जयपुर नगर निगम अतिक्रमण अभियान: 6 कैंटर सामान जब्त, 20 हजार कैरिंग चार्ज — दोबारा पकड़े तो भारी चालान

दीपावली नजदीक आते ही जयपुर के बाजारों में रौनक बढ़ती है, लेकिन सड़कों और फुटपाथ पर फैले ठेलों, काउंटरों और अस्थायी कब्जों से राहगीरों और खरीददारों की मुसीबत भी बढ़ जाती है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए नगर निगम जयपुर ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। गुरुवार को चलाए गए जयपुर नगर निगम अतिक्रमण अभियान में निगम की सतर्कता शाखा ने मानसरोवर, मालवीय नगर और प्रताप नगर समेत शहर के कई इलाकों में कार्रवाई करते हुए छह कैंटर सामान जब्त किया और अतिक्रमण करने वालों से 20 हजार रुपये का कैरिंग चार्ज वसूला।

सबसे बड़ी बात यह है कि निगम ने साफ चेतावनी दी है — दोबारा अतिक्रमण पाए जाने पर भारी चालान समेत नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होगी। यानी दुकानदारों और फुटपाथ पर कारोबार करने वालों के लिए सीधा संदेश है: अपनी दुकान की हद में रहें, सार्वजनिक रास्ता घेरना महंगा पड़ेगा।

दुकानदारों के लिए सबसे पहले यह जानें: क्या-क्या हो सकता है

अगर आपकी दुकान के बाहर फुटपाथ पर सामान, बोर्ड, ठेला या काउंटर लगा है, तो यह अभियान सीधे आपसे जुड़ा है। कार्रवाई में निगम की टीम अतिक्रमण में इस्तेमाल हो रहा सामान जब्त कर लेती है — ठेले, टेबिल, स्टैंड, बोर्ड, काउंटर, प्लास्टिक शीट, जो भी सार्वजनिक जगह पर पाया जाता है। जब्त सामान को कैंटर में भरकर निगम के गोदाम में पहुंचा दिया जाता है। गुरुवार को ही छह कैंटर सामान जब्त हुआ। इसके साथ मौके पर कैरिंग चार्ज भी वसूला जाता है — इस बार 20 हजार रुपये। टीम संबंधित लोगों को समझाती भी है और भविष्य में अतिक्रमण समय रहते हटाने के लिए मौखिक रूप से पाबंद करती है। लेकिन यह समझाइश आखिरी चेतावनी के रूप में है — अगली बार पकड़े गए तो भारी चालान पक्का है।

कैरिंग चार्ज और जब्त सामान: पूरी प्रक्रिया एक नजर में

बिंदु विवरण
जब्त सामान कहां जाता है निगम के गोदाम में सुरक्षित रखा जाता है
कैरिंग चार्ज कितना गुरुवार की कार्रवाई में 20 हजार रुपये वसूले गए
सामान वापसी की शर्त नियमानुसार शुल्क व जुर्माना जमा करने के बाद ही वापसी संभव
दोबारा पकड़े जाने पर भारी चालान के साथ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई
शिकायत कहां करें वार्ड कार्यालय या निगम मुख्यालय में शिकायत दर्ज कराएं
अभियान किसने चलाया उपायुक्त सतर्कता के नेतृत्व में सतर्कता शाखा

गुरुवार को कहां-कहां चला अभियान

यह अभियान पूर्व में मिली शिकायतों के आधार पर नियोजित कार्रवाई थी। नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा के निर्देश पर उपायुक्त सतर्कता के नेतृत्व में टीम ने शहर के कई हिस्सों को एक साथ घेरा।

अभियान वीटी रोड मध्यम मार्ग और विजयपथ से शुरू हुआ। मानसरोवर के शिप्रापथ और गोल्यावास क्षेत्र में अतिक्रमण हटाया गया। संजय नगर स्थित शनि मंदिर के आसपास लगी दुकानों और ठेलों पर भी कार्रवाई हुई। इसके बाद टीम मालवीय नगर के प्रधान मार्ग पहुंची, जहां मुख्य सड़क पर लगे अस्थायी ढांचे हटाए गए। प्रताप नगर के सेक्टर-8 में भी अस्थायी अतिक्रमण हटवाया गया।

मानसरोवर से मालवीय नगर और प्रताप नगर तक — शहर के दक्षिणी और पुराने बसावट वाले दोनों इलाके इस अभियान की परिधि में आए। टीम ने सभी जगहों से सामान जब्त कर छह कैंटर में भरवाया और गोदाम भिजवा दिया।

क्यों तेज हुई सख्ती: 100 दिवसीय कार्ययोजना की पृष्ठभूमि

यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई। इसकी जड़ें नगर निगम की उस 100 दिवसीय कार्ययोजना में हैं, जिसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों के बाद तैयार किया गया। अक्टूबर की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने निगम के कामकाज की समीक्षा बैठक में शहर की साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसके बाद महापौर सुनील कोठारी ने घोषणा की — सभी 150 वार्डों में पांच चरणों में काम, 100 दिनों में करीब 100 करोड़ रुपये का खर्च, हर वार्ड में पार्षद की अनुशंसा पर 50 लाख रुपये तक के विकास कार्य।

इसके साथ ही अमृत 2.0 योजना के तहत सात जोन में 465 करोड़ रुपये से अधिक के सीवरेज कार्यों के कार्यादेश जारी हो चुके हैं। दीपावली से पहले सफाई, सड़क सुधार, प्रकाश व्यवस्था और सौंदर्यीकरण पर खास जोर है — 10 हजार नई एलईडी स्ट्रीट लाइटें और 3000 अतिरिक्त सफाई कर्मचारी तैनात किए गए हैं। बाजारों और मुख्य मार्गों से अतिक्रमण हटाना इसी बड़ी योजना का हिस्सा है।

दूसरी तरफ, जयपुर की कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं के संकट पर उठी आवाज ने भी निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। अतिक्रमण पर कार्रवाई इसी दबाव का नतीजा मानी जा रही है।

अतिक्रमण पर कार्रवाई: नियम क्या कहते हैं

नगर निगम के नियमों के मुताबिक सार्वजनिक मार्ग, फुटपाथ, गली या सरकारी जमीन पर बिना अनुमति कोई भी अस्थायी या स्थायी निर्माण अतिक्रमण माना जाता है। ठेला, काउंटर, बोर्ड, शेड, चबूतरा — कोई भी चीज जो सार्वजनिक आवागमन में बाधा डाले, हटाई जा सकती है। पहली कार्रवाई में सामान जब्त और कैरिंग चार्ज, दोबारा पकड़े जाने पर भारी चालान और कड़ी कार्रवाई।

यह नीति सिर्फ जयपुर तक सीमित नहीं है। हाल ही में भरतपुर में BDA की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई में सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आए अतिक्रमण पर एक्शन हुआ था, और महापौर सुनील कोठारी की पहली मैराथन बैठक में भी अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर सख्त चेतावनी दी गई थी। प्रदेशभर में अवैध कब्जों पर कार्रवाई का माहौल बन रहा है।

दुकानदारों और ठेला-व्यापारियों के लिए जरूरी सलाह

अगर आप बाजार में दुकान चलाते हैं या ठेले से कारोबार करते हैं, तो ये चार बातें ध्यान रखें: पहला, दुकान का सामान दुकान की सीमा के अंदर रखें — फुटपाथ या सड़क पर बोर्ड, काउंटर या डिस्प्ले अतिक्रमण है, दीपावली की भीड़ के बहाने भी छूट नहीं मिलेगी। दूसरा, जिन इलाकों में अतिक्रमण की शिकायतें पहले से दर्ज हैं, वहां कार्रवाई की संभावना सबसे ज्यादा है — आयुक्त के निर्देश पर शिकायतों के आधार पर ही टीमें उतर रही हैं। तीसरा, जब्त सामान छुड़ाने के लिए निगम गोदाम से संपर्क कर निर्धारित शुल्क व जुर्माना जमा करना होगा — प्रक्रिया में समय लगता है, इसलिए पहले से सावधानी बेहतर है। चौथा, दोबारा पकड़े जाने पर जुर्माना भारी हो सकता है और रिकॉर्ड में नाम आ सकता है, जिससे भविष्य में लाइसेंस या नवीनीकरण में दिक्कत हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: कैरिंग चार्ज क्या होता है?

जवाब: अतिक्रमण हटाओ अभियान में जब निगम की टीम सामान जब्त करती है, तो उस सामान को ढोने, ले जाने और गोदाम तक पहुंचाने की लागत के रूप में वसूला गया शुल्क कैरिंग चार्ज कहलाता है। गुरुवार की कार्रवाई में यह 20 हजार रुपये था।

सवाल: जब्त सामान वापस कैसे मिलेगा?

जवाब: निगम गोदाम में रखे सामान को छुड़ाने के लिए निर्धारित शुल्क और जुर्माना जमा करना होगा। इसके लिए निगम कार्यालय से संपर्क कर प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

सवाल: क्या पहली बार में ही चालान कटता है?

जवाब: पहली कार्रवाई में सामान जब्त, कैरिंग चार्ज और मौखिक चेतावनी दी जाती है। दोबारा अतिक्रमण पाए जाने पर भारी चालान और कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।

सवाल: यह अभियान कब तक चलेगा?

जवाब: यह निगम की 100 दिवसीय कार्ययोजना का हिस्सा है, जो दीपावली सहित आगामी त्योहारों के दौरान शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित रखने के लक्ष्य से चल रही है। शिकायतों के आधार पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

निष्कर्ष

जयपुर नगर निगम अतिक्रमण अभियान सिर्फ एक दिन की छापेमारी नहीं, बल्कि शहर की व्यवस्था सुधारने की बड़ी योजना का हिस्सा है। मानसरोवर से मालवीय नगर और प्रताप नगर तक चली इस कार्रवाई ने साफ संदेश दिया है — सार्वजनिक रास्ता किसी की निजी दुकान का विस्तार नहीं बन सकता। दीपावली के खरीदारी सीजन में जब भीड़ बढ़ेगी, निगम की सतर्कता भी बढ़ेगी। दुकानदारों के लिए सबसे समझदारी का रास्ता यही है कि नियमों के दायरे में रहकर कारोबार करें, ताकि न सामान जब्त हो, न जेब पर बोझ पड़े।

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