कॉलेज की डिग्री का सपना देखने वाले एक छात्र के सामने एक दिन सौदा रख दिया गया — हाजिरी भी मिलेगी, इंटर्नशिप का कागज भी मिलेगा, बस कीमत है 20 हजार रुपये। बांसवाड़ा कॉलेज रिश्वत मामला इसी सौदे का पर्दाफाश है: शुक्रवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जाल बिछाकर ग्लोबल बीएड कॉलेज के एक शिक्षक को 5 हजार रुपये लेते रंगे हाथों दबोच लिया, और इसके बाद कॉलेज के निदेशक व एक व्याख्याता को भी गिरफ्तार कर लिया।
बांसवाड़ा कॉलेज रिश्वत मामला: हाजिरी और इंटर्नशिप पत्र का 20 हजार का सौदा
बांसवाड़ा कॉलेज रिश्वत मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई। एसीबी की बांसवाड़ा इकाई को एक परिवादी ने बताया कि बड़ोदिया स्थित ग्लोबल बीएड कॉलेज में छात्रों की उपस्थिति साल भर कम रही, फिर भी कॉलेज प्रबंधन पूरे वर्ष सहयोग का वादा कर रहा था — बदले में रिश्वत लेकर। साथ ही, इंटर्नशिप का कार्यमुक्ति पत्र जारी करने के नाम पर भी पैसे मांगे जा रहे थे।
शिकायत के सत्यापन में एसीबी को पता चला कि कॉलेज के निदेशक सिद्धांत जैन, राजनीति विज्ञान की व्याख्याता सुनीता जैन और रसायन विज्ञान के अध्यापक भूपेन्द्र जैन ने मिलकर प्रत्येक छात्र से 20 हजार रुपये की मांग तय कर रखी थी। यह रकम देने पर ही हाजिरी की परेशानी दूर होगी और इंटर्नशिप पत्र जारी किया जाएगा — सौदा लगभग तय हो चुका था। इसके बाद एसीबी ने ट्रैप की तैयारी शुरू कर दी।
शुक्रवार की ट्रैप: 5 हजार लेते रंगे हाथों पकड़ा गया शिक्षक
मांग की पुष्टि होते ही एसीबी ने जाल बिछाया। शुक्रवार को एसीबी बांसवाड़ा इकाई के पुलिस उप अधीक्षक रतन सिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में ट्रैप टीम मैदान में उतरी, जबकि पूरी कार्रवाई उदयपुर रेंज के पुलिस अधीक्षक के सुपरविजन में हुई।
जाल के तहत सह-परिवादी ने रसायन विज्ञान के शिक्षक भूपेन्द्र जैन को 5 हजार रुपये दिए। जैसे ही नोट उसके हाथों में पहुंचे, एसीबी की टीम ने दबिश देकर उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया और रकम मौके से बरामद कर ली। बांसवाड़ा कॉलेज रिश्वत मामले की असली कहानी इसके बाद पूछताछ में खुली।
गिरफ्तार तीनों आरोपी: निदेशक, व्याख्याता और अध्यापक
भूपेन्द्र जैन से गहन पूछताछ में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरे गठजोड़ की पोल खोल दी। एसीबी के मुताबिक, रिश्वत की मांग और पूरी योजना में मुख्य भूमिका कॉलेज के निदेशक सिद्धांत जैन और राजनीति विज्ञान की व्याख्याता सुनीता जैन की भी थी — कुछ मीडिया रिपोर्टों में व्याख्याता का नाम डॉ. डोमिनिक जैन के रूप में भी आया है।
इन तथ्यों के आधार पर एसीबी ने निदेशक सिद्धांत जैन और व्याख्याता सुनीता जैन को भी गिरफ्तार कर लिया — एक ही कार्रवाई में कॉलेज के तीनों स्तर (निदेशक, व्याख्याता, अध्यापक) हिरासत में आ गए। एसीबी के पुलिस महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने कार्रवाई की पुष्टि की है, और वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में आगे की पूछताछ जारी है।
शिकायत से ट्रैप तक: एसीबी ने बांसवाड़ा कॉलेज रिश्वत मामले में ऐसे बिछाया जाल
एसीबी की ट्रैप कार्रवाई के पीछे एक तयशुदा प्रक्रिया चलती है:
- शिकायत: परिवादी ने एसीबी बांसवाड़ा इकाई में लिखित शिकायत दी — हाजिरी और इंटर्नशिप पत्र के नाम पर रिश्वत मांगी जा रही है।
- मांग का सत्यापन: एसीबी ने गुप्त सत्यापन कराया, जिसमें प्रत्येक छात्र से 20 हजार रुपये मांगने की बात सही पाई गई।
- ट्रैप की योजना: रेंज पुलिस अधीक्षक के सुपरविजन और डीएसपी रतन सिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में टीम तैयार हुई।
- रंगे हाथों गिरफ्तारी: शुक्रवार को भूपेन्द्र जैन को 5 हजार रुपये लेते पकड़ा गया।
- पूछताछ और विस्तार: पूछताछ में निदेशक और व्याख्याता की संलिप्तता सामने आई — दोनों गिरफ्तार।
किशनगढ़-रेनवाल के आयुर्वेदिक कॉलेज में भी इंटर्नशिप NOC के बदले 35 हजार की रिश्वत मांगने पर एसीबी ने तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में मुकदमा, अब आगे क्या होगा
तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई होगी। एसीबी अब यह पता लगाएगी कि यह गठजोड़ कब से चल रहा था और क्या पहले भी छात्रों से पैसे वसूले गए थे। प्रदेश में एसीबी की सख्त कार्रवाइयां लगातार बढ़ रही हैं — हाल ही में राजसमंद में 25 लाख रुपये की रिश्वत लेते दो दलालों को भी ब्यूरो ने रंगे हाथों दबोचा था।
मुख्य तथ्य एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
| ट्रैप की तारीख | शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 |
| कॉलेज | ग्लोबल बीएड कॉलेज, बड़ोदिया, बांसवाड़ा |
| गिरफ्तार | सिद्धांत जैन (निदेशक), सुनीता जैन (व्याख्याता), भूपेन्द्र जैन (अध्यापक) |
| प्रति छात्र मांग | 20,000 रुपये |
| रंगे हाथों पकड़ी रकम | 5,000 रुपये |
| ट्रैप नेतृत्व | डीएसपी रतन सिंह राजपुरोहित, एसीबी बांसवाड़ा |
| पुष्टि | एसीबी डीजी गोविंद गुप्ता |
| कानून | भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम |
बांसवाड़ा कॉलेज रिश्वत मामला से सबक: रिश्वत मांगे तो कहां शिकायत करें
इस मामले का सबसे बड़ा सबक छात्रों और अभिभावकों के लिए है — किसी भी दस्तावेज के बदले रिश्वत मांगी जाए तो डरने के बजाय शिकायत करें। बांसवाड़ा कॉलेज रिश्वत मामले में भी एक शिकायत ने पूरे गठजोड़ का पर्दाफाश कर दिया। राजस्थान में ये रास्ते उपलब्ध हैं:
- एसीबी टोल-फ्री हेल्पलाइन 1064 — शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रहती है।
- वॉट्सऐप हेल्पलाइन 94135-02834 — 24×7 संपर्क।
- ऑनलाइन पोर्टल — राजस्थान एसीबी की आधिकारिक वेबसाइट acb.rajasthan.gov.in पर लॉज-कंप्लेंट विकल्प।
- नजदीकी एसीबी चौकी — लिखित शिकायत सीधे स्थानीय इकाई में।
शिकायत के बाद एसीबी पहले मांग का सत्यापन कराती है, फिर खुद ट्रैप बिछाती है — जैसा शुक्रवार को हुआ। शिकायत करने वाला इस प्रक्रिया में संरक्षित रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: बांसवाड़ा कॉलेज रिश्वत मामले में क्या हुआ? उत्तर: बड़ोदिया के ग्लोबल बीएड कॉलेज के निदेशक सिद्धांत जैन, व्याख्याता सुनीता जैन और अध्यापक भूपेन्द्र जैन को एसीबी ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि तीनों मिलकर छात्रों से हाजिरी और इंटर्नशिप पत्र के नाम पर प्रति छात्र 20 हजार रुपये मांग रहे थे। भूपेन्द्र जैन को शुक्रवार को 5 हजार रुपये लेते रंगे हाथों पकड़ा गया।
प्रश्न 2: रिश्वत किस काम के बदले मांगी जा रही थी? उत्तर: छात्रों की उपस्थिति साल भर कम रही थी। आरोप है कि इसी कम हाजिरी के बावजूद सहयोग करने और इंटर्नशिप का कार्यमुक्ति पत्र जारी करने की एवज में प्रत्येक छात्र से 20 हजार रुपये की मांग की जा रही थी।
प्रश्न 3: एसीबी ने ट्रैप कैसे बिछाया? उत्तर: शिकायत के बाद एसीबी बांसवाड़ा इकाई ने मांग का सत्यापन कराया। मांग सही पाए जाने पर डीएसपी रतन सिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में टीम बनी। शुक्रवार को सह-परिवादी से 5 हजार रुपये लेते हुए भूपेन्द्र जैन को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया, और पूछताछ के बाद निदेशक व व्याख्याता को भी हिरासत में लिया गया।
प्रश्न 4: आरोपियों पर क्या कार्रवाई होगी और शिकायत कहां करें? उत्तर: तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच होगी। आपसे भी कोई रिश्वत मांगे तो राजस्थान एसीबी की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1064 या वॉट्सऐप नंबर 94135-02834 पर शिकायत दर्ज कराएं।
स्रोत: रॉयल बुलेटिन (24 अक्टूबर 2026), IANS/लोकमत न्यूज़ (23 अक्टूबर 2026), भास्कर लाइव।