अगर आपको जंगल सफारी का शौक है, तो ये खबर आपके ट्रैवल प्लान को बदल सकती है। रणथंभौर टूरिज्म सर्किट का प्रस्ताव राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व से मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क और माधव टाइगर रिजर्व तक एक जुड़ा हुआ वन्यजीव पर्यटन सर्किट बनाने की तैयारी है। मध्य प्रदेश के वन विभाग ने इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप दे दिया है।
सीधी भाषा में कहें तो इसका मतलब ये है कि अगर आप दिल्ली, जयपुर या मुंबई से निकले, तो एक ही ट्रिप में आपको बाघ और चीता — दोनों के दर्शन हो सकते हैं। रणथंभौर में 75 से ज्यादा बाघ हैं, कूनो में करीब 55 चीते और माधव टाइगर रिजर्व में चार बाघ हैं।
रणथंभौर टूरिज्म सर्किट से पर्यटकों को क्या-क्या मिलेगा
इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा फायदा घरेलू और विदेशी दोनों तरह के पर्यटकों को मिलेगा। अभी तक रणथंभौर घूमने आने वाले पर्यटक बाघ देखकर लौट जाते थे, और चीता देखने के लिए उन्हें अलग से मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में कूनो जाना पड़ता था। दोनों ट्रिप अलग-अलग प्लान करनी पड़ती थीं। नया सर्किट बनने पर एक ही यात्रा में कई तरह की सफारी और प्राकृतिक गतिविधियों का विकल्प मिलेगा, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार इस रूट की दूरी भी सुविधाजनक है। कूनो से रणथंभौर और माधव नेशनल पार्क की दूरी महज 180 से 200 किलोमीटर के दायरे में है। यानी सुबह कूनो में चीता सफारी और शाम तक रणथंभौर के जंगल में बाघ के दीदार — ये प्लान अब कागज पर उतर चुका है।
प्रस्ताव की खास बातें — किन तीन पार्कों को जोड़ेगा ये सर्किट
तीनों संरक्षित क्षेत्रों को जोड़ने का खाका मध्य प्रदेश के वन विभाग ने तैयार किया है। इसमें सवाई माधोपुर का रणथंभौर टाइगर रिजर्व, श्योपुर का कूनो नेशनल पार्क और शिवपुरी का माधव टाइगर रिजर्व शामिल हैं। उद्देश्य सिर्फ पर्यटन नहीं है — भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) भी इन तीनों क्षेत्रों के बीच वन्यजीव कॉरिडोर की पहचान करने में रुचि दिखा चुका है।
कॉरिडोर का मतलब है कि जंगली जानवर एक पार्क से दूसरे पार्क तक प्राकृतिक रूप से आवाजाही कर सकें। इन्हें जमीन पर विकसित करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होगी।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने 17,000 वर्ग किलोमीटर के कूनो-गांधी सागर लैंडस्केप को अंतरराज्यीय संरक्षण कॉरिडोर के रूप में चिह्नित किया है। इसमें राजस्थान का करीब 6,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र भी शामिल है। यानी राजस्थान अब इस पूरे जंगली लैंडस्केप का अहम हिस्सा है, और दोनों राज्यों को मिलकर इसकी सुरक्षा करनी होगी।
एक नजर में — तीनों पार्कों की तुलना
| पार्क | राज्य | मुख्य वन्यजीव | अनुमानित संख्या |
|---|---|---|---|
| रणथंभौर टाइगर रिजर्व | राजस्थान | बाघ | 75 से ज्यादा |
| कूनो नेशनल पार्क | मध्य प्रदेश | चीता | करीब 55 |
| माधव टाइगर रिजर्व | मध्य प्रदेश | बाघ | 4 |
| कूनो-गांधी सागर लैंडस्केप | दोनों राज्यों में | अंतरराज्यीय कॉरिडोर | 17,000 वर्ग किमी |
ये तीनों पार्क अपनी-अपनी खासियत रखते हैं। रणथंभौर अपने प्राचीन किले और झीलों के लिए मशहूर है। कूनो भारत का इकलौता ऐसा पार्क है जहां जंगली चीते देखे जा सकते हैं — प्रोजेक्ट चीता के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते यहीं बसाए गए हैं। माधव नेशनल पार्क शिवपुरी के पास स्थित है और अब टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित हो रहा है।
सफारी प्लान करने वालों के लिए काम की बातें
अगर आप इस सर्किट पर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो कुछ बातें अभी से ध्यान रख लें। पहला — ये सर्किट अभी प्रस्ताव की अवस्था में है, यानी औपचारिक घोषणा और इंफ्रास्ट्रक्चर का काम बाकी है। लेकिन रणथंभौर का पर्यटन सीजन चल रहा है, तो मौजूदा सफारी का प्लान अभी से बना सकते हैं। हमारी रणथंभौर सफारी सीजन गाइड में बुकिंग, जोन और सही समय की पूरी जानकारी दी गई है।
दूसरा — कूनो नेशनल पार्क में चीता सफारी के साथ अब चंबल नदी की सफारी का विकल्प भी तैयार हो रहा है। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग रामेश्वर धाम के पास चंबल नदी में बोटिंग की तैयारी कर रहा है, जहां घड़ियाल, मगरमच्छ और दुर्लभ कछुए देखे जा सकते हैं। सफारी से जुड़ी आधिकारिक जानकारी मध्य प्रदेश पर्यटन की वेबसाइट पर देखी जा सकती है।
तीसरा — सफारी बुकिंग हमेशा आधिकारिक पोर्टल से ही करें। रणथंभौर के लिए वन विभाग का ऑनलाइन पोर्टल और कूनो के लिए मध्य प्रदेश का टूरिज्म पोर्टल इस्तेमाल करें। पीक सीजन (अक्टूबर से मार्च) में जीप सफारी की सीटें हफ्तों पहले फुल हो जाती हैं, इसलिए 30-45 दिन पहले बुकिंग कराएं।
चौथा — सवाई माधोपुर तक पहुंचना आसान है। जयपुर से ट्रेन और सड़क दोनों रास्ते हैं, और अब जयपुर से हवाई कनेक्टिविटी भी बेहतर हुई है। दौसा के आभानेरी महोत्सव जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी इसी ट्रिप में जोड़ा जा सकता है।
संरक्षण का बड़ा मकसद — कॉरिडोर और प्रोजेक्ट चीता
इस प्रस्ताव के पीछे सिर्फ पर्यटन नहीं, वन्यजीव संरक्षण का बड़ा मकसद भी है। मध्य प्रदेश के कूनो से चीते बार-बार राजस्थान की सीमा में आ रहे हैं। हाल ही में मादा चीता वीरा ने बारां में काफी समय बिताया, जिसके बाद उसे बेहोश करके वापस कूनो ले जाया गया। भारत में जन्मे चीते केपी-2 और केपी-3 भी राजस्थान के इलाकों में पहुंच चुके हैं। इन घटनाओं के बाद हाड़ौती क्षेत्र के वन्यजीव प्रेमियों की मांग तेज हुई है कि राजस्थान को प्रोजेक्ट चीता से औपचारिक रूप से जोड़ा जाए। उनका कहना है कि बारां, चित्तौड़गढ़ और राजस्थान के अन्य हिस्सों में चीतों की आवाजाही को चुनौती के बजाय संरक्षण के अवसर के तौर पर देखा जाना चाहिए। दोनों राज्यों के बीच समन्वित संरक्षण रणनीति की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है।
जानकारों का मानना है कि जब पर्यटन और संरक्षण एक साथ चलते हैं, तो स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है और जंगल की सुरक्षा भी मजबूत होती है। रणथंभौर इसका सबसे अच्छा उदाहरण है — गाइड, ड्राइवर, होटल और हस्तशिल्प से हजारों परिवारों की रोजी जुड़ी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: रणथंभौर टूरिज्म सर्किट क्या है?
जवाब: ये राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व को मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क और माधव टाइगर रिजर्व से जोड़ने का प्रस्तावित वाइल्डलाइफ टूरिज्म सर्किट है, ताकि पर्यटक एक ही ट्रिप में बाघ और चीता दोनों देख सकें।
सवाल 2: इस सर्किट में कौन-कौन से पार्क शामिल होंगे?
जवाब: तीन पार्क — सवाई माधोपुर का रणथंभौर टाइगर रिजर्व (राजस्थान), श्योपुर का कूनो नेशनल पार्क (मध्य प्रदेश) और शिवपुरी का माधव टाइगर रिजर्व (मध्य प्रदेश)।
सवाल 3: क्या ये सर्किट अभी से चालू हो गया है?
जवाब: नहीं, ये अभी प्रस्ताव की अवस्था में है। मध्य प्रदेश के वन विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है। तीनों पार्कों की मौजूदा सफारी अलग-अलग पहले से चल रही हैं।
सवाल 4: सफारी की बुकिंग कैसे करें?
जवाब: रणथंभौर की सफारी वन विभाग के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल से और कूनो की सफारी मध्य प्रदेश पर्यटन के पोर्टल से बुक करें। पीक सीजन में 30-45 दिन पहले बुकिंग कराएं।
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