राजस्थान के किसानों के लिए दीपावली के मौके पर एक बड़ी राहत की खबर आई है। राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी 29 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को सहकारी बैंक 101 करोड़ रुपये का ब्याज अनुदान जारी कर दिया है। यह पैसा अल्पकालीन फसली ऋण बांटने पर बैंकों को मिलने वाला क्षतिपूर्ति ब्याज अनुदान है — यानी जिन बैंकों ने किसानों को सस्ता फसली ऋण दिया, सरकार ने उनके ब्याज के नुकसान की भरपाई कर दी है, ताकि आगे भी किसानों को आसानी से और सस्ती दर पर ऋण मिलता रहे।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में रबी फसलों की बुवाई चल रही है और किसानों को खाद-बीज के लिए नकदी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
सहकारी बैंक 101 करोड़: सबसे ज्यादा पैसा किस जिले को मिला
कुल 101.67 करोड़ रुपये का अनुदान 29 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCB) में बांटा गया है। इसमें सबसे बड़ी राशि बाड़मेर को मिली है, जबकि राजधानी जयपुर दूसरे नंबर पर है:
| जिला केंद्रीय सहकारी बैंक | मिली राशि (करोड़ रुपये) |
|---|---|
| बाड़मेर | 7.74 |
| जयपुर | 7.12 |
| भीलवाड़ा | 5.37 |
| सीकर | 5.26 |
| चित्तौड़गढ़ | 5.08 |
| शेष 24 जिला बैंक | 71.10 |
| कुल | 101.67 |
बाड़मेर में सहकारी बैंकों के जरिए फसली ऋण का वितरण सबसे ज्यादा हुआ है। यह अनुदान सामान्य, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति — तीनों मदों के तहत जारी हुआ है।
सहकारी बैंक 101 करोड़: पैसा पांच किस्तों में कैसे पहुंचा
सरकार ने यह राशि एक साथ नहीं, बल्कि पांच किस्तों में जारी की है। पहली चार किस्तों में 20-20 करोड़ रुपये और पांचवीं किस्त में 21.67 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है।
पैसा पहुंचाने का तरीका भी खास है — राशि सीधे ट्रेजरी से जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के चालू खातों में जमा कराई गई है। अपेक्स बैंक (राजस्थान राज्य सहकारी बैंक) ने सभी 29 बैंकों को भुगतान संबंधी एडवाइजरी जारी की थी, जिसके बाद ट्रेजरी से सीधा भुगतान हुआ।
इससे 1 अप्रैल से 31 अगस्त 2025 तक के दावों का निस्तारण हुआ है — खरीफ सीजन में बांटे गए फसली ऋण पर बैंकों की ब्याज क्षतिपूर्ति अब चुका दी गई है।
ये अनुदान आखिर है क्या — फसली ऋण का गणित समझिए
किसान जब बुवाई से पहले सहकारी बैंक या अपनी गांव की सहकारी समिति (पैक्स) से फसली ऋण लेता है, तो उसे बहुत कम ब्याज देना पड़ता है। राजस्थान में अल्पकालीन फसली ऋण ब्याज मुक्त या नाममात्र ब्याज पर दिया जाता है। लेकिन बैंक को पैसा जुटाने और चलाने की अपनी लागत होती है — बैंक को यह लागत सरकार ब्याज अनुदान के रूप में लौटाती है। इसे ही क्षतिपूर्ति ब्याज अनुदान कहा जाता है।
इस व्यवस्था का सीधा फायदा यह है कि बैंक को नुकसान नहीं होता, इसलिए वह किसानों को सस्ता ऋण देने से पीछे नहीं हटता। अगर सरकार यह अनुदान समय पर न दे, तो बैंकों की हालत कमजोर पड़ने लगती है और आखिर में इसका असर किसान पर पड़ता है — ऋण मिलना मुश्किल हो जाता है। इसीलिए सहकारी बैंक 101 करोड़ रुपये का यह भुगतान सिर्फ बैंकों के खातों में गई रकम नहीं है, यह आगे के फसली ऋण की रफ्तार बनाए रखने की गारंटी है।
राजस्थान में सहकारी ढांचा तीन स्तरों पर काम करता है — अपेक्स बैंक, 29 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और गांव स्तर की प्राथमिक कृषि ऋणदात्री समितियां (पैक्स)। किसान आमतौर पर अपनी गांव की पैक्स के जरिए ऋण लेता है, और पैसा जिला बैंक से आता है।
बजट घोषणा 116 से जुड़ा है यह फैसला
यह अनुदान राज्य बजट 2025-26 की घोषणा संख्या 116 के तहत जारी हुआ है। बजट में सरकार ने वादा किया था कि फसली ऋण बांटने वाले सहकारी बैंकों को ब्याज अनुदान समय पर दिया जाएगा, और उसी वादे को निभाते हुए यह राशि जारी की गई है।
रबी सीजन के लिहाज से भी इसका समय अहम है — गेहूं, सरसों और चना की बुवाई के लिए किसान अभी खाद-बीज खरीद रहे हैं। बुवाई के समय किसान के पास नकदी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, क्योंकि बीज-खाद के साथ जुताई और मजदूरी का खर्च भी एक साथ आता है। सहकारी बैंक से मिलने वाला फसली ऋण इसी जरूरत को पूरा करता है।
किसान को इसका सीधा फायदा क्या होगा
यह राशि सीधे किसानों के खातों में नहीं आई है — यह बैंकों को दिया गया अनुदान है। लेकिन बैंक मजबूत होंगे तो फसली ऋण की प्रक्रिया तेज होगी और ब्याज की दर कम रखने में मदद मिलेगी।
अगर आप किसान हैं और आपने अपनी गांव की सहकारी समिति या जिला सहकारी बैंक से फसली ऋण लिया है, तो आपको इसके लिए अलग से कोई आवेदन नहीं करना है। यह भुगतान बैंकों के स्तर पर हुआ है। हां, अगर आपको रबी सीजन के लिए नया फसली ऋण चाहिए, तो अपनी नजदीकी प्राथमिक कृषि ऋणदात्री समिति (पैक्स) या जिला केंद्रीय सहकारी बैंक की शाखा से संपर्क करें। शाखा पर जाते समय अपने खेत के कागजात साथ रखें, ताकि प्रक्रिया में देर न हो।
किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि फसली ऋण समय पर चुकाने पर ब्याज में छूट का लाभ मिलता है, इसलिए फसल बेचते ही भुगतान करने की कोशिश करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: सहकारी बैंक 101 करोड़ रुपये का अनुदान किसे मिला है?
उत्तर: यह राशि प्रदेश के सभी 29 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को दी गई है। यह अल्पकालीन फसली ऋण वितरण पर मिलने वाला क्षतिपूर्ति ब्याज अनुदान है, जो वर्ष 2025-26 के लिए जारी हुआ है।
प्रश्न 2: क्या यह पैसा सीधे किसानों के खातों में आएगा?
उत्तर: नहीं, यह राशि सीधे किसानों को नहीं दी गई है। यह बैंकों को दी गई है, ताकि वे किसानों को सस्ता और समय पर फसली ऋण देते रह सकें।
प्रश्न 3: किन दावों का भुगतान इस राशि से हुआ है?
उत्तर: 1 अप्रैल से 31 अगस्त 2025 तक की अवधि में बांटे गए अल्पकालीन फसली ऋण पर बैंकों के ब्याज अनुदान के दावों का निस्तारण किया गया है।
प्रश्न 4: सबसे ज्यादा राशि किस जिले के बैंक को मिली?
उत्तर: बाड़मेर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक को सबसे ज्यादा 7.74 करोड़ रुपये मिले हैं। जयपुर को 7.12 करोड़, भीलवाड़ा को 5.37 करोड़, सीकर को 5.26 करोड़ और चित्तौड़गढ़ को 5.08 करोड़ रुपये मिले।
कुल मिलाकर, सहकारी बैंक 101 करोड़ का यह फैसला बैंकों की सेहत और किसानों की ऋण सुविधा — दोनों को मजबूत करता है।
*स्रोत: First India News | संबंधित खबरें: किसान सम्मान निधि | रबी खाद स्टॉक | फसल बीमा योजना*