दीपावली से पहले धान की खेती करने वाले किसानों के चेहरे पर ऐसी मुस्कान शायद ही पहले देखी गई हो। कोटा की भामाशाह कृषि उपज मंडी में कोटा मंडी धान भाव ने इतिहास रच दिया है — बीते साल के मुकाबले इस बार 1000 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा दाम मिल रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि मंडी में नया माल आते ही शुरुआती दिनों में ऐसा तेज बाजार पहले कभी नहीं खुला। मंडी के सेक्रेटरी मनोज कुमार मीणा ने खुद माना है कि यह रिकॉर्ड भाव है।
कोटा मंडी धान भाव: किस्मवार ताजा रेट और पिछले साल से अंतर
कोटा मंडी में फिलहाल तीन किस्मों — 1509, 1692 और 1718 — का माल सबसे ज्यादा आ रहा है:
| धान किस्म | गीला माल (₹/किलो) | सूखा माल (₹/किलो) | पिछले साल गीला (₹/किलो) | पिछले साल सूखा (₹/किलो) |
|---|---|---|---|---|
| 1509 / 1692 | 32–35 | 39–41 | 22–25 | 29–30 |
| 1718 | 35–38 | 42–44 | 25–28 | 32–34 |
यानी करीब-करीब हर कैटेगरी में क्विंटल पर 1000 से 1200 रुपये ज्यादा भाव मिल रहा है। 1847, सुगंधा, पूसा वन और 1121 जैसी किस्मों का माल अभी मंडी पहुंचना शुरू नहीं हुआ है — और जब वो माल भी आएगा, तो उसके दाम भी पिछले साल से ज्यादा ही रहने की उम्मीद है।
भाव रिकॉर्ड होने की 5 बड़ी वजहें
1. चावल मिलों की बेसब्री से खरीद: बीते साल का स्टॉक मिलों के पास पूरी तरह खत्म हो चुका है। जैसे ही नए सीजन का माल मंडी पहुंचा, मिलर्स ने तत्काल खरीद शुरू कर दी क्योंकि प्रोसेसिंग के बाद चावल तैयार करके आगे भेजना है।
2. खाड़ी देशों से बढ़ी एक्सपोर्ट डिमांड: एक्सपोर्टर प्रदीप पोकरा के मुताबिक ईरान, इराक, रियाद, दुबई, दमाम, जेद्दा समेत खाड़ी देशों से चावल की भारी मांग है। ईरान ने अपने तीन शिप भी भेज रखे हैं जिनमें लोडिंग चल रही है — ये जहाज करीब 20 अक्टूबर को रवाना होंगे। बीते साल के सौदों का माल भी अभी सप्लाई नहीं हो पाया था।
3. हाड़ौती में 70 फीसदी कम रकबा: इस बार हाड़ौती में धान का रकबा पिछले साल से करीब 70 फीसदी कम है — बारिश लेट होने से बुवाई देर से हुई। सप्लाई कम, डिमांड ज्यादा — भाव बढ़ने का सीधा गणित।
4. मध्य प्रदेश से आवक न आना: कोटा की मंडियों में माल मध्य प्रदेश के अशोक नगर-गुना से भी पहुंचता है, लेकिन वहां लॉन्ग ड्यूरेशन फसल होने से माल आना अभी शुरू नहीं हुआ। यूपी का माल जरूर आना शुरू हुआ है। दिवाली देरी से होने से कई किसान अभी माल रोककर सुखा रहे हैं — सप्लाई और कम।
5. 15 दिन से टिका बाजार: व्यापारी प्रकाश चंद जैन पालीवाल कहते हैं कि इतिहास में पहली बार मार्केट इतना तेज खुला और 15 दिन से लगातार यही दाम बने हुए हैं। पहले दाम शुरुआत में बढ़ते थे लेकिन बाद में टूट जाते थे — इस बार स्थिरता ही सबसे बड़ी खबर है।
किसान की जेब पर कितना असर? हिसाब करके देखिए
कोटा मंडी धान भाव की यह तेजी किसान की आमदनी में सीधे दिख रही है। काला तालाब इलाके के किसान विकास यादव बताते हैं कि धान उत्पादकों को इस बार 20 से 30 फीसदी ज्यादा पैसा मिल रहा है।
खर्च का हिसाब: ट्रांसप्लांटिंग में करीब 12,000 रुपये प्रति बीघा, जबकि सीधी बुवाई में करीब 8,000 रुपये का खर्च आता है — और कम बारिश के चलते इस बार बड़ी संख्या में किसानों ने सीधी बुवाई की है। 1509 किस्म का उत्पादन करीब 7 क्विंटल प्रति बीघा और 1718 का 9 क्विंटल प्रति बीघा तक हुआ है। इस हिसाब से 1509 पर किसानों को प्रति बीघा 25 से 29 हजार रुपये मिल रहे हैं — जबकि पिछले साल यही रकम 17 से 24 हजार रुपये के बीच थी। यानी प्रति बीघा 6 से 8 हजार रुपये की बढ़ोतरी, वो भी दीपावली से ठीक पहले।
कितने दिन चलेगा यह भाव?
सवाल यही है कि यह रिकॉर्ड भाव कब तक टिकेगा। एक्सपोर्टर प्रदीप पोकरा के मुताबिक वैश्विक डिमांड बनी हुई है और अलनीनो के असर से खाद्यान्न उत्पादन कम रहा है, इसलिए मांग बरकरार रहेगी। लेकिन चेतावनी भी है — यूपी से माल की आवक बढ़ी या वैश्विक डिमांड नरम पड़ी, तो दाम इसी स्तर पर ज्यादा समय टिक नहीं पाएंगे। किसानों के लिए सबसे व्यावहारिक सलाह यही है: सूखा माल लाएं (गीले से 700–900 रुपये/क्विंटल ज्यादा भाव मिलता है), अच्छी ग्रेडिंग करें और रोजाना भाव पर नजर रखें।
धान बेचने से पहले याद रखें ये 5 काम की बातें
- सूखा माल लाएं, ज्यादा दाम पाएं: गीले माल के मुकाबले सूखे माल पर 700–900 रुपये/क्विंटल का अंतर है। दो-तीन दिन का धूप-सुखाना काफी है।
- किस्म का नाम साफ बताएं: 1509, 1692, 1718 — हर किस्म का अलग भाव है। मिलावट वाली बोरियों से बचें।
- तुलाई के समय मौजूद रहें: आवक के दिनों में मंडी में भीड़ रहती है; अपनी बोरियों की तुलाई के समय खुद या भरोसेमंद व्यक्ति जरूर मौजूद रहे।
- eNAM पर भाव की तुलना करें: रोजाना eNAM पोर्टल पर अन्य मंडियों के भाव देखकर ही बेचने का फैसला लें — जल्दबाजी में कम भाव पर माल न बेचें। राजस्थान के ताजा मंडी भाव की रोजाना अपडेट भी यहां देखें।
- भंडारण का खर्च भी गिनें: अगर भाव बढ़ने की उम्मीद में माल रोक रहे हैं, तो भंडारण खर्च और नमी से होने वाले नुकसान का हिसाब जरूर लगा लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल 1: कोटा मंडी में अभी धान का क्या भाव चल रहा है?
जवाब: भामाशाह मंडी में 1509/1692 का गीला माल 32–35 ₹/किलो और सूखा 39–41 ₹/किलो; 1718 में गीला 35–38 और सूखा 42–44 ₹/किलो चल रहा है।
सवाल 2: धान के भाव इतने ज्यादा क्यों हैं?
जवाब: मिलों के पास स्टॉक खत्म, खाड़ी देशों से एक्सपोर्ट डिमांड, हाड़ौती में 70% कम रकबा और मध्य प्रदेश से माल न आना — यही मुख्य कारण हैं।
सवाल 3: क्या धान के भाव आगे और बढ़ेंगे?
जवाब: वैश्विक डिमांड अभी बनी हुई है, लेकिन यूपी से आवक बढ़ी तो दाम नरम भी पड़ सकते हैं। रोजाना भाव पर नजर रखें।
सवाल 4: कौन-सी किस्म पर सबसे अच्छा भाव मिल रहा है?
जवाब: 1718 किस्म पर सबसे ऊंचा भाव (सूखा माल 42–44 ₹/किलो) है। 1847, सुगंधा, पूसा वन और 1121 का माल अभी मंडी नहीं पहुंचा है।
निष्कर्ष
कोटा मंडी धान भाव का यह रिकॉर्ड किसानों के लिए दीपावली से पहले की सबसे बड़ी सौगात है — मिलों की डिमांड, एक्सपोर्ट का दबाव और कम सप्लाई ने मिलकर बाजार को ऐतिहासिक ऊंचाई दी है। दूसरी फसलों के भाव जानने के लिए अलवर मंडी में बाजरे के ताजा भाव और 1 नवंबर से शुरू हो रही MSP खरीद की रिपोर्ट भी पढ़ें। लेकिन रिकॉर्ड भाव के साथ समझदारी भी जरूरी है: सूखा माल लाएं, किस्म के हिसाब से भाव लें और भंडारण का खर्च गिनकर ही बेचें। क्योंकि मंडी का नियम पुराना है — जो भाव आज रिकॉर्ड है, वो कल भी रिकॉर्ड रहे, इसकी गारंटी कोई नहीं देता।