जसवंत यादव निधन की खबर ने रविवार सुबह राजस्थान की राजनीति को हिला दिया। बहरोड़ से भाजपा विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. जसवंत यादव का 8 नवंबर 2026 को जयपुर में निधन हो गया। वे 73 साल के थे और करीब आठ साल से प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे थे। उनके निधन के साथ ही राजस्थान विधानसभा में विधायकों की संख्या 200 से घटकर 199 रह गई है, और अब बहरोड़ सीट पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना होगा। बेटे डॉ. मोहित यादव ने सोशल मीडिया पर पिता के निधन की पुष्टि की है।
विधानसभा में अब 199 विधायक, बहरोड़ में उपचुनाव तय
जसवंत यादव निधन का सबसे बड़ा राजनीतिक असर विधानसभा के आंकड़े पर पड़ा है। राजस्थान विधानसभा की कुल 200 सीटों में से अब 199 पर विधायक रह गए हैं। नियमों के मुताबिक, खाली हुई बहरोड़ सीट पर अगले छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना होगा, यानी मई 2027 की शुरुआत तक यह चुनाव हो जाना चाहिए। यादव 2023 के चुनाव में तीसरी बार बहरोड़ से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, इसलिए इस सीट पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती थी। अब उपचुनाव में भाजपा के लिए अपनी सीट बचाना प्रतिष्ठा का सवाल होगा, जबकि कांग्रेस इसे भाजपा के गढ़ में सेंध लगाने के मौके के तौर पर देखेगी।
रविवार सुबह 8:15 बजे अंतिम सांस, बेटे ने दी जानकारी
परिवार के मुताबिक, डॉ. जसवंत यादव ने रविवार सुबह 8:15 बजे जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके बेटे डॉ. मोहित यादव ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखकर पिता के निधन की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि उनके पिता, बहरोड़ के वर्तमान विधायक, राजस्थान सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री और अलवर के पूर्व सांसद, अब हमारे बीच नहीं रहे। निधन की खबर फैलते ही बहरोड़, अलवर और पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। डॉ. यादव का पार्थिव शरीर रविवार शाम चार बजे के बाद अलवर स्थित जसवंत नगर आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, ताकि लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकें।
जसवंत यादव निधन से पहले आठ साल से प्रोस्टेट कैंसर से जंग
डॉ. जसवंत यादव लंबे समय से प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित थे और करीब आठ साल से इस बीमारी का इलाज करा रहे थे। अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही थी। 18 अक्टूबर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा खुद अस्पताल पहुंचे थे और उन्होंने यादव का हालचाल जाना था। उस समय उनकी हालत नाजुक बताई जा रही थी। सोशल मीडिया पर उस दिन उनके निधन की भ्रामक खबरें भी फैलने लगी थीं, जिनका उनके बेटे मोहित यादव ने खंडन किया था। तब से उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ और रविवार सुबह डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
1998 से 2023 तक: मुंडावर से बहरोड़ तक का लंबा सफर
डॉ. जसवंत यादव का जन्म 1953 में अलवर जिले के कोटकासिम स्थित शिलपटा गांव में हुआ था। गांव में शुरुआती पढ़ाई के बाद उन्होंने अलवर से 12वीं, अजमेर के रीजनल कॉलेज से स्नातक और दिल्ली से चिकित्सा की शिक्षा ली। चिकित्सा क्षेत्र से राजनीति में आए यादव अलवर-बहरोड़ की राजनीति में दशकों तक एक प्रभावशाली चेहरा बने रहे।
| साल | पद | क्षेत्र |
|---|---|---|
| 1998 | विधायक | मुंडावर विधानसभा |
| 1999–2004 | सांसद | अलवर लोकसभा |
| 2008 | विधायक | बहरोड़ विधानसभा |
| 2013 | विधायक | बहरोड़ विधानसभा |
| 2016–2018 | कैबिनेट मंत्री | राजस्थान सरकार |
| 2023 | विधायक | बहरोड़ विधानसभा |
उनके राजनीतिक जीवन में बड़ा मोड़ 1999 में आया, जब वे अलवर से सांसद चुने गए और 2004 तक सांसद रहे। इसके बाद बहरोड़ उनकी मुख्य कर्मभूमि बन गया — 2008 में पहली बार भाजपा के टिकट पर वहां से विधायक बने और 2013 में फिर जीते। वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार में 2016 से 2018 तक उन्होंने कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाली और श्रम मंत्री के तौर पर भी काम किया। 2023 के चुनाव में उन्होंने तीसरी बार बहरोड़ सीट से जीत दर्ज कर विधानसभा में धमाकेदार वापसी की थी। कुल मिलाकर वे चार बार विधायक और एक बार सांसद रहे।
सोमवार को पैतृक गांव सिलपटा में होगा अंतिम संस्कार
परिवार के मुताबिक, डॉ. जसवंत यादव का अंतिम संस्कार सोमवार, 9 नवंबर को दोपहर तीन बजे खैरथल-तिजारा जिले के उनके पैतृक गांव सिलपटा में किया जाएगा। इससे पहले रविवार शाम चार बजे के बाद उनका पार्थिव शरीर अलवर के जसवंत नगर स्थित आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। दिवाली के दिन आए इस दुखद समाचार ने क्षेत्र में त्योहार का माहौल गमगीन कर दिया है।
जसवंत यादव निधन पर शोक की लहर, CM समेत नेताओं ने जताया दुख
जसवंत यादव निधन पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा समेत भाजपा और अन्य दलों के नेताओं ने गहरा दुख जताया है। मुख्यमंत्री ने 18 अक्टूबर को अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल जाना था, और निधन की खबर पर उन्होंने शोक जताते हुए यादव के लंबे सार्वजनिक जीवन को याद किया। बहरोड़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी पहचान एक वरिष्ठ और जनप्रिय नेता के तौर पर थी। उनके जाने से क्षेत्र ने अपना एक प्रमुख राजनीतिक चेहरा खो दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
डॉ. जसवंत यादव का निधन कब और कैसे हुआ?
जसवंत यादव निधन रविवार, 8 नवंबर 2026 को सुबह 8:15 बजे जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में हुआ। वे करीब आठ साल से प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित थे।
जसवंत यादव कितनी बार विधायक और सांसद रहे?
वे चार बार विधायक रहे — 1998 में मुंडावर से और 2008, 2013 व 2023 में बहरोड़ से। इसके अलावा 1999 से 2004 तक वे अलवर से सांसद भी रहे।
बहरोड़ सीट पर उपचुनाव कब होगा?
नियमों के मुताबिक, खाली हुई बहरोड़ सीट पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना होगा, यानी मई 2027 की शुरुआत तक चुनाव हो जाना चाहिए। तारीखों का ऐलान चुनाव आयोग करेगा।
डॉ. जसवंत यादव का अंतिम संस्कार कहां होगा?
उनका अंतिम संस्कार सोमवार, 9 नवंबर को दोपहर तीन बजे खैरथल-तिजारा जिले के पैतृक गांव सिलपटा में किया जाएगा। इससे पहले रविवार शाम अलवर के जसवंत नगर आवास पर अंतिम दर्शन होंगे।
स्रोत
इस खबर के तथ्य पत्रिका, फर्स्ट इंडिया न्यूज और द हिंदू की 8 नवंबर 2026 की रिपोर्टों पर आधारित हैं। अक्टूबर में उनकी तबीयत को लेकर हमारी पहले की रिपोर्ट भी पढ़ें: बहरोड़ विधायक जसवंत यादव की हालत नाजुक, CM भजनलाल पहुंचे अस्पताल। अलवर की अन्य खबरों के लिए देखें: अलवर राजपुर में पथराव, DSP घायल और जोधपुर में भाजपा पदयात्रा, भजनलाल शर्मा शामिल।