जयपुर के वैशाली नगर में हुई जयपुर डिजिटल अरेस्ट ठगी की यह घटना साइबर अपराधियों के शातिर तरीकों की ताजा मिसाल है। 74 वर्षीय जितेंद्र नाथ भार्गव पूरे 10 दिन तक ठगों के “डिजिटल अरेस्ट” में रहे। इस दौरान उनके बैंक खातों से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 1 करोड़ 74 लाख रुपये ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने वैशाली नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर विशेषज्ञों की मदद से जांच शुरू कर दी है।
जयपुर डिजिटल अरेस्ट ठगी का 10 दिन का शातिर खेल
इस जयपुर डिजिटल अरेस्ट ठगी की शुरुआत एक फोन कॉल से हुई। ठगों ने बुजुर्ग को बताया कि उनके बैंक खाते में गलत लेनदेन हुआ है और उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है। खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताकर आरोपियों ने पहला दबाव बनाया।
इसके बाद बुजुर्ग को वीडियो कॉल पर जोड़ लिया गया। एक आरोपी की स्क्रीन पर सर्वोच्च अदालत का दृश्य दिख रहा था, फिर एक अन्य जालसाज को दिल्ली का पुलिस महानिदेशक (DGP) बताकर बात करवाई गई। ED, सुप्रीम कोर्ट और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नामों से बुजुर्ग पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया।
वैशाली नगर थानाधिकारी अरविंद सिंह शेखावत के अनुसार, ठगों ने धमकी दी थी कि अगर बुजुर्ग ने किसी रिश्तेदार, पड़ोसी या पुलिस से संपर्क किया तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। इसी डर में 74 वर्षीय बुजुर्ग 10 दिन तक लाचार बने रहे और ठगों के कहने पर अपनी जमा पूंजी ट्रांसफर करते चले गए।
अकेले रह रहे बुजुर्ग दंपती को बनाया निशाना
ठगों ने वही पुराना फॉर्मूला अपनाया — अकेले रह रहे बुजुर्गों को निशाना बनाना। जितेंद्र नाथ भार्गव अपनी पत्नी के साथ वैशाली नगर स्थित मकान में रहते हैं। उनका बेटा सिंगापुर में कार्यरत है और बेटी भी राजस्थान से बाहर रहती है। घर में बुजुर्ग दंपती के अकेलेपन का अपराधियों ने पूरा फायदा उठाया।
10 दिन की पाबंदी झेलने के बाद आखिरकार बुजुर्ग को ठगी का अहसास हुआ। उन्होंने एक परिचित को पूरी घटना बताई, जिसके समझाने पर वे वैशाली नगर थाने पहुंचे और लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।
घटनाक्रम: 10 दिनों में कैसे लुटे 1.74 करोड़
| चरण | क्या हुआ |
|---|---|
| पहला संपर्क | फोन पर बैंक खाते में गलत ट्रांजेक्शन और मनी लॉन्ड्रिंग केस का झूठा दावा; खुद को ED अधिकारी बताया |
| वीडियो कॉल का जाल | एक स्क्रीन पर सुप्रीम कोर्ट का दृश्य, दूसरे शख्स को दिल्ली का DGP बताकर बात करवाई |
| 10 दिन की निगरानी | गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती की धमकी; रिश्तेदारों-पड़ोसियों से संपर्क पर पाबंदी |
| रकम का ट्रांसफर | अलग-अलग ट्रांजेक्शन से कुल ₹1.74 करोड़ ठगों के बताए खातों में जमा |
| खुलासा | परिचित को जानकारी देने के बाद वैशाली नगर थाने में शिकायत, मामला दर्ज |
जांच कहां तक: साइबर विशेषज्ञों की मदद ले रही पुलिस
वैशाली नगर थाना पुलिस साइबर विशेषज्ञों की सहायता से मामले की विस्तृत जांच कर रही है। टीम ठगों के मोबाइल नंबरों, वीडियो कॉल के विवरण और रकम भेजे गए बैंक खातों के ब्योरे खंगाल रही है। पुलिस का कहना है कि संदिग्ध खातों की जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं।
जयपुर में यह पहली जयपुर डिजिटल अरेस्ट ठगी नहीं है — इससे पहले भी बुजुर्गों से करोड़ों की ठगी के मामले सामने आए हैं, जिनमें पुलिस ने दूसरे राज्यों से आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था। (पढ़ें: जयपुर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2 करोड़ से अधिक की ठगी) साइबर ठगों पर पुलिस का शिकंजा लगातार कस रहा है — हाल में जयपुर में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ भी इसी अभियान का हिस्सा था।
“डिजिटल अरेस्ट” कानून में होता ही नहीं — पुलिस की चेतावनी
सबसे अहम बात: भारतीय कानून में “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई चीज होती ही नहीं। पुलिस, ED, CBI या कोई भी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती। असली एजेंसियां कभी फोन पर पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहतीं। ठग फर्जी दस्तावेज, नकली वर्दी वाले वीडियो कॉल और अदालत जैसे दृश्य दिखाकर पीड़ित को इतना डरा देते हैं कि वह सोचने-समझने की स्थिति में नहीं रहता।
ऐसा कोई कॉल आए तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
जयपुर डिजिटल अरेस्ट ठगी से बचने के 7 जरूरी उपाय
- याद रखें — कोई एजेंसी फोन पर गिरफ्तार नहीं करती: ED, CBI, पुलिस या कोर्ट कभी वीडियो कॉल पर “अरेस्ट” नहीं करते। ऐसा दावा सुनते ही समझ जाएं कि ठगी है।
- डरकर तुरंत पैसे न भेजें: “अभी भेजो वरना जेल” — असली कानूनी प्रक्रिया में ऐसी जल्दबाजी कभी नहीं होती।
- कॉल काटकर परिवार से बात करें: ठग सबसे पहले आपको अपनों से अलग करते हैं। संदिग्ध कॉल के बाद तुरंत किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताएं।
- अनजान लिंक या ऐप न खोलें: “सत्यापन” के नाम पर इंस्टॉल करवाया गया ऐप आपका फोन ठगों के कब्जे में दे सकता है।
- 1930 पर तुरंत शिकायत करें: ठगी के बाद के शुरुआती घंटे “गोल्डन ऑवर” होते हैं — जल्दी शिकायत से रकम फ्रीज होने की संभावना बढ़ती है।
- बुजुर्गों को पहले से जागरूक करें: अकेले रह रहे माता-पिता को इस तरह की ठगी के बारे में पहले से बताकर रखें।
- बैंक को तुरंत सूचित करें: संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर बैंक की कस्टमर केयर पर कॉल करके खाते पर रोक लगवाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: वैशाली नगर की इस ठगी में कितनी रकम गई?
उत्तर: ठगों ने 74 वर्षीय जितेंद्र नाथ भार्गव से 10 दिनों में अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 1 करोड़ 74 लाख रुपये ठग लिए।
प्रश्न 2: ठगों ने बुजुर्ग को कैसे डराया?
उत्तर: खुद को ED अधिकारी बताकर मनी लॉन्ड्रिंग केस का झूठा दावा किया, वीडियो कॉल पर सुप्रीम कोर्ट का दृश्य दिखाया और एक शख्स को दिल्ली का DGP बताकर बात करवाई। गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती की धमकी देकर 10 दिन तक किसी से संपर्क नहीं करने दिया।
प्रश्न 3: क्या पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है?
उत्तर: हां, वैशाली नगर थाने में मामला दर्ज है। थानाधिकारी अरविंद सिंह शेखावत के अनुसार पुलिस साइबर विशेषज्ञों की मदद से मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की जांच कर रही है।
प्रश्न 4: डिजिटल अरेस्ट ठगी से बचने के लिए कहां शिकायत करें?
उत्तर: तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं। नजदीकी थाने में FIR भी दर्ज कराई जा सकती है।