीधा हमला

राजस्थान में हिरासत में मौतें अब केवल एक थाने की खबर नहीं रही, बल्कि पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया है कि राजस्थान में हिरासत में मौतों का आंकड़ा एक साल में दोगुना हो गया है और 2025-26 में यह संख्या 18 तक पहुंच गई, जिससे राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर आ गया है। गहलोत ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए FIR दर्ज करने, संबंधित पुलिसकर्मियों को तत्काल हटाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

NHRC के आंकड़े: 9 से बढ़कर 18, एक साल में दोगुनी मौतें

अशोक गहलोत के आरोप का सबसे बड़ा आधार NHRC के आंकड़े हैं। उनके मुताबिक, वर्ष 2024-25 में राजस्थान में हिरासत में मौत के 9 मामले सामने आए थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 18 हो गई। यानी महज एक साल के भीतर आंकड़ा दोगुना हो गया। गहलोत ने कहा कि 2025-26 में राजस्थान देश में हिरासत में मौतों के मामले में दूसरे स्थान पर रहा, जो राज्य की पुलिस व्यवस्था के लिए चिंता का गंभीर विषय है।

वर्षहिरासत में मौतों के मामले (NHRC आंकड़े)रुझान
2024-259—
2025-2618एक साल में दोगुना, देश में दूसरा स्थान

इन आंकड़ों ने सरकार की कानून-व्यवस्था संबंधी दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का कहना है कि जब हिरासत में मौतें इस रफ्तार से बढ़ रही हों, तो यह सिर्फ संयोग नहीं, व्यवस्था की खामी का संकेत है।

गहलोत की मांगें: FIR दर्ज हो, पुलिसकर्मी हटें, सख्त कार्रवाई हो

गहलोत ने केवल आरोप नहीं लगाया, बल्कि सरकार से तीन ठोस कदम उठाने की मांग भी की है। पहली मांग — संबंधित मामले में FIR दर्ज की जाए। दूसरी मांग — आरोपी पुलिसकर्मियों को तत्काल पद से हटाया जाए। तीसरी मांग — जांच के निष्कर्षों के आधार पर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

उनका कहना है कि जांच के निष्कर्षों से ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी। गहलोत ने यह भी जोर दिया कि जब तक पुलिसकर्मी पद पर बने रहेंगे, तब तक निष्पक्ष जांच पर सवाल उठते रहेंगे। यह मांग जयपुर के मुहाना थाना कांड के संदर्भ में उठी है, जहां घटना के कई दिन बाद भी जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर सवाल उठ रहे हैं।

मुहाना थाना कांड: नाबालिग की मौत और उठे सवाल

इस पूरे विवाद के केंद्र में जयपुर का मुहाना थाना है, जहां एक नाबालिग किशोर की मौत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, किशोर के जन्म प्रमाण पत्र में उसकी उम्र 16 साल 9 महीने दर्ज थी। आरोप है कि उसे बिना मुकदमा दर्ज किए थाने में रखा गया, जबकि किशोर न्याय कानून के तहत नाबालिगों के साथ निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।

मृतक की पहचान मंदसौर (मध्यप्रदेश) निवासी ऋतुराज लुहार के रूप में हुई है। परिजनों का आरोप है कि 22 सितंबर को तबीयत बिगड़ने के बाद उसे पहले एक निजी अस्पताल और फिर सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS) ले जाया गया, जहां आईसीयू में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार ने पोस्टमार्टम करवाने और शव लेने से इनकार कर दिया था, लेकिन न्यायिक जांच करवाने के भरोसे के बाद सहमति बनी। मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

चश्मदीदों ने किशोर के साथ मारपीट के आरोप लगाए हैं। आरोपों के मुताबिक, उसे दूसरे नाम से एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया और सांप के काटने की बात कही गई — उसे एंटीवेनम के 10 इंजेक्शन लगाए गए, जबकि शरीर पर सांप के काटने का निशान नहीं मिलने की बात सामने आई। सीटी स्कैन में दिमाग में गंभीर चोट का पता चला और 13 दिन बाद किशोर ने दम तोड़ दिया। पुलिस का पक्ष अलग है — थानाधिकारी के अनुसार थाने में मारपीट नहीं हुई और मामला तस्करी के सोने से जुड़े विवाद का है, जिसकी जांच जारी है।

मानवाधिकार आयोग का दखल: IG की टीम करेगी जांच

मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस जीआर मूलचंदानी ने जांच के लिए आईजी हिंगलाजदान और एडिशनल एसपी संध्या यादव की टीम गठित की है, जिसे 23 अक्टूबर तक रिपोर्ट पेश करनी होगी। आयोग ने संबंधित थाने के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और घटना की तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के आदेश भी दिए हैं।

यह जांच चल रही न्यायिक जांच से अलग होगी। आईजी की टीम कथित चश्मदीद युवकों से पूछताछ करेगी, नाबालिग का उपचार करने वाले डॉक्टरों के बयान दर्ज करेगी और इलाज से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी। जांच का दायरा तीन बिंदुओं पर है — किशोर की चोटों की असली वजह, अस्पताल में दिए गए उपचार की सच्चाई और सांप के काटने के दावे की हकीकत।

राजस्थान के लिए इसका मतलब क्या है

हिरासत में मौतें केवल आंकड़े नहीं हैं — ये नागरिकों के पुलिस व्यवस्था पर भरोसे से जुड़ा मसला है। NHRC हर साल राज्यों के आंकड़े जारी करता है, और इन आंकड़ों में लगातार दूसरे साल बढ़ोतरी किसी भी सरकार के लिए असहज होती है। विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था की नाकामी बता रहा है, जबकि सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

आने वाले दिनों में दो चीजें तय करेंगी इस मामले की दिशा — आईजी की टीम की 23 अक्टूबर तक आने वाली रिपोर्ट और न्यायिक जांच के निष्कर्ष। तब तक गहलोत का आरोप राजनीतिक बहस को तेज रखेगा, खासकर तब जब पंचायत चुनाव का माहौल प्रदेश में बना हुआ है।

राजस्थान में हिरासत में मौतों से जुड़ी यह बहस अब थाने की चारदीवारी से निकलकर विधानसभा और मीडिया की सुर्खियों तक पहुंच चुकी है — और NHRC के आंकड़े इसके केंद्र में हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: NHRC के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में हिरासत में कितनी मौतें हुईं?
उत्तर: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हवाले से NHRC के आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में हिरासत में मौत के 9 मामले सामने आए, जो 2025-26 में बढ़कर 18 हो गए। एक साल में आंकड़ा दोगुना हो गया और राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर रहा।

प्रश्न 2: अशोक गहलोत ने सरकार से क्या मांग की है?
उत्तर: गहलोत ने मुहाना थाना कांड में FIR दर्ज करने, संबंधित पुलिसकर्मियों को तत्काल पद से हटाने और जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

प्रश्न 3: मुहाना थाना कांड में जांच कौन कर रहा है?
उत्तर: मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा राज्य मानवाधिकार आयोग ने आईजी हिंगलाजदान की टीम से अलग जांच कराने के निर्देश दिए हैं, जिसकी रिपोर्ट 23 अक्टूबर तक पेश होनी है।

प्रश्न 4: पुलिस का इस मामले में क्या पक्ष है?
उत्तर: मुहाना थानाधिकारी के अनुसार थाने में नाबालिग के साथ मारपीट नहीं हुई। पुलिस का कहना है कि युवक के साथ तस्करी के सोने को लेकर होटल में मारपीट हुई थी, जिसका मुकदमा दर्ज है और जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (nhrc.nic.in)

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