भरतपुर जिले के नदबई कस्बे में गुरुवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने ऐसी ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसने सरकारी अस्पतालों में चल रहे एक गंदे खेल की पोल खोल दी। भरतपुर ACB ट्रैप में दलाल त्रिलोकचन्द शर्मा उर्फ चीनू को 35 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया, जबकि रिश्वत मांगने के आरोप में राजकीय चिकित्सालय नदबई के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशिकान्त शर्मा को उनके सरकारी आवास से हिरासत में लिया गया। रिश्वत की पूरी रकम दलाल की पैंट की जेब से बरामद हुई।
मामला किसी ठेके या फाइल का नहीं, बल्कि मेडिकल रिपोर्ट का था — वह कागज जो अदालत में इंसाफ की दिशा तय करता है। आरोप है कि मारपीट के एक मामले में रिपोर्ट को "हैवी MLC" बनाने के बदले यह रकम मांगी जा रही थी।
भरतपुर ACB ट्रैप की पूरी कहानी: शिकायत से गिरफ्तारी तक
ACB की यह कार्रवाई रातों-रात नहीं हुई। इसके पीछे कई दिनों की तैयारी थी:
शिकायत: सब कुछ एक परिवादी की हिम्मत से शुरू हुआ। उसने नदबई थाने में मारपीट का मामला दर्ज कराया था और परिजनों की चोटों का मेडिकल परीक्षण राजकीय चिकित्सालय नदबई में होना था। आरोप है कि इसी रिपोर्ट के बदले उससे 35 हजार रुपये मांगे गए।
गोपनीय सत्यापन: शिकायत मिलते ही ACB ने मामले का गुप्त तरीके से सत्यापन कराया और रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हो गई। ACB बिना सत्यापन के कभी ट्रैप नहीं बिछाती — ताकि कोई बेगुनाह इस जाल में न फंसे।
ट्रैप की योजना: ACB भरतपुर रेंज के उपमहानिरीक्षक (DIG) ओमप्रकाश मीणा के सुपरविजन में धौलपुर ACB चौकी के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) प्रेमचन्द मीणा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई।
रंगे हाथ गिरफ्तारी: तय योजना के मुताबिक गुरुवार को दलाल को 35 हजार रुपये लेते हुए मौके पर ही दबोच लिया गया — रकम उसकी पैंट की जेब से बरामद हुई। इसके बाद चिकित्सा अधिकारी को सरकारी आवास से डिटेन कर लिया गया।
हैवी MLC क्या होता है और इसके लिए रिश्वत क्यों मांगी जाती है
इस भरतपुर ACB ट्रैप के केंद्र में जो शब्द है — "हैवी MLC" — उसे समझना जरूरी है। MLC यानी मेडिको-लीगल केस: जब किसी मारपीट में कोई घायल होता है, तो डॉक्टर चोटों का परीक्षण करके जो रिपोर्ट बनाता है, उसे MLC रिपोर्ट कहते हैं। अदालत में यही रिपोर्ट तय करती है कि मामला कितना गंभीर है।
"हैवी MLC" का मतलब है ऐसी रिपोर्ट जिसमें चोटों को गंभीर (grievous) श्रेणी में दर्शाया गया हो। चोट जितनी गंभीर दिखाई जाएगी, आरोपी पर उतनी ही सख्त धाराएं लगेंगी। इसीलिए मारपीट के मामलों में रिपोर्ट को अपने पक्ष में करवाने की कोशिशें होती रही हैं — और यहीं से दलाली का खेल शुरू होता है।
शिकायत के मुताबिक यह रकम डॉ. शशिकान्त शर्मा की ओर से उनके कथित दलाल के माध्यम से मांगी जा रही थी। यानी डॉक्टर खुद सामने नहीं आया, बल्कि बीच में एक निजी व्यक्ति को खड़ा कर दिया गया। लेकिन ACB के जाल में यह चालाकी काम नहीं आई।
मामले के अहम तथ्य एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | राजकीय चिकित्सालय, नदबई (जिला भरतपुर) |
| कार्रवाई की तिथि | 8 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) |
| रिश्वत की रकम | 35,000 रुपये |
| गिरफ्तार दलाल | त्रिलोकचन्द शर्मा उर्फ चीनू |
| हिरासत में अधिकारी | डॉ. शशिकान्त शर्मा, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी |
| रिश्वत का कारण | मेडिकल रिपोर्ट में हैवी MLC बनाना |
| कार्रवाई करने वाली टीम | ACB धौलपुर चौकी, DSP प्रेमचन्द मीणा के नेतृत्व में |
| दर्ज मामला | भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत |
दोनों आरोपियों पर अब क्या कार्रवाई होगी
ACB ने दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर पूछताछ शुरू कर दी है। आगे ACB आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड मांगेगी, ताकि यह पता चले कि यह खेल कितने समय से चल रहा था और इसमें और कौन शामिल था।
सरकारी सेवा में होने के नाते डॉ. शशिकान्त शर्मा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी अलग से चल सकती है, जिसमें निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक के प्रावधान हैं।
गौरतलब है कि राजस्थान में ACB लगातार सक्रिय है। हाल ही में इंटर्नशिप NOC के बदले 35 हजार की रिश्वत मांगने वाले कॉलेज स्टाफ पर, झुंझुनूं में कृषि बिजली कनेक्शन की लाइन बदलने के बदले रिश्वत मांगने और कोटा में PM आवास योजना की किस्त पर रिश्वत के मामलों में भी ट्रैप हुए थे। नदबई की यह भरतपुर ACB ट्रैप कार्रवाई उसी कड़ी का नया अध्याय है।
आपसे भी मांगी जाए रिश्वत तो क्या करें
ACB ने आम लोगों से अपील की है कि अगर किसी सरकारी काम के बदले आपसे रिश्वत मांगी जाती है, तो डरें नहीं — आपकी एक शिकायत पूरे नेटवर्क को ध्वस्त कर सकती है। शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 1064 और WhatsApp हेल्पलाइन 94135-02834 पर 24×7 संपर्क करें।
प्रक्रिया सरल है: शिकायत दर्ज कराएं (कौन, कब, कहां, कितनी रिश्वत), फिर ACB गोपनीय सत्यापन करेगी — इस दौरान आपकी पहचान पूरी तरह सुरक्षित रहती है। पुष्टि होने पर ट्रैप बिछाया जाता है और आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा जाता है। ACB ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी के खिलाफ जांच दर्ज हो तो वह खुद ACB से संपर्क कर अपना पक्ष रख सकता है।
शिकायत ACB राजस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर भी दर्ज कराई जा सकती है। याद रखिए — रिश्वत देना भी अपराध है, और रिश्वत मांगने वाले के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक का अधिकार भी है और कर्तव्य भी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: नदबई ACB ट्रैप में कितनी रिश्वत मांगी गई थी?
उत्तर: इस भरतपुर ACB ट्रैप मामले में 35 हजार रुपये मांगे गए थे। दलाल को यह रकम लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया और पूरी रकम उसकी पैंट की जेब से बरामद हुई।
प्रश्न 2: हैवी MLC का मतलब क्या होता है?
उत्तर: MLC यानी मेडिको-लीगल केस रिपोर्ट — वह मेडिकल रिपोर्ट जो पुलिस केस से जुड़ी होती है। "हैवी MLC" में चोटों को गंभीर श्रेणी में दर्शाया जाता है, जिससे आरोपी पर सख्त धाराएं लग सकें।
प्रश्न 3: भरतपुर ACB ट्रैप में किन अधिकारियों ने कार्रवाई की?
उत्तर: ACB भरतपुर रेंज के DIG ओमप्रकाश मीणा के सुपरविजन में धौलपुर ACB चौकी के DSP प्रेमचन्द मीणा के नेतृत्व वाली टीम ने यह कार्रवाई की।
प्रश्न 4: ACB में रिश्वत की शिकायत कैसे करें?
उत्तर: टोल फ्री नंबर 1064 या WhatsApp हेल्पलाइन 94135-02834 पर 24×7 शिकायत की जा सकती है। गोपनीय सत्यापन के बाद ही ट्रैप बिछाया जाता है।
नोट: यह मामला अभी जांच के दायरे में है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।