सरकारी खर्च पर मुफ्त तीर्थ यात्रा — ये सपना राजस्थान के हजारों बुजुर्गों के लिए वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के तहत पूरा होता है। लेकिन गंगासागर की इस बार की यात्रा से जुड़े 970 वरिष्ठ नागरिकों ने इंतजामों पर गंभीर आरोप लगाए हैं — कोलकाता पहुंचने के बाद करीब 6 घंटे तक सड़क पर इंतजार, बस में टॉयलेट के लिए भी न रुकना, समय पर चाय-नाश्ता न मिलना और तय मानकों से नीचे ठहरने की व्यवस्था। ये आरोप इसलिए भी अहम हैं क्योंकि इस योजना का मकसद बुजुर्गों को सम्मान और सुविधा के साथ धार्मिक यात्रा कराना है।
बुजुर्ग यात्रियों के मुख्य आरोप
सबसे बड़ा आरोप कोलकाता पहुंचने के बाद की घटना को लेकर है। यात्रियों का कहना है कि धार्मिक स्थलों के दर्शन के सिलसिले में कोलकाता पहुंचने के बाद उन्हें लगभग छह घंटे तक सड़क पर बैठकर इंतजार करना पड़ा। इस उम्र में घंटों सड़क पर बैठना कितना तकलीफदेह होता है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं। बताया गया कि पुलिसकर्मियों के पहुंचने और पूछताछ करने पर ही अटेंडेंट को बुलाया गया।
दूसरा आरोप बस यात्रा से जुड़ा है। यात्रियों ने बताया कि लंबी बस यात्रा के दौरान टॉयलेट जाने के लिए बस रोकने की मांग के बावजूद काफी देर तक बस नहीं रोकी गई। करीब 130 किलोमीटर की बस यात्रा में उचित जगह पर बस न रोकने से बुजुर्गों को भारी परेशानी हुई।
खाने-पीने को लेकर भी शिकायतें हैं — होटल में सुबह 11 बजे तक चाय-नाश्ता नहीं मिला, बस में दिया गया खाना खराब गुणवत्ता का था (पूड़ियां इतनी सख्त कि खाना मुश्किल), और एक यात्री के मुताबिक दो रोटी के बाद तीसरी रोटी देने से मना कर दिया गया।
ठहरने की व्यवस्था पर भी तीखे आरोप हैं। यात्रियों के मुताबिक उन्हें बेहतर होटल में ठहराने की बात कही गई थी, लेकिन कई जगहों पर धर्मशाला में व्यवस्था की गई — एक कमरे में छह से आठ बुजुर्गों को ठहराया गया और कुछ जगहों पर बाथरूम में पानी तक नहीं था। मदद के लिए नियुक्त कर्मचारी भी जरूरत के समय मौजूद नहीं मिले।
वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा का पूरा कार्यक्रम
ये शिकायतें हवा में नहीं हैं — इनके पीछे नाम और चेहरे हैं। वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा के इस जत्थे में शामिल नरपत नाम के एक यात्री ने बताया कि 10 अक्टूबर को उदयपुर और अजमेर संभाग के यात्रियों को लेकर विशेष ट्रेन कोलकाता पहुंची थी। वहीं, यात्री ओमप्रकाश कुमावत ने खाने और बस यात्रा की अव्यवस्थाओं पर खुलकर आरोप लगाए।
इस जत्थे का पूरा ब्योरा इस तालिका में देखिए — ये वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा के गंगासागर दौरे के सभी प्रमुख तथ्य एक जगह समेटती है:
| विवरण | जानकारी |
| योजना का नाम | मुख्यमंत्री वरिष्ठ नागरिक निःशुल्क तीर्थ यात्रा योजना |
| गंतव्य | गंगासागर (कोलकाता होते हुए) |
| प्रस्थान | 10 अक्टूबर, राणा प्रताप नगर रेलवे स्टेशन, उदयपुर |
| यात्री | 970 वरिष्ठ नागरिक (उदयपुर और अजमेर संभाग) |
| गंगासागर पहुंच | 12 अक्टूबर |
| अन्य दर्शन | कोलकाता का बेलूर मठ सहित अन्य धार्मिक स्थल |
| वापसी (निर्धारित) | 16 अक्टूबर |
| सहायता कर्मचारी | 30 (प्रत्येक कोच में दो सरकारी कर्मचारी) |
| स्वास्थ्य सुविधा | 1 डॉक्टर और 2 नर्सिंगकर्मी |
970 यात्रियों के लिए 30 कर्मचारी और सिर्फ एक डॉक्टर — यही अनुपात अब सवालों के घेरे में है, क्योंकि यात्रियों की शिकायतों से ये इंतजाम पर्याप्त नहीं लगते।
मुख्यमंत्री वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना क्या है
आरोपों को समझने के लिए पहले ये जानना जरूरी है कि ये योजना आखिर है क्या। राजस्थान सरकार की वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को सरकार के खर्च पर तीर्थ यात्रा कराई जाती है। देवस्थान विभाग इसका नोडल विभाग है। आवेदन ऑनलाइन लिए जाते हैं और लॉटरी के जरिए वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा के यात्रियों का चयन होता है।
रेल मार्ग से 15 तीर्थ सर्किट तय हैं — हरिद्वार-अयोध्या-वाराणसी, मथुरा-वृंदावन, द्वारकापुरी-सोमनाथ, तिरुपति, कामाख्या-गंगासागर-कोलकाता, जगन्नाथपुरी, रामेश्वरम, वैष्णोदेवी-अमृतसर, महाकालेश्वर-उज्जैन और श्री हुजूर साहिब (नांदेड़) जैसे धाम इसमें शामिल हैं। हवाई मार्ग से नेपाल के पशुपतिनाथ-काठमांडू की यात्रा का भी प्रावधान है। आईआरसीटीसी की एसी कोच वाली ट्रेनों में यात्रा कराई जाती है और 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग अपने साथ एक सहायक भी ले जा सकते हैं।
यानी, कागज पर वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना बुजुर्गों के लिए एक बड़ी सौगात है — लेकिन गंगासागर जत्थे के अनुभव बताते हैं कि जमीनी अमल में बड़ी चूक हो रही है।
इन आरोपों के मायने और अब आगे क्या
सबसे पहला सवाल — क्या बुजुर्गों की शिकायतों पर सुनवाई होगी? खबर लिखे जाने तक आरोपों पर संबंधित विभाग या एजेंसी का पक्ष सामने नहीं आया था। निष्पक्ष जांच के लिए दोनों पक्षों का सुनना जरूरी है, इसलिए विभाग का जवाब आना बाकी है।
दूसरा सवाल व्यवस्था के डिजाइन पर है। 970 बुजुर्गों के साथ सिर्फ 30 कर्मचारी और एक डॉक्टर — क्या ये अनुपात उम्रदराज यात्रियों की जरूरतों के हिसाब से ठीक है? बुजुर्गों को बार-बार टॉयलेट, समय पर दवा-खाना और आरामदायक ठहरना चाहिए होता है। एक कमरे में 6-8 लोगों को ठहराना किसी भी मानक पर खरा नहीं उतरता।
तीसरा सवाल भविष्य की यात्राओं का है। वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना सालभर चरणबद्ध तरीके से चलती है और हजारों बुजुर्ग अपनी बारी का इंतजार करते हैं। अगर गंगासागर जत्थे के आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और खामियां दूर नहीं की गईं, तो आने वाले जत्थों को भी यही परेशानी झेलनी पड़ सकती है। बुजुर्गों से जुड़ी दूसरी व्यवस्थाओं में भी दिक्कतों की खबरें आती रही हैं — चाहे वो बुजुर्गों को निशाना बनाने वाली ठगी हो या स्वास्थ्य योजनाओं में इलाज की परेशानी। 16 अक्टूबर को जत्थे की वापसी होनी है — उम्मीद है कि यात्री अपनी शिकायतें औपचारिक रूप से विभाग के सामने रखेंगे और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना में कौन आवेदन कर सकता है?
उत्तर: राजस्थान के 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन ऑनलाइन पोर्टल से लिए जाते हैं और लॉटरी से चयन होता है। आवेदक को आय और पहले कभी यात्रा न करने का स्व-घोषणा पत्र देना होता है। 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग एक सहायक भी साथ ले जा सकते हैं।
प्रश्न 2: इस यात्रा में कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं?
उत्तर: रेल यात्रा (आईआरसीटीसी की एसी कोच वाली ट्रेनों से), बस परिवहन, ठहरने और भोजन की व्यवस्था सरकार के खर्च पर होती है। प्रत्येक कोच में सरकारी कर्मचारी तैनात रहते हैं और डॉक्टर व नर्सिंगकर्मी भी साथ भेजे जाते हैं।
प्रश्न 3: गंगासागर जत्थे के आरोपों पर विभाग ने क्या कहा?
उत्तर: खबर लिखे जाने तक देवस्थान विभाग या संबंधित एजेंसी का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया था। विभागीय प्रतिक्रिया आने के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
प्रश्न 4: इस योजना में और कौन-कौन से तीर्थस्थल शामिल हैं?
उत्तर: रेल मार्ग से 15 सर्किट तय हैं — हरिद्वार-ऋषिकेश-अयोध्या-वाराणसी, मथुरा-वृंदावन, तिरुपति, कामाख्या-गंगासागर-कोलकाता, जगन्नाथपुरी, रामेश्वरम, वैष्णोदेवी-अमृतसर, महाकालेश्वर-उज्जैन और श्री हुजूर साहिब (नांदेड़) सहित कई धाम। हवाई मार्ग से पशुपतिनाथ-काठमांडू (नेपाल) की यात्रा का भी प्रावधान है।