झुंझुनूं (चिड़ावा)। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने सोमवार को चिड़ावा में बड़ी कार्रवाई की। टीम ने अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL) की एक कनिष्ठ अभियंता (JEN) को कथित तौर पर 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। रिश्वत की राशि आरोपी की कार्यालय टेबल की दराज से बरामद हुई। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
पूरा मामला एक कृषि विद्युत कनेक्शन की लाइन बदलवाने से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक, कनिष्ठ अभियंता ने लाइन शिफ्टिंग के बदले पहले 25 हजार रुपये मांगे थे, जो बाद में घटाकर 15 हजार पर तय हुए। सत्यापन में पुष्टि के बाद एसीबी ने 5 अक्टूबर 2026 को ट्रैप बिछाया।
पहले 25 हजार की मांग, फिर 15 हजार पर हुआ सौदा
इस प्रकरण की शुरुआत एक शिकायत से हुई। परिवादी ने एसीबी को बताया कि उसके परिचित के कृषि विद्युत कनेक्शन की लाइन बदलवाने के लिए कनिष्ठ अभियंता दिपीका द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत के अनुसार, लाइन शिफ्टिंग जैसे सामान्य काम के लिए शुरुआत में 25 हजार रुपये मांगे गए, जो परिवादी के आग्रह पर घटाकर 15 हजार कर दिए गए।
एसीबी किसी भी शिकायत पर सीधे ट्रैप नहीं बिछाती। पहले शिकायत का सत्यापन कराया जाता है। इस मामले में भी सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई, जिसके बाद ट्रैप की योजना तैयार की गई।
ट्रैप की कार्रवाई: रिश्वत की रकम दराज से बरामद
एसीबी जयपुर रेंज की आईजी एस. परिमला के सुपरविजन और झुंझुनूं के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरेंद्र कुमार पूनियां के निर्देशन में पुलिस निरीक्षक सुरेश चंद की टीम ने ट्रैप की कार्रवाई की। टीम ने कनिष्ठ अभियंता दिपीका को परिवादी से 15 हजार रुपये लेते हुए पकड़ लिया।
एसीबी के मुताबिक, ट्रैप के दौरान 15 हजार रुपये की रिश्वत राशि आरोपी की कार्यालय टेबल की दराज से बरामद की गई। आम तौर पर ट्रैप में नोटों के नंबर पहले से नोट कर लिए जाते हैं, ताकि बरामदगी के समय साबित हो सके कि यही वह राशि है जो रिश्वत के तौर पर दी गई थी। मौके पर आरोपी से पूछताछ शुरू की गई।
आरोपी के खिलाफ अब आगे क्या होगा
रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। इस कानून में लोक सेवक द्वारा रिश्वत लेने पर कारावास और जुर्माने दोनों का प्रावधान है। एसीबी के मुताबिक, आरोपी से पूछताछ जारी है और रिश्वत की मांग, लेन-देन तथा इससे जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जाएगी।
ध्यान देने वाली बात यह है कि गिरफ्तारी के बाद की पूरी प्रक्रिया नियमानुसार चलती है। दोषसिद्धि से पहले तथ्यों और संबंधित पक्ष के स्पष्टीकरण का परीक्षण किया जाता है। यानी अदालत के फैसले से पहले किसी को दोषी नहीं माना जाता, लेकिन ट्रैप में रंगे हाथों पकड़े जाना भ्रष्टाचार के मामलों में मजबूत सबूत माना जाता है।
ACB का ट्रैप कैसे काम करता है: पूरी प्रक्रिया समझिए
एसीबी की ट्रैप कार्रवाई अचानक की गई छापेमारी नहीं होती। इसके पीछे एक तयशुदा प्रक्रिया चलती है, जिसे समझना हर नागरिक के लिए जरूरी है।
पहला चरण: शिकायत दर्ज। पीड़ित एसीबी को लिखित या मौखिक शिकायत देता है। इसमें स्पष्ट होना चाहिए कि किस अधिकारी ने, किस काम के बदले, कितनी रिश्वत मांगी है।
दूसरा चरण: सत्यापन। एसीबी गुप्त रूप से जांचती है कि शिकायत सच है या नहीं। कई बार शिकायतकर्ता को रिकॉर्डिंग उपकरण के साथ अधिकारी से बात करने भेजा जाता है।
तीसरा चरण: ट्रैप की योजना। पुष्टि के बाद ट्रैप की तारीख तय होती है। रिश्वत के नोटों के नंबर नोट कर लिए जाते हैं और कई बार उन पर रासायनिक पदार्थ भी लगाया जाता है।
चौथा चरण: रंगे हाथों पकड़ना। तय समय पर शिकायतकर्ता राशि देता है और टीम मौके पर आरोपी को पकड़ लेती है। बरामद नोटों का मिलान पहले से नोट किए गए नंबरों से किया जाता है।
पांचवां चरण: प्रकरण दर्ज और अनुसंधान। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू होती है।
रिश्वत मांगे तो कहां और कैसे करें शिकायत: काम की जानकारी
एसीबी ने अपील की है कि भ्रष्टाचार से जुड़े किसी भी मामले में निर्धारित प्रक्रिया के तहत सीधे ब्यूरो से संपर्क करें। शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 1064 और व्हाट्सऐप हेल्पलाइन 94135-02834 चौबीसों घंटे उपलब्ध है।
शिकायत करते समय इन बातों का ध्यान रखें:
- अधिकारी का नाम, पद और कार्यालय का पता स्पष्ट लिखें।
- किस काम के बदले कितनी रिश्वत मांगी गई, इसका पूरा ब्योरा दें।
- मांग कब और कहां की गई, तारीख और समय नोट करके रखें।
- मांग से जुड़े संदेश या कॉल रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
- ट्रैप की योजना को गुप्त रखें।
बिजली कनेक्शन, राजस्व या नगर निकाय जैसे विभागों में काम अटकाकर रिश्वत मांगने की शिकायतें अक्सर आती हैं। ऐसे में समझौता करने की बजाय तय प्रक्रिया से शिकायत करना ही सही रास्ता है।
घटनाक्रम एक नज़र में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| स्थान | चिड़ावा, जिला झुंझुनूं (राजस्थान) |
| आरोपी | AVVNL की कनिष्ठ अभियंता दिपीका |
| मामला | कृषि विद्युत कनेक्शन की लाइन शिफ्टिंग के बदले रिश्वत |
| शुरुआती मांग | 25,000 रुपये |
| तय राशि | 15,000 रुपये |
| बरामदगी | कार्यालय टेबल की दराज से 15,000 रुपये |
| कार्रवाई की तारीख | 5 अक्टूबर 2026 |
| सुपरविजन | आईजी एस. परिमला (एसीबी जयपुर रेंज) |
| निर्देशन | एएसपी नरेंद्र कुमार पूनियां (झुंझुनूं) |
| ट्रैप टीम | निरीक्षक सुरेश चंद व टीम |
| कानूनी कार्रवाई | भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज |
| शिकायत हेल्पलाइन | टोल फ्री 1064, व्हाट्सऐप 94135-02834 |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: एसीबी की ट्रैप कार्रवाई क्या होती है?
जवाब: इसमें एसीबी की टीम रिश्वत मांगने वाले लोक सेवक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ती है। पहले शिकायत का सत्यापन होता है और नोटों के नंबर पहले से नोट कर लिए जाते हैं, ताकि बरामदगी के समय सबूत पुख्ता हो।
सवाल: क्या शिकायत करने वाले की पहचान गुप्त रखी जाती है?
जवाब: एसीबी शिकायतकर्ता की सुरक्षा को गंभीरता से लेती है। हालांकि कानूनी कार्यवाही के दौरान जरूरत पड़ने पर शिकायतकर्ता को गवाह के तौर पर सामने आना पड़ सकता है।
सवाल: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में रिश्वत लेने पर कितनी सजा का प्रावधान है?
जवाब: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) के तहत लोक सेवक द्वारा रिश्वत लेने पर कारावास और जुर्माने दोनों का प्रावधान है। सजा की अवधि अपराध की गंभीरता के अनुसार तय होती है।
सवाल: बिजली कनेक्शन जैसे काम में रिश्वत मांगी जाए तो क्या करें?
जवाब: मांग का लिखित रिकॉर्ड रखें, फिर एसीबी के टोल फ्री नंबर 1064 या व्हाट्सऐप हेल्पलाइन 94135-02834 पर शिकायत दर्ज कराएं। समझौता करने की बजाय तय कानूनी प्रक्रिया अपनाएं।