जयपुर। फसल खराब होने के बाद फसल बीमा क्लेम के इंतजार में बैठे हजारों किसानों के लिए बुधवार की शाम बड़ी खुशखबरी लेकर आई — राज्य स्तरीय शिकायत निराकरण समिति (एसजीआरसी) ने बीमा कंपनियों की आपत्तियां खारिज कर दीं, जिसके बाद डूंगरपुर और जालोर के किसानों को कुल करीब ₹21.27 करोड़ का क्लेम मिलेगा। सिर्फ डूंगरपुर में 155 फसल कटाई प्रयोगों पर लगी आपत्तियों के हटने से किसानों को ₹7.69 करोड़ का लाभ मिलेगा, जबकि जालोर के दो प्रकरणों में ₹13.58 करोड़ से अधिक की राशि से जुड़ी आपत्तियों का निस्तारण हुआ है।
खास बात यह है कि इनमें से कुछ भुगतान एक-दो साल से लंबित थे। जालोर के कई किसान तो दो साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे — अब बीमा क्लेम की राशि सीधे उनके बैंक खातों में आएगी।
डूंगरपुर में ₹7.69 करोड़ का फसल बीमा क्लेम: एक साल से अटका भुगतान
डूंगरपुर जिले में खरीफ मौसम 2025 के दौरान बीमा कंपनी ने 155 फसल कटाई प्रयोगों पर आपत्तियां दर्ज कर दी थीं। फसल कटाई प्रयोग बीमा क्लेम तय करने का सबसे अहम आधार होता है — इन्हीं से तय होता है कि किसी क्षेत्र में फसल को कितना नुकसान हुआ और किसान को कितना मुआवजा मिलेगा। आपत्ति दर्ज होने के बाद करीब एक साल से किसानों का भुगतान अटका था।
समिति ने इन प्रयोगों पर दर्ज आपत्तियों का निस्तारण कर दिया, जिससे डूंगरपुर के किसानों को लगभग ₹7.69 करोड़ का लाभ मिलेगा — उन किसानों के लिए बड़ी राहत, जिन्होंने खराब फसल के बावजूद बीमा प्रीमियम भरा था।
जालोर: दो साल के चक्कर खत्म, ₹13.58 करोड़ का रास्ता साफ
जालोर जिले के किसानों के लिए यह फैसला और भी बड़ी राहत है, क्योंकि यहां कुछ प्रकरण करीब दो साल से लंबित थे।
पहला प्रकरण रबी मौसम 2023-24 का है। चवरडा पटवार मंडल में सरसों की फसल के फसल कटाई प्रयोगों पर बीमा कंपनी ने आपत्ति दर्ज कर रखी थी। समिति ने इन आपत्तियों का निस्तारण कर किसानों के लिए ₹1 करोड़ 22 लाख का बीमा क्लेम मंजूर किया है।
दूसरा प्रकरण खरीफ मौसम 2024 का है, जिसमें गिरदावरी रिपोर्ट के अभिलेखों में दर्ज फसलों का बीमित क्षेत्र वास्तविक बोए गए क्षेत्र से अधिक होने का मामला सामने आया था। यह मामला 13 पटवार मंडलों से जुड़ा था और इसमें करीब ₹12 करोड़ 36 लाख की राशि से जुड़ी आपत्तियों का निस्तारण किया गया।
| जिला | फसल मौसम | निस्तारित आपत्तियां | लाभ राशि |
|---|---|---|---|
| डूंगरपुर | खरीफ 2025 | 155 फसल कटाई प्रयोग | ₹7.69 करोड़ |
| जालोर | रबी 2023-24 (सरसों, चवरडा पटवार मंडल) | फसल कटाई प्रयोग | ₹1.22 करोड़ |
| जालोर | खरीफ 2024 (13 पटवार मंडल) | बीमित क्षेत्र संबंधी | ₹12.36 करोड़ |
| कुल | ≈₹21.27 करोड़ |
फैसला हुआ कैसे: एसजीआरसी की वीसी बैठक
बुधवार (14 अक्टूबर) को जयपुर के पंत कृषि भवन में एसजीआरसी की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई, जिसकी अध्यक्षता कृषि एवं उद्यानिकी की प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल ने की। विभिन्न जिलों के फसल बीमा प्रकरणों की समीक्षा कर उनका निस्तारण किया गया।
मंजू राजपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं में फसल नुकसान से आर्थिक सुरक्षा देने की महत्वपूर्ण योजना है, और योजना का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए आपत्तियों का निस्तारण तथ्यों के आधार पर पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कृषि विभाग, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है, ताकि पात्र किसानों को लाभ लेने में अनावश्यक परेशानी न हो।
फसल बीमा क्लेम पर आपत्तियां क्यों लगती हैं
किसानों के लिए यह समझना जरूरी है कि क्लेम के रास्ते में आपत्तियां आती क्यों हैं। सबसे आम वजह फसल कटाई प्रयोगों से जुड़ी होती है — अगर बीमा कंपनी मानती है कि प्रयोग सही तरीके से नहीं हुए, तो वह आपत्ति दर्ज कर देती है, जैसा डूंगरपुर में हुआ।
दूसरी बड़ी वजह बीमित क्षेत्र और वास्तविक बुवाई क्षेत्र का अंतर है। अगर गिरदावरी रिपोर्ट के अभिलेखों में दर्ज बीमित क्षेत्र वास्तविक बोए गए क्षेत्र से अधिक पाया जाता है, तो कंपनी क्लेम पर सवाल उठा देती है — जैसा जालोर के 13 पटवार मंडलों में हुआ था। इन्हीं विवादों के निपटारे के लिए एसजीआरसी जैसी समिति बनी है, जहां बीमा कंपनी की आपत्ति, किसानों का दावा और सरकारी अभिलेख — तीनों की जांच के बाद फैसला होता है।
अब किसानों को क्या करना चाहिए
समिति के फैसले के बाद बीमा क्लेम की राशि किसानों के बैंक खातों में आनी चाहिए, लेकिन किसानों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- बैंक खाता, आधार और बीमा पॉलिसी से जुड़े विवरण अद्यतित रखें — भुगतान इन्हीं खातों में आएगा।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के पोर्टल (pmfby.gov.in) पर अपने क्लेम की स्थिति समय-समय पर जांचें।
- क्लेम तय समय में खाते में न आए तो जिले के कृषि विभाग कार्यालय या बैंक शाखा से संपर्क करें।
- फसल कटाई प्रयोगों के समय पटवारी और बीमा प्रतिनिधियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड रखें, ताकि भविष्य के विवाद में सबूत हो।
फसल बीमा योजना में राजस्थान पहले से मजबूत स्थिति में है — केंद्र के हालिया मूल्यांकन में राज्य ने क्रियान्वयन में देश में चौथा स्थान हासिल किया था। डूंगरपुर-जालोर का यह फैसला दिखाता है कि शिकायत निवारण तंत्र अब किसानों के पक्ष में सक्रियता से काम कर रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
फसल बीमा क्लेम पर आपत्ति क्या होती है?
जब बीमा कंपनी किसी दावे पर सवाल उठाती है — जैसे फसल कटाई प्रयोग सही तरीके से नहीं हुए या बीमित क्षेत्र का रिकॉर्ड वास्तविक बुवाई से मेल नहीं खाता — तो उसे आपत्ति कहते हैं। आपत्ति दर्ज होने पर भुगतान अटक जाता है।
एसजीआरसी क्या है?
राज्य स्तरीय शिकायत निराकरण समिति — प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की शिकायतों और बीमा कंपनियों की आपत्तियों के निस्तारण के लिए बनाई गई समिति।
डूंगरपुर और जालोर के किसानों को कितनी राशि मिलेगी?
डूंगरपुर को ₹7.69 करोड़ और जालोर को ₹13.58 करोड़ से अधिक — कुल करीब ₹21.27 करोड़।
क्लेम की राशि कब तक खाते में आएगी?
समिति के फैसले के बाद बीमा कंपनियों को भुगतान की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। किसान अपने बैंक खाते और दस्तावेज अद्यतित रखें और pmfby.gov.in पर क्लेम की स्थिति जांचते रहें।
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आधिकारिक जानकारी के लिए: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पोर्टल