राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) राजसमंद की टीम ने केंद्रीय जीएसटी विभाग के 3.12 करोड़ रुपये के नोटिस को रफादफा करने की एवज में मांगी जा रही रिश्वत की पहली किश्त — 25 लाख रुपये — लेते हुए दो दलालों को रंगे हाथों दबोच लिया है। इस मामले में सीजीएसटी उदयपुर के अधीक्षक सांवलराम को भी ट्रैप किया गया है।
यह कार्रवाई 29 सितंबर 2026 को हुई और इसका खुलासा होते ही पूरे प्रदेश में चर्चा छिड़ गई है। जिस विभाग का काम कर संग्रह करना है, उसी के अधीक्षक पर करोड़ों के नोटिस को दबाने के बदले में एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है।
पूरा मामला: नोटिस से ट्रैप तक
मामले की शुरुआत केंद्रीय जीएसटी विभाग द्वारा राजसमंद जिले की कुछ फर्मों को जारी किए गए 3.12 करोड़ रुपये के नोटिस से हुई। सीजीएसटी में अनियमितता को लेकर ये नोटिस जारी किए गए थे। आरोप है कि सीजीएसटी उदयपुर के अधीक्षक सांवलराम ने इस अनियमितता को रफादफा करने या नोटिस की राशि कम करवाने की एवज में करीब एक करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग रखी।
बाद में सौदा 60 लाख रुपये पर तय हुआ और पहली किश्त के रूप में 25 लाख रुपये देने का फैसला हुआ। तय योजना के मुताबिक, संबंधित फर्म का प्रतिनिधि 25 लाख रुपये लेकर राजसमंद पहुंचा। राजसमंद के दलाल अनिल पारीक ने रिश्वत की यह राशि सौ फीट रोड स्थित एक टायर शोरूम पर सुशील पारीक को सौंपी।
लेकिन एसीबी की टीम पहले से तैयार बैठी थी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो राजसमंद की टीम ने शोरूम पर दबिश देकर रिश्वत की पूरी राशि जब्त कर ली। इसी के साथ राजसमंद के इनपुट पर एसीबी की कोटा टीम ने सुकेत से सीजीएसटी अधीक्षक सांवलराम को भी ट्रैप कर लिया, जबकि दलाल अनिल पारीक को एसीबी की दूसरी टीम ने केलवा से गिरफ्तार कर लिया।
कौन-कौन पकड़ा गया: 2 गिरफ्तार, अधीक्षक ट्रैप
एसीबी के अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक हिम्मत सिंह चारण के मुताबिक, इस कार्रवाई में अब तक दो निजी व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है — सुशील पारीक और दलाल अनिल पारीक। वहीं, सीजीएसटी उदयपुर के अधीक्षक सांवलराम को कोटा जिले के सुकेत से पकड़कर ट्रैप किया गया है और एसीबी की टीम उन्हें राजसमंद लेकर आ रही है।
गिरफ्तार दोनों निजी व्यक्तियों और सीजीएसटी अधीक्षक की मेडिकल जांच कराई जा रही है। फिलहाल सभी आरोपी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो राजसमंद के कार्यालय में एसीबी की कस्टडी में हैं और उनसे गहन पूछताछ जारी है।
तलाशी अभियान: दफ्तर से आवास तक
मामला सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा। एसीबी की टीम ने आरोपी अधीक्षक की ज्वाइनिंग से लेकर अब तक के पूरे सर्विस रिकॉर्ड की जानकारी लेना शुरू कर दिया है, और उदयपुर में सीजीएसटी के दफ्तर व आवास की तलाशी भी ली गई है। साथ ही एसीबी ने सीजीएसटी विभाग से राजसमंद में जारी 3.12 करोड़ रुपये के नोटिस वाली फर्मों की पूरी डिटेल मांगी है।
मुख्य तथ्य एक नजर में
| कार्रवाई करने वाली एजेंसी | भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), राजसमंद |
| नोटिस की राशि | 3.12 करोड़ रुपये (सीजीएसटी, राजसमंद की फर्मों को) |
| मांगी गई कुल रिश्वत | करीब 1 करोड़ रुपये |
| सौदा तय हुआ | 60 लाख रुपये पर |
| पहली किश्त (जब्त) | 25 लाख रुपये |
| गिरफ्तार | सुशील पारीक, दलाल अनिल पारीक |
| ट्रैप/डिटेन | सीजीएसटी उदयपुर अधीक्षक सांवलराम |
| रिश्वत सौंपी गई | राजसमंद में सौ फीट रोड स्थित टायर शोरूम पर |
| कार्रवाई की तारीख | 29 सितंबर 2026 |
क्यों अहम है यह कार्रवाई
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि आरोपी कोई छोटा-मोटा कर्मचारी नहीं, बल्कि सीजीएसटी का अधीक्षक स्तर का अधिकारी है। कर विभागों में नोटिस को दबाने या राशि कम करवाने के बदले में रिश्वत की मांग का यह आरोप व्यापारियों और आम करदाताओं दोनों के लिए चिंता का विषय है।
दूसरी अहम बात — एसीबी ने इस कार्रवाई को तीन जिलों में एक साथ अंजाम दिया। राजसमंद में शोरूम पर दबिश, केलवा से दलाल की गिरफ्तारी और कोटा के सुकेत से अधीक्षक का ट्रैप — तीनों कार्रवाईयां एक ही इनपुट के आधार पर समन्वित तरीके से हुईं। इससे साफ है कि एसीबी ने इस केस पर काफी पहले से नजर रखी हुई थी।
राजस्थान में एसीबी की इस तरह की बड़ी कार्रवाईयां हाल के समय में बढ़ी हैं। इससे पहले भी रिश्वत के मामलों में बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है — यह संदेश देती हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी लगातार तेज हो रही है।
रिश्वत मांगे तो क्या करें: आपके काम की जानकारी
अगर आपसे कोई सरकारी अधिकारी काम के बदले रिश्वत मांगे, तो घबराने की बजाय सही कदम उठाएं:
- एसीबी हेल्पलाइन: राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का टोल-फ्री नंबर 1064 है। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है।
- सबूत जुटाएं: अधिकारी से बातचीत का ऑडियो या वीडियो रिकॉर्ड करना ट्रैप की सफलता में बड़ा सहायक होता है।
- ट्रैप कैसे काम करता है: शिकायत के बाद एसीबी खुद रिश्वत के नोटों पर निशान लगाकर जाल बिछाती है — जैसा इस मामले में टायर शोरूम पर हुआ। रिश्वत लेते ही आरोपी रंगे हाथ पकड़ा जाता है।
याद रखें — रिश्वत देना भी कानूनन अपराध है, लेकिन एसीबी की ट्रैप कार्रवाई में सहयोग करने पर आप शिकायतकर्ता के रूप में संरक्षित रहते हैं।
आगे क्या होगा
एसीबी अब इस मामले की जड़ तक जाने की तैयारी में है। आरोपी अधीक्षक के सर्विस रिकॉर्ड की जांच से पता चलेगा कि क्या पहले भी इस तरह के लेन-देन हुए हैं। गिरफ्तार दलालों से पूछताछ में यह भी सामने आ सकता है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था। फिलहाल सभी आरोपी एसीबी की कस्टडी में हैं और जांच जारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: राजसमंद एसीबी कार्रवाई में कुल कितने लोग पकड़े गए?
उत्तर: अब तक दो निजी व्यक्तियों — सुशील पारीक और दलाल अनिल पारीक — को गिरफ्तार किया गया है। सीजीएसटी उदयपुर के अधीक्षक सांवलराम को ट्रैप/डिटेन किया गया है और उन्हें राजसमंद लाया जा रहा है।
प्रश्न 2: रिश्वत किस काम के बदले मांगी जा रही थी?
उत्तर: राजसमंद की फर्मों को जारी 3.12 करोड़ रुपये के सीजीएसटी नोटिस को रफादफा करने की एवज में करीब 1 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। सौदा 60 लाख पर तय हुआ था और 25 लाख की पहली किश्त लेते हुए ट्रैप हुआ।
प्रश्न 3: एसीबी ने रिश्वत की राशि कहां से जब्त की?
उत्तर: राजसमंद में सौ फीट रोड स्थित एक टायर शोरूम पर दलाल अनिल पारीक ने 25 लाख रुपये सुशील पारीक को सौंपे थे। एसीबी की टीम ने वहीं दबिश देकर पूरी राशि जब्त कर ली।
प्रश्न 4: रिश्वत मांगे जाने पर शिकायत कहां करें?
उत्तर: राजस्थान एसीबी के टोल-फ्री नंबर 1064 पर शिकायत दर्ज कराएं। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है और एसीबी खुद ट्रैप की कार्रवाई करती है।